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No love clause

पढ़ने का समय : 5 मिनट

Part 7

 

 

शुभम हल्का-सा मुस्कुराया। “ठीक है… फिर देखते हैं छह महीने बाद कौन सही साबित होता है।”

 

अग्नि ने उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया। उसने टेबल पर रखा अपना फोन उठाया। स्क्रीन पर कई नोटिफिकेशन थे। उसने एक-एक करके उन्हें देखा।

फिर अचानक उसकी उंगली एक नाम पर जाकर रुक गई।

Veda Sharma.

 

अग्नि ने मैसेज पढ़ा और फोन वापिस टेबल पर रख दिया और अपने लिए ड्रिंक बनाने लगा। लेकिन वो शायद कुछ सोच भी रहा था। 

 

शुभम ने उसकी हरकत नोटिस कर ली। “क्या हुआ?”

 

अग्नि, “कुछ नहीं।”

 

शुभम ने पूछा, “किसका मैसेज था?”

 

अग्नि बोला, “ऑफिस का।”

 

शुभम ने आँखें सिकोड़कर उसकी तरफ देखा। “वेदा का?”

 

अग्नि ने उसकी तरफ देखा। “तुझे उसका नाम कैसे पता?”

 

शुभम हँस पड़ा। “भाई, मैं तेरा दोस्त हूँ। तेरी सेक्रेटरी के बारे में इतना तो जानता ही हूँ कि वो पिछले तीन साल से तेरे साथ काम कर रही है।”

 

अग्नि ने कोई जवाब नहीं दिया। शुभम ने मुस्कुराकर पूछा, “वैसे कैसी है?”

 

अग्नि ने सामान्य स्वर में कहा, “कौन?”

 

शुभम कूल अंदाज में, “वेदा।”

 

अग्नि ने कंधे उचकाए, “मुझे क्या पता?”

 

“अच्छा?” शुभम ने शरारत से कहा, “अभी दो मिनट पहले तक तू बता रहा था कि तुझे एक समझदार, सादगी पसंद लड़की चाहिए…”

 

अग्नि ने उसे घूरा। “शुभम।”

 

शुभम, “हाँ भाई?”

 

अग्नि बोला, “अपनी बकवास बंद कर।” क्योंकि वो समझ गया था कि शुभम कहना क्या चाह रहा है,लेकिन उसे शुभम की बात बुरी भी नहीं लगी। 

 

शुभम हँस पड़ा। लेकिन अग्नि के मन में पहली बार एक विचार आया। 

एक ऐसा विचार जिसे उसने तुरंत अपने दिमाग से निकालने की कोशिश की।

 

वेदा शर्मा।

 

अग्नि ने गिलास में ड्रिंक डाली और उसे धीरे-धीरे घुमाने लगा।

 

शुभम अब भी उसे ही देख रहा था। “क्या सोच रहा है?”

 

अग्नि ने गिलास होंठों तक ले जाते हुए कहा, “कुछ नहीं।” लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में पहले जैसी सहजता नहीं थी।

 

शुभम ने भौंहें उठाईं। “तू जब ‘कुछ नहीं’ बोलता है ना, तब समझ आता है कि दिमाग में बहुत कुछ चल रहा है।”

 

अग्नि ने उसे घूरा। “तू मेरा दिमाग पढ़ना कब से सीख गया?”

 

“जब से तू मेरा दोस्त बना है।” शुभम ने आराम से सोफे की पीठ से सिर टिकाया। “वैसे एक बात बता… तेरी सेक्रेटरी शादीशुदा तो नहीं है?”

