एपिसोड – 25 : जिसे देखकर विराज भी डर गया
समुद्र किनारे उस सुनसान जगह पर एक पल के लिए सब कुछ थम गया था।
शेखर जमीन पर पड़े थे।
आरव उनके पास घुटनों के बल बैठा हुआ था।
उनकी सफेद शर्ट पर खून फैलता जा रहा था।
“पापा…!”
आरव की आवाज कांप रही थी।
“आंखें खोलिए… पापा, मेरी तरफ देखिए।”
शेखर ने मुश्किल से आंखें खोलीं।
“आरव…”
“हां पापा, मैं यहीं हूं।”
“तुम… यहां से चले जाओ।”
आरव की आंखों से आंसू बह निकले।
“मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा।”
तभी पीछे से बंदूक पकड़े वह आदमी आगे आया।
उसके चेहरे पर ठंडी मुस्कान थी।
विराज उसे देखते ही पीछे हट गया।
“तुम…?”
आदमी ने उसकी तरफ देखा।
“हां, विराज। मैं।”
अभय ने भी उसे पहचान लिया।
उसके चेहरे का रंग उड़ गया।
“ये यहां कैसे…?”
राघव ने घबराकर पूछा,
“कौन है ये?”
किसी के मुंह से जवाब नहीं निकला।
वह आदमी धीरे-धीरे आगे आया।
“मेरा नाम सुनने के बाद शायद तुम्हें अपने पुराने पाप याद आ जाएंगे।”
आरव ने गुस्से में उसकी तरफ बंदूक तान दी।
“तुमने मेरे पिता को गोली मारी है।”
आदमी मुस्कुराया।
“और अगली गोली तुम्हारे लिए है।”
आरोही तुरंत आरव के सामने आ गई।
“उसे गोली मत मारना!”
आदमी ने आरोही को देखा।
कुछ पल तक वह उसे घूरता रहा।
फिर उसके चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।
“तुम…”
आरोही ने पूछा,
“क्या?”
उस आदमी ने धीरे से कहा—
“तुम बिल्कुल अपनी मां जैसी दिखती हो।”
नंदिनी की आंखें फैल गईं।
“नहीं…”
अभय ने गुस्से में पूछा,
“तुम जिंदा कैसे हो?”
आदमी ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें लगा था कि तुमने मुझे खत्म कर दिया?”
विराज ने कहा,
“तुम्हें मर जाना चाहिए था।”
आदमी हंसा।
“इस परिवार के लोगों ने मुझे कई बार मारने की कोशिश की।”
फिर उसने अपनी बंदूक आरव की तरफ कर दी।
“लेकिन मैं हर बार वापस आया।”
आरव ने कहा,
“नाम बताओ अपना।”
आदमी ने कहा,
“तुम्हें मेरा नाम जानकर क्या मिलेगा?”
“सच।”
“सच?”
वह मुस्कुराया।
“तुम सच सुनने के लिए तैयार नहीं हो।”
आरव ने कहा,
“मैं सब सुनूंगा।”
उस आदमी ने कहा—
“मेरा नाम रुद्र है।”
माधवी के हाथ कांपने लगे।
राघव ने उन्हें संभाला।
आरोही ने पूछा,
“आप मुझे मेरी मां जैसा क्यों कह रहे थे?”
रुद्र ने उसकी तरफ देखा।
“क्योंकि तुम्हारी मां…”
वह रुक गया।
“क्योंकि मैं उसे बहुत अच्छी तरह जानता था।”
नंदिनी ने गुस्से में कहा,
“रुद्र, मेरी बेटी से दूर रहो।”
रुद्र हंसा।
“अब भी डरती हो?”
“हां।”
“क्यों?”
नंदिनी ने कहा,
“क्योंकि मैं जानती हूं तुम क्या कर सकते हो।
आरव ने शेखर के घाव पर हाथ दबाया।
“किसी को डॉक्टर बुलाना होगा।”
कबीर ने तुरंत फोन निकाला।
“मैं एंबुलेंस बुलाता हूं।”
शेखर ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“नहीं।”
आरव ने कहा,
“क्यों?”
