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टैग: हास्य व्यंग्य#सामाजिक #कविता

  • मल्टीटास्किंग देवी

    मल्टीटास्किंग देवी

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    एक हाथ में फोन, दूसरे में तवा,  

    तीसरे में लिपस्टिक, चौथे में हवा।  

    कहती — “मल्टीटास्किंग मेरी पहचान है,  

    कॉफी पीते‑पीते भी काम आसान है!”

     

    एक हाथ में फोन, दूसरे में तवा,  

    तीसरे में लिपस्टिक, चौथे में हवा।  

    कॉफी की चुस्की, काम का दबाव,  

    फिर भी मुस्कान — यही है उसका प्रभाव।  

     

    ऑफिस की मीटिंग, घर का झमेला,  

    बच्चों के होमवर्क का भी खेला।  

    कहती — “मल्टीटास्किंग मेरी पहचान है,  

    कॉफी पीते‑पीते भी सब आसान है!”  

     

    ना थकती, ना रुकती, बस हँसती जाती,  

    हर मुश्किल को मज़ाक में बदलती जाती।  

    आधुनिक नारी का ये रूप निराला,  

    हँसी में छुपा है उसका उजाला। 😅

     

     “मल्टीटास्किंग देवी”

    “कॉफी, फोन, और तवा — सब मेरे कंट्रोल में!” ☕📱🍳

    “Super Woman mode: ON 🔥”

    “एक हाथ में काम, दूसरे में स्टाइल — यही है मेरा टैलेंट!” 💄💪

    “जब ज़िंदगी कहे ‘रुको’, मैं कहती हूँ ‘Hold my coffee”

    😂 “मल्टीटास्किंग का असली मज़ा — हँसते‑हँसते काम पूरा!” 😄

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    Manoj Divana Namaste Story World

    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • “VIP सिलेंडर की महान गाथा”

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    सुबह की चाय में आज कुछ कमी सी है,

    चूल्हे की आँच भी जैसे थमी सी है।

    रसोई में खामोशी का राज हुआ,

    गैस का सिलेंडर अब कुछ नाराज़ हुआ।

    कहते हैं दूर कहीं युद्ध की आग है,

    दो देशों के बीच जलती हुई भाग-दौड़ है,

    पर असर यहाँ हर घर की थाली पर है,

    महंगाई की मार अब खाली जेब पर है।

    Narendra Modi जी ने भी सोचा होगा कुछ तो उपाय,

    पर जनता पूछे—”सर, ये महंगाई क्यों भाई?”

    सिलेंडर की कीमत जैसे चाँद को छू गई,

    और आम आदमी की सांसें भी रुक सी गई।

    अब रोटी बनती है हिसाब लगाकर,

    सब्ज़ी पकती है थोड़ा बचाकर,

    हंसी में भी अब हल्की सी आह है,

    “गैस जले तो ही घर में चाय है!”

    पर फिर भी उम्मीद का दीप जलता है,

    हर मुश्किल में भारत संभलता है।

    हँसते-हँसते हम ये दौर भी काटेंगे,

    थोड़ा कम पकाएँगे… पर दिल से खाएँगे।

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    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।