 

अग्नि ने तुरंत उसकी तरफ देखा। “नहीं।” जवाब इतना जल्दी आया कि शुभम के चेहरे पर शरारती मुस्कान और गहरी हो गई।

“ओहो… तो जानकारी पूरी है।”

 

अग्नि ने गिलास टेबल पर रख दिया। “शुभम।”

 

शुभम, “अरे मैं तो बस पूछ रहा था।”

 

अग्नि, “और मैं बस जवाब दे रहा हूँ।” 

 

शुभम, “ चल तू अब ज्यादा मत सोच, मैं कुछ करता हूँ।”

 

अग्नि में हां में सिर हिलाया और बोला, “ बस इसी जवाब की उम्मीद थी।”

 

 

अगली सुबह… राजावत ग्रुप।

सुबह के ठीक नौ बजे।

 

अग्नि हमेशा की तरह अपने ऑफिस पहुँच चुका था।

उसका केबिन पूरी तरह व्यवस्थित था।

टेबल पर जरूरी फाइलें रखी थीं। कॉफी उसके सामने थी।

 

लेकिन आज पहली बार… उसकी नजर बार-बार दरवाजे की तरफ जा रही थी।

 

तभी डोर नॉक हुआ।

अग्नि, “ come in!”

 

निशांत अंदर आया। “Good morning, sir.”

 

अग्नि, “Morning.” निशांत ने फाइल आगे बढ़ाई।

“आज दस बजे की बोर्ड मीटिंग है। ग्यारह बजे मल्होत्रा ग्रुप के साथ मीटिंग और दोपहर में…”

 

अग्नि, “निशांत।”

 

निशांत, “जी, सर?”

 

अग्नि ने बिना किसी रिएक्शन के पूछा, “वेदा आई?”

 

निशांत कुछ पल उसे देखता रहा। फिर बोला, “अभी तक नहीं, सर।”

 

अग्नि ने अपनी घड़ी देखी। नौ बजकर दस मिनट।

“आते ही उसे मेरे केबिन में भेजना।”

 

निशांत ने सिर हिलाया, “जी सर।”

 

निशांत जाने लगा। फिर अग्नि ने उसे रोक लिया। “और निशांत…”

 

निशांत रूककर पीछे मुड़ा, “जी?”

 

“अगर वो आज भी ऑफिस नहीं आ पाए तो…” अग्नि कुछ पल रुका। “पहले मुझसे बात करना।”

 

निशांत ने सिर हिलाया। “जी सर।”

 

दरवाजा बंद हो गया। अग्नि कुर्सी पर पीछे टिक गया।

उसने खुद से सवाल किया, वो आखिर वेदा का इंतजार क्यों कर रहा था?

 

उसे अपनी ही बेचैनी अजीब लग रही थी। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।

 

अग्नि की नजर दरवाजे पर गई। “Come in.”

 

दरवाजा खुला। और सामने… वेदा खड़ी थी।

आज भी उसकी आँखों के नीचे नींद की कमी साफ दिखाई दे रही थी। बाल जल्दी में बाँधे हुए थे।

चेहरा थका हुआ था।

लेकिन हाथ में हमेशा की तरह ऑफिस की फाइलें थीं।

“Good morning, sir.”

 

अग्नि कुछ सेकंड उसे देखता रहा। फिर बोला, “Sit.”

 

वेदा चुपचाप सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई।

अग्नि ने अपने सामने रखी फाइल बंद कर दी।

कुछ पल तक वो उसे देखता रहा।

फिर धीमे स्वर में बोला, “वेदा…”

 

वेदा ने हैरानी से अग्नि की तरफ देखा, क्योंकि ये शायद पहली बार था जब वो उसे इस तरह से पुकार रहा था। “जी, सर?”

 

“मुझे तुमसे ऑफिस के काम के अलावा…”

वो एक पल के लिए रुका। “…एक बेहद निजी बात करनी है।”

 

वेदा की भौंहें सिकुड़ गईं। उसे समझ नहीं आया कि अग्नि आखिर उससे क्या पूछने वाला है।

 

और अग्नि…

वो भी शायद पहली बार अपने जीवन का सबसे असामान्य प्रस्ताव किसी के

सामने रखने जा रहा था।

 

क्रमशः…

 

💕 No Love Clause

कभी-कभी जिंदगी सबसे बड़ा सौदा वहीं रखती है, जहाँ इंसान सबसे ज्यादा मजबूर होता है।

 

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