डरावनी आत्मा का बंद कमरा
शहर से थोड़ा दूर एक पुरानी हवेली थी। हवेली कई सालों से बंद पड़ी थी। उसकी दीवारों पर बेलें चढ़ चुकी थीं और खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे। गांव के लोग शाम होते ही उस रास्ते से गुजरना बंद कर देते थे।
कहा जाता था कि हवेली में एक डरावनी आत्मा रहती है।
लोगों का कहना था कि आधी रात के बाद हवेली की ऊपरी मंजिल से किसी लड़की के रोने की आवाज आती थी।
किसी ने उसे देखा नहीं था, लेकिन कई लोगों ने उसके कदमों की आवाज जरूर सुनी थी।
उसी गांव में एलेक्स नाम का बीस साल का लड़का रहता था। वह इन बातों पर विश्वास नहीं करता था।
एक शाम उसके दोस्त नोलन ने उसे चुनौती दी।
“अगर तुम्हें इतना ही भरोसा है कि वहां कोई आत्मा नहीं है, तो आज रात हवेली में जाकर दिखाओ।”
एलेक्स ने हंसकर कहा—
“मुझे किसी को कुछ साबित नहीं करना।”
नोलन बोला—
“डर गए?”
एलेक्स तुरंत बोला—
“ठीक है। आज रात चला जाऊंगा।”
रात करीब दस बजे एलेक्स टॉर्च लेकर हवेली की तरफ निकल पड़ा।
हवेली का मुख्य दरवाजा आधा खुला था।
उसने उसे धक्का दिया।
चर्ररर…
दरवाजा खुलते ही अंदर से ठंडी हवा का झोंका आया।
एलेक्स ने खुद को संभाला।
“पुरानी हवेली है, हवा तो चलेगी।”
वह अंदर चला गया।
फर्श पर धूल जमी थी। दीवारों पर पुराने चित्र लगे थे।
जैसे ही उसने टॉर्च एक चित्र पर डाली, उसे लगा कि चित्र में बनी लड़की की आंखें उसकी तरफ देख रही हैं।
एलेक्स कुछ पल रुका।
फिर हंस पड़ा।
“डराने की कोशिश कर रही हो?”
वह आगे बढ़ गया।
अचानक पीछे से दरवाजा बंद होने की आवाज आई।
धड़ाम!
एलेक्स पलटा।
“हवा होगी।”
उसने दरवाजा खोलने की कोशिश की।
दरवाजा नहीं खुला।
अब उसे थोड़ी चिंता हुई।
उसने फोन निकाला।
नेटवर्क नहीं था।
“कमाल है।”
तभी ऊपर से किसी के चलने की आवाज आई।
टक…
टक…
टक…
एलेक्स ने सिर उठाकर देखा।
ऊपरी मंजिल की सीढ़ियां अंधेरे में गायब हो रही थीं।
आवाज फिर आई।
टक…
टक…
टक…
वह धीरे-धीरे सीढ़ियों की तरफ बढ़ा।
जैसे ही उसने पहला कदम रखा, ऊपर से एक धीमी आवाज आई—
“मत आओ…”
एलेक्स वहीं रुक गया।
“कौन है?”
कोई जवाब नहीं मिला।
फिर आवाज आई—
“वापस चले जाओ…”
एलेक्स का दिल तेजी से धड़कने लगा।
लेकिन उसने हिम्मत करके ऊपर जाना जारी रखा।
ऊपरी मंजिल पर एक लंबा गलियारा था।
गलियारे के अंत में एक बंद कमरा था।
दरवाजे पर पुराने ताले के निशान थे।
एलेक्स ने टॉर्च उस दरवाजे पर डाली।
अचानक दरवाजे के अंदर से किसी ने धीरे से तीन बार दस्तक दी।
ठक…
ठक…
ठक…
एलेक्स पीछे हट गया।
“अंदर कौन है?”
कुछ देर बाद आवाज आई—
“मैं…”
एलेक्स ने पूछा—
“तुम कौन हो?”
“जिसका इंतजार कोई नहीं कर रहा।”
एलेक्स का डर बढ़ गया।
फिर भी उसने पूछा—
“तुम यहां कब से हो?”
अंदर से आवाज आई—
“बहुत सालों से।”
एलेक्स ने दरवाजे के नीचे से देखा।
अंदर से हल्की रोशनी दिखाई दे रही थी।
“तुम इंसान हो?”
कुछ देर चुप्पी रही।
फिर आवाज आई—
“अब नहीं।”
एलेक्स समझ गया।
वह वही आत्मा थी, जिसकी बातें गांव वाले करते थे।
वह भागने के लिए मुड़ा।
लेकिन गलियारे का रास्ता अचानक गायब था।
वह जहां सीढ़ियां थीं, वहां अब सिर्फ दीवार थी।
एलेक्स घबरा गया।
“मुझे जाने दो!”
आत्मा की आवाज आई—
“मैंने तुम्हें नहीं रोका।”
“तो रास्ता कहां है?”
