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श्रेणी: कहानी

दिल से दिल तक पहुंचने वाली एहसास कहानी बनती है।

  • बच्चों की यात्रा

    बच्चों की यात्रा

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में एक नन्हा चाँद रहता था। उसका नाम था चमकीला। चमकीला हमेशा आकाश में तारे के साथ खेलता और रात का नज़ारा देखने आता। लेकिन एक दिन, उसे एक सपना आया। उसने देखा कि वह धरती पर जाकर सारे बच्चों से मिलना चाहता है।

    चमकीला ने अपने दोस्तों, तारे और बादल से कहा, “मैं धरती पर जाना चाहता हूँ। मैं वहाँ के बच्चों के साथ खेलना चाहता हूँ।” तारे ने मुस्कुराते हुए कहा, “लेकिन चमकीला, तुम तो आकाश का चाँद हो। तुम धरती पर कैसे जा सकते हो?” 

    चमकीला ने कहा, “मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगा। मुझे सिर्फ एक मौका चाहिए।” उसने बादल से पूछा, “क्या तुम मुझे नीचे लाने में मदद करोगे?” बादल ने कहा, “बिल्कुल, मैं तुम्हें नीचे ले चलूँगा। लेकिन तुम्हें जल्दी आना होगा, वरना सूरज उग जाएगा।”

    तो चमकीला और बादल ने मिलकर एक योजना बनाई। बादल ने चमकीला को अपने विशाल पंखों में समेटा और धीरे-धीरे नीचे की ओर उड़ने लगा। जैसे ही वे धरती के करीब पहुँचे, चमकीला बहुत उत्साहित था।

    जब वे धरती पर पहुँचे, तो चमकीला ने देखा कि बच्चे खेल रहे थे, हंस रहे थे और खुश थे। चमकीला ने तुरंत बच्चों के बीच में आने की इच्छा व्यक्त की। बच्चे उसकी चमकीली रोशनी और सुंदरता को देखकर हैरान रह गए। उन्होंने चाँद से कहा, “क्या आप सच में चाँद हैं?

    चमकीला ने कहा, “हाँ, मैं ही हूँ! मैं यहाँ खेलने आया हूँ। चलो, हम साथ में खेलते हैं!” बच्चे बहुत खुश हुए और उन्होंने चमकीला के साथ खेलना शुरू कर दिया। वे दौड़ने लगे, कूदने लगे और चाँद की रोशनी में तारे की तरह चमकने लगे

    चमकीला ने देखा कि बच्चे कितने खुश हैं। वह उनके साथ खेलते हुए समय को भूल गया। लेकिन जल्द ही सूरज की किरणें फैलने लगीं। चमकीला को जल्दी समझ में आया कि अब उसे वापस आकाश में जाना होगा।

    बच्चों ने उसे रोकने की कोशिश की, “नहीं, चमकीला! मत जाओ!” लेकिन चमकीला ने कहा, “मुझे जाना होगा, लेकिन मैं हमेशा तुम सबके साथ रहूँगा। जब भी तुम रात में मुझे देखोगे, तो याद रखना, मैं तुम्हारे दोस्त हूँ।

    बादल ने फिर से चमकीला को अपने पंखों में समेटा और धीरे-धीरे उसे आसमान में ले जाने लगा। जब वह वापस चाँद पर पहुँचा, तो उसने अपने दोस्तों को बताया कि उसने धरती पर बच्चों के साथ कितना मजेदार समय बिताया

    उस रात, जब बच्चे सो रहे थे, उन्होंने चाँद को अपनी खिड़की से देखा और मुस्कुराने लगे। उन्हें पता था कि उन पर हमेशा चमकीला की नज़र है।

    सपने देखने और उन्हें पूरा करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। दोस्ती और खुशी हर जगह मिलती है, बस हमें उसे पहचानने का तरीका सीखना होता है।

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    Lakshmi Kumari

    NSW  अनुभवी लेखक -🥇

  • क्रुप

    क्रुप

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    सावरी का कॉलेज का पहला दिन था। वह अपनी नाक पर चश्मा लगाकर, गोरखा पहनकर कॉलेज गई। गोरखा उसका पहचान का हिस्सा बन चुका था, और वह इससे कभी पीछे नहीं हटी। लेकिन आज, उसके गोरखे का रंग और अधिक चमकीला लग रहा था। गोरखा पहनने के पीछे उसका एक गहरा कारण था, जिसे शायद किसी ने नहीं समझा।

     

    कॉलेज के नए माहौल में प्रवेश करते ही, लड़के और लड़कियां उसकी ओर टेढ़ी नजर से देखने लगे। कुछ ने उसे घूरा, कुछ बुदबुदाए और कुछ ने अदब से मुस्कुराते हुए एक-दूसरे से कहा, “क्या फर्क है, ये गोरखा पहनकर आई है!” सावरी के मन में एक डर सताने लगा। उसने हमेशा यही समझा था कि देखने के मामले में वह अलग है। उसके चेहरे पर एसिड के जले हुए निशान थे, जिन्हें वह किसी से छिपाना चाहती थी। उसे लगता था कि अगर किसी ने उसके चेहरे पर ध्यान दिया, तो सब उसकी उपहास करेंगे और उससे दूर रहना पसंद करेंगे।

     

    जब उसकी दोस्त जिया ने उससे पूछा, “तू गोरखा क्यों पहनती है, हर कोई तो पैंट-टॉप्स में आता है?” तो सावरी ने संकोच में सिर झुका लिया। उसका चेहरा धुंधला हो गया, जैसे उसने अपने अंदर की लड़ाई को छिपा लिया हो। उसने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आंखों के इशारे से जिया को समझाया कि यह एक गहरा विषय है, जिसे सुलझाना आसान नहीं है।

     

    कॉलेज के पहले दिन, सावरी ने अपनी पूरी कोशिश की कि वह किसी को अपने बारे में कुछ न बताने दे। लेकिन एक दिन, जब वह लाइब्रेरी में बैठी थी, उसने एक दोस्ताना आवाज सुनी। “तो तुम गोरखा में क्यों आती हो? क्या तुम्हें लगता है कि इससे तुम किसी से अलग लगती हो?” यह आवाज आयशा की थी, जो मुस्लिम समुदाय की एक लड़की थी। सावरी ने अपने दिल की धड़कन को धीमा करने की कोशिश की। उसने अपनी आंखों में खामोशी के साथ जवाब दिया, “बस, मेरी पसंद है।”

     

    आयशा ने उसकी आंखों में गहराई देखी और समझ गई कि सावरी कुछ छुपा रही है। वह पास आई और धीमी आवाज में समझाया, “तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। जब तुम अपनी पहचान को छुपाती हो, तो तुम खुद को एक बंधन में बांध लेती हो।” सावरी इस बात को सुनकर चुपचाप मुस्कुरा दी, लेकिन उसके दिल में एक हलचल थी। वह जानती थी कि आयशा सही कह रही है, लेकिन उसके लिए वह खुद को दिखाना बहुत कठिन था।

     

