Part – 18 hamara ghar
शिमला की सर्दियां अब अपने चरम पर थीं। जनवरी की शुरुआत हो चुकी थी, और ठाकुर हाउस की छत पर बर्फ की मोटी चादर जम गई थी। मीडिया का शोर धीरे-धीरे कम हो रहा था – लोग नई खबरों में व्यस्त हो गए थे। लेकिन प्रिया और आरव के लिए ये समय सबसे खूबसूरत था। वो समय जब उनका प्यार अब छिपा नहीं, बल्कि खुलकर जीया जा रहा था। घरवाले ने अपनाया था, रिया सबसे बड़ी सपोर्टर बनी थी, और दोनों अब एक-दूसरे के साथ हर पल को जी रहे थे।
एक सुबह प्रिया किचन में थी। वो आरव के लिए उसकी फेवरेट कॉफी बना रही थी – ब्लैक, बिना शुगर। आरव पीछे से आया, उसकी कमर में हाथ डाले। “गुड मॉर्निंग, मेरी जान।”
प्रिया मुस्कुराई। पीछे मुड़ी और उसके होंठों पर हल्का सा किस किया। “गुड मॉर्निंग भैया… नहीं, अब तो सिर्फ आरव।”
आरव ने उसे गोद में उठा लिया। “हां, सिर्फ तेरा आरव।”
रिया किचन में आई। “ओये होये! सुबह-सुबह रोमांस? मैं अंदर जा रही हूं।”
दोनों हंस पड़े। आरव ने प्रिया को नीचे उतारा। “रिया, आज प्लान है। हम तीनों बाहर जाएंगे। जाखू टेंपल। बर्फ देखने।”
प्रिया की आंखें चमक उठीं। “सच? चलो!”
तीनों बाहर निकले। कार में आरव ड्राइव कर रहा था, प्रिया उसके बगल में, रिया पीछे। रास्ते में पुरानी गानों की प्लेलिस्ट चल रही थी। प्रिया ने आरव का हाथ थामा। आरव ने उसकी उंगलियों को चूमा। रिया ने पीछे से कहा, “यार, तुम दोनों अब कपल गो्ल्स हो।”
जाखू टेंपल पहुंचे। ऊपर बर्फ की चादर, बंदर घूम रहे थे, हवा ठंडी लेकिन साफ। तीनों टहलने लगे। प्रिया ने बर्फ का गोला बनाया और आरव पर फेंका। आरव ने पकड़ा और प्रिया को गले लगा लिया। “पकड़ी गई!”
रिया फोटोज ले रही थी। “ये फोटोज मैं सेव करूंगी। ब्लैकमेल के लिए।”
प्रिया ने कहा, “रिया, तू सबसे बेस्ट है।”
शाम को घर लौटे। पापा और आदित्य अंकल टीवी देख रहे थे। पापा ने कहा, “बच्चो, आज न्यूज में तुम्हारी स्टोरी फिर आई। लेकिन पॉजिटिव। लोग कह रहे हैं – प्यार जीत गया।”
प्रिया और आरव मुस्कुराए। आदित्य अंकल ने कहा, “बेटी, मैं गर्व करता हूं तुम पर। तुमने स्ट्रगल किया, और सच्चा प्यार पाया।”
रात को डिनर के बाद प्रिया और आरव पुरानी हवेली गए – जो अब रेनोवेट हो रही थी। वो हवेली जो मम्मी की फेवरेट थी। अब वो उनका स्पेशल प्लेस बन गई थी। हवेली के बगीचे में बर्फ जमी थी। दोनों हाथ थामे टहल रहे थे।
आरव ने कहा, “प्रिया… ये हवेली हमारा घर बनेगी। हमारा अपना। जहां सिर्फ हम होंगे।”
प्रिया ने उसे गले लगाया। “हां आरव। हमारा घर। जहां हमारी यादें होंगी। हमारे बच्चे खेलेंगे।”
आरव ने उसे किस किया। “हां प्रिया। हमारे बच्चे। तेरी आंखें, मेरी मुस्कान।”
दोनों बगीचे के झूले पर बैठे। आरव ने प्रिया को गोद में लिया। “प्रिया… याद है बचपन में मैं तुझे झूला झुलाता था?”
प्रिया ने कहा, “अब मैं बड़ी हो गई। लेकिन तुम्हारी गोद में अभी भी छोटी लगती हूं।”
आरव ने उसके होंठों को गहराई से चूमा। “प्रिया… तू हमेशा मेरी छोटी राजकुमारी रहेगी। मेरी पत्नी बनेगी एक दिन।”
प्रिया ने जवाब में किस किया। “हां आरव। तेरी पत्नी। तेरी हमसफर।”
रात गहरा गई। दोनों हवेली के एक कमरे में रुके। फायरप्लेस जलाया। प्रिया आरव की बाहों में थी। “आरव… आज सबसे खुश हूं।”
आरव ने उसके बाल सहलाए। “प्रिया… मैं भी। तूने मुझे पूरा किया।”
दोनों सो गए – गले लगे। पहली बार पूरी रात साथ। कोई डर नहीं, कोई गिल्ट नहीं। सिर्फ प्यार।
सुबह हुई। घर लौटे। रिया ने चिढ़ाया, “कहां थे रात भर? हवेली में?”
