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Dil sabhal ja jara part – 19

पढ़ने का समय : 5 मिनट

Part – 19 Dulhan ki tyari or chhupa huaa khatra 

 

 

 

ठाकुर हाउस में शादी का दिन आ चुका था। मार्च की सुबह थी, हवा में हल्की ठंडक, लेकिन धूप खिली हुई थी। घर को दुल्हन की तरह सजाया गया था – लाल और गोल्डन फूलों की मालाएं, लाइट्स की चमक, और बाहर मंडप तैयार। मेहमानों की भीड़ थी, लेकिन सबकी नजरें दुल्हन पर थीं। प्रिया अपने कमरे में थी। कमरा फूलों से सजा था, आईने के सामने कुर्सी लगी थी। शिमला की बेस्ट पार्लर टीम आ चुकी थी – चार लड़कियां, मेकअप किट्स, हेयर स्टाइल टूल्स लेकर।

 

पार्लर की लीड आर्टिस्ट, नेहा, प्रिया के बाल संभाल रही थी। “मैम, आपके बाल तो सिल्क जैसे हैं। आज ओपन रखेंगे या बन?”

 

प्रिया मुस्कुराई। “बन। ट्रेडिशनल लुक।”

 

दूसरी लड़की, सोनिया, मेहंदी चेक कर रही थी। “वाह मैम, मेहंदी का कलर तो डार्क आया है। दूल्हा बहुत प्यार करते हैं।”

 

प्रिया शर्मा गई। “हां… बहुत।”

 

तीसरी आर्टिस्ट, रिया (नाम संयोग से), मेकअप शुरू कर रही थी। “मैम, आईलाइनर थिक रखें? आंखें बड़ी हैं आपकी, हाइलाइट होंगी।”

 

प्रिया ने हां कहा। चौथी लड़की ज्वेलरी सेट कर रही थी – मांगटीका, नथ, कान के झुमके।

 

कमरे में रिया (प्रिया की बेस्ट फ्रेंड) भी थी। वो एक्साइटेड। “प्रिया यार, आज तू दुल्हन बनेगी। आरव भैया… मतलब आरव… तो दूल्हा। मैं अभी भी बिलीव नहीं कर पा रही!”

 

प्रिया हंसी। “रिया, मैं भी कभी-कभी सपना लगता है।”

 

पार्लर वाली नेहा ने बालों में फूल लगाते हुए कहा, “मैम, आपकी स्टोरी तो फिल्म जैसी है। पहले भाई-बहन जैसे, अब शादी। लोग बातें कर रहे थे, लेकिन आज देखकर सब चुप हो जाएंगे। आप कितनी खूबसूरत जोड़ी लग रहे हो।”

 

प्रिया ने मुस्कुराकर कहा, “थैंक्स नेहा। प्यार होता है तो सब मुमकिन है।”

 

मेकअप चल रहा था। फाउंडेशन, ब्लश, लिपस्टिक – रेड, मैचिंग लहंगे से। लहंगा हैवी था – रेड वेलवेट, गोल्डन एम्ब्रॉयडरी, दुपट्टा लंबा। प्रिया आईने में खुद को देख रही थी। “लग रही हूं दुल्हन?”

 

सोनिया ने कहा, “मैम, परी जैसी। दूल्हा देखकर बेहोश हो जाएगा।”

 

सब हंस पड़े। रिया ने फोटोज लीं। “ये आरव को नहीं दिखाऊंगी। सरप्राइज रहेगा।”

 

तैयारियां पूरी होने में दो घंटे लगे। आखिर में दुपट्टा सेट किया गया। प्रिया खड़ी हुई। आईने में खुद को देखा। आंखें नम हो गईं। “मां… देख रही हो ना? आज तेरी बेटी दुल्हन बन रही है।”

 

रिया ने गले लगाया। “प्रिया… तू सबसे खूबसूरत दुल्हन है।”

 

दूसरी तरफ, आरव अपने कमरे में तैयार हो रहा था। शेरवानी – क्रिम कलर, गोल्डन बटन, मैचिंग पगड़ी। उसका बेस्ट फ्रेंड, विक्रांत (अब अच्छा दोस्त बन चुका था), मदद कर रहा था। “आरव यार, तू तो राजकुमार लग रहा है। प्रिया देखकर पिघल जाएगी।”

 

आरव मुस्कुराया। “विक्रांत, थैंक्स यार। तूने बहुत सपोर्ट किया।”

 

विक्रांत ने पगड़ी सेट की। “यार, तुम्हारी स्टोरी इंस्पायरिंग है। मैं खुश हूं तुम दोनों के लिए।”

 

आरव तैयार हो गया। आईने में खुद को देखा। “आज प्रिया मेरी हो जाएगी। हमेशा के लिए।”

 

तभी उसका फोन बजा। अनजान नंबर। आरव ने रिसीव किया। “हैलो?”

