🔐 लॉग-इन या रजिस्टर करें  

जिंदगी को यूं बर्बाद मत करो

पढ़ने का समय : 6 मिनट

जिंदगी को यूँ बर्बाद मत करो

 

शहर के एक छोटे से मोहल्ले में 22 साल का रोहन अपनी माँ के साथ रहता था। उसके पिता का देहांत तब हो गया था जब वह बहुत छोटा था। माँ ने सिलाई करके उसे पढ़ाया था। वह चाहती थी कि उसका बेटा पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा हो और एक दिन उनका छोटा-सा घर खुशियों से भर जाए।

 

रोहन पढ़ाई में कभी बहुत तेज नहीं था, लेकिन मेहनती जरूर था। स्कूल के दिनों में वह अपने दोस्तों के साथ खूब खेलता और भविष्य के सपने देखा करता था। वह कहता था, “माँ, एक दिन मैं तुम्हारे लिए अपना बड़ा-सा घर बनाऊँगा।”

 

माँ हंसकर कहती, “मुझे बड़ा घर नहीं चाहिए बेटा, बस तू अच्छा इंसान बन जाना।”

 

लेकिन कॉलेज में आने के बाद रोहन की जिंदगी धीरे-धीरे बदलने लगी।

 

उसे कुछ ऐसे दोस्त मिल गए जिनके लिए पढ़ाई और भविष्य से ज्यादा जरूरी मौज-मस्ती थी। शुरुआत में रोहन सिर्फ उनके साथ समय बिताता था। फिर उसने पढ़ाई छोड़कर घंटों मोबाइल चलाना शुरू कर दिया। रात देर तक जागना और सुबह देर से उठना उसकी आदत बन गई।

 

माँ कई बार समझाती।

 

“रोहन, बेटा थोड़ा पढ़ लिया कर।”

 

रोहन झुंझलाकर कहता, “माँ, हर समय पढ़ाई-पढ़ाई मत किया करो। मुझे पता है मुझे क्या करना है।”

 

माँ चुप हो जाती।

 

एक दिन कॉलेज से रोहन के शिक्षक का फोन आया।

 

“आप रोहन की माँ बोल रही हैं?”

 

“जी।”

 

“रोहन पिछले कई दिनों से कॉलेज नहीं आ रहा। उसकी पढ़ाई बहुत खराब हो रही है।”

 

माँ को विश्वास नहीं हुआ।

 

उस शाम उन्होंने रोहन से पूछा, “तुम कॉलेज क्यों नहीं जा रहे?”

 

रोहन ने बिना उनकी तरफ देखे कहा, “मन नहीं करता।”

 

“लेकिन बेटा, तुम्हारे पापा का सपना था कि तुम पढ़ाई पूरी करो।”

 

रोहन अचानक गुस्सा हो गया।

 

“हर बात में पापा को बीच में मत लाया करो!”

 

माँ की आँखें भर आईं।

 

वह कमरे में चली गईं।

 

रोहन को थोड़ी देर बाद अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन उसने माँ से माफी नहीं मांगी।

 

दिन बीतते गए।

 

उसकी पढ़ाई लगभग छूट गई। दोस्त भी धीरे-धीरे उससे दूर होने लगे। जिनके साथ वह घंटों घूमता था, वे अपने-अपने काम में लग गए।

 

एक दिन रोहन को पता चला कि उसके एक पुराने दोस्त को नौकरी मिल गई है।

 

उसने सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीर देखी। सब उसे बधाई दे रहे थे।

 

रोहन देर तक मोबाइल स्क्रीन देखता रहा।

 

उसे पहली बार लगा कि बाकी लोग आगे बढ़ रहे हैं और वह वहीं खड़ा है।

 

लेकिन फिर उसने मोबाइल बंद किया और खुद से कहा, “अभी बहुत समय है।”

 

यही सोचकर वह फिर वही जिंदगी जीने लगा।

 

एक शाम वह बाजार से लौट रहा था। रास्ते में उसकी मुलाकात उसके पुराने शिक्षक, शेखर सर से हो गई।

 

शेखर सर ने उसे देखते ही कहा, “रोहन?”

 

रोहन ने नजरें चुराईं।

 

“नमस्ते सर।”

 

“कॉलेज कैसा चल रहा है?”

 

रोहन चुप हो गया।

 

शेखर सर सब समझ गए।

 

उन्होंने कहा, “कल सुबह मेरे पास आना।”

 

रोहन ने बात टालने की कोशिश की, लेकिन सर ने कहा, “बस एक बार आ जाना।”

 

अगली सुबह रोहन उनके घर पहुँचा।

 

शेखर सर ने उसे एक पुरानी डायरी दी।

 

“इसे खोलो।”

 

पहले पन्ने पर रोहन का नाम लिखा था।

 

रोहन हैरान हो गया।

 

“ये क्या है?”

 

सर बोले, “जब तुम स्कूल में थे, तब तुमने अपने सपने लिखे थे।”

 

रोहन ने डायरी पढ़नी शुरू की।

 

एक पन्ने पर लिखा था—

 

“मैं अपनी माँ को कभी दुखी नहीं करूँगा।”

 

दूसरे पर—

 

“मैं अपने पैरों पर खड़ा होकर माँ के लिए घर बनाऊँगा।”

 

तीसरे पर—

 

“मैं अपने गाँव के गरीब बच्चों की मदद करूँगा।”

 

रोहन की आँखें भर आईं।

 

सर ने पूछा, “कहाँ गए वो सपने?”

