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भाग 1 — आख़िरी तस्वीर

पढ़ने का समय : 6 मिनट

रात के करीब ग्यारह बज रहे थे। शहर के पुराने हिस्से में बारिश लगातार हो रही थी। सड़कें सुनसान थीं और बिजली बार-बार चमक रही थी। उसी रात आरव अपने नए किराए के घर में पहली बार अकेला था।

 

घर बहुत पुराना था। दीवारों पर नमी के निशान थे, लकड़ी के दरवाज़े जगह-जगह से उखड़े हुए थे और ऊपर की मंज़िल पर एक छोटा-सा कमरा था, जिसे मकान मालिक ने साफ़ करने से मना किया था।

 

आरव को यह बात अजीब लगी थी।

 

जब उसने पूछा था, “वह कमरा बंद क्यों है?”

 

मकान मालिक ने बस इतना कहा था, “पुराना सामान है। आपको उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।”

 

आरव ने ज्यादा सवाल नहीं किए।

 

वह पेशे से फोटोग्राफर था। पुराने घरों और सुनसान जगहों की तस्वीरें लेना उसका शौक था। इसलिए घर की अजीब हालत देखकर डरने के बजाय वह उत्साहित था।

 

रात को खाना खाने के बाद उसने अपना कैमरा निकाला और घर की तस्वीरें लेने लगा।

 

सीढ़ियां…

 

खिड़की…

 

पुरानी घड़ी…

 

फिर उसकी नजर सामने की दीवार पर पड़ी।

 

वहां एक पुरानी तस्वीर लगी थी।

 

तस्वीर में चार लोग खड़े थे—एक बुजुर्ग आदमी, एक औरत, करीब दस साल की बच्ची और एक जवान लड़का। सभी कैमरे की तरफ देख रहे थे।

 

लेकिन सबसे अजीब बात यह थी कि तस्वीर के पीछे की तारीख साफ दिखाई दे रही थी।

 

“17 अगस्त 1998.”

 

आरव ने तस्वीर उतारी और अपने कैमरे से उसकी फोटो खींच ली।

 

तभी ऊपर से कुछ गिरने की आवाज आई।

 

धड़ाम!

 

आरव चौंक गया।

 

उसने ऊपर देखा।

 

आवाज़ उसी बंद कमरे की तरफ से आई थी।

 

कुछ सेकंड तक वह सीढ़ियों के पास खड़ा रहा। फिर उसने खुद को समझाया कि शायद कोई पुरानी चीज गिर गई होगी।

 

वह ऊपर गया।

 

कमरे का दरवाज़ा बंद था।

 

आरव ने हैंडल घुमाया।

 

दरवाज़ा नहीं खुला।

 

अंदर से हल्की-सी खरोंचने की आवाज आ रही थी।

 

खर्र… खर्र…

 

आरव का दिल तेज धड़कने लगा।

 

“कोई है?” उसने धीरे से पूछा।

 

आवाज़ तुरंत बंद हो गई।

 

कुछ पल बाद उसने नीचे लौटने का फैसला किया।

 

कमरे में वापस आकर उसने कैमरे की तस्वीरें लैपटॉप में डालनी शुरू कीं।

 

एक-एक करके तस्वीरें सामने आने लगीं।

 

लेकिन जब उसने उस पुरानी तस्वीर वाली फोटो खोली, तो उसकी सांस रुक गई।

 

तस्वीर में अब चार लोग नहीं थे।

 

उनके पीछे एक पांचवीं परछाई खड़ी थी।

 

एक औरत।

 

उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।

 

आरव ने आंखें मलकर स्क्रीन को देखा।

 

उसे लगा शायद कैमरे की रोशनी के कारण ऐसा दिख रहा है।

 

उसने फोटो को ज़ूम किया।

 

परछाई बिल्कुल साफ थी।

 

काले कपड़े।

 

लंबे बाल।

 

और चेहरा पूरी तरह नीचे झुका हुआ।

 

आरव ने तस्वीर सेव की और कैमरा बंद कर दिया।

 

तभी कमरे की खिड़की अपने आप खुल गई।

 

तेज़ हवा अंदर आई।

 

लाइट चली गई।

 

पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

 

आरव ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाई।

 

कमरे में कोई नहीं था।

 

लेकिन फर्श पर गीले पैरों के निशान थे।

 

खिड़की से लेकर उसके कैमरे तक।

 

आरव धीरे-धीरे कैमरे के पास गया।

 

कैमरा अभी बंद था।

 

फिर भी उसकी स्क्रीन जल उठी।

 

स्क्रीन पर एक तस्वीर दिखाई दे रही थी।

 

आरव ने उसे देखा और उसके हाथ कांपने लगे।

 

वह तस्वीर उसी कमरे की थी।

 

लेकिन उसमें आरव खुद खड़ा था।

 

और उसके पीछे वही काले कपड़ों वाली औरत खड़ी थी।

 

आरव ने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।

 

कुछ नहीं था।

 

वह घबराकर कमरे से बाहर निकला।

 

नीचे पहुंचकर उसने मकान मालिक को फोन किया।

 

“आपने मुझे इस घर के बारे में सब कुछ नहीं बताया,” आरव ने गुस्से में कहा।

 

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक चुप्पी रही।

 

फिर मकान मालिक ने पूछा, “आपने ऊपर वाले कमरे की तस्वीर देख ली?”

 

आरव चौंका।

 

“आपको कैसे पता?”

 

मकान मालिक की आवाज अचानक धीमी हो गई।

 

“क्योंकि उस घर में जो भी उस तस्वीर को कैमरे में कैद करता है… वह ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहता।”

 

आरव के हाथ से मोबाइल लगभग गिर गया।

 

“क्या मतलब?”

 

मकान मालिक ने जवाब नहीं दिया।

 

फोन कट गया।

 

उसी समय ऊपर से किसी के चलने की आवाज आई।

 

धीरे-धीरे।

 

ठक…

 

ठक…

 

ठक…

 

जैसे कोई सीढ़ियों से नीचे उतर रहा हो।

 

आरव ने मोबाइल की रोशनी सीढ़ियों पर डाली।

 

कोई दिखाई नहीं दिया।

 

लेकिन आवाज जारी रही।

 

ठक…

 

ठक…

 

ठक…

 

फिर अचानक उसके फोन पर एक नई तस्वीर आई।

 

अज्ञात नंबर से।

 

आरव ने तस्वीर खोली।

 

उसमें वही पुरानी तस्वीर थी।

 

चार लोग…

 

और पीछे खड़ी पांचवीं परछाई।

 

लेकिन इस बार परछाई का चेहरा थोड़ा ऊपर उठा हुआ था।

 

आरव ने तस्वीर को ज़ूम किया।

 

उसका खून जम गया।

 

चेहरा किसी औरत का नहीं था।

 

वह चेहरा आरव की अपनी मां का था।

 

उसकी मां की मौत छह साल पहले हो चुकी थी।

 

तभी फोन पर एक मैसेज आया।

 

“मुझे ढूंढना मत।”

 

आरव ने कांपते हुए लिखा—

 

“आप कौन हैं?”

 

कुछ सेकंड बाद जवाब आया।

 

“मैं वो हूं… जिसकी आख़िरी तस्वीर तुमने खींची है।”

 

आरव ने तुरंत घर छोड़ने का फैसला किया।

 

उसने बैग उठाया और दरवाज़े की तरफ दौड़ा।

 

लेकिन मुख्य दरवाज़ा बंद था।

 

उसने चाबी घुमाई।

 

चाबी घूम रही थी, मगर दरवाज़ा नहीं खुल रहा था।

 

पीछे से किसी के हंसने की आवाज आई।

 

बहुत धीमी।

 

बहुत करीब।

 

आरव धीरे-धीरे मुड़ा।

 

सीढ़ियों के नीचे वही काले कपड़ों वाली औरत खड़ी थी।

 

उसके लंबे बाल चेहरे पर लटक रहे थे।

 

आरव पीछे हटने लगा।

 

औरत ने अपना सिर उठाया।

 

चेहरा अब साफ दिखाई दे रहा था।

 

वह उसकी मां थी।

 

लेकिन उसकी आंखें पूरी तरह काली थीं।

 

उसने मुस्कुराकर कहा—

 

“बेटा… एक तस्वीर और ले लो।”

 

आरव का कैमरा अपने आप चालू हो गया।

 

स्क्रीन पर लिखा आया—

 

“आख़िरी तस्वीर — 17 अगस्त 2026.”

 

और कैमरे ने खुद ही तस्वीर खींच ली।

 

फ्लैश चमका।

 

उस एक पल में आरव ने देखा कि उसके पीछे दर्जनों लोग खड़े थे।

 

सबके चेहरे पहचान में नहीं आ रहे थे।

 

और सबसे आगे वही चार लोग खड़े थे, जो पुरानी तस्वीर में थे।

 

फिर अंधेरा छा गया।

 

सुबह जब मकान मालिक घर पहुंचा, तो दरवाज़ा खुला था।

 

आरव कहीं नहीं था।

 

सिर्फ उसका कैमरा फर्श पर पड़ा था।

 

कैमरे में आख़िरी तस्वीर मौजूद थी।

 

उस तस्वीर में आरव अकेला खड़ा था।

 

लेकिन उसके पीछे एक नहीं…

 

सात परछाइयां थीं।

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