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श्रेणी: कहानी

दिल से दिल तक पहुंचने वाली एहसास कहानी बनती है।

  • अधूरी मोहब्बत के ‘इंतज़ार का साया

    अधूरी मोहब्बत के ‘इंतज़ार का साया

    पढ़ने का समय : 8 मिनट

     

    अधूरी मोहब्बत के ‘इंतज़ार का साया

    नयन और आरुषि का मिलना किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। पहली मुलाकात दिल्ली विश्वविद्यालय के पुराने आर्ट्स फैकल्टी की कैंटीन में हुई थी, जब पहली बरसात ने जून की तपती गर्मी को अचानक ठंडक में बदल दिया था। आरुषि अपनी किताबों और बिखरे हुए नोट्स को समेटने की हड़बड़ी में थी, और नयन, एक शांत, गंभीर चेहरा लिए, वहीं कोने की मेज पर बैठा उसे देख रहा था।
    “माफ़ करना, मेरा छाता आज धोखा दे गया,” आरुषि ने भीगे बालों से पानी झटकते हुए कहा।
    नयन ने बिना कुछ कहे, अपना जैकेट उसकी ओर बढ़ा दिया। “भीग जाओगी।”
    वह जैकेट, जिसकी महक में मिट्टी की सोंधी खुशबू और उसकी अपनी एक हल्की सी सिगरेट की गंध मिली हुई थी, आरुषि के लिए पहला तोहफ़ा था। वह जैकेट नयन की तरह ही था,  बाहर से रूखा, पर अंदर से बेहद गर्म और सुरक्षा देने वाला।
    धीरे धीरे वह एक छोटी मुलाक़ात कब दोस्ती में बदली और दोस्ती कब इश्क़ की एक गहरी नदी में, उन्हें पता ही नहीं चला। उनका रोमांस किताबों के पन्नों, देर रात की कॉफ़ी और दिल्ली की सर्द रातों में गर्माहट देने वाली लंबी ड्राइव में पनपा। आरुषि को नयन की खामोशियाँ पढ़ना आता था, और नयन को आरुषि की आँखों में छिपे हर सपने को साकार करना था।

    नयन की उंगलियां जब आरुषि के उलझे बालों को सुलझाती थीं, तो उस स्पर्श में सदियों का इकरार होता था। उनका प्रेम सिर्फ शब्दों का मोहताज नहीं था, वह एक-दूसरे की रूह में उतर चुका था। हर चुंबन, हर आलिंगन एक वादा था, हमेशा साथ रहने का।

    एक रात, इंडिया गेट पर, मद्धम रोशनी के बीच, नयन ने आरुषि का हाथ अपने हाथ में लेकर भींच लिया था।
    “तुम मेरी हो, आरुषि। आख़िरी साँस तक।”
    आरुषि ने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें बंद कर ली थीं, जैसे उसने ब्रह्मांड के सबसे बड़े सच को स्वीकार कर लिया हो।

    लेकिन हर प्रेम कहानी की तरह उनकी प्रेम कहानी में एक मोड़ आना बाकी था, जो किसी भी प्रेम कहानी को पूरा नहीं होने देता।
    नयन एक मध्यवर्गीय परिवार से था, पर महत्वाकांक्षाएँ पहाड़ जितनी ऊँची थीं। उसके पिता का सपना था कि वह सिविल सर्विसेज़ में जाए। और नयन भी आरुषि के परिवार की तरह तथा अन्य लोंगों की तरह जानता था कि सरकारी नौकरी ही समाज में उनकी प्रेम कहानी को स्वीकार्यता दिला सकती है।
    “एक साल, बस एक साल और, आरुषि,” नयन ने उसे समझाते हुए कहा था, जब आरुषि ने उसे रोज़ मिलने से मना करने पर शिकायत की थी, तो नयन ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोला, बस इस एक साल के बाद तुम्हें वो सब दूँगा जिसका तुम सपना देखती हो, एक सुरक्षित भविष्य, एक छोटा-सा घर, और हर पल मेरा साथ।

    वह एक साल, इंतज़ार और विरह का है। उनका रोमांस अब फ़ोन कॉल्स, चोरी-छिपे की मुलाक़ातों और ख़त में सिमट गया था।
    परीक्षा की तैयारी चरम पर थी, और तभी किस्मत ने अपना क्रूर खेल खेला। नयन के पिता को अचानक दिल का दौरा पड़ा। परिवार की सारी जमापूंजी इलाज में लग गई, और नयन को अपनी पढ़ाई छोड़कर, परिवार को संभालने के लिए एक छोटी-सी निजी कम्पनी में नौकरी करनी पड़ी।
    टूट गए सारे वादे, बिखर गए सारे सपने।
    कुछ दिनों तक जब आरुषि की बातचीत और कोई संपर्क नयन से नही हुआ,  तो अचानक एक दोपहर, आरुषि, नयन के पुराने कमरे में पहुँची। कमरा खाली था, सिर्फ़ कोने में रखी किताबों पर धूल जमी थी। नयन उसे यह सब बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था, उसने बस एक छोटा-सा संदेश छोड़ा था:
    आरुषि, मैं टूट गया हूँ। मैं तुम्हें वो ज़िंदगी नहीं दे सकता जिसका तुम हक़ रखती हो। मेरा प्रेम स्वार्थी नहीं है कि मैं तुम्हें भी अपने साथ इस अंधेरे में खींच लूँ। मुझे भूल जाना। यह हमारे इश्क़ का दर्दनाक अंत है।”

    नयन के उस एकतरफ़ा फ़ैसले ने आरुषि को अंदर तक झकझोर दिया। वह रोई, चिल्लाई, पर नयन का  कुछ भी पता नहीं चला। नयन यह जानता था कि आरुषि के परिवार वाले कभी एक असफल और आर्थिक रूप से टूटे हुए लड़के से उसकी शादी नहीं करेंगे। इसलिए उसने खुद को दूर करके, अपनी मोहब्बत को एक तरह से बलिदान कर दिया था।

