न्यायालय में दोनों पक्षों को
सच पता होता है
असल में तो जज कटघरे में होता है।
(बात बहुत गहरी है… 🥹)
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
दिल से दिल तक पहुंचने वाली एहसास कहानी बनती है।
न्यायालय में दोनों पक्षों को
सच पता होता है
असल में तो जज कटघरे में होता है।
(बात बहुत गहरी है… 🥹)
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

रोशन है ऐ चांद तुमसे धरती का कोना- कोना,
एक चांद मेरे पास भी है जिससे
रोशन है मेरी जिंदगी का अंधियारा,
ऐ चांद तुम पर बंदिशें है बादलों,
बारिशों और आसमान में छाए धुंध की,
मेरा चांद है मेरे पास मेरे हर लम्हें ,
मेरे हर वजूद की परछाई में ,
मैं तुम्हें देखूं जो बादलों से
आ़खंमिचौली करता है,
या उसे जो मेरे साथ मेरे हाथों
में डालें हाथ एकटक तुम्हें निहारता है,
वो प्रमाण है मेरी जिंदगी की
हर उधेड़बुन का,
तुम्हीं बताओ अब उसे कैसे
ना देखूं मैं तुमसे पहले ,
तुम पर हक कविता शायरी
करने का हक सबको मिला है ,
मेरा चांद मेरे दिल का चैन
उसने अपने सारे हक़ मेरे नाम किये,
वो सिर्फ मेरा है ,
मेरे इस दिल ,जज़्बात ,ज़िन्दगी ,पर
हक़ सिर्फ उसका है …!!

NSW उभरते लेखक – 🥈
लेखक नहीं हूं फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं ,

पढ़ने का समय : 2 मिनट
जॉन एक युवा शेफ था जो न्यूयॉर्क शहर में रहता था। उसका सपना था कि वह दुनिया के विभिन्न हिस्सों के व्यंजनों को सीखकर अपने रेस्तरां में पेश करे। एक दिन, उसने यूरोप की यात्रा करने का निर्णय लिया ताकि वहाँ के पारंपरिक व्यंजनों का अध्ययन कर सके।
पहला पड़ाव इटली था, जहाँ उसने पिज़्ज़ा और पास्ता के विभिन्न प्रकारों को बनाना सीखा। नेपल्स में, उसने असली नेपोलिटन पिज़्ज़ा के रहस्यों को जाना, जबकि बोलोग्ना में उसने टैग्लिएटेल अल रागू की विधि सीखी।
इसके बाद, वह फ्रांस गया, जहाँ उसने पेस्ट्री और बेकिंग की कला में महारत हासिल की। पेरिस में, उसने क्रोइसेंट और बैगेट बनाना सीखा, जबकि लियोन में उसने कोक औ विन और बुफ़ बौर्गिन्योन जैसे पारंपरिक व्यंजनों का ज्ञान प्राप्त किया।
स्पेन में, जॉन ने तपस और पेला की विविधताओं का अध्ययन किया। बार्सिलोना में, उसने पेला वेलेंसियाना बनाना सीखा, जबकि मैड्रिड में उसने विभिन्न तपस व्यंजनों का स्वाद लिया और उनकी तैयारी की विधियाँ सीखीं।
यूरोप की इस यात्रा ने जॉन के ज्ञान को समृद्ध किया और उसे पाश्चात्य व्यंजनों की गहराई और विविधता का अनुभव कराया। अपने देश लौटकर, उसने अपने रेस्तरां में इन सभी व्यंजनों को शामिल किया, जिससे उसके ग्राहकों को विभिन्न पाश्चात्य स्वादों का आनंद मिला।
इस प्रकार, जॉन की यह यात्रा न केवल उसके व्यक्तिगत विकास का साधन बनी, बल्कि उसने अपने समुदाय को भी पाश्चात्य व्यंजनों की समृद्ध विरासत से परिचित कराया।

NSW अनुभवी लेखक -🥇

पढ़ने का समय : 2 मिनट
तकरीबन सवा साल बीत गया था उसे गए हुए,
कल अचानक उसका एक मैसेज आया
सिर्फ एक शब्द लिखा था,
“सुनो…”
मैंने फोन हाथ में लिया, पर उंगलियाँ कांप रही थीं,
दिल ने कहा सब कह डालो जो इन महीनों में सहा है,
दिमाग ने कहा खामोश रहो, उसने तुम्हें कब का भुला दिया है।
मैंने टाइप करना शुरू किया
“पता है? तुम्हारे जाने के बाद मैंने हंसना छोड़ दिया है,” (फिर मिटा दिया…) फिर लिखा