“अस्पताल मत ले जाना।”
“लेकिन गोली लगी है।”
शेखर ने धीमे से कहा,
“वहां… उनके लोग हैं।”
आरव समझ गया।
“तो फिर हम आपको सुरक्षित जगह ले जाएंगे।”
अर्जुन ने कहा,
“मेरे पास एक पुराना फार्महाउस है।”
शेखर ने सिर हिलाया।
“वहीं चलो।”
राघव और कबीर ने शेखर को उठाया।
लेकिन तभी रुद्र ने बंदूक उठाई।
“कोई कहीं नहीं जाएगा।”
आरव उसके सामने खड़ा हो गया।
“तुम्हें पहले मुझसे गुजरना होगा।”
रुद्र मुस्कुराया।
“यही तो चाहता हूं।”
आरव ने बंदूक तान दी।
“तुमने मेरे पिता को गोली मारी है।”
रुद्र ने कहा,
“वो तुम्हारे पिता हैं?”
“हां।”
“तो फिर तुम्हें भी मरना होगा।”
आरोही चिल्लाई,
“नहीं!”
रुद्र ने उसकी तरफ देखा।
“तुम बीच में मत आओ।”
आरोही ने कहा,
“मैं आरव को कुछ नहीं होने दूंगी।”
रुद्र कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला,
“तुम्हें पता है तुम किसे बचा रही हो?”
“आरव को।”
“वही आरव जिसने तुम्हारे परिवार की पूरी विरासत अपने नाम कर रखी है।”
आरोही ने कहा,
“मुझे उसकी संपत्ति नहीं चाहिए।”
रुद्र ने कहा,
“फिर भी तुम उसके साथ हो।”
“हां।”
“क्यों?”
आरोही ने आरव की तरफ देखा।
“क्योंकि मैं उससे प्यार करती हूं।”
चारों तरफ खामोशी छा गई।
आरव ने भी उसकी तरफ देखा।
आरोही ने पहली बार सबके सामने अपने दिल की बात कह दी थी।
रुद्र कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर उसने धीरे से कहा,
“यही प्यार तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी बनेगा।”
आरव ने जवाब दिया,
“और यही हमारा सबसे बड़ा हथियार भी है।”
विराज ने अचानक रुद्र से कहा,
“तुम्हारा असली मकसद क्या है?”
रुद्र उसकी तरफ मुड़ा।
“तुम्हें पता होना चाहिए।”
“नहीं।”
“झूठ।”
“मैं सच कह रहा हूं।”
रुद्र ने बंदूक नीचे की।
“तुम्हें याद है वो रात?”
विराज का चेहरा बदल गया।
“कौन-सी रात?”
“अस्पताल वाली।”
नंदिनी ने आंखें बंद कर लीं।
रुद्र ने कहा,
“जिस रात दो बच्चों का जन्म हुआ था।”
आरव और आरोही एक-दूसरे को देखने लगे।
“उस रात तुमने आदेश दिया था कि दोनों बच्चों को खत्म कर दिया जाए।”
आरोही के पैरों तले जमीन खिसक गई।
“क्या?”
विराज चिल्लाया,
“झूठ!”
रुद्र ने कहा,
“लेकिन नंदिनी ने एक बच्चे को बचा लिया।”
नंदिनी रोते हुए बोलीं,
“मैंने दोनों को बचाने की कोशिश की थी।”
रुद्र ने कहा,
“नहीं।”
फिर उसने आरव की तरफ देखा।
“तुम्हारी मां माधवी आरव को लेकर भाग गई थी।”
माधवी की आंखों से आंसू निकल आए।
“हां।”
“और नंदिनी आरोही को लेकर।”
“हां।”
“लेकिन तीसरा आदमी कौन था?”
सब चौंक गए।
आरव ने पूछा,
“तीसरा?”
रुद्र ने कहा,
“उस रात वहां एक और बच्चा था।”
अर्जुन ने तुरंत कहा,
“ये झूठ है।”
रुद्र मुस्कुराया।
“तुम जानते हो कि मैं झूठ नहीं बोल रहा।”
आरोही ने पूछा,
“तीसरा बच्चा कौन था?”
रुद्र ने कहा,
“वही बच्चा जिसकी वजह से आज तुम दोनों की जिंदगी उलझी हुई है।”
आरव ने कहा,
“सीधे-सीधे बताओ।”
रुद्र ने कहा,
“उस बच्चे की पहचान कभी सामने नहीं आई।”
“क्यों?”