    दिन बीतते गए, और सावरी ने धीरे-धीरे कुछ दोस्तों को बना लिया। लेकिन कॉलेज में जब भी कोई नया आया, सभी के बीच चर्चाओं का केंद्र बनी हुई थी सावरी का गोरखा। सावरी ने यह भी पाया कि कुछ लड़के उसे देखकर मजाक करते, “वह तो गोरखा की रानी है!” उसे भले ही इस बात का दुख नहीं हुआ लेकिन वह महसूस करती थी कि कुछ लोग उसके प्रति संवेदनशील नहीं थे।

     

    एक दिन, कॉलेज में एक वर्कशॉप का आयोजन हुआ, जिसमें सभी को अपनी कहानी साझा करने के लिए कहा गया। सावरी ने सोचा कि शायद यहां वह अपनी कहानी साझा कर पाएगी। उसने अपनी आँखों को बंद किया और खुद को यह बताते हुए अंदर से मजबूत बनाने की कोशिश की, “मैं खुद को दूसरों के सामने क्यों नहीं रख सकती?” लेकिन जब उसकी बारी आई, तो वह झिझक गई।

     

    सावरी ने अपने गोरखे का पल्ला खींचते हुए एक गहरी सांस ली। वह जानती थी कि उसका यह क्षण उसके लिए कितना महत्वपूर्ण था। कॉलेज की वर्कशॉप में जब उसने अपने गोरखे को नीचे फेंका, तो कमरे में गहरी खामोशी छा गई। सभी की आंखें उसकी ओर थीं। कुछ क्षणों के लिए, उसने सोचा कि क्या उसने सही किया? लेकिन फिर, उसके मन में एक ताकत का अहसास हुआ। यह केवल उसका चेहरा नहीं था, बल्कि यह उसकी पूरी कहानी थी, जिसे उसने अब तक छिपाने की कोशिश की थी।

     

    “मैं सावरी हूँ,” उसने धीरे-धीरे कहना शुरू किया, “और मेरा ये चेहरा, इसने मुझे ताकत दी है। यह एक एसिड हमले का परिणाम है। मुझे पहले लगा कि अपने चेहरे को छिपाकर मैं खुद को औरों से अलग रख सकती हूँ, लेकिन आज मैंने समझा कि यह मुझे और भी अधिक खड़ा बनाता है।”

     

    कमरे में उसके शब्दों की गूंज ने सबको झकझोर दिया। कुछ लड़कियों के चेहरे पर जबरदस्त सहानुभूति का भाव था, और कुछ लड़कों की आंखों में अफसोस। सावरी ने अपनी कहानी को आगे बढ़ाया, “यह सब एक दिन हुआ जब मैं स्कूल जा रही थी। अचानक मेरे किसी परिचित ने मुझ पर एसिड फेंक दिया। मेरे चेहरे के जले हुए निशान एक दाग हैं, लेकिन यह मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा हैं। मैंने इससे लड़ाई लड़ी है, और आज मैं इसे अपने गोरखे के माध्यम से स्वीकार कर रही हूँ।”

     

    आगंतुकों में से एक लड़के ने पूछा, “ये गोरखा तुम्हारे लिए क्या मतलब रखता है?” सावरी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “यह मेरे साथ एक पहचान है। यह बताता है कि मैं खुद को कैसे देखती हूँ। मैं इसे पहन कर यह नहीं छिपा रही हूँ कि मैं अलग हूँ, बल्कि यह मेरे गर्व का प्रतीक है।”

     

    धीरे-धीरे, लोग उसकी बातों को सुनने लगे। उन्हें समझ में आने लगा कि सावरी का गोरखा सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि यह उसके आत्मविश्वास, संघर्ष और साहस का प्रतीक था। कोई भी व्यक्ति जब खुद को स्वीकार करता है, तो वह बाकी दुनिया को भी साहस देता है।

     

    उसने अपनी कहानी में यह भी कहा कि किस तरह पिछले दिनों में लोग उसके गोरखे को मज़ाक में लेते थे। “लेकिन अब मैं समझती हूँ कि यह उनका मामला है, मेरा नहीं। मैं अपनी पहचान के लिए शर्मिंदा नहीं हूँ। मेरे अंदर ऐसा कुछ नहीं है जिसकी मैं शर्म करूँ।” उसकी आवाज़ में अब आत्मविश्वास था।

     

    इस शेयरिंग से न केवल सावरी, बल्कि अन्य छात्रों ने भी अपने अपने अनुभव साझा किए। यह वर्कशॉप एक जागरूकता कार्यक्रम बन गई थी, जिसमें सबने अपने जीवन की कठिनाइयों के बारे में खुलकर बात की। एक अन्य लड़की ने कहा, “मुझे भी मेरी क्यूटनेस के लिए हमेशा सफेद त्वचा की जरूरत महसूस होती थी। लेकिन अब मुझे अपने असली रूप को स्वीकार करने की जरूरत है।”

     

    वर्कशॉप के अंत में, सभी छात्रों ने सावरी के प्रति एकजुटता दिखाई। उन्होंने उसे सराहा और कहा कि वह उनकी टेम्पलेट में हमेशा से थी। इसने सावरी के मन में एक नई ऊर्जा का संचार किया। वह जानती थी कि यह सिर्फ उसके लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए एक नई शुरुआत थी। उसने यह अनुभव किया कि सबका अनुभव अलग है, लेकिन सबकी लड़ाई एक ही है – खुद को स्वीकारना।

     

    उस दिन के बाद, सावरी ने कॉलेज में अपनी आवाज़ को और ऊँचा किया। इस तरह साबरी ने कुरूप चेहरे को सबके सामने गोरखे की मदद

    से अपनी एक नई पहचान बना ली। 

     

     

     

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    Lakshmi Kumari

    NSW  अनुभवी लेखक -🥇

  • तुझ बिन मैं कहाँ 💘💘

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    जैसे खुशबू बिना कोई फूल अधूरा हो,

    जैसे चाँद भी हो मगर उसकी चाँदनी कहीं खोया हो।

     

    तेरी बाहों में ही मेरी हर शाम सिमटती है,

    तेरे नाम से ही मेरी हर सुबह सँवरती है।

    तू पास हो तो धड़कनों को सुकून सा मिलता है,

    तेरी हँसी से ही मेरी दुनिया निखरती है।

     

    तेरे लबों की मिठास में मेरा हर ख्वाब घुल जाए,

    तेरी आँखों की गहराई में मेरा जहाँ डूब जाए।

    तू छू ले जो हल्के से, तो रूह तक महक उठे,

    तेरे इश्क में ये दिल हर हद से गुजर जाए।

     

    मैं तुझमें खो जाऊँ, तू मुझमें कहीं ठहर जाए,

    जैसे दो धड़कनें मिलकर एक कहानी कह जाएँ।

    ना कोई फासला रहे, ना कोई खामोशी दरमियां,

    बस तेरे मेरे प्यार का सिलसिला यूँ ही बह जाए।

     

    तुझ बिन मैं कहाँ — अब ये कहना भी जरूरी नहीं,

    तू ही मेरा सुकून है, तू ही मेरी हर खुशी।

    अगर तू साथ है, तो हर लम्हा जन्नत सा लगे,

    • वरना ये दिल तेरे बिना कहीं भी लगे नहीं।
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    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇

    चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं

    शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

  • “VIP सिलेंडर की महान गाथा”

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    सुबह की चाय में आज कुछ कमी सी है,

    चूल्हे की आँच भी जैसे थमी सी है।

    रसोई में खामोशी का राज हुआ,

    गैस का सिलेंडर अब कुछ नाराज़ हुआ।

    कहते हैं दूर कहीं युद्ध की आग है,

    दो देशों के बीच जलती हुई भाग-दौड़ है,

    पर असर यहाँ हर घर की थाली पर है,

    महंगाई की मार अब खाली जेब पर है।

    Narendra Modi जी ने भी सोचा होगा कुछ तो उपाय,

    पर जनता पूछे—”सर, ये महंगाई क्यों भाई?”