“आज भी रात को जब नींद खुलती है, तो फोन में तुम्हारा नाम ढूंढते है,” (फिर मिटा दिया…)
आखिर में मैंने सिर्फ इतना लिखा “कहो, कैसे हो?” उसका जवाब आया
“बस यूं ही याद आ गई थी, लगा तुम बदल गए होगे।” मैंने मन ही मन मुस्कुराया,
अंदर एक टीस उठी और आंखों के कोर भीग गए।
बदल तो वो लोग जाते हैं जिनके पास कोई और होता है,
हम जैसे लोग तो बस एक ही याद के सहारे पूरी उम्र गुज़ार देते हैं।
तभी स्क्रीन पर ‘Typing…’ दिखा और फिर गायब हो गया,
शायद उसे भी एहसास हो गया था…
कि कुछ सवाल पूछने के लिए अब बहुत देर हो चुकी है।
उस दिन फिर समझ आया
कुछ लोग हाल पूछने नहीं,
सिर्फ ये तसल्ली करने आते हैं,
कि तुम आज भी उनकी यादों की कैद में हो या रिहा हो गए!💔💔💔

NSW नया लेखक -🥉

पढ़ने का समय : 12 मिनट
एक गाँव में सुहानी नाम की एक लड़की अपने पिता उदय और सौतेली माँ मधु के साथ रहती थी , सुहानी की एक सौतेली बहन भी निशा भी थी , सुहानी की माँ अपनी बेटी को बहुत प्यार करती थी , लेकिन वह सुहानी से नफरत करती थी और दिन भर घर के काम में लगा कर रखती थी , और उसे ठीक से खाना भी नहीं देती थी।
एक दिन मधु सुहानी को लेकर जंगल जाती है , और लकड़ी काटने लगती है , मधु के दिमाग में सुहानी को लेकर कुछ षडयंत्र चल रहा था।
मधु सुहानी से बोली ,” मुझे बहुत प्यास लगी है , जरा पानी ले आओ “!
सुहानी पानी लेने के लिए नदी के पास जाती है ,तो मधु भी दबे पाव सुहानी के पीछे चली जाती है।
सुहानी बहुत ही मासूम थी , उसे पानी से डर लगता था , पर क्योंकि उसकी मां को प्यास लगी थी , इसलिए वह डर डर के नदी के पास चली गई।
अभी सुहानी पानी भरने के लिए झुकी ही थी कि मधु ने उसे नदी में धक्का दे दिया।
सुहानी जैसे ही पानी में गिरी खुद को बचाने की कोशिश करने लगी पर क्योंकि उसे तैरना नहीं आता था इसलिए वह नदी के किनारे नहीं आ पाई।
सुहानी चीखते हुए बोली ,” मां प्लीज मुझे बचा लो “!
पर मधु पर कोई असर नहीं पड़ा और वह नफरत से हंसते हुए बोली , ” तुझे बचा लूं , ताकि मेरी बेटी के हिस्से की खुशी तू खा जाए ,तेरे रहते मेरी बेटी का रिश्ता नहीं हो पाएगा , भगवान ने अक्ल तुझे भला ही कम दी है पर शक्ल बहुत अच्छी दी है , इसलिए जब तक तू जिंदा मेरी बेटी को दुनिया की सबसे अच्छी चीज नहीं मिलेगी “!
सुहानी रोते हुए बोली ,” प्लीज मां बचा लो , मैं बेटी हूं आपकी “!
मधु वह से जाते हुए बोली ,” तू बेटी नहीं है मेरी , सौतेली बेटी है “!
सुहानी पानी में डूबती रही पर मधु वहां से जा चुकी थी।
कुछ देर बाद जब सुहानी को होश आता है तो वह एक अलग ही दुनिया में होती है, जो बहुत खूबसूरत थी।
सुहानी धीरे से अपनी आंखे खोलती है और इधर उधर देखती है तो उसे ही तरफ सुंदर पद पौधे फूल दिख रहे थे, ये सब देखकर एक पल के लिए वह बहुत खुश होती है ,और इधर उधर घूमते-घूमते थक जाती है तो पेड़ के नीचे बैठ जाती है।
सुहानी घबराते हुए बोली ,” यह मैं कहां आ गई ,यह कौन सा गांव है “? तभी उसकी नजर एक हवेली पर पड़ती है , सुहानी वह से उठकर उस हवेली का दरवाजा खोलती है ,तो उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती है।
सुहानी को वहाँ एक खूबसूरत सी औरत दिखती है जो बड़ी सी कुर्सी में बैठी हुई थी।
वह औरत मुस्कराकर बोली ,” तुम कौन हो ? और यहां कैसे आई “?