प्रिया शर्मा गई। आरव ने कहा, “रिया, जलन हो रही है?”
रिया हंसी। “नहीं भैया। खुश हूं। तुम दोनों परफेक्ट हो।”
लेकिन बाहर विक्रम बाहर आ चुका था। वो अवनी से मिला। “अवनी, अब आखिरी वार। प्रिया और आरव को अलग कर दूंगा। पुराना प्रूफ है – रानी की डायरी का दूसरा पेज। जहां लिखा है कि प्रिया राजेश की बेटी नहीं। अगर फैमिली को पता चला तो…”
अवनी मुस्कुराई। “करो।”
लेकिन प्रिया और आरव तैयार थे। उनका प्यार अब इतना मजबूत था कि कोई साजिश नहीं तोड़ सकती।
शाम को दोनों छत पर थे। बर्फ देख रहे थे। आरव ने प्रिया को रिंग दी – सिंपल, लेकिन डायमंड वाली। “प्रिया… विल यू मैरी मी?”
प्रिया रो पड़ी। “यस आरव। हजार बार यस।”
दोनों गले लगे। किस किया। हमारा घर – अब सच होने वाला था।
प्यार की जीत हो चुकी थी। बचपन से शुरू हुआ सफर अब शादी तक पहुंच रहा था।
ठाकुर हाउस में अब खुशियों का माहौल था। फरवरी की शुरुआत हो चुकी थी, और शिमला की बर्फ अब पिघलने लगी थी – जैसे प्रिया और आरव के प्यार के आगे सारी ठंडक गायब हो रही हो। शादी की तारीख फिक्स हो चुकी थी – मार्च के पहले हफ्ते में। हवेली को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा था। फूलों की मालाएं, लाइट्स, डेकोरेटर्स की टीम दिन-रात लगी हुई थी। प्रिया की शादी की शॉपिंग चल रही थी – लहंगे, ज्वेलरी, मेहंदी की डिजाइन। रिया सबसे एक्टिव थी – वो प्रिया की बेस्ट फ्रेंड और सिस्टर-इन-लॉ दोनों बनने वाली थी।
एक सुबह ठाकुर हाउस में मेहमान आने शुरू हो गए। दूर के रिश्तेदार, पापा के बिजनेस पार्टनर्स, पुराने फैमिली फ्रेंड्स। हाउस में रौनक थी। प्रिया रेड लहंगे में ट्रायल कर रही थी। आरव बाहर मेहमानों का स्वागत कर रहा था।
पहले मेहमान आए – पापा के पुराने दोस्त, अंकल वर्मा और उनकी पत्नी। अंकल वर्मा ने आरव को गले लगाया। “बेटा, बधाई हो। शादी की खबर सुनी।”
फिर आंटी ने प्रिया को देखा। मुस्कुराई, लेकिन आंखों में कुछ और था। “प्रिया बेटी… बहुत खूबसूरत लग रही हो। लेकिन… सुना है तुम दोनों… पहले भाई-बहन जैसे थे?”
प्रिया थोड़ा असहज हो गई। आरव ने बीच में कहा, “आंटी, हमारा रिश्ता सच्चा है। प्यार है।”
आंटी ने हल्के से तंज कसा। “हां बेटा, प्यार तो अंधा होता है। लेकिन लोग क्या कहेंगे? पहले भाई कहकर बुलाती थी, अब पति?”
रिया ने बीच में कट किया। “आंटी, प्यार में क्या पुराना-नया। जो दिल कहे वही सही।”
आंटी चुप हो गईं, लेकिन फुसफुसाहट शुरू हो गई।
दूसरे मेहमान – चाची जी (दूर की रिश्तेदार)। वो प्रिया के पास आईं। लहंगा देखा। “वाह बेटी, दुल्हन तो बन गई। लेकिन आरव तो तेरा भाई था ना? अब पति? अजीब नहीं लगता?”
प्रिया ने मुस्कुराकर कहा, “चाची जी, रिश्ते दिल से होते हैं। हमारा प्यार सालों पुराना है।”
चाची जी ने ताना मारा। “हां हां, सालों पुराना। पहले भाई-बहन वाला, अब पति-पत्नी। समाज क्या कहेगा? लोग तो कह रहे हैं – ठाकुर फैमिली में क्या हो रहा है?”
आरव ने सुना। वो पास आया। “चाची जी, समाज जो कहे कहे। हम खुश हैं। हमारा प्यार सच्चा है।”
चाची जी हंसकर टाल गईं, लेकिन दूसरे मेहमानों से फुसफुसाने लगीं।
शाम को मेहंदी की रस्म थी। प्रिया हाथों में मेहंदी लगवा रही थी। लड़कियां गाना गा रही थीं। आरव दूर खड़ा देख रहा था। एक पुरानी सहेली – नेहा – प्रिया के पास आई। “प्रिया यार, बधाई हो। लेकिन सच बता… आरव को भाई मानती थी ना? अब…?”
प्रिया ने हंसकर कहा, “नेहा, प्यार होता है। रिश्ते बदलते हैं।”
नेहा ने तंज कसा। “हां, बदलते हैं। लेकिन इतना जल्दी? लोग तो कह रहे हैं – भाई से पति? ड्रामा किंग-क्वीन हो तुम दोनों।”
रिया ने फिर बचाया। “नेहा, जलन हो रही है? प्रिया और आरव का प्यार परफेक्ट है। तू अपनी शादी देख।”
नेहा चली गई। लेकिन ताने जारी थे। कुछ मेहमान खुले में, कुछ पीठ पीछे। “अरे, पहले तो भाई-बहन कहते थे, अब शादी? पैसों की वजह से?” “नहीं यार, प्यार है। लेकिन अजीब लगता है।”
प्रिया का मन भारी हो गया। वो बाहर बालकनी में गई। आरव पीछे आया। “प्रिया… ताने सुनकर दुखी है?”
प्रिया ने आंसू पोंछे। “आरव… लोग क्या-क्या कह रहे हैं। पहले भाई-बहन, अब पति-पत्नी। लगता है हम गलत हैं।”
आरव ने उसे गले लगाया। “प्रिया… लोग हमेशा बोलते हैं। लेकिन हमारा प्यार सच्चा है। तूने मुझे चुना, मैंने तुझे। सालों की कमी पूरी हुई है। ये ताने कुछ दिन के हैं। हमारी जिंदगी हमारी है।”
प्रिया ने उसके सीने पर सिर रखा। “आरव… तुम सही कहते हो। मैं तुम्हारे साथ हूं। ताने सह लूंगी।”
आरव ने उसके होंठ चूमे। “प्रिया… तू मेरी बहादुर लड़की है। हम साथ हैं।”
रात को सगाई की रिंग सेरेमनी थी। प्रिया और आरव ने रिंग्स पहनाईं। मेहमान तालियां बजा रहे थे, लेकिन कुछ की आंखें तंज भरी थीं। एक अंकल ने पापा से कहा, “राजेश भाई, बधाई। लेकिन ये रिश्ता… पहले भाई-बहन जैसे थे ना?”
पापा ने मुस्कुराकर कहा, “प्यार होता है भाई साहब। बच्चे खुश हैं। बस।”
सेरेमनी के बाद प्रिया और आरव हवेली के बगीचे में अकेले थे। प्रिया ने कहा, “आरव… ताने सुनकर अच्छा नहीं लगता। लेकिन तुम्हारे साथ हूं तो सब सह लूंगी।”
आरव ने उसे गोद में उठाया। “प्रिया… ताने देने वाले हमारी खुशी नहीं देख सकते। लेकिन हम जीएंगे – अपना प्यार, अपनी जिंदगी। तू मेरी दुल्हन बनेगी। मेरी पत्नी। हमारा घर बनेगा।”
प्रिया ने उसे किस किया। “हां आरव। हमारा घर। हमारी जिंदगी।”
दोनों गले लगे। बर्फ गिर रही थी, लेकिन उनके प्यार में गर्मी थी। ताने थे, लेकिन प्यार मजबूत था।
अगले दिन शादी की तैयारियां और तेज हो गईं। डेकोरेशन, कार्ड्स, डांस प्रैक्टिस। रिया ने कहा, “प्रिया, ताने देने वाले शादी में आएंगे तो डांस करेंगे। हम दिखाएंगे हम कितने खुश हैं।”
प्रिया हंसी। “हां रिया। हम जीतेंगे।”
आरव ने प्रिया को रिंग पहनाई फिर से – प्राइवेट में। “प्रिया… जल्दी दुल्हन बन जा मेरी।”
प्रिया ने कहा, “हां आरव। तेरी दुल्हन। हमेशा।”
शादी की तैयारियां चल रही थीं। ताने थे, लेकिन प्यार उनसे बड़ा था। प्रिया और आरव का सफर अब शादी तक पहुंच चुका था।
विक्रम दूर से देख रहा था। उसका प्लान फेल हो गया। अब वो हार मान चुका था।
शादी का दिन करीब था। खुशियां थीं। प्यार की जीत थी।

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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