“जिस कमरे में तुमने कभी आने की हिम्मत नहीं की, वही रास्ता दिखाएगा।”
एलेक्स ने बंद कमरे की तरफ देखा।
दरवाजा धीरे-धीरे खुल गया।
अंदर एक पुरानी मेज, एक टूटी कुर्सी और दीवार पर कई तस्वीरें थीं।
एक तस्वीर देखकर एलेक्स के कदम रुक गए।
उस तस्वीर में एक युवा लड़की थी।
उसके साथ एक छोटा लड़का खड़ा था।
लड़का बिल्कुल एलेक्स जैसा दिखता था।
उसके हाथ कांपने लगे।
“ये… कौन है?”
आत्मा उसके पीछे खड़ी थी।
अब उसका चेहरा दिखाई दे रहा था।
वह एक शांत चेहरे वाली लड़की थी। उसकी आंखों में डर नहीं, बल्कि बहुत गहरा दुख था।
उसने कहा—
“तुम्हारे दादा के छोटे भाई की बेटी।”
एलेक्स हैरान रह गया।
“मेरा परिवार?”
आत्मा ने सिर हिलाया।
“मेरा नाम एलिसा था।”
उसने बताया कि कई साल पहले हवेली में रहने वाले परिवार में जमीन को लेकर विवाद हुआ था। एलिसा ने एक पुराने दस्तावेज के बारे में सच जान लिया था, जिससे परिवार के एक लालची सदस्य का झूठ सामने आ सकता था।
लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी।
उसे इसी कमरे में बंद कर दिया गया था।
“मैंने बहुत देर तक मदद के लिए पुकारा,” एलिसा ने कहा।
“लेकिन कोई नहीं आया।”
एलेक्स की आंखें नम हो गईं।
“फिर?”
“कुछ दिनों बाद मुझे इसी कमरे में मेरी डायरी मिली। उसमें मैंने सब सच लिख दिया था।”
एलिसा ने मेज की तरफ इशारा किया।
वहां एक पुरानी डायरी रखी थी।
एलेक्स ने उसे उठाया।
उसमें पूरे परिवार का सच लिखा था।
आखिरी पन्ने पर एक नाम था।
एलेक्स के परदादा का।
लेकिन उसके आगे लिखा था—
“उन्होंने मुझे बचाने की कोशिश की थी, मगर देर हो चुकी थी।”
एलेक्स स्तब्ध रह गया।
उसे समझ आया कि उसके परिवार ने एलिसा को नुकसान नहीं पहुंचाया था। बल्कि उसके परदादा ने उसे बचाने की कोशिश की थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
एलेक्स ने पूछा—
“तुम अब तक यहां क्यों हो?”
एलिसा ने धीमे से कहा—
“क्योंकि मेरा सच किसी ने दुनिया तक नहीं पहुंचाया।”
एलेक्स ने डायरी अपने बैग में रख ली।
“मैं तुम्हारा सच सबको बताऊंगा।”
एलिसा की आंखों में पहली बार शांति दिखाई दी।
तभी हवेली में तेज हवा चलने लगी।
खिड़कियां खुल गईं।
दीवारों पर टंगी तस्वीरें हिलने लगीं।
एलिसा धीरे-धीरे पीछे हटने लगी।
एलेक्स ने कहा—
“तुम जा रही हो?”
उसने मुस्कुराकर कहा—
“अब मुझे जाने का रास्ता मिल गया है।”
कमरे में अचानक तेज सफेद रोशनी फैल गई।
एलेक्स ने अपनी आंखें बंद कर लीं।
कुछ सेकंड बाद जब उसने आंखें खोलीं तो कमरा खाली था।
दरवाजा खुला हुआ था।
गलियारा भी वापस आ चुका था।
वह तेजी से नीचे आया।
मुख्य दरवाजा इस बार आसानी से खुल गया।
बाहर नोलन और गांव के कुछ लोग खड़े थे।
नोलन घबराकर बोला—
“तुम ठीक हो?”
एलेक्स ने कहा—
“हां। लेकिन मुझे तुम सबको कुछ बताना है।”
अगले दिन एलेक्स ने पूरी डायरी गांव के बुजुर्गों के सामने रखी।
जैसे-जैसे पन्ने पढ़े गए, एलिसा की पुरानी कहानी सामने आती गई।
गांव के बुजुर्गों ने उस हवेली के बारे में पहली बार सच जाना।
उन्होंने एलिसा के नाम से हवेली के पास एक छोटा-सा स्मारक बनवाया।
उस दिन के बाद हवेली से कभी रोने की आवाज नहीं आई।
लेकिन एलेक्स जब भी उस रास्ते से गुजरता, उसे हवेली की ऊपरी खिड़की में एक हल्की रोशनी दिखाई देती।
एक बार उसने ऊपर देखा।
खिड़की पर एलिसा खड़ी थी।
उसने दूर से हाथ हिलाया।
एलेक्स ने भी हाथ हिला दिया।
अगले ही पल रोशनी गायब हो गई।
उस दिन एलेक्स समझ गया कि हर डरावनी आत्मा बदला लेने नहीं आती।
कुछ आत्माएं सिर्फ इसलिए भटकती हैं क्योंकि उनकी अधूरी कहानी कोई सुनने वाला नहीं होता।
और जब सच आखिरकार सामने आ जाता है…
तो सबसे डरावनी आत्मा भी शांति पा सकती है।

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं
अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं
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