 

रोहन के पास कोई जवाब नहीं था।

 

शेखर सर ने धीरे से कहा, “रोहन, जिंदगी किसी एक बड़ी गलती से बर्बाद नहीं होती। जिंदगी तब बर्बाद होती है जब इंसान रोज अपनी गलतियों को दोहराता है और हर बार खुद से कहता है कि कल बदल जाऊँगा।”

 

रोहन चुपचाप सुनता रहा।

 

सर बोले, “तुम्हारे पास अभी भी समय है। लेकिन समय हमेशा तुम्हारा इंतजार नहीं करेगा।”

 

ये शब्द रोहन के दिल में उतर गए।

 

वह घर लौटा तो माँ सिलाई कर रही थीं।

 

रोहन उनके पास जाकर बैठ गया।

 

“माँ।”

 

माँ ने उसकी तरफ देखा।

 

“क्या हुआ?”

 

रोहन की आँखों से आँसू निकल पड़े।

 

“माँ, मैंने आपको बहुत परेशान किया ना?”

 

माँ ने तुरंत सिलाई रोक दी।

 

“नहीं बेटा।”

 

“मैंने पढ़ाई छोड़ दी। आपका भरोसा तोड़ा। आपसे भी ठीक से बात नहीं की।”

 

माँ ने उसके सिर पर हाथ रखा।

 

“गलती हो गई तो सुधार ले बेटा।”

 

रोहन ने माँ का हाथ पकड़ लिया।

 

“मैं बदलना चाहता हूँ।”

 

उस दिन से रोहन ने अपनी जिंदगी को दोबारा संभालने का फैसला किया।

 

उसने मोबाइल का समय कम किया। पुराने दोस्तों से दूरी बनाई और पढ़ाई के लिए रोज का समय तय किया।

 

शुरुआत बहुत मुश्किल थी।

 

कई बार उसका मन करता कि सब छोड़ दे।

 

लेकिन जब भी वह थकता, उसे शेखर सर की बात याद आती—

 

“समय हमेशा इंतजार नहीं करता।”

 

छह महीने बाद रोहन ने अपनी परीक्षा दी।

 

इस बार उसके अंक पहले से बहुत अच्छे आए।

 

माँ की आँखों में खुशी के आँसू थे।

 

लेकिन रोहन ने यहीं रुकने का फैसला नहीं किया।

 

उसने आगे की पढ़ाई जारी रखी और साथ ही मोहल्ले के बच्चों को शाम में पढ़ाने लगा।

 

एक दिन एक छोटा बच्चा उसके पास आया और बोला, “भैया, मैं बड़ा होकर आपके जैसा बनना चाहता हूँ।”

 

रोहन मुस्कुराया।

 

उसने बच्चे के सिर पर हाथ रखा और कहा, “मेरे जैसा नहीं, मुझसे भी बेहतर बनना।”

 

कई साल बाद रोहन को एक अच्छी नौकरी मिल गई।

 

पहली तनख्वाह लेकर वह सीधे घर गया।

 

उसने पैसे माँ के हाथ में रख दिए।

 

माँ की आँखों में आँसू आ गए।

 

“बेटा, मुझे पैसे नहीं चाहिए थे।”

 

रोहन मुस्कुराया।

 

“मुझे पता है माँ। लेकिन आज मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि आपका बेटा खोया नहीं था… बस रास्ता भूल गया था।”

 

माँ ने उसे गले लगा लिया।

 

कुछ समय बाद रोहन ने अपने पुराने स्कूल में जाकर शेखर सर से मुलाकात की।

 

सर ने पूछा, “अब कैसी चल रही है जिंदगी?”

 

रोहन मुस्कुराया।

 

“अब समझ आया सर कि जिंदगी कितनी कीमती है।”

 

सर ने कहा, “और?”

 

रोहन बोला, “उसे बर्बाद करने के लिए हमारे पास बहुत सारे बहाने होते हैं, लेकिन बनाने के लिए सिर्फ एक फैसला चाहिए।”

 

शेखर सर मुस्कुरा दिए।

 

रोहन ने पीछे मुड़कर स्कूल की इमारत को देखा।

 

उसे अपना पुराना रूप याद आया—वह लड़का जो सपने तो बहुत देखता था, लेकिन मेहनत से भाग रहा था।

 

आज वह समझ चुका था कि असफल होना जिंदगी का अंत नहीं है।

 

गलत रास्ते पर चलते रहना असली नुकसान है।

 

इसलिए अगर कभी जिंदगी में आपको लगे कि आप पीछे रह गए हैं, तो खुद को खत्म समझने की जरूरत नहीं।

 

रुकिए।

 

सोचिए।

 

अपनी गलती स्वीकार कीजिए।

 

और फिर एक छोटा कदम सही दिशा में उठाइए।

 

क्योंकि जिंदगी को बर्बाद करने में साल लग सकते हैं, लेकिन उसे बदलने के लिए कभी-कभी एक सही फैसला ही काफी होता है।

 

जिंदगी बहुत कीमती है। इसे बहानों, आलस और गलत फैसलों में यूँ ही बर्बाद मत करो। आज का छोटा-सा बदलाव ही आने वाले कल की पूरी कहानी बदल सकता है।

Comments

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *