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Dil sabhal ja jara part – 15

पढ़ने का समय : 5 मिनट

Part – 15 pahla sparsh

शिमला में अब बर्फबारी रुक-रुक कर हो रही थी। ठाकुर हाउस की छत पर बर्फ की मोटी परत जम चुकी थी, और बाहर का तापमान माइनस में था। घर के अंदर हीटर की गर्माहट थी, लेकिन प्रिया और आरव के दिलों में एक अलग ही आग सुलग रही थी – धीमी, लेकिन लगातार। वो अनकहा वादा, वो बर्फीली रात का गले लगना, अब दोनों के बीच एक अदृश्य धागा बन चुका था। दोनों एक-दूसरे से बात करते, हंसते, लेकिन हर बात में एक नई गहराई थी। नजरें मिलतीं तो लंबी हो जातीं, और फिर शर्मा कर हट जातीं।

 

प्रिया रातों में सोचती – “भैया का प्यार… वो कितना गहरा है। सालों का इंतजार, कमी, और अब ये एहसास। लेकिन अगर मैंने भी दिल खोल दिया तो क्या होगा? फैमिली? रिया? विक्रांत?” वो खुद से लड़ रही थी। आरव को खोने का डर था, लेकिन रिश्ता बदलने का डर भी।

 

आरव का कॉन्फ्लिक्ट अब थोड़ा शांत हो रहा था। प्रिया के साथ बिताए पल उसे सुकून दे रहे थे। वो जानता था कि जल्दबाजी नहीं करनी। लेकिन हर छोटी चीज उसे प्रिया की ओर खींचती – उसकी मुस्कान, उसकी आवाज, उसकी मौजूदगी। वो खुद से कहता, “धीरे चल आरव। प्रिया को वक्त दे। वो तेरी है – दिल से।”

 

एक दिन कॉलेज बंद था – बर्फबारी की वजह से। घर में सब थे। रिया ने प्लान बनाया। “चलो, आज स्नोमैन बनाते हैं! बचपन जैसा।”

 

राजेश पापा और आदित्य अंकल हंस पड़े। “हम बूढ़े हो गए बेटा। तुम जाओ।”

 

प्रिया, रिया और आरव लॉन में निकले। बर्फ गीली थी – परफेक्ट स्नोमैन के लिए। रिया ने बेस बनाना शुरू किया। “प्रिया, तू आंखें बना। भैया, नाक!”

 

आरव और प्रिया साथ-साथ काम कर रहे थे। आरव ने बड़ा गोला घुमाया। प्रिया ने मदद की। उनके हाथ बार-बार छू रहे थे। हर स्पर्श में करंट दौड़ता। आरव ने प्रिया की तरफ देखा। प्रिया शर्मा गई।

 

रिया ने चिढ़ाया। “ओहो, दोनों कितने रोमांटिक हो रहे हैं स्नोमैन बनाते हुए!”

 

आरव ने बर्फ का गोला रिया पर फेंका। “चुप रिया!”

 

तीनों हंसने लगे। बर्फ की लड़ाई शुरू हो गई। प्रिया भागी, आरव पीछे। आरव ने उसे पकड़ लिया – पीठ से गले लगाकर। “पकड़ी गई!”

 

प्रिया हंस रही थी, लेकिन आरव के स्पर्श में सांस रुक गई। वो पीछे मुड़ी। दोनों की नजरें मिलीं। बर्फ उनके बालों पर गिर रही थी। आरव का हाथ प्रिया की कमर पर था। वो छोड़ना नहीं चाहता था। प्रिया ने भी हाथ उसकी जैकेट पर रखा।

 

रिया दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी। “मैं अंदर जा रही हूं। ठंड लग रही है।” वो चली गई – जानबूझकर।

 

अब सिर्फ आरव और प्रिया। बर्फ में खड़े। आरव ने धीरे से प्रिया के गाल से बर्फ हटाई। “प्रिया… ठंड लग रही है?”

 

प्रिया ने सिर हिलाया। “नहीं भैया।”

 

आरव ने उसका चेहरा हाथों में लिया। “प्रिया… मैं अब और नहीं लड़ सकता। तू मेरे दिल में है। हर पल।”

 

प्रिया की आंखें नम हो गईं। “भैया… मैं भी… तुम्हारे बिना अधूरी हूं। लेकिन डर लगता है।”

 

आरव ने कहा, “डर मत। हम साथ हैं। धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।”

 

उसने प्रिया को और करीब खींचा। पहली बार – होठों पर नहीं, माथे पर किस। एक लंबा, गर्म स्पर्श। प्रिया की आंखें बंद हो गईं। वो पहला स्पर्श – प्यार का, लेकिन सम्मान का। आरव ने पीछे हटकर कहा, “सॉरी अगर…”

 

प्रिया ने उसे रोका। “नहीं भैया। अच्छा लगा।”

 

दोनों मुस्कुराए। हाथ थामे घर की ओर चले। रिया दरवाजे पर खड़ी थी। “वाह! आखिरकार!”

 

प्रिया शर्मा गई। “रिया!”

 

आरव ने हंसकर कहा, “रिया, तू कुछ नहीं देखी।”

 

लेकिन रिया की आंखें चमक रही थीं। वो समझ गई थी।

 

शाम को विक्रांत का फोन आया। “प्रिया, कल मिलें? कुछ इम्पॉर्टेंट बात है।”

 

प्रिया ने कहा, “विक्रांत… कल देखते हैं।”

 

वो फोन काटकर आरव के पास गई। दोनों लाइब्रेरी में बैठे। आरव किताब पढ़ रहा था। प्रिया उसके बगल में। “भैया… विक्रांत मिलना चाहता है।”

 

आरव का चेहरा सख्त हो गया। लेकिन उसने खुद को कंट्रोल किया। “जा प्रिया। अगर तुझे अच्छा लगे तो। मैं तेरी खुशी चाहता हूं।”

 

प्रिया ने उसका हाथ पकड़ा। “भैया… मेरी खुशी तुम हो।”

 

आरव मुस्कुराया। “प्रिया… तूने मुझे जीत लिया।”

 

दोनों करीब आए। आरव ने प्रिया के हाथ चूमे। पहला रोमांटिक स्पर्श – धीमा, इमोशनल।

 

अगले दिन प्रिया विक्रांत से मिली। विक्रांत ने कहा, “प्रिया… मुझे तुझसे प्यार हो गया है। दोस्ती से ज्यादा।”

 

प्रिया चुप रही। “विक्रांत… तू बहुत अच्छा है। लेकिन मेरा दिल… कहीं और है।”

 

विक्रांत की आंखें नम हो गईं। “आरव?”

 

प्रिया ने सिर हिलाया। “हां। हमारा रिश्ता… कॉम्प्लिकेटेड है। लेकिन सच्चा।”

 

विक्रांत ने मुस्कुराकर कहा, “प्रिया, मैं खुश हूं कि तू खुश है। दोस्त हमेशा रहूंगा।”

 

प्रिया ने उसे गले लगाया – दोस्त की तरह। “थैंक्स विक्रांत। तू बेस्ट है।”

 

विक्रांत चला गया। प्रिया का मन हल्का हो गया।

 

घर लौटकर प्रिया ने आरव को बताया। आरव ने उसे गले लगाया। “प्रिया… तूने मुझे चुना?”

 

प्रिया ने कहा, “हमेशा भैया। तू मेरा पहला और आखिरी प्यार है।”

 

आरव ने उसे माथे पर फिर किस किया। “धीरे-धीरे प्रिया। सब ठीक हो जाएगा।”

 

लेकिन अवनी ने ये सब देख लिया। वो विक्रम को फोन की। “विक्रम, प्रिया और आरव साथ हैं। अब प्लान बी। फैमिली को बता दो। राजेश अंकल को कहो कि आरव और प्रिया का रिश्ता गलत है।”

 

विक्रम हंसा। “अच्छा। अब ठाकुर हाउस में तूफान आएगा।”

 

रात को राजेश पापा को एक अनाम लेटर मिला – “आपके बेटे और बेटी का रिश्ता नॉर्मल नहीं। सावधान।”

 

पापा चौंके। लेकिन कुछ बोले नहीं।

 

प्रिया और आरव बालकनी में थे। हाथ थामे। बर्फ गिर रही थी। आरव ने कहा, “प्रिया… चाहे दुनिया कुछ कहे, मैं तेरा हूं।”

 

प्रिया ने सिर उसके कंधे पर रखा। “और मैं तेरी।”

 

पहला स्पर्श, पहला वादा। प्यार अब खुल रहा था – धीरे, लेकिन मजबूती

से। लेकिन बाहर तूफान आने वाला था। फैमिली का, समाज का।

 

क्या वो साथ रह पाएंगे? या सब छिन जाएगा?

 

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