सुहानी घबराते हुए बोली ,” मैं सुहानी हूं , और रामपुर गांव में रहती हूं ,और मैं नदी में गिर गई और यहां आ गई “!
सुहानी की बात सुनकर वह औरत सोच में पड़ जाती है ,कि आखिर एक इंसान उनके जललोक में कैसे आई ?
वह औरत अपनी आंखे बंद करती है और उसे सब सच पता चल जाता है।
सुहानी बोली ,” आप कौन है और मैं कौन से गांव में हूं “?
वह औरत मुस्कराकर उसके पास जाकर उसका सिर सहलाकर बोली ,” मैं उर्वशी हूं इस जल लोक की रानी पारी और तुम नदी में गिर गई इसलिए हमारे लोक आ गई हो “!
उर्वशी की बात सुनकर सुहानी घबरा गई , और डरते हुए पीछे होने लगी ।
उर्वशी सुहानी का हाथ पकड़कर बोली ,” घबराओ मत बेटा ,मैं तुम्हे कुछ नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी ,मुझे मालूम है तुम्हारी मां ने तुम्हे मारने की कोशिश की “!
उर्वशी की बात सुनकर सुहानी की आंखे भर आई और वह रोने लगी और उर्वशी को गले लगा लिया।
सुहानी के उर्वशी को गले लगाते ही उर्वशी को एक अलग सा एहसास हुआ जो वो समझ नहीं पा रही थी।
उर्वशी ने सुहानी को खाना खिलाया और फिर अपने साथ सुला दिया।
सुहानी को सोता देख उर्वशी सोचने लगी , कि आखिर एक साधारण लड़की उनके लोक में कैसे आई ? और आखिर क्यों यह अपनी सी लग रही है ।
अब ऐसे ही कुछ दिन निकल गए और सुहानी जल लोक में ही रहने लगी ,और उर्वशी और सुहानी के बीच एक अलग ही रिश्ता बन गया , सुहानी उर्वशी को परी मां कहने लगी।
एक दिन पारियों की बैठक में उर्वशी की दुश्मन शकीरा परी ने भरी सभा में शिकायत की कि उर्वशी ने इंसानों के साथ हाथ मिला लिया है ,जिससे उनके लोक को खतरा है तभी तो इंसानों के जासूस को अपनी बेटी बनाकर रखा है।
शकीरा की बात सुनकर उर्वशी गुस्से से बोली ,” शकीरा सब तुम्हारी तरह स्वार्थी नहीं होते, और यह मासूम सी बच्ची तो खुद अपनो की ठुकराई हुई है किसी को क्या धोखा देगी “!
शकीरा मुस्कराकर बोली ,” रानी परी आप भी तो सब छोड़कर इंसानी दुनिया चली गई थी , तो फिर है आप पर कैसे भरोसा करे “!
शकीरा की बार सुनकर उर्वशी चुप हो गई ,उर्वशी को चुप होता देखकर शकीरा का हौसला बढ़ गया।
शकीरा बोली ,” देखिए रानी परी या तो आप इस लड़की को मार दीजिए या इसकी दुनिया वापिस भेज दीजिए “!
रात के समय सुहानी खिड़की में बैठी कुछ सोच रही थी , और उसकी आँखें नम थी।
सुहानी को उदास देख उर्वशी उसके पास जाकर बोली ,” क्या हुआ सुहानी इतनी उदास क्यों हो ? घर की याद आ रही है “?
सुहानी नम आंखों से उर्वशी को गले लगा लेती है। और रोते हुए बोली ,” आखिर क्यों मेरी मां मुझे छोड़कर चली गई ? छोटी मां सही कहती थी मैं मनहूस हूं तभी उन्होंने मुझे नदी में फेंक दिया फिर भी मैं बच गई ,और यहां आकर आपके लिए भी मुसीबत बन गई “!
उर्वशी सुहानी का सिर सहलाते हुए बोली ,” परेशान मत हो , मैं अब संभाल लूंगी , और शकीरा तो हमेशा मेरे खिलाफ षडयंत्र रचती रहती है , चिंता मत करो मैं अब देख लूंगी “!