    धीरे धीरे देखते देखते कब पांच साल गुज़र गए, किसी को पता भी नही चला।
    आरुषि की शादी एक सफल व्यवसायी से हो चुकी थी। अब उसके पास ऐशो-आराम के लिए सब कुछ था, बंगला, गाड़ी, ऐशो-आराम। पर उसकी आँखों में नयन का इंतज़ार आज भी ज़िंदा था। वह आज भी हर बारिश में नयन के जैकेट की महक खोजती थी।
    उसकी ज़िंदगी में रोमांस था, पर इश्क़ नहीं। उसका पति उसे बहुत प्यार करता था, पर वह स्पर्श, वह जुड़ाव जो नयन की नज़रों में था, उसे वह कहीं नहीं मिला।
    एक रात, बारिश ज़ोरों पर थी। आरुषि अपने बेडरूम की बालकनी में खड़ी थी, आँखें मूँदकर। उसके मन में नयन के साथ बिताई गई हर अंतरंग मुलाक़ात, हर मीठी शरारत घूम रही थी। उसे याद आया, कैसे नयन उसे पहली बार अपने सीने से लगाया था और कैसे उनके होंठ एक कसक भरी चाहत में मिले थे।
    आरुषि ने अपनी आँखें खोलीं और उसकी नज़रों के सामने नयन का चेहरा घूम गया, एक दर्द भरा प्रेम, एक अनसुलझा बंधन। उसके दिल में एक टीस उठी।

    संयोगवश उसी शहर में, नयन ने भी खुद को अपने परिवार के लिए संभाला था। वह एक छोटी-सी प्रिंटिंग प्रेस चलाता था, जो ठीक-ठाक चल जाती थी। वह भी एक खालीपन में जी रहा था। उसका सबसे बड़ा डर था कि वह आरुषि को किसी और के साथ खुश देखेगा। पर जब उसने दूर से आरुषि को एक बार अपनी कार में देखा, तो उसकी आँखों की उदासी ने नयन को बता दिया कि आरुषि अभी भी उसी अधूरी मोहब्बत के पिंजरे में कैद है।
    नयन ने हर शाम एक डायरी लिखी, जिसमें वह आरुषि को अपनी ज़िंदगी के हर पल का हिसाब देता था।
    आज मैंने तुम्हारे पसंदीदा फूल देखे।
    आज चाय बनाते हुए तुम्हारा ख़याल आया।
    आज बारिश हुई, और मुझे तुम्हारा भीगा हुआ चेहरा याद आया।
    यह डायरी, उसके लिए आरुषि से रोज़ बात करने का ज़रिया थी। उसका प्रेम अब भी ज़िंदा था, पर सिर्फ़ कागज़ों पर।

    छठे साल, एक कला प्रदर्शनी में, किस्मत ने उन्हें एक बार फिर मिला दिया।
    आरुषि, अपने पति के साथ, एक पेंटिंग के सामने खड़ी थी, जिसका शीर्षक था, इंतज़ार का साया’। उस पेंटिंग में, एक लड़की दूर क्षितिज को देख रही थी, और उसके साये में एक धुंधला-सा पुरुष का चेहरा छिपा था।
    जब आरुषि ने पलटा, तो उसके सामने नयन खड़ा था। समय थम गया। पाँच सालों का दर्द, विरह, और प्रेम उनकी आँखों में भर आया।
    नयन का शरीर पहले से ज़्यादा थका हुआ लग रहा था, पर उसकी आँखें आज भी वही थीं, गहरी और आरुषि के लिए अटूट प्रेम से भरी।
    “आरुषि…” नयन की आवाज़ काँपी।
    “नयन…” आरुषि ने केवल इतना कहा, और उसके होंठ काँपने लगे।
    आरुषि के पति ने नयन को देखा, पर उन्हें लगा कि वह कोई पुराना सहपाठी है। उन्होंने सम्मानपूर्वक हाथ मिलाया और थोड़ी देर में उन्हें अकेला छोड़ दिया।
    वे दोनों गैलरी के शांत कोने में बैठ गए।
    “तुमने क्यों किया ऐसा, नयन?” आरुषि की आवाज़ में पाँच सालों का दर्द था। “तुमने क्यों मान लिया कि मेरा प्यार इतना कमज़ोर है कि वह तुम्हारी मुश्किलों को नहीं सह पाएगा?”
    नयन ने उदास नज़रों से उसे देखा। “मैं स्वार्थी नहीं बन सकता था, आरुषि। मैं तुम्हें अंधेरे और अभाव की ज़िंदगी नहीं देना चाहता था। मेरा प्रेम आज भी उतना ही सच्चा है, पर मैं तुम्हें यह सब देने के बाद तुम्हारे सपनों को मरते हुए नहीं देख पाता।”
    उस शाम, वे घंटों बातें करते रहे। उन्होंने अपने अधूरे प्रेम के हर मोड़ को छुआ। उनका प्रेम, जो कभी शारीरिक आलिंगनों में व्यक्त होता था, आज सिर्फ़ आत्मिक जुड़ाव में सिमट गया था।
    आरुषि ने नयन का हाथ पकड़ा। वह स्पर्श आज भी उतना ही सुरक्षित और अपनापन देने वाला था।
    “हम अब भी एक-दूसरे से प्यार करते हैं, नयन।”
    नयन की आँखों से आँसू बह निकले। “हाँ, करते हैं। पर अब यह प्यार हमारा नहीं रहा, यह बस एक दर्द भरी याद है।”
    नयन ने अपनी जेब से एक मुड़ी हुई डायरी निकाली। “यह तुम्हारी अमानत है। इसमें हमारे हर अधूरे पल का हिसाब है।”
    “क्या अब हम…?” आरुषि ने हिम्मत करके पूछा।
    नयन ने मुस्कुराने की कोशिश की, पर उसकी मुस्कुराहट में केवल पीड़ा थी।
    “हम हमेशा एक-दूसरे के रहेंगे, आरुषि, पर अब केवल सपनों में। तुम्हारी ज़िंदगी में अब एक सफ़र है जिसे तुम्हें पूरा करना है। और मेरी ज़िंदगी… मेरी ज़िंदगी तो उसी दिन खत्म हो गई थी जब मैंने तुम्हें खोने का फ़ैसला किया था।”
    आरुषि ने वह डायरी ले ली। वह डायरी नहीं थी, वह उनके इश्क़ का मज़ार था।
    नयन उठा। यह उनकी अंतिम, और सबसे दर्द भरी मुलाक़ात थी। उसने आरुषि के माथे को धीरे से छुआ, बिना कोई चुंबन दिए, बिना कोई आलिंगन दिए। यह स्पर्श, किसी भी गहरे शारीरिक मिलन से ज़्यादा पवित्र और गहरा था, क्योंकि इसमें केवल त्याग और निस्वार्थ प्रेम था।
    “ख़ुश रहना, आरुषि। तुम जहाँ हो, ख़ुश रहना।”
    “और तुम?”
    “मैं? मैं हमेशा तुम्हारा हूँ।”
    नयन मुड़ा और भीड़ में कहीं खो गया। आरुषि वहीं खड़ी रही। उसके पास प्रेम की सबसे बड़ी निशानी थी, वह अधूरी डायरी।
    आज भी, आरुषि अपने आलीशान घर में रात की तन्हाई में उस डायरी के पन्ने पढ़ती है। वह जानती है कि उसका पति उसे भौतिक सुख दे सकता है, पर उसकी रूह हमेशा नयन की रहेगी।
    उनकी मोहब्बत अधूरी रही, पर उनका इश्क़ अमर हो गया, एक मीठा, दर्द भरा एहसास जो हर साँस के साथ ज़िंदा रहता है।
    समाप्त
    पढ़ने के लिए धन्यवाद।
    यह कहानी आपको कैसी लगी? आपकी समीक्षा का इंतज़ार रहेगा। यदि आपको यह कहानी छू गई हो, तो मुझे प्रोत्साहन में एक ❤️ या ✨ स्टीकर भेजकर मेरा उत्साहवर्धन ज़रूर करें!