    सिलेंडर की कीमत जैसे चाँद को छू गई,

    और आम आदमी की सांसें भी रुक सी गई।

    अब रोटी बनती है हिसाब लगाकर,

    सब्ज़ी पकती है थोड़ा बचाकर,

    हंसी में भी अब हल्की सी आह है,

    “गैस जले तो ही घर में चाय है!”

    पर फिर भी उम्मीद का दीप जलता है,

    हर मुश्किल में भारत संभलता है।

    हँसते-हँसते हम ये दौर भी काटेंगे,

    थोड़ा कम पकाएँगे… पर दिल से खाएँगे।

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    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇

    चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं

    शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

  • आईना जो कभी टूटता नही…।।

    पढ़ने का समय : 5 मिनट

    • गांव की सुबह हमेशा की तरह धूप से नहीं, बल्कि उम्मीदों से जागती थी। मिट्टी की खुशबू, कच्चे रास्तों पर चलते लोग, और दूर मंदिर की घंटी—सब कुछ एक सुकून देता था। इसी गांव में रहती थी सावित्री, एक साधारण सी औरत, जिसकी आंखों में असाधारण हिम्मत थी। उसका जीवन आसान नहीं था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे—अपने बेटे अमन को पढ़ा-लिखाकर एक अच्छा इंसान बनाना।
    • सावित्री का पति कई साल पहले शहर कमाने गया था और फिर कभी लौटा नहीं। गांव वालों ने तरह-तरह की बातें बनाई—किसी ने कहा वो दूसरी शादी कर चुका है, तो किसी ने कहा वो अब इस दुनिया में नहीं। लेकिन सावित्री ने कभी हार नहीं मानी। उसने दूसरों के घरों में काम करके, खेतों में मजदूरी करके अपने बेटे को पाला।
    • अमन पढ़ाई में बहुत तेज था। स्कूल में हमेशा अव्वल आता था। गांव के मास्टर जी भी उसकी तारीफ करते नहीं थकते थे। लेकिन गांव के कुछ लोग उसकी तरक्की से खुश नहीं थे। उन्हें लगता था कि एक गरीब औरत का बेटा इतना आगे कैसे बढ़ सकता है।
    • एक दिन, गांव में एक बड़ा कार्यक्रम रखा गया—“सामाजिक विकास सम्मेलन।” इसमें शहर से बड़े-बड़े लोग आने वाले थे। गांव के प्रधान ने घोषणा की कि इस कार्यक्रम में गांव के होनहार बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। अमन का नाम भी उस सूची में था।
    • सावित्री बहुत खुश थी। उसने अपने बेटे के लिए नया कुर्ता खरीदा, जो उसने अपनी महीनों की बचत से लिया था। अमन भी बहुत उत्साहित था। उसे लग रहा था कि उसकी मेहनत रंग ला रही है।
    • कार्यक्रम का दिन आया। मंच सजा हुआ था, बड़े-बड़े नेता और अधिकारी आए हुए थे। भाषणों का दौर शुरू हुआ। सब लोग समाज की तरक्की, समानता और शिक्षा की बात कर रहे थे। शब्द बड़े-बड़े थे, लेकिन उनमें सच्चाई कितनी थी, यह कोई नहीं जानता था।
    • जब अमन का नाम पुकारा गया, तो सावित्री की आंखों में आंसू आ गए। वह गर्व से भर गई। अमन मंच की ओर बढ़ा। लेकिन तभी एक अप्रत्याशित घटना हुई।
    • गांव के एक प्रभावशाली आदमी, ठाकुर साहब, ने अचानक विरोध जताया। उन्होंने कहा, “यह लड़का इस सम्मान के लायक नहीं है। इसका बाप कौन है, किसी को नहीं पता। ऐसे बच्चों को मंच पर लाना समाज के लिए सही नहीं है।”
    • पूरे कार्यक्रम में सन्नाटा छा गया। लोग एक-दूसरे की ओर देखने लगे। किसी ने कुछ नहीं कहा। मंच पर बैठे अधिकारी भी चुप थे। जो लोग अभी तक समानता की बातें कर रहे थे, वे अब खामोश थे।
    • अमन वहीं रुक गया। उसके कदम थम गए। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन उसने खुद को संभालने की कोशिश की। सावित्री भीड़ में खड़ी थी, उसका दिल टूट चुका था। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी।
    • वह आगे बढ़ी और सीधे मंच पर चढ़ गई। सब लोग हैरान रह गए। उसने माइक उठाया और बोली—
    • “आज आप सब समाज की बात कर रहे हैं। लेकिन यह कैसा समाज है, जहां एक बच्चे की मेहनत से ज्यादा उसके बाप का नाम मायने रखता है? मेरा बेटा मेहनती है, ईमानदार है। क्या यह काफी नहीं है?”
    • उसकी आवाज कांप रही थी, लेकिन उसके शब्दों में ताकत थी। उसने आगे कहा—
    • “अगर बाप का नाम ही सब कुछ है, तो फिर उन बच्चों का क्या, जिनके बाप उन्हें छोड़कर चले गए? क्या उन्हें जीने का हक नहीं? क्या उनके सपनों की कोई कीमत नहीं?”
    • भीड़ में कुछ लोग सिर झुकाने लगे। लेकिन ठाकुर साहब अब भी अड़े हुए थे। उन्होंने कहा, “समाज नियमों से चलता है, भावनाओं से नहीं।”
    • सावित्री ने जवाब दिया, “समाज इंसानों से बनता है, नियमों से नहीं। और अगर नियम इंसानियत को कुचल दें, तो उन्हें बदलना ही चाहिए।”
    • यह सुनकर कुछ लोग तालियां बजाने लगे। धीरे-धीरे पूरा माहौल बदलने लगा। जो लोग चुप थे, वे अब बोलने लगे। मास्टर जी आगे आए और बोले—
    • “अमन इस गांव का सबसे होनहार बच्चा है। अगर उसे सम्मान नहीं मिलेगा, तो यह हम सबकी हार होगी।”
    • अधिकारियों को भी अब समझ आ गया कि चुप रहना सही नहीं है। उन्होंने अमन को मंच पर बुलाया और उसे सम्मानित किया। तालियों की गूंज पूरे गांव में फैल गई।
    • लेकिन यह जीत सिर्फ अमन की नहीं थी। यह जीत उस सोच की थी, जो समाज को बदलना चाहती है।
    • कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी लोग इस घटना की चर्चा करते रहे। कुछ लोग अब भी ठाकुर साहब के साथ थे, लेकिन बहुत से लोग अब बदल चुके थे। उन्हें एहसास हो गया था कि समाज का असली चेहरा वही है, जो हम अपने कर्मों से दिखाते हैं, न कि अपने शब्दों से।
    • अमन ने उस दिन सिर्फ एक पुरस्कार नहीं जीता, बल्कि उसने समाज को एक आईना दिखाया—एक ऐसा आईना, जो टूटता नहीं, बल्कि सच्चाई को साफ-साफ दिखाता है।
    • सालों बाद, अमन एक बड़ा अधिकारी बना। उसने अपने गांव में एक स्कूल खोला, जहां हर बच्चे को बिना भेदभाव के शिक्षा मिलती थी। सावित्री अब बूढ़ी हो चुकी थी, लेकिन उसकी आंखों में वही चमक थी।
    • एक दिन, गांव में फिर एक कार्यक्रम हुआ। इस बार मंच पर अमन था, और सामने वही लोग बैठे थे। उसने अपने भाषण में कहा—
    • “समाज बदलता है, जब हम बदलते हैं। उस दिन मेरी मां ने जो कहा था, वह सिर्फ मेरे लिए नहीं था, बल्कि हम सबके लिए था। हमें यह तय करना है कि हम कैसा समाज बनाना चाहते हैं—वह जो लोगों को तोड़ता है, या वह जो उन्हें जोड़ता है।”
    • भीड़ में बैठे लोग चुपचाप सुन रहे थे। इस बार उनकी खामोशी में शर्म नहीं, बल्कि समझ थी।
    • कहानी यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि समाज की कहानी कभी खत्म नहीं होती। हर दिन, हर जगह, यह कहानी दोहराई जाती है। फर्क सिर्फ इतना है कि कहीं कोई सावित्री बोलने की हिम्मत करती है, और कहीं कोई चुप रह जाता है।
    • अंत में, यह कहानी हमें एक सवाल छोड़ जाती है—
    • क्या हम उस समाज का हिस्सा बनना चाहते हैं, जो दूसरों को उनके हालात से आंकता है, या उस समाज का, जो उन्हें उनके प्रयासों से पहचानता है?
    • क्योंकि असली चेहरा वही है, जो हम रोज आईने में देखते हैं… और वह आईना कभी झूठ नहीं बोलता।
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    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇

    चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं

    शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

  • एक गलती

    एक गलती

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    सौरभ कॉलेज का बिगड़ा हुआ लड़का था, जिसे पढ़ाई में कोई रुचि नहीं थी। वो हमेशा क्लास में लेट आता और पढ़ाई से ज्यादा समय नशे और दोस्तों के साथ बिताता था। एक दिन, कॉलेज में एक नया लड़का आया, जिसका नाम आकाश था। आकाश बेहद गंभीर और संजीदा था, लेकिन उसकी सोच और व्यवहार में एक अलग तरह की गहराई थी।

    आकाश ने सौरभ को पहले दिन ही देखा और समझा कि वह एक कठिन दौर से गुजर रहा है। उसने सौरभ से दोस्ती करने का फैसला किया। शुरुआत में सौरभ ने इसे हल्के में लिया, लेकिन आकाश की मेहनत और दोस्ती ने धीरे-धीरे उसका मन बदल दिया। आकाश ने सौरभ को समझाया कि जीवन में सही दिशा में चलना कितना ज़रूरी है और पढ़ाई की अहमियत को जाने बिना भविष्य को संवारना मुश्किल है।

    एक दिन, आकाश ने सौरभ को एक किताब दी और कहा, “ये किताब तुझे सोचने पर मजबूर करेगी।” सौरभ ने शुरुआत में अनमने तरीके से पढ़ना शुरू किया, लेकिन जैसे-जैसे वह पढ़ता गया, उसके अंदर की जिज्ञासा जाग गई। आकाश ने उसे न केवल पढ़ाई की दिशा में प्रेरित किया, बल्कि उसे अपनी जिंदगी के प्रति नई दृष्टि भी दी।

    एक दिन सौरभ ने आकाश से कहा चलो क्लब चलते हैं आकाश तो माना करते है लेकिन सौरभ के जिंदा करने पर वो चला जाता हैं। लेकिन ओह सौरभ से एक भूल हो जाती है मजाक मजाक में उसने आकाश को दारू पीला देता है

    सौरभ ने जब देखा कि आकाश धीरे-धीरे नशे के असर में डूबता जा रहा है, तो उसे यह एहसास हुआ कि उसकी ये मजाकिया हरकत कहीं न कहीं उनकी दोस्ती के लिए खतरा बन गई है। शुरू में तो वह सोचता रहा कि वह बस थोड़ी मस्ती कर रहा है, लेकिन जैसे-जैसे आकाश की स्थिति बिगड़ती गई, सौरभ को समझ में आया कि यह मजाक की सीमा से बाहर जा चुका है।

    उसने जल्दी से आकाश को पकड़ा और उसे बाथरूम ले जाकर उसे पानी पीने के लिए कहा। “आकाश, मैं माफ़ी चाहता हूँ, मैं जानता था कि मैंने मजाक किया, लेकिन मैंने तुम्हें बहुत अधिक पीने दिया। तुम ठीक हो जाओ,” सौरभ ने कहा, उसकी आवाज़ में चिंता थी।

    आकाश ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं, सौरभ। लेकिन तुम समझते हो कि ये मजाक और जिम्मेदारी का मिक्सचर नहीं होता है। मैं जानता था कि तुम मुझे उत्साहित करने के लिए ये कर रहे हो, लेकिन कभी-कभी मजाक अपनी सीमाएं पार कर जाता है।”

    आकाश की तबियत धीरे धीरे ओर बिगड़ती जा रही थी।

    सौरभ ने आकाश को बाथरूम में लिटाया और उसके माथे पर पानी का छींटा मारकर उसे जगाने की कोशिश की। आकाश की आंखें थकी-थकी थीं, और उसके शरीर में झुनझुनी आ चुकी थी। सौरभ को भय लगने लगा था। जब उसे लगा कि आकाश बेहोश हो रहा है, उसने तुरंत उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन आकाश की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी।

    “आकाश! तुम्हें सुनाई दे रहा है? तुम ठीक हो जाओ!” सौरभ ने चिल्लाया। वह बेताब हो गया था, और उसके अंदर एक भयावह डर समाने लगा। आकाश की तबियत और बिगड़ती गई, और अंततः उसे पता चला कि उसके मजाक ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। उसकी उंगलियां कांपने लगीं और उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

    सौरभ बिना समय गंवाए, अपने दोस्त को अपने कंधों पर लेकर बाहर की ओर भागा। क्लब का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। सभी लड़के-लड़कियों की नजरें उन पर थी, और कुछ लोग उनकी मदद के लिए आए। “क्या हुआ? क्या उसने कुछ खाया या पीया?” एक छात्र ने पूछा।

    “वो ठीक नहीं है! उसे जल्दी अस्पताल लेजाने की जरूरत है!” सौरभ ने तेजी से उत्तर दिया, उसके गले में एक भारी भावुकता थी। भीड़ में से कुछ छात्र मदद के लिए आगे बढ़े और उन्होंने आकाश को सहारा दिया। सौरभ ने अपने दोस्तों को कहा, “किसी को एम्बुलेंस बुलाने दो! हमें जल्दी करना होगा!”