 

दूसरी तरफ से भारी, विकृत आवाज आई। “आरव ठाकुर? बधाई हो शादी की। लेकिन आज का दिन तुम्हारा आखिरी खुशी का दिन होगा। प्रिया को कुछ नहीं होगा, लेकिन तू… तुझे सजा मिलेगी। पुरानी साजिशों की।”

 

आरव चौंका। “कौन बोल रहा है?”

 

आवाज हंसी। “विक्रम नहीं। कोई और। जो सालों से इंतजार कर रहा था। ठाकुर और राठौर की दुश्मनी… वो अभी खत्म नहीं हुई। आज मंडप में देखना।”

 

फोन कट गया। आरव का चेहरा सफेद पड़ गया। विक्रांत ने पूछा, “क्या हुआ यार?”

 

आरव ने कहा, “कुछ नहीं। गलत नंबर।”

 

लेकिन अंदर से डर गया। वो पापा के पास गया। “पापा… सिक्योरिटी चेक करो। कुछ अनजान कॉल आया।”

 

पापा ने कहा, “बेटा, चिंता मत कर। सब ठीक होगा।”

 

लेकिन आरव का मन बैचेन था।

 

नीचे मंडप में मेहमान इकट्ठे हो रहे थे। कुछ ताने फिर शुरू। एक अंकल ने दूसरे से कहा, “देखो, भाई-बहन जैसे थे, अब शादी। पैसों का खेल है।”

 

लेकिन ज्यादातर मेहमान खुश थे। रिया ने म्यूजिक शुरू करवाया।

 

प्रिया तैयार हो चुकी थी। दुल्हन बनकर नीचे आने वाली थी। रिया ने कहा, “प्रिया… तैयार? दूल्हा इंतजार कर रहा है।”

 

प्रिया ने आईने में आखिरी बार देखा। “हां रिया। तैयार हूं।”

 

बारात आने वाली थी – नहीं, घर में ही शादी थी। आरव नीचे मंडप में जाएगा। प्रिया को दुल्हन बनकर लाया जाएगा।

 

आरव मंडप में खड़ा था। घोड़ी पर नहीं, लेकिन दूल्हा बनकर। मन बैचेन। वो कॉल… कौन था? विक्रम तो जेल में था। कोई और?

 

प्रिया ऊपर से नीचे आ रही थी। दुपट्टा सिर पर, लड़कियां सहारा दे रही थीं। सबकी नजरें उस पर। “वाह… कितनी खूबसूरत।”

 

आरव ने देखा। उसकी सांस रुक गई। प्रिया… उसकी दुल्हन।

 

प्रिया मंडप में आई। आरव के पास बैठी। पंडित जी मंत्र पढ़ने लगे।

 

लेकिन आरव का फोन वाइब्रेट कर रहा था। अनजान मैसेज – “अब देखो।”

 

आरव ने चारों तरफ देखा। मेहमानों में कोई अनजान चेहरा? सिक्योरिटी थी, लेकिन…

 

फेरे शुरू हुए। प्रिया और आरव हाथ थामे घूम रहे थे। प्रिया मुस्कुरा रही थी। आरव भी, लेकिन अंदर डर।

 

आखिरी फेरे में अचानक लाइट्स चली गईं। अंधेरा। चीखें।

 

लाइट्स आईं। मंडप में एक लिफाफा पड़ा था। आरव ने उठाया। अंदर फोटो – प्रिया की पुरानी, आश्रम की। और चिट – “ये शादी नहीं होगी। प्रिया को ले जाऊंगा।”

 

आरव चौंका। प्रिया ने देखा। “आरव… क्या है?”

 

आरव ने कहा, “कुछ नहीं प्रिया।”

 

लेकिन उसकी आंखें डर गईं। कौन था वो? विक्रम? या कोई नया दुश्मन?

 

शादी जारी थी। सिंदूर डाला गया। मंगलसूत्र पहनाया गया। सब तालियां बजा रहे थे।

 

लेकिन आरव का मन बैचेन। वो कॉल… वो लिफाफा… खतरा अभी बाकी था।

 

शादी पूरी हुई। प्रिया और आरव पति-पत्नी बन गए। 

 

रात को विदाई के समय प्रिया रो रही थी। आरव ने गले लगाया। “प्रिया… 

 

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