     

    आशीष मिश्रा मैथिली

    NSW  नया लेखक  🥉

  • 💞💞प्यार का नशा… पार्ट 7💞💞

    💞💞प्यार का नशा… पार्ट 7💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे,

    लोकेशन, ” रिशाल अग्निहोत्री फॉर्मेहाउस,”

    रिशाल अपनी कार में, ” चलो अंदर!!

    अमानत, ” ये क्या बतमीजी है आपकी, ” आप अमीर है तो क्या कुछ भी करेंगे मेने कहा न मे कहीं नहीं जाने वाली और मेरे भाई को आपने कहा छोड़ा है बताये कहा है मेरा व्योम? “

    रिशाल अग्निहोत्री, ” वही बोल रहा हु, ” चुपचाप जो बोल रहा हु वो करोगी तो तुम्हारा भाई ठीक रहेगा वरना तुम सोच भी नहीं सकती मे उसकी साथ क्या कर सकता हु वो अब मेरे आदमी के अंदर मे है मे जब चहु उसे ऊपर पंहुचा सकता हु?? और तुम अच्छे से जानती हो मे ऐसा जरूर कर सकता हु? “

    अमानत के आँखों मे आंसू आ जाते है ये सब सुन कर आखिर रिशाल ऐसा कर क्यों रहा है क्या दुश्मनी थी उसकी अमानत से ये अमानत को समझ ही नहीं आ रहा था? “

    रिशाल अग्निहोत्री, ” लगता है तुम ऐसे नहीं मानोगी मुझे तुम्हे सबूत दिखाना ही होगा या फिर कुछ कर के बताना ही होगा की मे कुछ भी कर सकता हु? “

    रिशाल न अपने शर्ट के पॉकेट से फोन निकला और अपने आदमी को कॉल कर कहा व्योम का वीडियो उतर कर भेजो ओर हाँ मेरे ऑडर का इंतजार karna तभी उसे कुछ करना तब तक के लिए उसे कुछ सांस और ले लेने दो!!

    कुछ ही देर मे रिशाल के फ़ोन पर एक वीडियो आता है जो रिशाल अमानत को दिखा कहता है, ये देखो ये रहा तुम्हारा भाई जो अभी स्विंप्लू के आगे बैठा है मेरे आदमी बस मेरे ऑडर का इंतजार कर रहे है मेरे हाँ कहते है ही ये तुम्हारे भाई को धक्का दे देंगे और फिर वो पानी के अंदर…. और जहा तक मुझे पता है सायद तिम्हारे भाई को स्विंग करना नहीं आता है क्यों सही कहा न मेने??

    अमानत आपमें भाई को देख डर जाती है क्युकी ये बात सच थी की उसे स्विंग नहीं आता था,

    अमानत, ” व्योम…. व्योम् हट जा वहा से क्या कर रहा है वहा पर हट जा… देखो तुम ऐसा कुछ भी नहीं करोगे मेरे भाई को छोड़ दो उसने क्या ही बिगड़ा है तुम्हरा मेरे भाई को बक्श दो तुम जो बोलोगे वो करुँगी मे पर मेरे भाई को छोड़ दो pls..!!!

    रिशाल अग्निहोत्री, ” तो ये हुई न बात अब बानी हो तुम असली बहन.. चलो अभी के लिए तो तुमने अपने भाई की जान बचा ली अब बस देखना है की और कितने देर बचा पाती हो.. मेरी जान अब चलो अंदर जाओ मे अभी आता है कार पार्क कर के फिर मे तुम्हे बताता हु की आगे करना क्या है….!!!!

    अमानत को तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की ये उसकी साथ हो क्या रहा है आखिर ये सब क्यों.. ये है कौन जो उसकी साथ ऐसा सब कर रहा है इसकी तो कोई दुश्मनी भी नहीं है अचानक कहीं से आकर मेरे साथ ये बर्ताव क्यों कर रहा है मेरा व्योम सही तो होगा न मेरी जान है वो उसकी बिना तो मे जीने का सोच भी नहीं सकती क्या करू कैसे बचाऊ खुद के भाई को… माँ पापा आप ही कुछ रास्ता दिखाई??? “”!!!!

    .. to be continue…

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • 💞💞प्यार का नशा पार्ट 6💞💞

    💞💞प्यार का नशा पार्ट 6💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    अब आगे,

    व्योम को इतना ख्याल नहीं रहता है कु वो बिच सड़क पर aa गया है और तभी एक रज रफ़्तार से आती हुई कार जो व्योम के बिलकुल नजदीक आ रही थी वो हॉर्न बजती है पर व्योम को सुनाई नहीं देता है क्युकी उसका ध्यान कहीं और ही रहता है |”

    अमानत जैसे ही पीछे मुर देखती है उसकी हाथो से सामान छूट कर नीचर गिर जाता है और वो भागती हुई व्योम के पास जाती है और उसे खींच कर साइड करते हुए उस कार वाले को सुनाने लगती है,

    कुछ आगे जाकर वो कार भी रुक जाती है,

    अमानत, ” तू ठीक है न व्योम ये ज्या कर रहा है अभी तुझे किछ हो जाता तो मे क्या करती अपना ख्याल रखना चाहिए न, तभी कार उन दोनों के सामने आ जाती है और उससे बाहर आते है Ra….

