एपिसोड – 30 : दो मिनट का फैसला
पुराने रेलवे स्टेशन की अंधेरी सुरंग में लगी लाल बत्ती लगातार जल-बुझ रही थी।
01:59…
01:58…
01:57…
आरव की नजर घड़ी पर टिक गई।
आरोही का चेहरा डर से सफेद पड़ चुका था।
अमन दीवार के पास खड़ा होकर बम के तारों को ध्यान से देख रहा था।
आरव ने बेचैनी से पूछा,
“अमन, कुछ करो!”
अमन ने बिना उसकी तरफ देखे कहा,
“चिल्लाने से बम बंद नहीं होगा।”
“तो क्या करना होगा?”
“सोचना होगा।”
आरव ने चारों तरफ देखा।
“कितने बम हैं?”
“कम से कम चार।”
“और इन्हें बंद करने का तरीका?”
अमन ने कहा,
“एक मुख्य कंट्रोल बॉक्स होगा। अगर वो बंद हो गया तो बाकी बम भी निष्क्रिय हो जाएंगे।”
आरोही ने पूछा,
“कंट्रोल बॉक्स कहां है?”
अमन ने सुरंग की दीवार पर नजर दौड़ाई।
“यहीं कहीं।”
01:32…
आरव ने टॉर्च उठाई।
“सब अलग-अलग जगह देखो।”
आरोही एक तरफ चली गई।
अमन दूसरी तरफ।
आरव दीवारों को ध्यान से देखने लगा।
तभी उसे एक छोटी-सी लोहे की प्लेट दिखाई दी।
उस पर लिखा था—
A-17
आरव चौंक गया।
“अमन!”
अमन दौड़कर आया।
“क्या मिला?”
आरव ने प्लेट दिखाई।
अमन ने कहा,
“यही है।”
उसने प्लेट खोलने की कोशिश की।
लेकिन वह लॉक थी।
आरव ने जेब से शेखर की दी हुई चाबी निकाली।
“शायद ये काम आए।”
चाबी ताले में लगी।
क्लिक!
प्लेट खुल गई।
अंदर तारों का जाल था।
लाल, पीले और काले तार…
और बीच में एक डिजिटल टाइमर।
01:05…
आरोही घबराकर बोली,
“अब सिर्फ एक मिनट!”
अमन ने तारों को देखा।
“कोई भी तार गलत काटा तो सब खत्म।”
आरव ने पूछा,
“कौन सा काटना है?”
अमन चुप रहा।
फिर उसने एक तार पर उंगली रखी।
“ये।”
आरव ने पूछा,
“तुम्हें यकीन है?”
“नहीं।”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“क्या?”
अमन ने कहा,
“मुझे पक्का यकीन नहीं है।”
“तो तुम काटोगे कैसे?”
अमन मुस्कुराया।
“कभी-कभी जिंदगी में सौ प्रतिशत यकीन का इंतजार करने का समय नहीं होता।”
00:42…
अमन ने चाकू निकाला।
आरोही ने आरव का हाथ पकड़ लिया।
“अगर कुछ हुआ तो?”
आरव ने कहा,
“कुछ नहीं होगा।”
“तुम इतने भरोसे से कैसे कह सकते हो?”
आरव ने उसकी आंखों में देखकर कहा,
“क्योंकि अभी मुझे तुम्हारे साथ बहुत लंबी जिंदगी जीनी है।”
आरोही की आंखें भर आईं।
“आरव…”
“कुछ नहीं होगा।”
अमन ने दोनों को देखा।
“तुम दोनों का प्यार देखकर मुझे अपनी मां याद आती है।”
आरव ने कहा,
“फिर हमें बचा लो।”
अमन ने मुस्कुराकर कहा,
“कोशिश करता हूं।”
00:30…
अमन ने तार काटने के लिए चाकू आगे बढ़ाया।
लेकिन तभी…
उसका हाथ रुक गया।
“रुको!”
आरव चौंका।
“क्या हुआ?”
अमन ने कहा,
“ये जाल है।”
“मतलब?”
“ये टाइमर असली नहीं है।”
आरव ने पूछा,
“क्या?”
अमन ने कहा,
“असल बम कहीं और है।”
तभी पीछे से आवाज आई—
“बिल्कुल सही।”
तीनों पलटे।
सुरंग के अंधेरे में एक आदमी खड़ा था।
काले कपड़े।
चेहरे पर मास्क।
हाथ में बंदूक।
आरव ने तुरंत बंदूक उठा ली।
“कौन हो तुम?”