सुहानी बोली ,” मैं अपनी दुनिया में वापिस जाना चाहती हूं “!
उर्वशी बोली ,” यह क्या बोल रही हो ? उस दुनिया में तुम्हारी मां तुम्हारी जान की दुश्मन है , और तुम्हारे पिता भी हमेशा काम से बाहर रहते है , तो ऐसे में हमेशा तुम्हारी जान को खतरा रहेगा “!
सुहानी बोली ,” परी मां आप चिंता मत करो , मां को अपनी गलती का एहसास हो गया होगा और वो भी मुझे याद करती होगी , इसलिए मैं अपने गांव जाना चाहती हूं”!
उर्वशी परेशान होते हुए बोली ,” सुहानी जल लोक में है किसी को भी उसकी मर्जी के खिलाफ नहीं रख सकते , अगर तुम जाना चाहती हो तो जाओ ,पर यह अंगूठी हमेशा अपने पास रखना “!
सुहानी अंगूठी देखते हुए बोली ,” परी मां यह क्या है “?
उर्वशी सुहानी की उंगली में अंगूठी पहनाते हुए बोली ,” यह जादुई अंगूठी है , अगर तुम किसी मुसीबत में हो और जैसे ही इसे अपने होंठों से चूमकर मुझे याद करोगी , मैं आ जाऊंगी “!
सुहानी उर्वशी को गले लगाकर अपने मन में सोचने लगी ,” मैं आपको किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहती इसलिए यहां से जा रही हूं ,पर आपसे मुझे मां का प्यार मिला है , मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगी कि अगले जन्म में आप मेरी मां बने “!
सुहानी यह सब मन में बोल रही थी, पर उर्वशी सुहानी के मन की बात सुन पा रही थी , उर्वशी की आंखे भी नम हो जाती है।
कुछ देर बाद सुहानी नदी के किनारे खड़ी थी, सुहानी एक नजर नदी की ओर देखती है और फिर अपने घर चली जाती है।
सुहानी जैसे ही अपने घर जाती है ,तो उसकी मां की नजर उस पर पड़ती है ,और वह बोली ,” यह क्या मैं सपना देख रही हूं , यह तो मर गई थी ,तो फिर यहां कैसे आई “?
मधु गुस्से से सुहानी का हाथ पकड़कर बोली ,” यहां क्या कर रही है “?
सुहानी रोते हुए बोली ,” मां मै घर लौट आई”!
मधु बोली ,” निकल जा यहां से ,अब क्या लेने आई है कुलटा “!
सुहानी रोते हुए बोली ,”मां आप यह क्या कह रही है “?
अभी सुहानी रो ही रही थी तभी उदय आ गया , उदय को देख कर मधु रोते हुए बोली ,” देखिए जी आपकी यह बेटी हमारी नाक कटा के चली गई थी , जैसे तैसे हमने निशा की शादी की और अब यह लौट आई ताकि हमारी पूरे गांव में थू थू हो “!
सुहानी अपने पिता के पास जाकर बोली ,” नहीं पिता जी , ऐसा कुछ नहीं है ,मैने कुछ भी किया “!
सुहानी के पिता गुस्से से उसके गाल में एक थप्पड़ मारकर बोले ,” झूठ मत बोलो , तुम भी अपनी मां की तरह धोखेबाज निकली ,मेरी इज्जत उछाल कर भाग गई “!
सुहानी बोली ,” नहीं पिता जी, मैं कहीं नहीं भागी , मां ने मुझे नदी में फेंक दिया था”!
सुहानी की बात सुनकर मधु सुहानी के बाल पकड़कर खींचते हुए घर के बाहर फेंक देती है और बोली ,” झूठ मत बोल , तू ही अपने किसी यार के साथ भाग गई ,जैसे तेरी मां तुझे पैदा करते ही अपने यार के साथ भाग गई ,तुझे इतनी शर्म नहीं की मैने अपनी बेटी की तरह थे पाला और तू यह इल्जाम लगा रही है मुझपर “!
सुहानी रोते हुए बोली ,” छोटी मां झूठ मत बोलो ,जब जम जंगल लकड़ी लेने गए थे ,आपने ही मुझसे पानी मंगाया और जब मैं नदी में पानी लेने गई तो आपने धक्का दे दिया “!
मधु सुहानी की बात सुनकर घबरा गई, और अपना झूठ छुपाने के लिए रोते हुए उदय के पास गई और बोली ,” यह झूठ बोल रही है ,आप तो जानते है इसी तैरना नहीं आता ,और अगर मैने इसे नदी में फेंका, तो यह बच कैसे गई “!