    कुछ ही क्षणों में, एम्बुलेंस वहां पहुंची। सौरभ ने आकाश को सारा ध्यान देकर एम्बुलेंस में लिटाया। उसकी आंखों में आंसू थे, और दिल में पछतावा। “मैंने तुम्हें इस हालत में नहीं देखना चाहा था, आकाश,” वह बुदबुदाया। आकाश की आंखें अब आधी बंद थीं, लेकिन उसने धीरे से सौरभ को देखा।

    “सौरभ,” उसने मुश्किल से कहा, “यह तुम्हारी गलती नहीं है। लेकिन हम सबको अपनी सीमाएं जाननी चाहिए।”

    सौरभ ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “मैंने तुम्हें समझने की बजाय मजाक में लेने की गलती की। मैं नहीं जानता था कि यह सब इतनी गंभीरता से बदल जाएगा।” वह खुद को कोसने लगा। एम्बुलेंस में डॉक्टर ने जांच शुरू की, और सौरभ ने अपनी दीर्घकालिक चिंता को बाहर नहीं आने दिया।

    जब एम्बुलेंस अस्पताल पहुंची, तो सौरभ आकाश के
    माथे पर हाथ रखे हुए उसके साथ आया। अस्पताल के अंदर, डॉक्टर और नर्सों ने तुरंत आकाश का इलाज शुरू किया। सौरभ की धड़कनें तेजी से चल रही थीं। वह इंतज़ार के दौरान अपने किए पर पछताने लगा। उसने सोचा, “अगर मैंने उस दिन मजाक नहीं किया होता, तो आज यह सब नहीं होता।”

    कुछ समय बाद, एक डॉक्टर ने आकर सौरभ से कहा, “उसकी हालत स्थिर है, लेकिन उसे कुछ समय की ज़रूरत होगी। हम उसे सामान्य स्थिति में वापस लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।” सौरभ ने राहत की सांस ली, लेकिन उसका दिल अभी भी भारी था।

    आकाश थोड़ी देर बाद होश में आया। उसने धीरे-धीरे आँखें खोलीं और सौरभ को देखा। “सौरभ, क्या हुआ?” उसने मिचली आवाज़ में पूछा।

    “तुम ठीक हो, लेकिन तुमने बहुत ज़्यादा पी लिया था। मुझे माफ कर दो, मैंने तुम्हारे साथ जो किया वो गलत था,” सौरभ ने कहा, उसकी आँखों में आँसू थे।

    आकाश ने मुस्कुराकर कहा, “मैं जानता हूँ, तुमने क्या सोचा। लेकिन याद रखो, ज़िन्दगी में मजाक और जिम्मेदारी के बीच में एक सही संतुलन होना चाहिए। हर बात में सीमाएं होती हैं।”

    सौरभ ने सिर झुकाया और सोचा कि आकाश की सोच कितनी मज़बूत है, भले ही वह खुद मुश्किल में था। “मैंने तुम्हें समझा नहीं, दोस्त। कभी-कभी हम अपनी मस्ती के लिए दूसरों को खतरे में डालते हैं।”

    आकाश ने कहा, “जो हुआ, वह हुआ। हम समझने लगे हैं कि हमारी दोस्ती का क्या महत्व है। हम एक-दूसरे के लिए क्या कर सकते हैं, यह जानना ज्यादा ज़रूरी है।”

    अस्पताल में कुछ समय बिताने के बाद, आकाश ठीक होने लगा। इस घटना ने सौरभ को गहराई से प्रभावित किया। उसने पढ़ाई में भी ध्यान देना शुरू कर दिया, और आकाश के साथ विचार साझा करने लगा।

    सौरभ ने आकाश से कुछ किताबें उधार लीं और उनके बारे में चर्चाएं करने लगा। आकाश की प्रेरणादायक बातें अब सौरभ के लिए एक नए सिरे से जीवन जीने का माध्यम बन गईं। अब वह अपनी ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना चाहता था।

    उनकी दोस्ती अब और भी मजबूत हो चुकी थी। आकाश ने सौरभ को सिखाया कि सुधार केवल तब संभव है जब हम अपने गलतियों से सीखते हैं। सौरभ ने आकाश को वादा किया कि वह अपने जीवन को सही दिशा में ले जाएगा, और वह अपने लक्ष्य की ओर मेहनत करेगा।

    “जब हम एक-दूसरे का साथ देंगे, तो हम और भी मजबूत होंगे,” सौरभ ने कहा।

    “बिल्कुल, यही दोस्ती का असली अर्थ है,” आकाश ने मुस्कुराते हुए कहा।

    ऐसे ही, सौरभ और आकाश की दोस्ती ने साबित कर दिया कि सही दोस्त की मौजूदगी ही इंसान को सही दिशा में ले जा सकती है और मुश्किल परिस्थितियों में मदद कर सकती है।

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    NSW  अनुभवी लेखक -🥇

  • सोनिया का सपना

    सोनिया का सपना

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    सोनिया एक चकाचौंध से भरे शहर में रहने वाली एक होशियार और महत्वाकांक्षी लड़की थी। उसका सपना था कि वह शिक्षा के क्षेत्र में अपने पांव जमा सके और एक शिक्षक बनकर न सिर्फ अपने सपनों को साकार करे, बल्कि अपने पिता का सपना भी पूरा करे। उसके पिता एक शिक्षक थे और वे हमेशा सोनिया को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करते रहे थे।

    सोनिया कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी, जहाँ उसे अपने अध्यापकों से लेकर सहपाठियों तक सभी का प्यार और सम्मान मिलता था। वह पढ़ाई में अव्‍वल थी और अपने भविष्य को लेकर बेहद गंभीर थी। लेकिन, अचानक उसकी ज़िंदगी में एक मोड़ आया। कॉलेज में उसकी मुलाकात अजय से हुई, जो उसकी कक्षा का होशियार लड़का था। दोनों के बीच दोस्ती जल्दी ही गहरी हो गई और प्यार का रंग भी उन पर चढ़ने लगा।

    सोनिया ने अपने सपने को छोड़कर अजय के साथ विवाह करने का निर्णय लिया। उसके मन में एक ख्याल था कि शादी के बाद वह अपने सपनों को फिर से आगे बढ़ा सकेगी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उसे एहसास हुआ कि विवाह के बाद उसकी जिम्मेदारियों में इजाफा हो गया। घर, परिवार और अन्य ज़िम्मेदारियों ने उसे अपने सपनों से दूर कर दिया।

    अजय एक व्यवसाय में व्यस्त हो गया और सोनिया को घर के कामकाज और परिवार की देखभाल में वक्त गुजारना पड़ा। धीरे-धीरे उसने अपने अध्यापक बनने के सपने को भुला दिया। उसे यह समझ में आया कि प्यार में पड़ने के चक्कर में उसने अपनी शिक्षा और अपने भविष्य को अधूरा छोड़ दिया।