उस आदमी ने मास्क उतार दिया।
आरोही की आंखें फैल गईं।
अमन भी पीछे हट गया।
क्योंकि सामने खड़ा था—
रुद्र।
आरव ने गुस्से में कहा,
“तुम यहां?”
रुद्र ने कहा,
“तुम्हें बचाने आया हूं।”
अमन हंस पड़ा।
“तुम्हारे जैसे लोग हमेशा यही कहते हैं।”
रुद्र ने उसकी तरफ देखा।
“अमन, अगर मैं तुम्हारा दुश्मन होता तो तुम अभी जिंदा नहीं होते।”
आरव ने पूछा,
“फिर ये बम?”
रुद्र ने कहा,
“ये बम मैंने नहीं लगाए।”
“किसने?”
“सम्राट ने।”
अमन ने कहा,
“तो इसे बंद कैसे करेंगे?”
रुद्र ने कहा,
“हम नहीं कर सकते।”
आरव चौंका।
“क्या?”
“क्योंकि असली बम स्टेशन में नहीं है।”
रुद्र ने दीवार पर लगी घड़ी की तरफ इशारा किया।
“ये पूरा टाइमर सिर्फ तुम्हें डराने के लिए है।”
आरोही ने पूछा,
“तो असली खतरा क्या है?”
रुद्र ने कहा—
“स्टेशन के नीचे गैस पाइपलाइन है।”
“अगर उसमें धमाका हुआ तो?”
“पूरा इलाका तबाह हो जाएगा।”
अचानक रुद्र के फोन पर कॉल आया।
उसने फोन उठाया।
दूसरी तरफ से सम्राट की आवाज आई—
“रुद्र… तुम फिर मेरे रास्ते में आ गए।”
रुद्र ने कहा,
“इस बार तुम्हें रोकूंगा।”
सम्राट हंसा।
“तुम्हें लगता है मैं अकेला हूं?”
रुद्र ने कहा,
“तुम कहीं भी छुप जाओ, मैं तुम्हें ढूंढ लूंगा।”
“मुझे ढूंढने की जरूरत नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि मैं तुम्हारे बहुत करीब हूं।”
रुद्र की आंखें सिकुड़ गईं।
“क्या मतलब?”
सम्राट ने कहा—
“तुम्हारे साथ जो लोग खड़े हैं… उनमें से एक मेरा आदमी है।”
कॉल कट गया।
सब एक-दूसरे को देखने लगे।
आरव ने कहा,
“कौन?”
अमन ने कहा,
“पता नहीं।”
आरोही ने धीरे से कहा,
“लेकिन अब किसी पर भरोसा नहीं कर सकते।”
रुद्र ने कहा,
“अगर सिया की रिकॉर्डिंग सच में पुराने अस्पताल में है, तो हमें वहां जाना होगा।”
आरव ने पूछा,
“अभी?”
“हां।”
“और स्टेशन?”
“मैं संभाल लूंगा।”
अमन ने कहा,
“नहीं।”
सब उसकी तरफ देखने लगे।
“मैं भी चलूंगा।”
रुद्र ने कहा,
“तुम घायल हो।”
“मेरी मां की आखिरी रिकॉर्डिंग है।”
“तुम्हें आराम करना चाहिए।”
अमन ने बंदूक उठाई।
“मैं अपनी मां के लिए मर भी सकता हूं।”
आरव उसके सामने आ गया।
“मरने की बात बंद करो।”
अमन ने उसकी तरफ देखा।
“ठीक है, भाई।”
आरव मुस्कुराया।
“अब सही है।”
वे सुरंग से बाहर निकलने ही वाले थे कि अचानक गोली चली।
धांय!
रुद्र ने आरव को नीचे खींच लिया।
गोली दीवार में लगी।
दूसरी गोली चली।
अमन ने तुरंत जवाबी गोली चलाई।
सामने अंधेरे में एक आदमी भागता दिखाई दिया।
रुद्र उसके पीछे दौड़ा।
“रुको!”
वह आदमी सुरंग के दूसरे रास्ते से भाग गया।
रुद्र वापस आया।
उसके हाथ में एक छोटा-सा कार्ड था।
आरव ने पूछा,
“कौन था?”