“क्योंकि उसके रिकॉर्ड बदल दिए गए थे।”
“किसने?”
रुद्र ने विराज की तरफ देखा।
विराज चुप रहा।
रुद्र बोला,
“विराज ने।”
आरोही ने अपने पिता की तरफ देखा।
“आपने?”
विराज ने कहा,
“मैंने किसी बच्चे को नहीं छुआ।”
रुद्र ने कहा,
“तुमने आदेश दिया था।”
विराज चुप रहा।
आरव ने कहा,
“उस बच्चे का क्या हुआ?”
रुद्र ने कहा,
“वो बच्चा…”
वह रुक गया।
फिर उसने आरव की तरफ देखा।
“तुम्हारे सामने खड़ा है।”
आरव स्तब्ध रह गया।
“क्या?”
रुद्र ने कहा,
“तुम्हें हमेशा बताया गया कि तुम माधवी के बेटे हो।”
आरव ने कहा,
“हां।”
“लेकिन तुम्हारा जन्म रिकॉर्ड नकली है।”
माधवी रो पड़ीं।
“नहीं!”
रुद्र ने कहा,
“माधवी ने तुम्हें पाला जरूर है।”
आरव ने पूछा,
“तो मेरी असली मां कौन है?”
रुद्र ने नंदिनी की तरफ देखा।
नंदिनी का चेहरा सफेद पड़ गया।
आरोही ने हैरानी से अपनी मां की तरफ देखा।
“मां?”
नंदिनी ने कांपते हुए कहा,
“आरव…”
आरव पीछे हट गया।
“आप…?”
नंदिनी की आंखों से आंसू बहने लगे।
“मैं तुम्हें सच बताना चाहती थी।”
आरव की आवाज टूट गई।
“क्या आप मेरी मां हैं?”
नंदिनी ने आंखें बंद कर लीं।
“हां।”
आरोही जैसे पत्थर बन गई।
“तो…”
उसकी नजर आरव पर गई।
“आरव मेरे भाई हैं?”
आरव का चेहरा सफेद पड़ गया।
कुछ पल तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर रुद्र हंस पड़ा।
“अब समझ आया?”
आरोही धीरे-धीरे आरव से दूर होने लगी।
“नहीं…”
आरव ने कहा,
“आरोही, मेरी बात सुनो।”
“नहीं!”
“हम दोनों के बीच…”
उसकी आवाज रुक गई।
नंदिनी रोते हुए बोलीं,
“तुम दोनों भाई-बहन नहीं हो।”
आरव ने चौंककर उनकी तरफ देखा।
“लेकिन आपने कहा कि आप मेरी मां हैं।”
नंदिनी ने सिर हिलाया।
“मैं तुम्हारी जैविक मां नहीं हूं।”
रुद्र चुप हो गया।
आरव ने कहा,
“तो फिर?”
नंदिनी ने कांपते हुए कहा,
“मैंने तुम्हें सिर्फ उस रात बचाया था।”
आरव ने गहरी सांस ली।
“तो मेरी असली मां कौन है?”
नंदिनी ने माधवी की तरफ देखा।
माधवी रो रही थीं।
“माधवी ही तुम्हारी मां है।”
आरव ने राहत की सांस ली।
लेकिन रुद्र हंस पड़ा।
“अभी कहानी खत्म नहीं हुई।”
आरव ने गुस्से में पूछा,
“अब क्या?”
रुद्र ने कहा,
“तुम्हें सच में लगता है कि मैं यहां सिर्फ तुम्हें डराने आया हूं?”
उसने अपनी जेब से एक पुराना लॉकेट निकाला।
लॉकेट देखकर माधवी अचानक चौंक गईं।
“ये…”
रुद्र ने कहा,
“पहचानती हो?”
माधवी की आंखों से आंसू बहने लगे।
“ये मेरे बेटे का था।”
आरव ने लॉकेट की तरफ देखा।
“मेरे पास भी बिल्कुल ऐसा ही लॉकेट था।”
रुद्र मुस्कुराया।
“क्योंकि ये तुम्हारा था।”
आरव ने लॉकेट अपने हाथ में लिया।
उसके पीछे एक छोटा सा निशान बना था।
‘A.R.’
