एपिसोड – 46 : असली दुश्मन कौन है?
“बहुत देर कर दी तुम लोगों ने मुझे पहचानने में।”
आवाज सुनते ही आरव, अमन और विहान ने एक साथ पीछे मुड़कर देखा।
अंधेरे में एक परछाई खड़ी थी।
हाथ में बंदूक थी।
चेहरा अभी भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था।
राजवीर भी उस आवाज को सुनकर कुछ पल के लिए जम गया।
आरव ने तुरंत पूछा—
“कौन हो तुम?”
परछाई धीरे-धीरे रोशनी में आई।
और जैसे ही चेहरा सामने आया, तीनों भाइयों के होश उड़ गए।
वो कोई अनजान इंसान नहीं था।
वो था…
रुद्र।
अमन की आंखें फैल गईं।
“रुद्र?”
विहान पीछे हट गया।
“तुम…?”
आरोही ने आरव का हाथ पकड़ लिया।
“ये क्या हो रहा है?”
रुद्र के चेहरे पर कोई भाव नहीं था।
वह धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ा।
“हां… मैं।”
आरव ने अविश्वास से पूछा—
“तुमने हमें धोखा दिया?”
रुद्र ने कहा—
“मैंने कभी तुम्हारा दोस्त होने का दावा नहीं किया था।”
आरव का चेहरा कठोर हो गया।
“लेकिन तुमने इतने साल मेरे साथ काम किया।”
“क्योंकि मुझे तुम्हारे पास रहना था।”
अमन ने गुस्से में बंदूक उठा ली।
“किसके कहने पर?”
रुद्र ने जवाब दिया—
“राजवीर के।”
राजवीर ने उसकी तरफ देखा।
“रुद्र!”
रुद्र ने उसकी तरफ मुड़कर कहा—
“अब चुप रहो।”
राजवीर पहली बार असहाय नजर आया।
राजवीर भी हैरान था
आरव ने तुरंत समझ लिया कि मामला सिर्फ रुद्र और राजवीर के बीच का नहीं है।
“तुमने अभी राजवीर को भी चुप करा दिया।”
रुद्र मुस्कुराया।
“क्योंकि अब खेल मेरे हाथ में है।”
राजवीर ने गुस्से में कहा—
“तुम भूल रहे हो कि तुम्हें मैंने बनाया है।”
रुद्र ने कहा—
“और तुम भूल रहे हो कि तुम्हारे सारे राज मेरे पास हैं।”
राजवीर कुछ नहीं बोला।
आरव ने पूछा—
“तुम दोनों के बीच आखिर रिश्ता क्या है?”
रुद्र ने कहा—
“राजवीर मेरा मालिक था।”
“था?”
“अब नहीं।”
विहान ने कहा—
“तो फिर तुम चाहते क्या हो?”
रुद्र ने उसकी तरफ देखा।
“तुम तीनों।”
आरव आगे आया।
“क्यों?”
रुद्र ने कहा—
“क्योंकि तुम तीनों के बिना नैना की आखिरी वसीयत पूरी नहीं हो सकती।”
अमन ने पूछा—
“वसीयत?”
रुद्र ने सिर हिलाया।
“तुम्हारी मां ने अपनी पूरी संपत्ति तुम्हारे नाम की थी।”
“लेकिन उसके साथ एक शर्त थी।”
आरव ने पूछा—
“क्या?”
रुद्र मुस्कुराया।
“तीनों भाइयों को एक साथ होना होगा।”
नैना की डायरी
आरव ने हाथ में पकड़ी डायरी को देखा।
“इसमें क्या है?”
रुद्र ने कहा—
“तुम्हारी मां की आखिरी सच्चाई।”
आरव ने डायरी खोलने की कोशिश की।
लेकिन पन्ने आपस में चिपके हुए थे।
विहान ने कहा—
“शायद कोई गुप्त तरीका है।”
अमन ने डायरी को ध्यान से देखा।
“यहां कुछ लिखा है।”
एक पन्ने पर तीन छोटे निशान बने थे।
एक पर आरव का नाम।
दूसरे पर अमन।
तीसरे पर विहान।
तीनों भाइयों ने एक-दूसरे को देखा।
रुद्र ने कहा—
“अपने हाथ उन निशानों पर रखो।”
आरव ने हाथ रखा।
अमन ने भी।
विहान ने तीसरे निशान पर हाथ रखा।
कुछ सेकंड तक कुछ नहीं हुआ।
फिर…
टक!
डायरी के बीच से एक छोटा हिस्सा बाहर निकला।
उसमें एक फोटो थी।
फोटो देखते ही आरव के हाथ कांपने लगे।
फोटो में नैना थी।
उसकी गोद में तीन छोटे बच्चे थे।
और उनके पीछे खड़ी थी…
माधवी।
लेकिन तस्वीर में एक और आदमी था।
आरव ने तस्वीर को गौर से देखा।
“ये कौन है?”