सुहानी रोते हुए बोली ,” मुझे भी पता पर मैं बच गई ,और जल लोक में चली गई, और वहां परी मां के साथ रहने लगी “!
सुहानी की बात सुनकर मधु उदय की ओर देखकर बोली ,” देखा यह खुद को बचाने के लिए कैसे झूठी कहानी बना रही है “!
उदय मधु की बात में यकीन कर लेता है , और गुस्से से बोला ,” सुहानी झूठ मत बोलो “!
पिता जी मैं झूठ नहीं बोल रही हूं। सुहानी ने रोते हुए कहा।
मधु बोली ,” अच्छा झूठ नहीं बोल रही हो ,तो सबूत दो की तुम पानी में पारियों की दुनिया में चली गई थी ,और परी के साथ रह रही थी ,अरे तुम एक काम करो उस परी को ही क्यों। नहीं बुला लेती “! यह शब्द मधु ने हंसते हुए बोले।
मधु की बात से सुहानी को उर्वशी का ख्याल आया ,और उसने अपने हाथ में पहनी अंगूठी को चूमकर उर्वशी को याद किया।
कुछ ही पल में एक तेज रोशनी उत्पन्न हुई जिससे सभी की आंखे बंद हो गई, जब सुहानी ने आंखे खोली , तो उसके सामने उर्वशी थी।
मधु और उदय ने जैसे ही आंखे खोली , उनकी आंखे उर्वशी को देखकर फटी की फटी रह गई।
सुहानी उर्वशी को गले लगाते हुए बोली ,” परी मां आप आ गई “!
उर्वशी की नजरे मधु और उदय में टिकी हुई थी, और वह सुहानी का सिर सहला रही थी।
सुहानी रोते हुए बोली ,” परी मां , छोटी मां कह रही है कि मैं भाग गई थी किसी के साथ , आप बताइए ना मैं आपके साथ थी, इन्हें लग रहा है मैं अपनी मां की तरह भाग गई थी “!
उर्वशी हैरानी से बोली ,” मां , क्या तुम्हारी मां जिंदा है “?
उदय बोला ,” हां जिंदा है इसकी मां , और इसके सामने खड़ी है “!
उदय की बात सुनकर उर्वशी और सुहानी एक दूसरे को देखने लगे “!
उदय बोला ,” हां सुहानी यही है तुम्हारी मां उर्वशी, जो तुम्हे जन्म देते ही कहीं चली गई ,और सालों ढूंढा मैने इसे पर यह कहीं नहीं मिली, और आज मुझे पता चल रहा है यह एक परी है “!
उर्वशी नम आंखों से बोली ,” मुझे माफ कर दो उदय , मैं क्या करती , मैं जल लोक से बाहर की दुनिया देखने आई , और मेरी मुलाकात तुमसे हुई , और मुझे तुमसे प्यार हो गया , पर जब मैने तुमसे शादी की और मेरी बेटी का जन्म हुआ , तो मेरे पिता जी की हमारे दुश्मनों ने हत्या कर दी , और मुझे जल लोक को बचाने के लिए अपनी दुनिया में लौटना पड़ा , अगर मेरे दुश्मनों को मेरी बेटी का पता चलता तो उसकी जान को खतरा था इसलिए मैं वापिस लौट गई “!
सच जानकर उदय और सुहानी की आंखे नम हो गई।
सुहानी उर्वशी को गले लगाते हुए बोली ,” परी मां आप मेरी मां है”!
उर्वशी सुहानी का माथा चूमती है और फिर उसके गालों को एक एक कर चूमकर अपनी ममता लुटाते हुए बोली ,” हां मैं हूं तुम्हारी मां , जिस दिन तुम जल लोक में आई , मैं उसी दिन सोच में पड़ गई थी कि आखिर एक साधारण इंसान जल लोक में कैसे आ सकता है ,काश मैने पहले सच जानने की कोशिश की होती “!
उदय ने मधु को एक झन्नाटेदार थप्पड़ मारकर कहा ,” तुमने मेरी बेटी की जान लेने की कोशिश की निकल जाओ यहां से “!