आरोही ने पूछा,
“इसका मतलब?”
रुद्र ने कहा,
“आरव राजवंशी।”
रुद्र ने अचानक बंदूक नीचे कर दी।
“मैं तुम्हें मारने नहीं आया।”
आरव ने हैरानी से पूछा,
“तो?”
“मैं तुम्हें सच बताने आया हूं।”
“क्यों?”
“क्योंकि तुम्हारे पिता ने मेरे साथ भी धोखा किया था।”
शेखर ने कमजोर आवाज में कहा,
“रुद्र…”
रुद्र उनकी तरफ मुड़ा।
“तुम चुप रहो।”
“तुम्हें पूरी सच्चाई नहीं पता।”
“मुझे सब पता है।”
शेखर ने कहा,
“नहीं।”
रुद्र चिल्लाया,
“तो बताओ!”
शेखर ने कहा,
“तुम्हारी बहन की मौत… मेरी वजह से नहीं हुई थी।”
रुद्र के चेहरे पर गुस्सा जम गया।
“क्या?”
“उसकी हत्या विराज ने नहीं की थी।”
विराज ने भी हैरानी से शेखर की तरफ देखा।
“तो किसने?”
शेखर ने कांपते हुए कहा “तुमने खुद।”
रुद्र की आंखें फैल गईं।
“क्या?”
“तुम्हें याद नहीं… लेकिन उस रात तुम नशे में थे।”
रुद्र पीछे हट गया।
“झूठ!”
शेखर ने कहा,
“और तुम्हें सच बताने के लिए मैंने तुम्हारी याददाश्त से जुड़े सारे दस्तावेज छुपाए थे।”
रुद्र का हाथ कांपने लगा।
“नहीं…”
अचानक दूर से पुलिस सायरन की आवाज सुनाई दी।
कबीर ने कहा,
“पुलिस आ रही है।”
रुद्र ने चारों तरफ देखा।
“नहीं…”
विराज ने तुरंत अपने आदमियों को पीछे हटने का इशारा किया।
अभय ने मौका देखकर नंदिनी और माधवी को दूसरी तरफ भेज दिया।
आरव ने शेखर को संभाला।
“चलो पापा।”
शेखर ने कहा,
“आरव… लाल फाइल।”
“वो कहां है?”
शेखर ने अपनी जेब से एक छोटी चाबी निकाली।
“नीलगिरी हवेली… कमरा नंबर 17।”
“उसमें क्या है?”
शेखर ने कहा,
“तुम्हारी जिंदगी का आखिरी राज।”
आरव ने चाबी ले ली।
तभी रुद्र ने पीछे से आवाज लगाई—
“आरव!”
आरव पलटा।
रुद्र ने कहा,
“अगर कमरा नंबर 17 खोला…”
वह कुछ पल रुका।
“तो तुम्हें पता चल जाएगा कि तुम्हारे जन्म के समय तुम्हारी जिंदगी में सबसे बड़ा धोखा किसने दिया था।”
आरव ने पूछा,
“किसने?”
रुद्र ने माधवी की तरफ देखा।
माधवी के चेहरे का रंग उड़ गया।
आरव ने अपनी मां की तरफ देखा।
“मां…?”
माधवी कुछ नहीं बोलीं।
आरव की आंखों में शक उतर आया।
और उसी समय…
आरोही ने आरव का हाथ पकड़ लिया।
“जो भी सच होगा… हम साथ जानेंगे।”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“लेकिन अगर सच ने हमें अलग कर दिया तो?”
आरोही ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा “तो मैं उस सच को ही गलत साबित कर दूंगी।”
दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ गए।
पीछे समुद्र की लहरें जोर-जोर से चट्टानों से टकरा रही थीं।
और नीलगिरी हवेली के अंदर…
कमरा नंबर 17 का दरवाजा पहली बार खुलने वाला था।
लेकिन उस कमरे के अंदर क्या था?
एक तस्वीर… एक खून से लिखा खत… और ऐसा राज, जो आरव और आरोही के पूरे रिश्ते को बदलने वाला था।
जारी रहेगा…

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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