    अमानत खरी हो जाती है, रिशाल अग्निहोत्री को देख उसे उस बिच पर हुई बातें याद आ जाती है, अपर आज उसकी गलती थी इसीलिए वो बिना कुछ सोचे समझें Ra को काफ़ी कुछ कहती है.. आज उसके भाई का सवाल था वो चुप कैसे रह सकती थी, देखते ही देखते काफ़ी भीड़ जमा हो जाती है, और सभी रिशाल अग्निहोत्री को एक आम लड़की से बात सुनता हूआ देख हस देते है |”

    रिशाल अग्निहोत्री जो अमानत से माफ़ी मांगने की सोच रहा था इस इंसिडेंट के बाद वो अमानत से बेहद नफरत करने लगता है आखिर अमानत न उसे सबके सामने बेज्जत जो किया, वो अमानत से बदला लेने का सोच कहता है,

    रिशाल अग्निहोत्री, ” मुझे माफ कर दो गलती से हो गया, पर मे इसीलिए भरपाई करना चाहता हु, तुम दोनों मेरे साथ चलो मे तुम्हे कहीं ले जाना चाहता हु |”

    अमानत, ” कहा ले जाना है हमें कहीं नहीं जाना आप जेसो के साथ जिसे बस अपने पेसो का रोब दिखाना आता है खड़ूस…

    रिशाल अग्निहोत्री अपने gusse को काबू मे कर व्योम को और फिर उसकी बहन को कार मे बिठा कर जबरदस्ती ही ले जाता है |”

    अमानत, ” ये क्या मज़ाक लगा रखा है आपने आप हमारे साथ जबरदस्ती केसव कर सकते है एक तो गलती करते है ऊपर से उतना एगो….

    रिशाल कुछ नहीं कहता है और कुछ दुरी पर एक अच्छे से हॉस्टल मे व्योम का एडमिशन करवा देता है जहा व्योम को वो भेज कर अपने फार्महाउस मे कार जाकर रोक अमानत को उतार देता है,

    अमानत -” ये सब क्या है मेरा भाई …. आपने उसे कहा छोड़ दिया है ये सबा क्या कर रहे है आप?? “

    क्या करेगा रिशाल अमानत के साथ??

    आखिर रिशाल न क्यों किया व्योम और अमानत को अलग अलग??

    क्या Ra के मन मे चल रहा है कोई और ही सवाल क्या अमानत कर पायेगी Ra का सामना?? 

    आज के लिए बस इतना ही, कल फिर मिलेंगे कहानी के एक नए भाग के साथ, तब तक अपना ख्याल रखिये | आगे का कहानी जानने के लिए आपलोग इसलिए कहानी को आगे पढ़ते रहे और अपना सपोर्ट देते रहे.. 🙂

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • अबके बरस..💘💘

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    वाराणसी की गलियों में बारिश का अपना ही संगीत होता है—भीगी हुई मिट्टी की खुशबू, मंदिरों की घंटियों में घुलती बूंदों की लय, और गंगा के किनारे बहती ठंडी हवा। उसी शहर में, उसी बारिश के मौसम में, एक अधूरी प्रेम कहानी हर साल जन्म लेती थी… और हर साल अधूरी ही रह जाती थी।

     

    आरव को बारिश से प्यार था, लेकिन उससे भी ज़्यादा उस लड़की से, जो हर बरसात में अचानक उसकी जिंदगी में आ जाती थी—नैना।

     

    पहली बार वह उसे पाँच साल पहले सावन की पहली बारिश में मिला था। आरव अस्सी घाट पर भीगता हुआ खड़ा था, तभी उसने देखा—सफेद सलवार में एक लड़की, हाथों में चूड़ियाँ, बालों से टपकती बूंदें, और चेहरे पर अजीब सी मुस्कान। वह जैसे बारिश को महसूस नहीं कर रही थी, बल्कि बारिश उसके अंदर उतर रही थी।

     

    “तुम भीग क्यों रहे हो?” नैना ने पूछा था।

     

    आरव ने हंसते हुए जवाब दिया था, “क्योंकि बारिश रुकने का इंतजार करना मुझे पसंद नहीं।”

     

    “और मुझे बारिश में खो जाना पसंद है,” उसने कहा था।

     

    उस दिन दोनों घंटों साथ बैठे रहे। बातें खत्म ही नहीं हो रही थीं। जैसे बरसों से एक-दूसरे को जानते हों। लेकिन शाम ढलते-ढलते, जब आरव ने उसका नंबर माँगा, नैना मुस्कुरा कर चली गई। बस इतना कहा—“अगर किस्मत हुई, तो अगले बरस मिलेंगे।”

     

    आरव को लगा था यह बस एक अजीब सी मुलाकात थी, जो खत्म हो गई। लेकिन अगले साल, ठीक उसी दिन, उसी जगह… नैना फिर मिल गई।

     

    “तुम आ गए,” उसने कहा।

     

    “तुम भी,” आरव ने जवाब दिया।

     

    उस दिन भी वही हुआ—लंबी बातें, हंसी, चाय, और फिर विदाई। कोई नंबर नहीं, कोई वादा नहीं। बस एक उम्मीद—“अबके बरस फिर मिलेंगे।”

     

    इस तरह चार साल बीत गए। हर साल सावन में वे मिलते, प्यार थोड़ा और गहरा होता, लेकिन कभी किसी ने इज़हार नहीं किया। जैसे दोनों को डर हो कि इज़हार करते ही यह जादू खत्म हो जाएगा।

     

    लेकिन पाँचवें साल कुछ बदल गया था।

     

    इस बार आरव ने तय कर लिया था—वह नैना को जाने नहीं देगा। वह उसे बताएगा कि वह उससे प्यार करता है, कि वह हर साल सिर्फ उसी के लिए जीता है, कि उसकी जिंदगी अब इन बरसाती मुलाकातों से कहीं ज़्यादा चाहती है।

     

    सावन की पहली बारिश हुई, और आरव अस्सी घाट पर पहले से खड़ा था। दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। हर आती-जाती लड़की में उसे नैना दिख रही थी। लेकिन वह नहीं आई।

     

    घंटे बीत गए। बारिश तेज़ हो गई। घाट खाली होने लगा। आरव का दिल टूटने लगा।

     

    “शायद इस बार किस्मत नहीं थी…” उसने खुद से कहा।

     

    वह जाने ही वाला था कि पीछे से वही आवाज़ आई—“इतनी जल्दी हार मान गए?”

