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हरियाला बगान

पढ़ने का समय : 7 मिनट

वह हरा-भरा बगान जहां कोई नहीं जा सकता था

 

एक छोटे से गांव के किनारे एक बहुत बड़ा बगान था। चारों तरफ घने पेड़, रंग-बिरंगे फूल और हरी घास से ढकी जमीन थी। दूर से देखने पर वह जगह इतनी खूबसूरत लगती कि हर कोई उसके अंदर जाने का मन बना लेता।

 

लेकिन गांव में एक अजीब बात मशहूर थी।

 

उस बगान में कोई नहीं जा सकता था।

 

गांव के बुजुर्ग कहते थे कि जो भी वहां जाने की कोशिश करता है, वह रास्ता भूल जाता है।

 

किसी ने कहा था कि वहां रात को पेड़ बातें करते हैं।

 

किसी ने कहा था कि बगान के बीचों-बीच एक ऐसा पेड़ है, जिसके नीचे बैठकर इंसान अपनी सबसे बड़ी इच्छा मांग सकता है।

 

लेकिन किसी ने आज तक उस पेड़ को देखा नहीं था।

 

गांव में रहने वाला लियो इन बातों पर विश्वास नहीं करता था।

 

वह बीस साल का एक जिज्ञासु लड़का था। उसे हमेशा उन चीजों के पीछे का सच जानने की आदत थी, जिनसे बाकी लोग डरते थे।

 

एक दिन उसने अपने दादा से पूछा—

 

“दादा, आखिर उस बगान में ऐसा क्या है?”

 

दादा ने गंभीर होकर कहा—

 

“उसके बारे में ज्यादा मत पूछना।”

 

“लेकिन क्यों?”

 

“क्योंकि वह बगान किसी को अपने अंदर आने नहीं देता।”

 

लियो हंस पड़ा।

 

“बगान कोई इंसान थोड़ी है, जो किसी को रोक देगा।”

 

दादा ने उसकी तरफ देखा।

 

“तुम्हें जो मजाक लगता है, उसके पीछे कई लोगों की जिंदगी जुड़ी है।”

 

लियो चुप हो गया।

 

उस रात वह अपने कमरे में सो रहा था कि अचानक उसकी खिड़की के बाहर से फूलों की खुशबू आई।

 

वह उठकर बाहर आया।

 

खिड़की से दूर बगान दिखाई दे रहा था।

 

लेकिन आज वहां कुछ अलग था।

 

बगान के बीचों-बीच हल्की सुनहरी रोशनी चमक रही थी।

 

लियो ने सोचा शायद उसकी आंखों का भ्रम होगा।

 

लेकिन रोशनी फिर चमकी।

 

अगली सुबह उसने दादा से पूछा—

 

“कल रात बगान में रोशनी क्यों थी?”

 

दादा का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।

 

“तुमने देखी?”

 

“हां।”

 

दादा कुछ देर चुप रहे।

 

फिर बोले—

 

“इसका मतलब है कि बगान ने तुम्हें बुलाया है।”

 

लियो हैरान हो गया।

 

“बगान किसी को बुला भी सकता है?”

 

दादा ने कोई जवाब नहीं दिया।

 

बस इतना कहा—

 

“अगर जाना ही है तो अकेले जाना। और चाहे कुछ भी हो, वहां से कोई चीज अपने साथ मत लाना।”

 

लियो उसी शाम बगान के पास पहुंच गया।

 

जैसे ही उसने पहला कदम आगे बढ़ाया, तेज हवा चली।

 

पेड़ों की पत्तियां एक साथ हिलने लगीं।

 

लियो ने पीछे देखा।

 

गांव अब पहले से बहुत दूर दिखाई दे रहा था।

 

उसने आगे कदम बढ़ाया।

 

कुछ दूर चलने के बाद उसे एक बड़ा पत्थर दिखाई दिया।

 

उस पर लिखा था—

 

“जो यहां अपने स्वार्थ से आता है, वह रास्ता खो देता है।”

 

लियो मुस्कुराया।

 

“मैं तो सिर्फ सच जानने आया हूं।”

 

वह आगे बढ़ गया।

 

बगान के अंदर का नजारा बाहर से भी ज्यादा खूबसूरत था।

 

हर तरफ फूल थे।

 

छोटी-छोटी धाराएं बह रही थीं।

 

पक्षियों की आवाजें गूंज रही थीं।

 

लेकिन अजीब बात यह थी कि उसे एक भी जानवर डरता हुआ नहीं दिखा।

 

कुछ देर बाद वह बगान के बीचों-बीच पहुंच गया।

 

वहां एक बहुत पुराना पेड़ खड़ा था।

 

उसकी शाखाएं इतनी फैली थीं कि पूरा मैदान उसकी छांव में आ जाता था।

 

पेड़ के तने पर एक छोटा-सा निशान बना था।

 

वही निशान जो लियो ने बचपन में अपने दादा की पुरानी डायरी में देखा था।

 

लियो ने पेड़ को छुआ।

 

अचानक उसके सामने एक दृश्य दिखाई दिया।

 

एक बहुत पुराना गांव।

 

लोग सूखे खेतों में परेशान घूम रहे थे।

 

पानी नहीं था।

 

फसलें बर्बाद हो चुकी थीं।

 

फिर उसने देखा कि गांव के कुछ लोगों ने इसी बगान के पेड़ काटने शुरू कर दिए।

 

जैसे ही पेड़ काटे गए, बगान की हरियाली खत्म होने लगी।

 

दृश्य बदल गया।

 

एक बूढ़ा आदमी गांव वालों के सामने खड़ा था।

 

उसने कहा—

 

“अगर तुमने इस बगान को बचाया नहीं, तो तुम्हारे गांव की जमीन भी बंजर हो जाएगी।”

 

लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं मानी।

 

कुछ लोगों ने पेड़ काटने की कोशिश की।

 

तभी अचानक तेज आंधी आई।

 

सभी लोग भाग गए।

 

उस दिन के बाद बगान के चारों तरफ एक अदृश्य सीमा बन गई।

 

कोई इंसान उसके अंदर नहीं जा सका।

 

लियो ने आंखें खोलीं।

 

वह समझ चुका था।

 

यह बगान किसी जादू की वजह से बंद नहीं था।

 

यह लोगों के लालच से खुद को बचा रहा था।

 

तभी उसके पीछे किसी की आवाज आई—

 

“अब तुम समझ गए?”

