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इस जिंदगी ने

पढ़ने का समय : 7 मिनट

इस जिंदगी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया

 

अमन की उम्र अभी सिर्फ पच्चीस साल थी, लेकिन वह अक्सर कहता था, “इस जिंदगी ने मुझे मेरी उम्र से कहीं ज्यादा सिखा दिया है।”

 

कभी वह बहुत खुश रहने वाला लड़का था। छोटी-सी सफलता पर खुश हो जाता, दोस्तों के साथ घंटों हंसता और भविष्य को लेकर बड़े-बड़े सपने देखता था। उसे लगता था कि जिंदगी वैसी ही चलेगी जैसी वह चाहता है।

 

लेकिन जिंदगी हमेशा हमारी इच्छा के हिसाब से नहीं चलती।

 

अमन एक छोटे से शहर में अपनी मां, पिता और छोटी बहन के साथ रहता था। उसके पिता की छोटी-सी कपड़ों की दुकान थी। घर बहुत बड़ा नहीं था, मगर उसमें प्यार की कोई कमी नहीं थी।

 

अमन का सपना था कि वह एक दिन अपना बड़ा कारोबार शुरू करेगा।

 

कॉलेज खत्म होते ही उसने नौकरी के लिए कई जगह आवेदन किए। उसे पूरा भरोसा था कि जल्दी ही अच्छी नौकरी मिल जाएगी।

 

लेकिन महीने गुजरते गए।

 

कहीं से जवाब नहीं आया।

 

कई जगह इंटरव्यू दिए, लेकिन हर बार कोई न कोई कमी निकाल दी जाती।

 

एक दिन अमन बहुत परेशान होकर घर लौटा।

 

मां ने पूछा, “क्या हुआ बेटा?”

 

अमन ने गुस्से में कहा, “कुछ नहीं हुआ मां। लगता है मेरी किस्मत ही खराब है।”

 

पिता दुकान से लौटे तो उन्होंने बेटे को चुप बैठे देखा।

 

उन्होंने पूछा, “कोशिश छोड़ दी?”

 

अमन बोला, “नहीं।”

 

पिता मुस्कुराए।

 

“तो फिर हार कैसे गए?”

 

अमन कुछ नहीं बोला।

 

पिता ने कहा, “बेटा, जिंदगी में हर दरवाजा पहली बार में नहीं खुलता। कभी-कभी बार-बार दस्तक देनी पड़ती है।”

 

अमन ने उनकी बात सुनी, लेकिन उस समय उसे वह बात सिर्फ एक सलाह लगी।

 

कुछ दिनों बाद उसे एक कंपनी में नौकरी मिल गई।

 

उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था।

 

पहली तनख्वाह मिलने पर उसने मां के लिए साड़ी खरीदी और पिता के लिए नई घड़ी।

 

घर लौटकर उसने दोनों चीजें उनके सामने रख दीं।

 

मां की आंखें भर आईं।

 

पिता ने घड़ी पहनते हुए कहा, “आज मेरी मेहनत सफल हो गई।”

 

अमन ने पहली बार महसूस किया कि उसकी छोटी-सी सफलता भी उसके परिवार के लिए कितनी बड़ी खुशी थी।

 

लेकिन नौकरी शुरू होने के कुछ महीनों बाद अमन बदलने लगा।

 

अब उसके पास समय नहीं था।

 

मां फोन करतीं तो वह कहता, “मां, बाद में बात करता हूं।”

 

बहन कहती, “भैया, रविवार को कहीं घूमने चलेंगे?”

 

वह कहता, “देखेंगे।”

 

पिता दुकान की परेशानी बताते तो अमन कहता, “पापा, अभी बहुत काम है।”

 

उसे लगने लगा था कि पैसे और सफलता ही जिंदगी की सबसे बड़ी चीजें हैं।

 

फिर एक दिन कंपनी में अचानक छंटनी शुरू हो गई।

 

अमन की नौकरी भी चली गई।

 

उसने कई दिनों तक यह बात घर में नहीं बताई।

 

सुबह तैयार होकर घर से निकलता और पूरा दिन इधर-उधर घूमता रहता।

 

शाम को वापस आ जाता।

 

एक दिन पिता ने उसे रास्ते में देख लिया।

 

उन्होंने कुछ नहीं पूछा।

 

बस घर पहुंचकर बोले, “नौकरी चली गई है?”

 

अमन चौंक गया।

 

“आपको कैसे पता?”

 

पिता ने कहा, “बेटे, पिता से अपनी परेशानी छिपाना आसान नहीं होता।”

 

अमन की आंखों में आंसू आ गए।

 

“पापा, मैं हार गया।”

 

पिता ने उसके कंधे पर हाथ रखा।

 

“नौकरी गई है, तुम नहीं।”

 

यह बात अमन के दिल में उतर गई।

 

अगले दिन उसने फिर से काम तलाशना शुरू किया।

 

इस बार उसे एक छोटे ऑफिस में नौकरी मिली। तनख्वाह पहले से कम थी।

 

उसके कुछ पुराने दोस्तों ने मजाक उड़ाया।

 

“इतनी पढ़ाई करके इतनी छोटी नौकरी?”