    उस समय सोनिया को यह एहसास हुआ कि सपने सिर्फ देखने से नहीं पूरे होते; उन्हें पाने के लिए मेहनत और सही निर्णय लेना जरूरी है। उसने अपने पिता के सपने को याद करते हुए ठान लिया कि वह अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करेगी और अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

    सोनिया ने अपने सपनों को जीवित रखने का फैसला किया। पहले कुछ महीने चुनौतीपूर्ण रहे, क्योंकि उसे घर के कामों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई के लिए समय निकालना था। लेकिन उसने दृढ़ निश्चय किया कि अब वह अपने लक्ष्य को हासिल करेगी।

    वह दिन की शुरुआत जल्दी करती, सुबह के नाश्ते के बाद कुछ समय पढ़ाई के लिए समर्पित करती और फिर घर के दूसरे काम करती। जब उसके पति अजय घर आते, वह उनकी मदद करती, लेकिन पढ़ाई का समय हमेशा अपने लिए निर्धारित रखती। धीरे-धीरे अजय ने सोनिया के प्रयासों की सराहना की और उसे प्रोत्साहित करने लगा।

    सोनिया ने कॉलेज के अपने शिक्षकों से संपर्क किया और अपने पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए फिर से प्रवेश लिया। उसने कड़ी मेहनत की, और अपने बीच के खोए हुए वर्षों को जल्दी से पूरा करने के लिए रात-रात भर पढ़ाई की। उसने अपने साथियों से मदद ली, अध्ययन समूहों में शामिल हुई और फिर से अपने पैरों पर खड़ी होने में सफल हो गई।

    सोनिया ने अपनी मेहनत के फल देखने शुरू कर दिए। उसने परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए, और अंततः वह स्नातक की डिग्री प्राप्त करने में सफल रही। उसे अपनी मेहनत का फल मिला और वह अपने कॉलेज में टॉपर भी बनी।

    अब सोनिया अपने पिता के सपने को पूरा करने के एक कदम और करीब थी। उसने तुरंत टीचर ट्रेनिंग की पढ़ाई शुरू की। उसके मन में एक आध्यात्मिक उद्देश्य जाग उठा था कि वह न केवल एक शिक्षक बनेगी, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत भी।

    अजय, जो पहले थोड़ा सहज था, अब देख रहा था कि सोनिया ने कितनी मेहनत की है और उसने अपने सपनों को पुनर्जीवित किया है। उसने भी उसे सपोर्ट करना शुरू किया, और दोनों ने मिलकर एक खुशहाल जीवन जीने का संकल्प लिया।

    सोनिया टीचर ट्रेनिंग में भी अव्‍वल रही और उसे अपनी कठिनाईयों से उबरना इतना सरल नहीं था। लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। आखिरकार, एक दिन वह अपने पहले क्लासरूम में खड़ी थी। जब उसने अपने छात्रों का सामना किया, तो उसे अपने सपनों की उस हकीकत का एहसास हुआ जिसका वह लंबे समय से इंतजार कर रही थी।

    उसे उन बच्चों के चेहरों में वो संभावना दिखाई दी, जिसे उसने कभी अपने अंदर देखा था। सोनिया ने उन्हें पढ़ाने का काम सिर्फ सेकेण्डरी या हाई स्कूल की किताबों तक सीमित नहीं रखा; उसने उन्हें जीवन के महत्त्वपूर्ण पाठ भी पढ़ाए। उसने उन्हें सिखाया कि सपने देखना और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करना सबसे ज्यादा जरूरी है।

    सोनिया का संघर्ष न केवल उसके लिए, बल्कि उसके परिवार और सभी छात्रों के लिए प्रेरणा बन गया। उसने यह साबित कर दिया कि जीवन में चुनौतियाँ आ सकती हैं, लेकिन अगर अपने सपनों के प्रति समर्पण हो, तो कोई भी बाधा उसे आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती।

    सोनिया की शिक्षिका बनने की यात्रा ने उसे न केवल एक पेशेवर बना दिया, बल्कि एक सशक्त महिला भी बना दिया। जैसे-जैसे वह अपने छात्रों के साथ समय बिताती, उसने देखा कि कई बच्चे उनके सपनों को पाने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति, सामाजिक प्रथाओं और सीमाओं ने उनके सपनों के रास्ते में बाधाएं डाली थीं। सोनिया ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया और अपने छात्रों की मदद करने के लिए एक नया रास्ता चुनने का निश्चय किया।

    सोनिया ने छात्रों की शिक्षा में सुधार लाने के लिए एक नई पहल शुरू की। उसने स्कूल में ट्यूशन क्लासेस आयोजित कीं, जहाँ उसने वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का फैसला किया। उसकी इस पहल ने स्कूल में पठन-पाठन की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद की और कई बच्चों को उनकी पढ़ाई के प्रति उत्साहित किया। सोनिया की मेहनत और प्रतिबद्धता ने उसके छात्रों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।

    उसने अन्य शिक्षकों को भी इस मुहिम में अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया। उसने एक वर्कशॉप का आयोजन किया जिसमें शिक्षकों को समर्पण और प्रेरणा के साथ छात्रों को पढ़ाने की तकनीक सिखाई गई। इस वर्कशॉप में यह सिखाया गया कि किस तरह से बच्चों के साथ सही से संवाद किया जाए और उनके समस्याओं को समझा जाए।

    सोनिया के इस प्रयास से न केवल छात्रों की शिक्षा में सुधार हुआ, बल्कि शिक्षकों के बीच भी एक नई ऊर्जा आई। सभी ने मिलकर एक समुदाय बनाया जो पढ़ाई को आसान और मजेदार बनाने के लिए कार्य कर रहा था। सोनिया का नाम अब न केवल उसके विद्यालय में, बल्कि पूरे शहर में सुनाई देने लगा।

    समय के साथ, सोनिया की शिक्षिका के रूप में पहचान बढ़ी और उसे विभिन्न शैक्षणिक मंचों पर बोलने के लिए आमंत्रित किया जाने लगा। उसने अपने अनुभव साझा किए और अन्य युवाओं को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया। इसके अलावा, उसने महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी बात की, यह बताते हुए कि कैसे शिक्षा एक महिला को अपने सपनों को पूर्ण करने की शक्ति देती है।

    अपनी सफलता के साथ, सोनिया ने एक चैरिटी फाउंडेशन शुरू किया, जिसका उद्देश्य कमज़ोर और वंचित बच्चों को शिक्षा प्रदान करना था। उसने इस फाउंडेशन के माध्यम से कई बच्चों को scholarships प्रदान की और उनके लिए आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई।

    सोनिया के इस प्रयास ने न केवल उसके जीवन को बदल दिया, बल्कि कई बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन लाया। उसकी कहानी ने पूरे समाज में एक नई सोच को जन्म दिया। लोग अब शिक्षा को केवल एक जरूरत नहीं, बल्कि विकास और संभावनाओं का रास्ता मानने लगे।