     

    आरव पलटा। नैना थी। भीगी हुई, मुस्कुराती हुई… लेकिन इस बार उसकी आँखों में कुछ अलग था—जैसे कोई दर्द, कोई झिझक।

     

    “तुम आई क्यों नहीं?” आरव ने शिकायत की।

     

    “आई तो हूँ,” उसने धीरे से कहा, “बस थोड़ी देर हो गई।”

     

    दोनों फिर साथ बैठे। लेकिन इस बार बातचीत में वो पुरानी हल्कापन नहीं था। कुछ अनकहा, कुछ अधूरा सा हवा में तैर रहा था।

     

    आखिरकार, आरव ने हिम्मत जुटाई—“नैना, मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ।”

     

    “मत कहो,” उसने तुरंत कहा।

     

    “क्यों?”

     

    “क्योंकि अगर तुमने कह दिया, तो शायद हम फिर कभी नहीं मिल पाएंगे।”

     

    आरव चुप हो गया। “क्या मतलब?”

     

    नैना ने गहरी सांस ली। “हर साल मैं यहाँ इसलिए आती थी क्योंकि मुझे लगता था कि कुछ चीजें अधूरी ही खूबसूरत होती हैं। अगर हम इन्हें पूरा करने की कोशिश करेंगे, तो ये टूट जाएंगी।”

     

    “लेकिन मैं अधूरा नहीं रहना चाहता,” आरव ने कहा। “मैं तुम्हारे साथ पूरा होना चाहता हूँ।”

     

    नैना की आँखों में आँसू आ गए। “तुम समझ नहीं रहे…”

     

    “तो समझाओ,” आरव ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा। “इस बार मैं तुम्हें ऐसे नहीं जाने दूंगा।”

     

    कुछ पल की खामोशी के बाद, नैना ने कहा—“मैं हर साल इसलिए आती थी क्योंकि मैं खुद से भाग रही थी। मेरी शादी तय हो चुकी थी… पाँच साल पहले ही।”

     

    आरव का दिल जैसे थम गया। “क्या?”

     

    “हाँ,” नैना ने सिर झुका लिया। “मैं हर साल यहाँ आती थी, क्योंकि तुम्हारे साथ वो जिंदगी जी पाती थी, जो मेरी नहीं थी।”

     

    “और अब?” आरव ने कांपती आवाज़ में पूछा।

     

    “अब मेरी शादी अगले महीने है,” उसने कहा।

     

    बारिश और तेज़ हो गई। जैसे आसमान भी इस कहानी का दर्द महसूस कर रहा हो।

     

    आरव ने कुछ देर तक कुछ नहीं कहा। फिर धीरे से बोला—“क्या तुम खुश हो?”

     

    नैना चुप रही।

     

    “सच-सच बताओ,” आरव ने ज़ोर दिया।

     

    उसकी आँखों से आँसू बह निकले। “नहीं।”

     

    “तो फिर ये शादी क्यों?” आरव ने पूछा।

     

    “क्योंकि मैंने कभी हिम्मत नहीं की,” उसने कहा। “मैंने कभी अपने दिल की नहीं सुनी।”

     

    आरव ने उसका हाथ कसकर पकड़ा। “तो अब सुनो। अबके बरस, हम इस कहानी को अधूरा नहीं छोड़ेंगे।”

     

    “लेकिन सब कुछ इतना आसान नहीं है,” नैना ने कहा।

     

    “कुछ भी आसान नहीं होता,” आरव मुस्कुराया, “लेकिन प्यार अगर सच्चा हो, तो रास्ते खुद बन जाते हैं।”

     

    उस रात, दोनों ने बहुत देर तक बातें कीं। डर, उम्मीदें, सपने—सब कुछ सामने रख दिया। और पहली बार, उन्होंने अपने प्यार को नाम दिया।

     

    अगले कुछ दिन कठिन थे। नैना ने अपने परिवार से बात की। आँसू, गुस्सा, सवाल—सब कुछ हुआ। लेकिन इस बार, वह पीछे नहीं हटी।

     

    “मैं अपनी जिंदगी खुद चुनना चाहती हूँ,” उसने दृढ़ता से कहा।

     

    आरव भी उसके साथ खड़ा रहा। हर मुश्किल में, हर डर में।

     

    और फिर, एक दिन… सब बदल गया।

     

    नैना के परिवार ने आखिरकार उसकी बात मान ली। शायद उन्होंने उसकी आँखों में सच्चाई देख ली थी, या शायद उन्होंने समझ लिया था कि प्यार को रोका नहीं जा सकता।

     

    सावन की आखिरी बारिश थी। अस्सी घाट फिर भीग रहा था। लेकिन इस बार, कहानी अलग थी।

     

    नैना लाल साड़ी में थी, और आरव उसके सामने खड़ा था—हाथों में वरमाला।

     

    “तो अबके बरस…?” आरव ने मुस्कुराते हुए पूछा।

     

    “अबके बरस,” नैना ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “हमेशा के लिए।”

     

    दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई। बारिश उनके चारों ओर नाच रही थी, जैसे आशीर्वाद दे रही हो।

     

    “तुम्हें पता है,” आरव ने धीरे से कहा, “मुझे हमेशा लगता था कि बारिश हमें मिलाने के लिए आती है।”

     

    “और अब?” नैना ने पूछा।

     

    “अब लगता है,” उसने उसका हाथ थामते हुए कहा, “बारिश हमारी कहानी का हिस्सा बन गई है।”

     

    नैना मुस्कुरा दी। “शायद इसलिए, क्योंकि हमने इस बार उसे अधूरा नहीं छोड़ा।”

     

    गंगा के किनारे, बारिश की बूंदों के बीच, दो दिल आखिरकार एक हो गए।

     

    और उस दिन के बाद, हर सावन सिर्फ एक मौसम नहीं रहा—वह उनकी प्रेम कहानी का उत्सव बन गया।

     

    अबके बरस, उन्होंने सिर्फ एक-दूसरे को नहीं पाया… बल्कि अपनी पूरी जिंदगी पा ली।

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    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇

    चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं

    शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

  • 💞💞प्यार का नशा.. 💞💞पार्ट 5

    💞💞प्यार का नशा.. 💞💞पार्ट 5

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे,

    अमानत, ” नहीं अंकल ऐसा मत कहिये मे आपका एक एक रुपया दे दूंगी बस कुछ समय और दे दीजिये मुझे बस काम मिलने ही वाला है आप मेरी बात को समझने की कोशिश कीजिये, आप यहाँ से निकाल देंगे तो मे कहा जाउंगी pls अंकल ऐसा मत करिये!”