राजवीर ने फोटो देखते ही नजरें फेर लीं।
देवेंद्र ने भी कुछ नहीं कहा।
माधवी की आंखों से आंसू बहने लगे।
आरव ने पूछा—
“मां… आप इस आदमी को जानती हैं?”
माधवी ने धीरे से कहा—
“हां।”
“कौन है?”
माधवी ने जवाब देने से पहले बहुत देर तक चुप्पी साधे रखी।
फिर बोलीं—
“ये तुम्हारा नाना है।”
तीनों भाई स्तब्ध रह गए।
नाना की कहानी
अमन ने पूछा—
“हमारे नाना?”
माधवी ने सिर हिलाया।
“हां।”
विहान ने कहा—
“लेकिन हमें कभी उनके बारे में क्यों नहीं बताया गया?”
माधवी की आंखों में दर्द था।
“क्योंकि उनकी मौत के पीछे भी राजवीर का हाथ था।”
राजवीर ने गुस्से में कहा—
“माधवी!”
“चुप रहो!”
माधवी ने पहली बार राजवीर पर जोर से आवाज उठाई।
“पच्चीस साल तक तुमने हम सबको डराया।”
“अब नहीं।”
राजवीर कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक बाहर से गोली चलने की आवाज आई।
धांय!
सबने नीचे झुककर अपनी जान बचाई।
रुद्र ने खिड़की से बाहर देखा।
“कोई और भी आया है।”
आरव ने पूछा—
“कौन?”
रुद्र ने कहा—
“मुझे नहीं पता।”
अमन ने कहा—
“क्या तुम्हें हर बात पता नहीं होती?”
रुद्र ने उसकी तरफ देखा।
“कुछ चीजें ऐसी हैं जो मुझे भी नहीं पता।”
आरव ने पूछा—
“जैसे?”
रुद्र ने जवाब दिया—
“नैना अभी जिंदा हैं या नहीं।”
क्या नैना सच में जिंदा हैं?
विहान की आंखों में उम्मीद की चमक आ गई।
“अगर मेरी मां जिंदा हैं… तो मैं उन्हें ढूंढूंगा।”
राजवीर ने तुरंत कहा—
“वो जिंदा नहीं है।”
विहान ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें कैसे पता?”
राजवीर चुप रहा।
विहान आगे बढ़ा।
“तुमने उसकी लाश देखी थी?”
राजवीर ने कोई जवाब नहीं दिया।
“तुमने खुद उसे मारा था?”
राजवीर की आंखें बदल गईं।
विहान ने कहा—
“जवाब दो!”
राजवीर ने आखिरकार कहा—
“नहीं।”
“तो फिर?”
राजवीर ने सिर झुका लिया।
“मैंने उसे मरते हुए देखा था।”
विहान ने कहा—
“तुम झूठ बोल रहे हो।”
“नहीं।”
राजवीर की आवाज पहली बार कमजोर थी।
“नैना को गोली लगी थी।”
“लेकिन उसके बाद…”
“उसके बाद क्या?”
राजवीर चुप हो गया।
रुद्र ने कहा—
“उसे कोई वहां से ले गया था।”
आरव ने पूछा—
“कौन?”
रुद्र ने कहा—
“मुझे नहीं पता।”
एक और चौंकाने वाला सच
अचानक माधवी ने कहा—
“मुझे पता है।”
सबकी नजर उनकी तरफ गई।
आरव ने पूछा—
“कौन ले गया था?”
माधवी की आंखों से आंसू बह निकले।
“मैं।”
विहान स्तब्ध रह गया।
“आप?”
माधवी ने सिर हिलाया।
“नैना को गोली लगने के बाद मैं उसे वहां से लेकर गई थी।”
“लेकिन फिर?”
“वो बेहोश थी।”
“मैं उसे अस्पताल ले गई।”
आरव ने पूछा—
“फिर?”
माधवी ने कहा—
“अस्पताल पहुंचने से पहले ही हमें रोक लिया गया।”
अमन ने पूछा—
“किसने?”
माधवी ने कहा—
“शेखर के आदमियों ने।”
राजवीर ने कहा—
“झूठ।”
माधवी ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें सब पता था।”
“लेकिन तुमने मुझे कभी नहीं बताया कि नैना को बचाया जा चुका था।”
आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।
“तो नैना बच गई थीं?”
माधवी ने सिर हिलाया।
“हां।”
विहान की आंखों से आंसू बहने लगे।
“मेरी मां जिंदा हैं?”
माधवी ने धीरे से कहा—
“मुझे नहीं पता।”
“क्यों?”
“क्योंकि उसके बाद मुझे कभी नैना नहीं मिली।”
देवेंद्र की चुप्पी
आरव ने देवेंद्र की तरफ देखा।
“आपको पता था?”
देवेंद्र चुप रहा।
आरव ने फिर पूछा—
“आपको पता था कि नैना बच गई थीं?”
देवेंद्र ने नजरें झुका लीं।
“हां।”
आरव का गुस्सा बढ़ गया।
“फिर आपने हमें क्यों बताया कि वो मर चुकी हैं?”