“भाग गया।”
“कार्ड पर क्या है?”
रुद्र ने कार्ड आरव को दिया।
उस पर लिखा था—
BLACK CROWN
और नीचे एक फोटो।
आरव ने फोटो देखते ही सांस रोक ली।
फोटो में…
शेखर और सम्राट एक साथ खड़े थे।
आरोही ने हैरानी से कहा,
“ये कब की तस्वीर है?”
रुद्र ने कहा,
“पच्चीस साल पुरानी।”
अमन ने फोटो को घूरते हुए कहा,
“तो मेरे पिता और सम्राट एक साथ काम करते थे?”
आरव ने शेखर की तरफ देखा।
शेखर वहां नहीं थे।
“पापा कहां हैं?”
किसी ने जवाब नहीं दिया।
आरव ने तुरंत फोन निकाला।
शेखर को कॉल किया।
फोन बंद था।
फिर माधवी को कॉल किया।
इस बार भी फोन बंद।
आरव की बेचैनी बढ़ गई।
“कुछ गलत हुआ है।”
आरोही ने कहा,
“हमें तुरंत हवेली लौटना चाहिए।”
अमन ने कहा,
“नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि सम्राट हमें यही करवाना चाहता है।”
रुद्र ने कहा,
“अमन सही कह रहा है।”
आरव ने पूछा,
“तो हम कहां जाएं?”
अमन ने सिया की डायरी निकाली।
उसके आखिरी पन्ने को फिर से देखा।
अचानक उसने डायरी को पलटा।
पीछे के कवर में एक छोटी-सी तस्वीर चिपकी थी।
तस्वीर देखकर अमन की सांस थम गई।
उसमें सिया थी।
उसके साथ एक आदमी खड़ा था।
अमन की आंखों से आंसू निकल पड़े।
“ये…”
आरव ने पूछा,
“कौन?”
अमन ने कांपती आवाज में कहा—
“ये मेरे पिता हैं।”
रुद्र ने तस्वीर देखते ही चेहरा फेर लिया।
आरव ने ध्यान दिया।
“रुद्र… तुम इस आदमी को जानते हो?”
रुद्र चुप रहा।
आरव ने उसका कंधा पकड़ लिया।
“बताओ।”
रुद्र ने धीरे से कहा—
“हां।”
“कौन है?”
रुद्र ने तस्वीर की तरफ देखा।
फिर धीमी आवाज में बोला—
“ये शेखर नहीं हैं।”
अमन की आंखें फैल गईं।
“तो कौन हैं?”
रुद्र ने कहा—
“ये आदमी… सम्राट का असली नाम है।”
आरव और आरोही दोनों स्तब्ध रह गए।
“क्या?”
रुद्र ने कहा—
“सम्राट कोई दूसरा इंसान नहीं।”
वह कुछ पल रुका।
फिर बोला—
“सम्राट का असली नाम है… आर्यन।”
अमन के हाथ से तस्वीर गिर गई।
और उसी वक्त आरव के फोन पर एक मैसेज आया।
मैसेज में सिर्फ एक तस्वीर थी।
माधवी और शेखर बंधे हुए थे।
नीचे लिखा था—
“अगर अपने माता-पिता को जिंदा देखना चाहते हो, तो आज रात पुराने सिटी अस्पताल आओ।”
और उसके नीचे…
“अकेले।”
आरव ने फोन कसकर पकड़ लिया।
आरोही ने पूछा,
“क्या हुआ?”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आंखों में गुस्सा और डर दोनों थे।
“मां-पापा को अगवा कर लिया गया है।”
अमन ने तस्वीर देखी।
फिर उसकी नजर आरव पर टिक गई।
“हम जाएंगे।”
आरव ने कहा,
“लेकिन उसने अकेले आने को कहा है।”
अमन ने मुस्कुराकर कहा—
“उसे लगता है कि अब भी हम उसके नियमों पर चलेंगे।”
रुद्र ने बंदूक लोड की।
“आज रात पुराने सिटी अस्पताल में सिर्फ सच नहीं मिलेगा।”
आरव ने पूछा,
“तो क्या मिलेगा?”
रुद्र ने अस्पताल की तरफ देखते हुए कहा—
“पच्चीस साल पहले शुरू हुई इस कहानी का असली खूनी।”
जारी रहेगा…

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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