    मकान मलिक, ” मे तो ऐसा ही करूँगा बहुत झेल लोया तुम दोनों का नतक अब अभी के अभी निकलो मेरे घर से पेसो की तो उम्मीद ही नहीं है तुम फातिचरों से निकलो मेरे घर से,

        ये कहते हुए मकान मालिक अपन कुछ गुंडों को घर खाली करवाने का इशारा करता है,

    अमानत बार बार हाथ जोरती है की उसे कुछ समय दे दे वो कुछ न कुछ कर लेगी उसे जॉब मिल जायेगा पर उसकी एक भी नहीं सुनी जाती है,

    आखिर मे अमानत और उसकी छोटे से भाई व्योम लो सामान के साथ बाहर फेक दिया जाता है और वाह से जाने लो कह दिया जाता है,

    अमानत के पास और कोई भी ऑप्शन नहीं रहता है तो उसे जाना ही परता है पर कहा जाय क्या करें उसे कुछ भी समझ नहीं आता है, वो अपने भाई के सामने ये सब नहीं दिखा सकती थी इसीलिए वो कहती है की वो इससे भी अच्छे घर मे जाएगी और सब ठीक हो जायेगा व्योम को सब कुछ दिलवाने का उसका जो सपना था वो एक ही पल मे टूट जाता है |”

    बिच सरक पर चलते हुए उसके भाई को प्यास लग जाती है, अमानत के पास बोटोल नहीं रहता है जिस कारण ओ परेशान हो जाती है और यहाँ वहा ढूंढती है, तभी उसे एक ठेले वाला दिखाई देता है और वो उससे पानी लेके अपने भाई व्योन को पिलाती है |”

    अमानत, ” तू ठीक है न व्योम? “

    व्योम, ” हाँ दीदी मे ठीक हु आप जब तक हो मुझे क्या होगा पर मे आपके लिए बोझ सा हो गया हु न आपको मेरे लिए कितना परेशान होना परता है न पता नहीं मे कब आपकी मदद के लिए बनूँगा सायद अंकल न सही कहते है मे न कामचोर हु तभी तो मे आपके दूँखों का कारण बन गया हु |”

    अमानत, ” नहीं नहीं व्योम ऐसा कुछ भी नहीं है तू ये सब मत सोच देख भगवान जब एक दरवाजा बंद करते है न तो उन्होंने पहले ही दूसरा दरवाजा सोच रखा होता है, तू देखना सब सही हो जायेगा तू बस अपने मन से न ये सबा वहम निकल दे समझ!”

    व्योम, ” आप सच कह रही है दीदी!”

    अमानत, ” तो ज्या तेरी बहन क्या तुझसे झूठ कहेगी भला!!

    अमानत अपने भाई को समझा देती है पर उसे खुद कुछ समझ नहीं आता है की आखिर अब करें क्या,

    अमानत, ” अच्छा रुक तू यही पर मे तेरे लिए कुछ खाने को लाती हु तुझे भूख लग गया होगा न,

    व्योम दीदी की बात पर सर हिला देता है क्युकी उसे सच मे भूख लग गयी थी, अमानत जैसे ही कुछ खाने को लाने के लिए ठेले के पास जाती है की तभी व्योम की नजर सड़क पर परी एक बेलून पर जाता है और वो उसे लेने के लिए बिच सड़क पर चला जाता है |”

    … to be continue…

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • सुना है बहुत ख़ुश है वो किसी और से मिलके…

    सुना है बहुत ख़ुश है वो किसी और से मिलके…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट
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    अर्ज किया है,,

    बिछड़े हुए लोग जब बुरे दौर से मिलेंगे 

    दर्द जब भी मिलेंगे चारों ओर से मिलेंगे!!

    सुना है बहुत खुश है वो किसी ओर से मिल कर 

    आग तो तब लगेगी जब हम किसी ओर से मिलेंगे… 😎😎

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    Rani Thakur

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  • अच्छे इंसान की पहचान…

    अच्छे इंसान की पहचान…

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    स्त्री की भावनाएं सराय जैसी नहीं हैं

    कि कोई भी आया , रूका और चला गया

    स्त्री की भावनाएं मनमोहक महल जैसी हैं

    जिसमें या तो कोई आ नहीं सकता

    और यदि आ जाए

    तो फिर जीवन भर जा नहीं सकता

    एक औरत में अगर आपको कुछ जानना हैं

    तो मौन को पढ़िए..

    सुन्दरता देखनी हैं

    तो सादगी में ढूंढिए

    और खुशी देखनी हैं

    तो बंधनों से मुक्त करिये ….इससे बेहतर आप किसी स्त्री को समझ नहीं सकते. इसीलिए आप एक अच्छे स्त्री की संतान  है इसका पता बस ऐसे ही लग सकता है की आप दूसरे स्त्री को कितना समझते है और उसे कितना सम्मान देते है.. आपके कर्म ही आपको ऊंचा उठती है इसीलिए ज़ब भी कुछ कीजिये एक बार खुद से जरूर पूछिए क्या ये सही है.. और फिर ज़ब आपके अंदर से जवाब आये तो वो काम बिना डरे कर दीजिये.. पर इस बात का खास ध्यान रखे की आपके कारण किसी को तकलीफ ना हो.. क्योकि इस दुनिया मे गम देना आसान है पर किसी को ख़ुशी देना बहुत मुश्किल…तो किसी के चेहरे की ख़ुशी की वजह बने ना की उनकी तकलीफो की…✍️✍️

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    Rani Thakur

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  • 💞💞प्यार का नशा…💞💞 पार्ट 4