देवेंद्र ने कहा—
“क्योंकि हमें लगा राजवीर उसे ढूंढ लेगा।”
“और अगर वो जिंदा थीं तो?”
“मैं उन्हें ढूंढ नहीं पाया।”
विहान ने देवेंद्र की तरफ देखा।
“आपने मेरी मां को ढूंढने की कोशिश की?”
“हर दिन।”
विहान की आंखों में आंसू थे।
“फिर मुझे क्यों नहीं बताया?”
देवेंद्र ने कहा—
“क्योंकि तुम्हें बचाना जरूरी था।”
आरव और आरोही
इस पूरे रहस्य के बीच आरोही चुप थी।
आरव ने उसका हाथ पकड़ा।
“तुम कुछ सोच रही हो।”
आरोही ने कहा—
“हां।”
“क्या?”
“अगर नैना जिंदा थीं और किसी ने उन्हें छुपाया… तो वो अभी भी कहीं हो सकती हैं।”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“और हमें उन्हें ढूंढना होगा।”
आरोही मुस्कुराई।
“मैंने यही सोचा।”
आरव ने धीरे से कहा—
“तुम मेरे साथ चलोगी?”
आरोही ने बिना किसी झिझक के कहा—
“जहां तुम जाओगे, मैं वहां रहूंगी।”
आरव ने उसके माथे को हल्के से चूम लिया।
अमन ने पीछे से कहा—
“भाई, इस वक्त भी रोमांस?”
आरव हंस पड़ा।
“तू चुप कर।”
विहान ने पहली बार हल्की मुस्कान दी।
इतने दर्द के बीच भी तीनों भाइयों के बीच का रिश्ता और मजबूत हो रहा था।
बाहर कौन आया था?
अचानक बाहर फिर गोली चली।
रुद्र ने कहा—
“सब नीचे रहो!”
वह दरवाजे की तरफ बढ़ा।
अचानक एक गोली आकर उसके कंधे में लगी।
“आह!”
आरव दौड़कर उसके पास गया।
“रुद्र!”
रुद्र जमीन पर गिर पड़ा।
अमन ने कहा—
“बाहर कोई स्नाइपर है।”
राजवीर ने तुरंत अपने आदमियों को पीछे हटने का इशारा किया।
“सब हथियार नीचे रखो।”
आरव ने आश्चर्य से पूछा—
“क्यों?”
राजवीर ने कहा—
“क्योंकि जो बाहर है… वो मेरे आदमी नहीं हैं।”
अमन ने पूछा—
“तो किसके हैं?”
राजवीर ने पहली बार डरते हुए कहा—
“नैना के।”
सबकी सांस रुक गई।
विहान ने पूछा—
“क्या?”
राजवीर ने कहा—
“अगर नैना सच में जिंदा है…”
वह खिड़की की तरफ देखने लगा।
“तो आज रात वो यहां जरूर आएगी।”
तभी बाहर से एक महिला की आवाज गूंजी—
“विहान!”
विहान का शरीर जैसे जम गया।
उसकी आंखों से आंसू बह निकले।
“ये आवाज…”
माधवी ने भी सांस रोक ली।
आरव ने कहा—
“विहान?”
विहान कांपते हुए दरवाजे की तरफ बढ़ा।
“ये मेरी मां की आवाज है।”
राजवीर पीछे हट गया।
और बाहर से वही आवाज फिर आई—
“मेरे बच्चे… दरवाजा खोलो।”
विहान की आंखों से आंसू बह रहे थे।
उसने दरवाजे की कुंडी पर हाथ रखा।
लेकिन तभी आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“रुको।”
“क्यों?”
आरव ने गंभीर आवाज में कहा—
“क्योंकि हमें नहीं पता… बाहर सच में नैना हैं या कोई हमें जाल में फंसा रहा है।”
और तभी बाहर से महिला ने कहा—
“आरव… अगर तुम सच में मेरे बेटे हो, तो तुम्हें याद होगा कि बचपन में मैं तुम्हें किस नाम से बुलाती थी।”
आरव का चेहरा सफेद पड़ गया।
उसकी आंखों के सामने बचपन की एक धुंधली तस्वीर उभरी।
और उसके होंठों से खुद-ब-खुद एक नाम निकला—
“गुड्डू…”
बाहर कुछ पल सन्नाटा रहा।
फिर महिला की आवाज आई—
“हां बेटा… गुड्डू।”
आरव की आंखों से आंसू बह निकले।
विहान ने दरवाजा खोलने के लिए हाथ बढ़ाया।
लेकिन उसी क्षण राजवीर चिल्लाया—
“दरवाजा मत खोलना! वो नैना नहीं है!”
सब उसकी तरफ देखने लगे।
राजवीर के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
और तभी बाहर खड़ी महिला ने धीमी आवाज में कहा—
“राजवीर… क्या तुम अब भी मुझसे डरते हो?”
राजवीर के हाथ से बंदूक गिर गई।
जारी रहेगा…

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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