मधु ने बहुत मन्नते की पर उदय ने उसकी एक ना सुनी और मधु को घर से बाहर निकाल दिया।
उदय ने अपने अविश्वास के लिए उर्वशी और सुहानी से माफी मांगी।
उर्वशी ने भी उदय से माफी मांगी , और उदय से इजाजत लेकर उर्वशी सुहानी को लेकर अपने जल लोक लौट गई ,और उसे परी की सारी शक्तियां दे दी, और जल लोक की राजकुमारी बना दिया।
इस तरह एक मासूम सी लड़की इतनी तकलीफें झेलने के बाद अपनी मां से मिल गई , और राजकुमारी बनकर जल लोक की परी बन गई ।
Mysterious Chand

NSW नया लेखक -🥉

पढ़ने का समय : 8 मिनट
एक छोटे से गाँव में, जिसका नाम था नेहरूवाला, एक साधारण सा वैद्य था, जिसका नाम था रामू। उसे अपनी दवाइयों और औषधियों के लिए जाना जाता था। रामू का काम गाँव वालों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, लेकिन उसकी दवाओं में एक खास बात थी। गाँव वाले कहते थे कि उसकी कुछ दवाएँ जादू में बदल सकती हैं। रामू खुद इस बात से अनजान था, लेकिन वह हमेशा अपने काम में लगे रहता था।
एक दिन, गाँव में एक नई महिला आई, जिसका नाम था सुमन। सुमन की आँखों में एक अलग सी चमक थी। उसने रामू के पास आकर कहा, “मुझे तुम्हारी दवा की जरूरत है। मेरे बेटे को तेज बुखार है, और कोई और दवा काम नहीं कर रही।” रामू ने तुरंत एक जड़ी-बूटी निकाली और उसे तैयार किया। उसने सुमन को बताया कि यह दवा केवल तभी प्रभावी होगी जब इसे दिल से बनाया जाएगा।
सुमन ने विश्वास के साथ दवा का सेवन किया। रामू ने देखा कि जैसे ही सुमन ने दवा ली, उसके चेहरे पर एक हल्का सा उत्साह आ गया। बीमार बेटा तुरंत स्वस्थ हो गया, और यह देखकर सुमन की आँखों में आंसू आ गए। वह रामू का धन्यवाद करते हुए बोली, “आपकी दवा एक जादू है! मुझे यकीन है कि यह अन्य समस्याओं के लिए भी काम करेगी।”
गाँव में इस घटना की चर्चा होने लगी। लोग रामू के पास और अधिक समस्याएँ लेकर आने लगे। एक सप्ताह के भीतर, रामू ने महसूस किया कि उसकी दवाएँ सचमुच जादू में बदल रही थीं। कई लोग उसे अपनी आशा का अंतिम द्वार मानने लगे थे। लेकिन रामू ने सोचा कि यह सब बस संयोग है।
फिर एक दिन, एक वृद्ध व्यक्ति, जिसका नाम था हरिदास, रामू के पास आया। वह बेहद परेशान था। “मेरी बहु बीमार है,” उसने कहा। “कोई भी दवा काम नहीं कर रही।” रामू ने फिर से एक जड़ी-बूटी तैयार की, और हरिदास ने उसे अपनी बहु को दिया। चमत्कार हुआ! बहु ठीक हो गई और हरिदास के चेहरे पर खुशी आ गई। लेकिन इस बार, रामू ने असामान्य महसूस किया। उसे लगा कि उसकी दवा में कुछ और है जो उसे नहीं पता।
रामू की यह जिज्ञासा उसे और भी परेशान करने लगी, और वह चुपचाप अपनी दवाओं के पीछे के रहस्यमयी तत्वों का पता लगाने लगा। उसने कई पुरानी किताबें पढ़ीं, जिनमें जड़ी-बूटियों और औषधियों के बारे में ज्ञान था। धीरे-धीरे, उसे पता चला कि एक बहुत पुरानी जड़ी-बूटी, जिसका नाम ‘अमृतिका’ था, उसकी दवाओं में विशेष प्रभाव डालती थी। यह जड़ी-बूटी केवल एक ही जगह पाई जाती थी – एक प्राचीन जंगल में, जहाँ जाना असंभव था।
एक रात, रामू ने तय किया कि वह उस जड़ी-बूटी की खोज में निकलेगा। वह जंगल की ओर बढ़ा, जहाँ उसे अंधेरे, जंगली पौधों और अजीब जीवों का सामना करना पड़ा। लेकिन रामू का इरादा मजबूत था। उसने सोचा, “यदि मैं इस जड़ी-बूटी को पा लूँ, तो मैं और भी लोगों की मदद कर सकूँगा।”