    समाज में सोनिया का योगदान और उसकी प्रेरक कहानी ने उसे एक रोल मॉडल बना दिया। वह हमेशा इस विश्वास में रही कि एक शिक्षिका न केवल पाठ्यक्रम पढ़ाती है, बल्कि वह अपने छात्रों के जीवन में एक दिशा दिखाने का भी काम करती है।

    सोनिया ने खुद को संजोते हुए अपने पति अजय के साथ मिलकर परिवार को भी संभाला। अजय उसके सपनों का सबसे बड़ा समर्थक बन गया था। उसने सोनिया के सभी कार्यों में उसका साथ दिया और उन्हें प्रोत्साहित किया। दोनों ने मिलकर एक खुशहाल परिवार बनाया, जिसमें सपनों को साकार करने का मजा था।

    आखिरकार, सोनिया ने अपने पिता के सपनों को सच करने के साथ-साथ अपने अपने सपनों को भी पूरा किया। उसकी जीवन यात्रा ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, समर्पण और शिक्षा किसी भी बाधा को पार कर सकती है। उसने यह दिखाया कि अगर आप अपने सपनों की ओर निरंतर बढ़ते रहें, तो कोई भी चीज़ आपको रोक नहीं सकती।

    सोनिया की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों का पीछा कर रहा है। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, अगर आपके पास जुनून और दृढ़ता हो, तो आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।

    Lakshmi Kumari

     

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    Lakshmi Kumari

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  • 💞💞 प्यार का नशा..पार्ट 9💞💞

    💞💞 प्यार का नशा..पार्ट 9💞💞

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    कहानी अब आगे,

     

    अमानत को यह सुनकर गुस्सा आता है, लेकिन वह डरी हुई भी है। वह रिशाल से कहती है, “मैं तुम्हारी गुलाम नहीं हूँ। मैं अपने फैसले खुद लेती हूँ और आगे भी लुंगी ।”

     

     

    रिशाल हँसता है और कहता है, “तुम्हारे फैसले अब मैं लूँगा। तुम्हारी जिंदगी मेरे हाथ में है। तुम्हारा भाई मेरे पास है मेरी हर बात माननी ही होंगी अगर भाई से इतना प्यार है तो, ताकि मे तुम्हारे भाई को सही सलामत छोड़ दू अब उसकी आजादी तुम्हारे हाथो मे है तो तुम सोच लो क्या करना है क्या नहीं मे तब तक यहाँ बैठता हु ये कहते हुए रिशाल अग्निहोत्री अमानत का हाथ छोड़ देता है और खुद सोफे पर बैठ पैर पर पैर राख कर डेविल स्माइल के साथ अमानत के तरफ देखने लगता है !!!!!

     

     

    अमानत को लगता है कि वह फँस गई है। वह सोचती है कि कैसे रिशाल से खुद को और अपने भाई को बचा सकती है। “

     

    वह रिशाल से कहती है, “मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी , लेकिन तुम्हें मुझे प्रोमिस करना होगा की तुम मेरे भाई को कुछ भी नहीं करोगे और वो सुरक्षित होगा जहा भी होगा मेरी उससे बात करवाओगे ताकि मे उसे कह पाऊ की कोई बात नहीं है सब ठीक है और वो डरे नहीं वो मेरे छोटा भाई है मुझे उसकी फ़िक्र है और मे उसे अच्छे से जनता हु अभी वो डर रहा होगा की आखिर हूआ क्या जो उसे और मुझे यु अलग कर दिया गया है ।”

     

     

    रिशाल मुस्कराता है और कहता है, “मैं तुम्हे ये प्रॉमिस तो करना नहीं चाहता क्युकी में रिशाल अग्निहोत्री हु और रिशाल अग्निहोत्री का जब मन जो करने का वही करता है, पर मे इतना भी बुरा नहीं हु इसीलिए चलो मे प्रॉमिस करता हु की मे तुम्हारे भाई को कुछ भी नहीं करूँगा पर wait wait wait…., 

     

    अमानत,”अब क्या हूआ तुम वादा करो मेरे भाई को कुछ भी नहि करोगे और उसे सही सलामत रखोगे बोलो?”

     

    रिशाल अग्निहोत्री, ” हाँ बिलकुल पर तब तक ही जब तक तुम मेरी गुलामी करोगी और मेरी कहीं हर बात को मानोगी उसके बाद ही मे तुम्हे ये वादा कर सकता हु तो बोलो मंजूर है???? “

     

    क्या अमानत रिशाल को वादा कर पाएगी कि वह उसकी गुलाम बन कर ही रहेगी ? क्या वह अपने भाई को बचाने के लिए बन जाएगी गुलाम ?

     

     

     

    आज के लिए बस इतना ही, कल फिर मिलेंगे कहानी के एक नए भाग के साथ, तब तक अपना ख्याल रखिये | 

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇

    जो हमसे दूर हुए..

    हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

  • अधूरा इश्क

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    अधूरा इश्क

     

    EPISODE 1 — पहली दस्तक

     

    रागिनी को हमेशा से अंधेरे कमरों से अजीब-सी खींच महसूस होती थी।

    उसके नए किराए के घर में एक कमरा था जिसका दरवाज़ा ताला लगा था। मालिक ने कहा था “कभी मत खोलना।”

     

    एक रात बिजली चली और वही कमरे से हल्की दस्तक आई। रागिनी डरते हुए बोली “क…कौन?”

     

    अंदर से एक धीमी, टूटी आवाज़ आई “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

     

    अगली बार बिजली जाने पर आवाज़ फिर आई।

    इस बार कमरे का ताला अपने आप गिरा।

    और अंदर था… सिर्फ़ अंधेरा।

     

    पर उसी अंधेरे में एक परछाई उभर रही थी एक लड़का… बेहद खूबसूरत, पर धुंध जैसा।

     

    उसने कहा “मेरा नाम आरव है… मैं इंसान नहीं हूँ, पर तुम्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचाऊँगा।”

     

    रागिनी चाहकर भी उस कमरे से दूर नहीं रह पाती।

    आरव उसे हर रात मिलता कभी बातों में, कभी बस खामोशी में।

     

    रागिनी ने महसूस किया कि वह आरव की तरफ़ खिंच रही है… डर और प्यार के बीच फँसकर।

     

    आरव हमेशा कहता “मेरी दुनिया में मत आना रागिनी… वो अंधेरा तुम्हें वापस नहीं लौटने देगा।”

     

    एक दिन रागिनी ने पूछ ही लिया “तुम कौन हो? क्या हो?”

     

    आरव की आँखों में अजीब-सा दर्द चमका“एक गलती ने मुझे इस दुनिया के बीच कहीं अटका दिया है… ना मैं ज़िंदा हूँ, ना मरा हुआ।”

     

    रागिनी उससे और गहराई से जुड़ने लगी, वह डर खत्म हो चुका था। बस एक अजीब-सी मोहब्बत जन्म ले चुकी थी।

     

    अब रागिनी हर दिन सूरज ढलने का इंतज़ार करती।

    रात होते ही आरव उसके पास आ जाता उसे कहानियाँ सुनाता, कभी हवा बनकर उसके बालों को छूता, कभी उसके आँसू पोंछता।

     

    दोनों जानते थे ये रिश्ता नामुमकिन है। पर इश्क़ कभी इजाज़त थोड़े ही पूछता है।

     

    एक रात कमरे में सिर्फ आरव नहीं आया… उसके पीछे कुछ और भी था।

     

    काली, गुर्राती परछाइयाँ जो रागिनी पर झपट पड़ीं।

     

    आरव चिल्लाया “भागो! ये मेरी दुनिया के भूखे साए हैं—तुम्हें ले जाएँगे!”