    💞💞प्यार का नशा…💞💞 पार्ट 4

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

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    •  

    रिशाल के चेहरे पर थकान के निशान कम होने लगते हैं और वह आराम से बैठ जाता है। वरुणा अग्निहोत्री की देखभाल से वह अपने तनाव को भूलने लगता है।

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करती हैं और कहती हैं, “देखो, बेटा। माँ का प्यार कितना अच्छा होता है। तुम्हें कभी भी अपनी माँ की देखभाल की जरूरत नहीं होती।”

    रिशाल मुस्कराता है और कहता है, “हाँ, माँ। तुम सबसे अच्छी माँ हो।”

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के चेहरे को देखती हैं और मुस्कराती हैं। वह रिशाल के माथे को चूम लेती हैं और कहती हैं, “मेरा बेटा मुझे सबसे प्यारा है।” सबका ख्याल रहता है इसको और सबकी फ़िक्र भी रहती है, रभी तो मेरा बेटा सबसे अच्छा है इस दुनिया मे जो किसी के आँखों मे आंसू भी नहीं आने देता है |”

    माँ की बाते सुन कर RA को अमानत के आंसू याद आ जाते है उसे याद आ जाता है की आज ही तो वो किसी के दर्द के कारण बना था |” 

    रिशाल को अपनी माँ का प्यार और लाड मिलती है, लेकिन उसका मन जो अमानत के आँखों के आंसू को सोचता है, वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है,

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के चेहरे को देखती हैं और प्यार से पूछती हैं, “बेटा, आखिर बात क्या है? तुम इतना टेंशन में क्यों लग रहे हो? तुम्हारी माँ हूँ, तुम मुझे कुछ भी बता सकते हो।”

    रिशाल: (हिचकिचाते हुए) “कुछ नहीं, माँ। बस काम की तनाव है।”

    वरुणा अग्निहोत्री: (प्यार से) “नहीं, बेटा। तुम मुझे नहीं बता सकते कि यह सिर्फ काम की तनाव है। तुम्हारी आँखें बता रही हैं कि कुछ और है। तुम्हारे दिल में क्या है, बताओ मुझे।”

    रिशाल: (माँ की बात सुनकर) “माँ… मैं नहीं जानता कि मैं क्या कहूँ।”

    वरुणा अग्निहोत्री: (प्यार से) “बेटा, तुम मुझे कुछ भी बता सकते हो। मैं तुम्हारी माँ हूँ। मैं तुम्हें कभी भी निराश नहीं करूँगी। तुम्हारे लिए मैं हमेशा यहाँ हूँ।”

    रिशाल वरुणा अग्निहोत्री की बात सुनकर अपने दिल की बात बताने की सोचता है, लेकिन वह अभी भी हिचकिचाता है…

    क्या Ra बता पायेगा अपने माँ को अपने दिल मे हो रही इस हलचल को??

    क्या वरुणा अग्निहोत्री करेंगी सपोर्ट अमानत को??

    क्या Ra मागेगा माफ़ी अमानत से??

    क्या होगा अमानत का रिएक्शन?? 

    ( मकान मालिक), अमानत के किराये का घर, सुबह के 10:00 बजे,

    मकान मालिक, ” दरवाजा खोलो, कामचोरो… अभी तक क्या सोये हुए हो… मेरा पैसा दो कब से आ आकर थक चूका हु या तो पैसा दो या फिर अपने कामचोर भाई को लेके यहां से दफा हो जाओ!”

    अमानत दरवाजे पर आवाज़ सुन अपने भाई को कहती है, ” तू फ़िक्र ना कर सब सही हो जायेगा ये अंकल तो ऐसे ही कहते है हमेशा तुम ये खाना खत्म कर और स्कूल के लिए तैयार हो जाओ मे बात कर के आती हु ठीक है |”

    व्योम, ” ठीक है, दीदी,

    अमानत दरवाजा खोल बाहर आ जाती है और दरवाजे को लगा देती है,

    मकान मालिक, ” ये लो आ गयी कामचोर भाई की बहन जिसे करना तो कुछ नहीं है बस बहाना जितना बनवा लो आज न कोई भी बहाना नहीं चलेगा मुझे मेरा किराया चाहिए तो चाहिए वरना ये बोरिया बिस्तर लेके यहां से दफा हो जाओ अभी के अभी मुझे दूसरा किरायदार मिल गया है जो तुमसे ज़्यदा ही पैसे देने को तैयार है, और समय पर भी देने को तैयार है समझी ..

    .. to be continue…

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    Rani Thakur

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  • 💞💞प्यार का नशा… पार्ट 3💞💞

    💞💞प्यार का नशा… पार्ट 3💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे,

    वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को देखती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या हुआ? तुम कहीं और ही लग रहे हो।”

    रिशाल जल्दी से अपने आप को संभालता है और कहता है, “माँ, मीटिंग तो ठीक रही। बस थोड़ा थकान है।”

    वरुणा देवी रिशाल की बात मानती हैं और कहती हैं, “ठीक है, बेटा। तुम आराम करो। 

    लेकिन रिशाल का मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है, वह अमानत की मासूमियत और उसकी आँखों में आंसू को याद करता है और उसके लिए अपने दिल में एक अजीब सा हलचल महसूस करता है…:

    वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को जब देखती हैं तो उसे लगता है कि वह किसी बात से परेशान है। वह रिशाल के पास जाती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या सब ठीक है? तुम्हारे चेहरे पर तनाव दिख रहा है। क्या तुम मुझे कुछ बताना चाहते हो?”

    रिशाल वरुणा देवी की बात सुनता है, लेकिन वह कुछ नहीं बताता। वह जल्दी से एक बहाना बनाता है और कहता है, “माँ, मेरा सर दर्द कर रहा है। मुझे लगता है कि मैं थोड़ा थक गया हूँ। मैं कुछ देर अकेले में आराम करना चाहता हूँ।”

    रिशाल अपने हाथ में रखे हुए अमानत के बाल के टुकड़े को देखता है और सोचता है,

    वरुणा अग्निहोत्री जब अपने बेटे के सर दर्द की बात सुनती है, तो तुरंत घर के नौकर, रामू को आवाज़ लगाती है, “रामू, रामू! जल्दी आओ और मुझे तेल लेकर आओ। रिशाल को सर दर्द हो रहा है।”

    रामू वरुणा देवी की आवाज़ सुनकर जल्दी से आता है और पूछता है, “मैम, कौन सा तेल लाऊं? कोकोनट का या बदाम का?”

