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“VIP सिलेंडर की महान गाथा”

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

सुबह की चाय में आज कुछ कमी सी है,

चूल्हे की आँच भी जैसे थमी सी है।

रसोई में खामोशी का राज हुआ,

गैस का सिलेंडर अब कुछ नाराज़ हुआ।

कहते हैं दूर कहीं युद्ध की आग है,

दो देशों के बीच जलती हुई भाग-दौड़ है,

पर असर यहाँ हर घर की थाली पर है,

महंगाई की मार अब खाली जेब पर है।

Narendra Modi जी ने भी सोचा होगा कुछ तो उपाय,

पर जनता पूछे—”सर, ये महंगाई क्यों भाई?”

सिलेंडर की कीमत जैसे चाँद को छू गई,

और आम आदमी की सांसें भी रुक सी गई।

अब रोटी बनती है हिसाब लगाकर,

सब्ज़ी पकती है थोड़ा बचाकर,

हंसी में भी अब हल्की सी आह है,

“गैस जले तो ही घर में चाय है!”

पर फिर भी उम्मीद का दीप जलता है,

हर मुश्किल में भारत संभलता है।

हँसते-हँसते हम ये दौर भी काटेंगे,

थोड़ा कम पकाएँगे… पर दिल से खाएँगे।

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