रामू ने अद्भुत और डरावना जंगल पार करने की ठानी। पहले तो उसे रास्ता ढूँढने में दिक्कत हुई, लेकिन उसकी दृढ़ता ने उसे आगे बढ़ने का साहस दिया। जंगल में अद्भुत पेड़ और पौधे थे, जो उसे कभी-कभी मंत्रमुग्ध कर देते थे। अचानक, उसे एक चमकदार फूल दिखाई दिया,
रामू ने जब जंगल में कदम रखा, तो उसके मन में एक अद्भुत मिश्रण था—उत्सुकता और भय। जंगल की गहराई में कदम रखते ही, उसके चारों ओर का वातावरण बदलने लगा। पेड़ों की ऊँचाई आसमान को छू रही थी और इनकी शाखाएँ एक-दूसरे से मिलकर एक ऐसी छत बना रही थीं, जिससे सूर्य की किरणें मुश्किल से नीचे पहुँच पा रही थीं। उसके कदमों की आवाज़ घनघोर सन्नाटे में फँस गई थी, और बस चिड़ियों की चहचहट और पत्तों की सरसराहट सुनाई दे रही थी।
जंगल में चलते हुए, रामू ने पहचाना कि यह जगह उसके लिए केवल एक चुनौती नहीं थी, बल्कि यह किसी अद्भुत दुनिया की ओर संकेत कर रही थी। उसके चारों ओर चढ़ते हुए मजबूत लताएँ, रंग-बिरंगे फूल, और अजीबोगरीब जानवर उसे लगातार आकर्षित कर रहे थे। उसने पहले से सोचा था कि जंगल में ढृढ़ता और साहस की आवश्यकता होगी, परंतु उसे यह भी महसूस होने लगा कि यहाँ की सुंदरता और अनोखापन भी उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा था।
जब वह आगे बढ़ा, तो उसकी नज़र एक चमकदार फूल पर पड़ी। यह फूल अद्वितीय था—इसके पंखुड़ियाँ नीली और सुनहरी चमक से भरी हुई थीं, मानो वह सूरज की किरणों का प्रतिबिम्ब हो। रामू ने सोच लिया कि इसे निकटता से देखना अनिवार्य है। उसने धीरे-धीरे उसके पास जाकर उसे देखने की कोशिश की। फूल की महक इतनी आकर्षक थी कि वह उसे खींच ले गई।
जैसे ही रामू ने उस फूल के पास पहुँचकर उसे छुआ, वह एक अद्भुत अनुभव का सामना किया। उसके चारों ओर हल्की चमक फैल गई, और फूल से एक मधुर धुन निकलने लगी। यह सच में कोई साधारण फूल नहीं था, बल्कि यह जंगल का एक रहस्यमय अभेद्य गहना प्रतीत हो रहा था। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। क्या यह कोई जादुई फूल है?
फूल के पास खड़े-खड़े, रामू ने अपने मन में अनेक विचार आने लगे। क्या इसका मतलब यह है कि इसे किसी प्रकार की मिठास या शक्ति प्राप्त है? या फिर यह एक हानिकारक जादू का हिस्सा है? लेकिन उसकी जिज्ञासा ने उसे पीछे हटने नहीं दिया। उसने अपने चारों ओर देखा और महसूस किया कि जिंदगी में कुछ खास अनुभवों के लिए आपको थोड़ी जोखिम उठानी पड़ती है।
अचानक, फूल से फैल रही रोशनी ने एक छोटी सी दरवाज़े की आकृति बनानी शुरू कर दी। रामू के मन में सवाल उठने लगा—क्या उसे उस दरवाज़े के पार जाना चाहिए? उसके अंदर साहस और डर का एक अद्भुत मिश्रण था। उसने ठान लिया कि उसे इसका पता लगाना होगा। अपनी हिम्मत जुटाकर, रामू ने दरवाजे की ओर कदम बढ़ाया।
जैसे ही वह दरवाजे के पार पहुँचा, उसे एक नई दुनिया में प्रवेश करते हुए महसूस हुआ। यहाँ की प्रकृति और भी अधिक अद्भुत थी। पेड़ और पौधे हर तरह की सुंदरता में लिपटे हुए थे। हवा में एक मीठी महक थी और पक्षियों का गाना इतना मधुर था कि वह मंत्रमुग्ध हो गया। यह स्थान किसी जादुई संसार से कम नहीं था।