     

    आरव ने उन्हें रोक लिया… पर उसके शरीर का आधा हिस्सा अंधेरे में गायब हो गया।

     

    रागिनी रो पड़ी “मैं तुम्हें खो दूँगी क्या?”

     

    आरव बोला “मैं पहले ही खो चुका हूँ…”

     

    आरव कमज़ोर पड़ने लगा। वह कहने लगा “रागिनी… जब तक मैं हूँ, तुम सुरक्षित हो। पर मेरा समय ख़त्म हो रहा है। इस कमरे को छोड़कर किसी और शहर चली जाओ।”

     

    पर रागिनी ने साफ़ कह दिया “इश्क़ भागता नहीं, लड़ता है।”

     

    उस रात हवा में अजीब सरसराहट थी। कमरा खुद-ब-खुद खुल गया। अंधेरा गाढ़ा और डरावना।

     

    आरव ने रागिनी का हाथ पकड़ लिया पहली और आखिरी बार… उसका स्पर्श ठंडा, पर गहरा था।

     

    “मेरे साथ मत आना…”

     

    पर रागिनी ने कहा “मैं अकेली रह ही नहीं सकती तुम्हारे बिना।”

     

    अंधेरा दोनों के चारों तरफ घूमने लगा।

     

    अगली सुबह घर का दरवाज़ा खुला मिला। कमरा बिल्कुल शांत। आरव की परछाई गायब थी। रागिनी भी गायब थी।

     

    बस दीवार पर उभरी एक धुँधली लाइन “अंधेरों में किया इश्क़… दोनों को उजाला कभी नहीं मिला।”

     

    कई साल बाद, उसी घर में नए किरायेदार आते हैं।

    पहली ही रात, बिजली जाती है… और बंद कमरे से आवाज़ आती है “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

     

    इस बार कमरे में दो परछाइयाँ दिखाई देती हैं एक धुँधला लड़का… और उसके कंधे पर सिर रखे एक लड़की।

     

    दोनों की आँखों में एक ही बात उनकी कहानी कभी पूरी नहीं हुई… और शायद कभी होगी भी नहीं।

     

    “अंधेरों का इश्क़… अधूरा ही सही, पर अमर रहा।”

     

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    Lakshmi Kumari

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  • 💞💞प्यार का नशा.. पार्ट 8💞💞

    💞💞प्यार का नशा.. पार्ट 8💞💞

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    कहानी अब आगे, 

     

    अमानत फार्महाउस के अंदर कैद तो हो जाती है, पर उसके मन में कई सवाल हैं। वह सोचती है कि रिशाल अग्निहोत्री की दुश्मनी क्या है उससे और क्यों वह उसके भाई व्योम को खतरे में डाल रहा है, और उसके साथ ये सब आखिर क्यों कर रहा है?” 

     

    अमानत सोच लेती है की अबकी रिशाल आएगा तो वो रिशाल से पूछेगी , “की मुझे बताये , उसे मुझसे क्या चाहता है ? मेरे भाई को मुझे वापस कर दे उसे कुछ भी नहीं होना चाहिए अगर उसे कुछ हूआ तो वो भी नहीं जी पायेगी ।”

     

     अमानत को लगता है कि उसका भाई खतरे में है। वह सोचती है कि कैसे अपने भाई को बचा सकती है और रिशाल से उसे आजाद करवा सकती है।

     

     

    क्या अमानत अपने भाई को बचा पाएगी? क्या वह रिशाल के खतरनाक इरादों से खुद को बचा पाएगी?

     

     

    तभी दरवाजे पर कुछ हलचल होती है और फिर अमानत पीछे मुड़कर देखती है जहा रिशाल को अपनी तरफ आते हुए देखती है जिससे अमानत का मन डर जाता है वो सोचती है की पता नहीं अब ये क्या ही करेगा रिशाल अग्निहोत्री अंदर आकर दरवाजा बंद कर देता है और अमानत को घेर लेता है। अमानत को डर लगता है और वह पीछे हटने लगती है।

     

     

    रिशाल का चेहरा लाल हो जाता है और उसकी आँखें भी बहुत ही दरवानी सी लगती हैं। वह अमानत को कहता है, “तुम कहीं नहीं जा सकती। तुम मेरे साथ यही रहोगी।”

     

     

    अमानत की साँसें तेज हो जाती हैं और वह डर से कांपने लगती है। वह रिशाल से दूर रहने की कोशिश करती है, लेकिन रिशाल उसे पकड़ लेता है।

     

     

    अमानत छूटने की कोशिश करती है, लेकिन रिशाल की पकड़ मजबूत होती है । वह अमानत को दीवार से सटा देता है और उसकी आँखों में देखता है।

     

     

    रिशाल की आवाज में खतरा है, “तुम्हे मुझे समझने में समय लगेगा। लेकिन तुम्हें मुझे समझाना ही पड़ेगा मेरी डार्लिंग आखिर अब तुम्हे यहाँ ही रहना है तो ये सब की आदत डालनी होंगी तुम्हे my sweetheart….💞💞

     

     

    अमानत की आँखों में डर आ जाता हैं और वह रिशाल से कहती है, “मुझे छोड़ दो। मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती आखिर मेने बिगड़ा ही क्या है तुम्हारा मे तो तुम्हे जानती तक नहीं फिर मेरे मेरे भाई के पीछे क्यों परे हो तुम?? है ऐसे ही बहुत सी मुश्किलो से घिरे है ज़िंदगी मे पहले ही अब तुम और मत बढ़ाओ प्लीज मुझे जाने दो और मेरे भाई को भी छोड़ दो प्लीज!!!

     

     

    रिशाल का चेहरा और भी लाल हो जाता है और वह अमानत को हस्ते हुए से कहता है, “तुम मुझे नहीं छोड़ सकती। तुम मेरी हो अब और मे तुम्हे कभी छोडरने नहीं दूंगा अब तुम्हारी यही जिंदगी है ये कैद और जब तक तुम यहाँ मेरी गुलामी करोगी तब तक ही तुम अपने भाई को बचा पाओगी उसके बाद तुम जानो और तुम्हरा वो भाई ।”

     

     

     

    अब अमानत को लगता है कि वह सच मे कैद मे आ चुकी है। 

     

    रिशाल अमानत की तरफ मुस्कुराकर देखता है और उसकी आँखों में एक डेविल सी चमक आ जाती है। वह अमानत को कहता है, “चलो शुरू हो जाओ, अमानत। आज से तुम्हारी जिंदगी मेरे हिसाब से चलेगी। आज से तुम मेरी गुलाम हो।”

     

     

     

    … to be continue…

     

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    Rani Thakur

    NSW अनुभवी लेखक -🥇

    जो हमसे दूर हुए..

    हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