 

अमन को बुरा लगा।

 

लेकिन इस बार उसने जवाब नहीं दिया।

 

उसने सोचा, “काम छोटा या बड़ा नहीं होता। सोच छोटी या बड़ी होती है।”

 

वह पूरी मेहनत से काम करने लगा।

 

कुछ महीनों बाद उसकी मुलाकात एक बुजुर्ग व्यक्ति से हुई, जो उसी ऑफिस के बाहर चाय की दुकान लगाते थे।

 

एक दिन अमन उनके पास बैठ गया।

 

बुजुर्ग ने पूछा, “बेटा, परेशान लग रहे हो।”

 

अमन ने कहा, “जिंदगी समझ नहीं आ रही।”

 

बुजुर्ग हंस पड़े।

 

“जिंदगी समझने की चीज नहीं है। उसे जीने की चीज है।”

 

अमन चुपचाप उनकी बात सुनता रहा।

 

बुजुर्ग बोले, “मैंने भी बहुत खोया है। लेकिन एक बात सीखी—जो चला गया, उसके पीछे रोते रहोगे तो जो सामने है, उसे भी खो दोगे।”

 

अमन ने उस दिन बहुत कुछ सोचा।

 

उसे समझ आया कि वह हमेशा उस चीज के पीछे भागता रहा जो उसके पास नहीं थी।

 

जब नौकरी नहीं थी, तब नौकरी चाहिए थी।

 

नौकरी मिली तो ज्यादा पैसे चाहिए थे।

 

पैसे मिले तो ज्यादा नाम चाहिए था।

 

वह जिंदगी जी ही नहीं रहा था।

 

बस अगली मंजिल के पीछे भाग रहा था।

 

उसने अपना रवैया बदलने का फैसला किया।

 

अब वह मां के साथ बैठकर खाना खाने लगा।

 

पिता की दुकान पर जाकर हाथ बंटाता।

 

बहन की बातें ध्यान से सुनता।

 

छुट्टी के दिन दोस्तों से मिलता।

 

और सबसे जरूरी बात—उसने खुद की तुलना दूसरों से करना बंद कर दिया।

 

एक दिन उसकी बहन ने पूछा, “भैया, आप इतने बदल कैसे गए?”

 

अमन मुस्कुराया।

 

“जिंदगी ने सिखाया है।”

 

“क्या?”

 

अमन ने कहा, “यह कि हर चीज हमारे हिसाब से नहीं मिलेगी। कुछ लोग हमें छोड़कर जाएंगे, कुछ मौके हाथ से निकलेंगे, कुछ सपने पूरे होने में समय लगेगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जिंदगी खत्म हो गई।”

 

बहन मुस्कुराई।

 

“और क्या सिखाया?”

 

अमन ने कहा, “यह कि परिवार की कीमत तब मत समझना जब उनके पास बैठने का समय ही न बचे।”

 

कुछ साल बीत गए।

 

अमन ने धीरे-धीरे अपना छोटा कारोबार शुरू किया।

 

इस बार उसने शुरुआत बहुत छोटे स्तर से की।

 

पहले महीने बहुत कम कमाई हुई।

 

दूसरे महीने थोड़ा सुधार हुआ।

 

कई बार नुकसान भी हुआ।

 

लेकिन अब वह घबराता नहीं था।

 

उसे पता था कि गिरना रास्ते का हिस्सा है।

 

एक दिन उसका कारोबार अच्छा चलने लगा।

 

लोग उसे सफलता की मिसाल बताने लगे।

 

एक पत्रकार ने उससे पूछा, “आपकी सफलता का राज क्या है?”

 

अमन कुछ देर चुप रहा।

 

फिर मुस्कुराकर बोला—

 

“मेरी सफलता का राज मेरी असफलताएं हैं।”

 

पत्रकार ने पूछा, “कैसे?”

 

अमन ने कहा, “क्योंकि जब जिंदगी ने मुझे गिराया, तब मैंने सीखा कि उठना कैसे है। जब लोगों ने मेरा साथ छोड़ा, तब मैंने अपने परिवार की कीमत समझी। जब नौकरी गई, तब मैंने जाना कि इंसान की पहचान उसकी नौकरी नहीं होती। जब पैसे कम थे, तब मैंने छोटी खुशियों का महत्व समझा। और जब सब कुछ मिल गया, तब समझ आया कि सुकून सबसे बड़ी दौलत है।”

 

उस शाम अमन घर लौटा।

 

पिता बरामदे में बैठे थे।

 

अमन उनके पास जाकर बैठ गया।

 

पिता ने पूछा, “आज बहुत खुश लग रहे हो।”

 

अमन मुस्कुराया।

 

“पापा, आज समझ आया कि मैं इतने साल से जिंदगी से शिकायत करता रहा।”

 

“अब?”

 

“अब शुक्रिया करता हूं।”

 

पिता ने उसकी पीठ थपथपाई।

 

मां अंदर से चाय लेकर आईं।

 

बहन भी आकर पास बैठ गई।

 

चारों साथ बैठे और बातें करने लगे।

 

अमन उन्हें देखता रहा।

 

उसे लगा कि उसकी सबसे बड़ी सफलता उसके पास मौजूद पैसा या कारोबार नहीं था।

 

उसकी सबसे बड़ी सफलता यह थी कि उसने जिंदगी को समझना सीख लिया था।

 

उसने डायरी खोली और लिखा—

 

“इस जिंदगी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया।

सिखाया कि हर हार अंत नहीं होती।

हर बिछड़ना जिंदगी का अंत नहीं होता।

हर असफलता इंसान को कमजोर नहीं बनाती।

और हर मुश्किल अपने साथ एक सीख लेकर आती है।”

 

उसने आखिरी लाइन लिखी—

 

“जिंदगी हमेशा आसान नहीं होगी, लेकिन अगर हम हर मुश्किल से कुछ सीखते रहें, तो एक दिन पीछे मुड़कर देखने पर वही मुश्किलें हमारी सबसे बड़ी ताकत बन जाती हैं।”

 

अमन ने डायरी बंद की और मुस्कुरा दिया।

 

अब उसे जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी।

 

क्योंकि उसने आखिरकार समझ लिया था—

 

जिंदगी हमें हर दिन कुछ न कुछ सिखाती है। बस जरूरत है तो उसकी सीख को समझने की।

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