जैसे ही रामू उस जादुई दुनिया में कमीज़ होकर आगे बढ़ा, उसने देखा कि चारों ओर रंग-बिरंगे फूल, अनोखे पेड़ और कई प्रकार के जीव-जंतु मौजूद थे। लेकिन यहां का असली रहस्य एक मीठी महक में छुपा था, जो उसे हर कदम पर आकर्षित कर रही थी। उसने ध्यान से सुना और उसे पता चला कि यहां के जीव-जंतु आपस में किसी महत्वपूर्ण दवा के बारे में बात कर रहे थे।
रामू ने नज़दीक जाकर सुना कि वे एक जादुई दवा के बारे में चर्चा कर रहे थे, जो केवल इस जंगल में मिलती थी। यह दवा gezondheidsproblemen में मददगार थी और प्राकृतिक रूप से ऊर्जा प्रदान करती थी। उसने यह भी सुना कि इस दवा को बनाने के लिए एक विशेष पौधे की आवश्यकता होती है, जिसे “जीवनफूल” कहा जाता है। यह फूल केवल चाँद की रौशनी में खिलता है और इसे प्राप्त करना आसान नहीं होता।
रामू की आँखों में चमक आ गई। यदि वह इस जादुई दवा को खोज ले, तो न केवल वह अपने गाँव के लोगों की मदद कर सकेगा बल्कि इस अनुभव को भी अपने जीवन का लक्ष्य बना सकेगा। उसने निर्णय लिया कि वह “जीवनफूल” की खोज में निकलेगा। लेकिन वह जानता था कि यह असामान्य चुनौती केवल साहस से ही दूर की जा सकती थी।
जंगल की गहरी गुफाओं में पहुँचते ही रामू ने अपने रास्ते में कई कठिनाइयों का सामना किया। उसे विशाल पेड़ों के नीचे से गुजरना पड़ा, जहां विलक्षण जीव-जंतु उसे घूर रहे थे। लेकिन रामू ने हिम्मत नहीं हारी। वह हमेशा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहा। उसके हृदय में एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा था, जो उसे हर कदम पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही थी।
आखिरकार, चाँद की रोशनी में जब पूरी वनवासी दुनिया चाँद की सुनहरी रोशनी में नहाने लगी, तभी रामू ने दूर एक चमकदार फूल देखा। यह वही “जीवनफूल” था, जो उसने सुना था। वह खुशी से झूम उठा, लेकिन उसे अपने दिल की धड़कन को नियंत्रित करना था। उसने धीरे-धीरे उस फूल के पास जाकर उसे देखा। इसकी पंखुड़ियाँ चाँदनी की रोशनी में चमक रही थीं, और इसकी खुशबू मंत्रमुग्ध कर देने वाली थी।
रामू ने धीरे-धीरे फूल को हाथ में लिया और उसकी पंखुड़ियाँ छू कर महसूस किया। उसे एहसास हुआ कि यह फूल न केवल उसकी खोज का वांछित फल था, बल्कि यह उस साहस और धैर्य का प्रतीक भी था, जो उसे जंगल में आगे बढ़ने के लिए मिला था।
उसने फूले को सावधानी से अपने थैले में रखा और वापस लौटने का मन बनाया। जब वह जंगल की ओर लौट रहा था, तब उसे महसूस हुआ कि इस यात्रा ने उसे कितनी चीजें सिखा दी थीं। साहस, दृढ़ता, और सबसे महत्वपूर्ण—प्रकृति का सम्मान।
जब वह गाँव पहुँचा, तो लोगों ने उसे कौतुहल भरी नज़रें गड़ा कर देखा। उसने “जीवनफूल” की शक्ति का विकास करके एक जादुई दवा बनाई और सभी को इसकी उपयोगिता बताई। गाँव में सबके बीच खुशी और उम्मीद की एक नई लहर दौड़ पड़ी।
रामू ने उन सबको बताया कि जंगल में उसने न केवल दवा खोजी थी, बल्कि एक नई दुनिया का भी अनुभव किया था—एक ऐसी दुनिया, जहां प्रकृति की शक्ति और मानव के साहस का अद्भुत तालमेल था। अब वह सिर्फ दवा के माध्यम से नहीं, बल्कि जिन्दगी के हर छोटे-बड़े अनुभव से गाँववालों की मदद करना चाहता था।
इस तरह, रामू की यात्रा समाप्त हुई, लेकिन उसके द्वारा अर्जित ज्ञान और साहस हमेशा उसके साथ रहेगा।
Lakshmi Kumari……

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