 

लियो पलटा।

 

वहां एक बूढ़ी महिला खड़ी थी।

 

“आप कौन हैं?”

 

महिला मुस्कुराई।

 

“मैं इस बगान की रखवाली करती हूं।”

 

लियो ने पूछा—

 

“तो इतने सालों से किसी को अंदर क्यों नहीं आने दिया?”

 

“क्योंकि जो भी यहां आया, उसने कुछ लेने की कोशिश की।”

 

“और मैं?”

 

“तुम पहली बार कुछ लेने नहीं, सच जानने आए हो।”

 

लियो ने पूछा—

 

“अब मुझे क्या करना होगा?”

 

बूढ़ी महिला ने कहा—

 

“बगान तुम्हें एक मौका देगा।”

 

“कैसा मौका?”

 

“तुम यहां से एक चीज ले जा सकते हो।”

 

लियो की नजर पेड़ पर गई।

 

“क्या?”

 

“एक सुनहरा फल।”

 

पेड़ पर एक ही फल लगा था।

 

वह चमक रहा था।

 

बूढ़ी महिला ने कहा—

 

“इसे खाने से तुम्हारी जिंदगी बदल सकती है। तुम्हारे परिवार की गरीबी खत्म हो सकती है।”

 

लियो कुछ देर उस फल को देखता रहा।

 

फिर उसने सिर हिला दिया।

 

“नहीं।”

 

बूढ़ी महिला चौंकी।

 

“क्यों?”

 

“क्योंकि मेरे दादा ने कहा था कि यहां से कुछ साथ लेकर मत जाना।”

 

महिला मुस्कुराई।

 

“तुम्हें धन नहीं चाहिए?”

 

“चाहिए। लेकिन अगर उसके लिए इस बगान से कुछ छीनना पड़े तो नहीं।”

 

बूढ़ी महिला ने हाथ उठाया।

 

अचानक पूरा बगान सुनहरी रोशनी से भर गया।

 

पेड़ों की पत्तियां हवा में झूमने लगीं।

 

“आज से यह बगान तुम्हारे लिए बंद नहीं रहेगा।”

 

लियो हैरान रह गया।

 

“लेकिन गांव के बाकी लोगों के लिए?”

 

“जब तक वे इसे पाने की जगह बचाने की सोच नहीं बदलेंगे, तब तक नहीं।”

 

लियो गांव वापस आया।

 

उसने अपने दादा को पूरी बात बताई।

 

दादा की आंखों में आंसू आ गए।

 

“तुमने वही किया जो तुम्हारे पिता नहीं कर पाए।”

 

लियो ने पूछा—

 

“मेरे पिता?”

 

दादा ने बताया कि कई साल पहले लियो के पिता भी उस बगान में गए थे। उन्होंने भी सुनहरा फल पाने की कोशिश की थी। लेकिन बगान ने उन्हें बाहर निकाल दिया था।

 

उस दिन से वह बदल गए थे।

 

लियो को पहली बार अपने पिता की अधूरी कहानी समझ आई।

 

अगले दिन लियो ने गांव वालों को इकट्ठा किया।

 

उसने कहा—

 

“हम इस बगान से कुछ लेने की कोशिश करते रहे। लेकिन अगर हम इसकी हरियाली बचाएंगे, तो यह खुद हमें बहुत कुछ देगा।”

 

गांव वालों ने पहले उसकी बात नहीं मानी।

 

लेकिन लियो ने हार नहीं मानी।

 

उसने गांव के सूखे तालाब की सफाई शुरू की।

 

बच्चे उसके साथ आ गए।

 

फिर बुजुर्ग भी।

 

कुछ ही महीनों में गांव बदलने लगा।

 

लोगों ने पेड़ लगाना शुरू किया।

 

पानी बचाना शुरू किया।

 

और एक सुबह गांव वालों ने देखा कि बगान की सीमा के पास लगी पुरानी बेल अपने आप हट गई थी।

 

पहली बार गांव के लोगों के लिए रास्ता खुला था।

 

लेकिन इस बार कोई दौड़कर अंदर नहीं गया।

 

सबने दूर खड़े होकर उस हरे-भरे बगान को देखा।

 

लियो मुस्कुराया।

 

उसे समझ आ गया था कि बगान का रहस्य कोई जादुई फल नहीं था।

 

उसका असली रहस्य यह था कि प्रकृति उन लोगों के लिए अपने दरवाजे खोल देती है, जो उसे जीतना नहीं, बचाना जानते हैं।

 

उस दिन से वह बगान गांव की सबसे सुरक्षित जगह बन गया।

 

और वहां जाने वाले हर व्यक्ति को एक ही बात याद दिलाई जाती—

 

“हरियाली सिर्फ देखने की चीज नहीं, संभालने की जिम्मेदारी भी है।”

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