    वरुणा देवी कहती हैं, “बदाम का तेल लाओ। और जल्दी करो। रिशाल को आराम करना है ।”

    रामू बदाम का तेल लेकर आता है और वरुणा देवी को देता है। वरुणा देवी तेल को लेकर रिशाल के कमरे में जाती हैं और उसके सर पर तेल से मालिश करने को कहती हैं, 

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करने के लिए कहती हैं, “बेटा, मैं तुम्हारे माथे की मालिश कर दूँ। इससे तुम्हारा सर दर्द कम होगा।”

    लेकिन रिशाल मना कर देता है, “नहीं, माँ। मैं ठीक हूँ। तुम्हें परेशान नहीं होना चाहिए।”

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल की बात नहीं मानती और कहती हैं, “नहीं, बेटा। तुम्हारी सेहत मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट है। मैं तुम्हारे माथे की मालिश करूँगी।”

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल को अपने पैरों के पास बैठने के लिए कहती हैं और खुद बेड पर बैठ जाती हैं। वह रिशाल के माथे पर तेल लगाती हैं और धीरे-धीरे मालिश करने लगती हैं, 

    रिशाल अपनी माँ की चम्पी से खुश होता है, लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है, 

    वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करती हैं और कहती हैं, “बेटा, तुम्हें आराम करना चाहिए । मैं तुम्हारे लिए खाना भिजवा दूंगी ऊपर ही । तुम्हें कुछ नहीं करना है। बस आराम करो।”

    रिशाल वरुणा देवी की बात मानता है और आराम करने लगता है। लेकिन उसके मन मे अमानत के साथ बीते पल ही रहता है…

    वरुणा अग्निहोत्री की चम्पी धीरे-धीरे रिशाल को भी अच्छा लगने लगता है।

    .. to be continue….

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    Rani Thakur

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  • 💞💞प्यार का नशा पार्ट 2 💞💞

    💞💞प्यार का नशा पार्ट 2 💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट
    • कहानी अब आगे,

    अमानत ने रिशाल की बात सुनी और उसकी आँखों में आंसू आ गए।

     “मुझे माफ कर दीजिए, मैं आपको नहीं जानती थी। मैं सिर्फ अपने भाई के साथ घूमने आई थी, और उसकी साथ खेलते हुए बस गलती से आपसे टकरा गयी मे माफ़ी मांगती हु pls माफ कर दीजिये “

    रिशाल ने अमानत को देखा और उसकी मासूमियत को देखकर उसका गुस्सा थोड़ा कम हो गया । लेकिन फिर भी वो अपने गुस्से को कण्ट्रोल नहीं कर पाया और वो गुस्सा अमानत पर निकल दी उसे काफ़ी कुछ सुना कर |” 

    अमानत ने रिशाल की बात सुनी जिससे उसके आँखों में आंसू आ गए। वह अपने भाई के साथ वहाँ से चली गई, लेकिन रिशाल की बातें उसके दिल में बस गईं…

    रिशाल ने अमानत को वहाँ से जाने दिया और अपनी मीटिंग में चला गया। लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही था। वह अमानत की मासूमियत और उसकी आँखों में आंसू देखकर थोड़ा परेशान हो गया था।

    मीटिंग खत्म होने के बाद, रिशाल अपने घर चला गया। लेकिन उसका मन अमानत के बारे में ही सोच रहा था। वह अपनी शर्ट के बटन को देखकर अचानक रुक गया। उसमें एक बाल फंसा हुआ था, जो अमानत का था।

    रिशाल को वो बाल को देख, अमानत की याद आ जाती है और वो उसी मे खो जाता है । वह सोच रहा था कि क्या उसने अमानत के साथ ठीक बर्ताव किया था। उसने अमानत को रुला दिया था, और अब उसे इसका अफसोस हो रहा था।

    रिशाल ने अपनी शर्ट उतारी और उस बाल को अपने हाथ में लिया। वह अमानत के बारे में सोच रहा था, और उसकी मासूमियत को याद कर रहा था।

    तभी एंट्री होती है, 

    वरुणा देवी, रिशाल की माँ, कमरे में आती हैं और रिशाल को अपने हाथ में कुछ पकड़े हुए देखती हैं। वह उसके पास जाती हैं और पूछती हैं,

    वरुणा अग्निहोत्री, “क्या है यह, रिशाल? तुम क्या कर रहे हो?”

    रिशाल जल्दी से उस बाल के टुकड़े को अपने हाथ में छिपा लेता है और कहता है, “कुछ नहीं, माँ। बस एक छोटी सी चीज़।”

    वरुणा देवी को लगता है कि रिशाल कुछ छिपा रहा है, लेकिन वह कुछ नहीं कहतीं। वह रिशाल के चेहरे को देखती हैं और पूछती हैं, “क्या हूआ सब ठीक है न , रिशाल? तुम थोड़े परेशान लग रहे हो।”

    रिशाल वरुणा देवी को देखता है और मुस्कराता है, “हाँ, माँ। सब ठीक है। बस थोड़ा थकान है।”

    वरुणा देवी रिशाल की बात मानती हैं और कहती हैं, “ठीक है, बेटा। तुम आराम करो। मैं तुम्हारे लिए चाय मंगवा देती हूँ।”

    जैसे ही वरुणा देवी जाती हैं, रिशाल अपने हाथ में छिपाए हुए बाल के टुकड़े को देखता है और अमानत के बारे में सोचता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है और उससे माफ़ी मांग सकता है, क्युकी कहीं न कहीं उसने गुस्से मे अमानत को कुछ ज़्यदा ही सुना दिया था और अब RA को उसकी लिए गिलट हो रहा था |” 

    वरुणा देवी रिशाल के लिए चाय लाती है और रिशाल के पास आकर बैठती हैं और पूछती हैं, “आज की मीटिंग कैसी रही, रिशाल? क्या हूआ सब ठीक रहा न ?”

    रिशाल को माँ की मीटिंग की बात सुन जुहू बिच पर हुई इंसिडेंट अमानत की याद आ जाती है और वह उसी में खो जाता है। वह वरुणा देवी की बात को सुनता है, लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही रहता है।

    … to be continue….

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    Rani Thakur

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