,एपिसोड – 37 : डॉक्टर का छुपा हुआ राज
हवेली का दरवाजा जोर से बंद होते ही आरव, आरोही, अमन और रुद्र एक-दूसरे की तरफ देखने लगे।
कुछ पल पहले तक उन्हें लगता था कि वे इस हवेली में शेखर और माधवी को ढूंढने आए हैं।
लेकिन अब…
उनके सामने एक ऐसा राज खड़ा था, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
दीवार पर लगी पुरानी तस्वीर में शेखर और अभय के साथ खड़ा तीसरा आदमी वही था, जिसे वे अपना मददगार समझते आए थे।
डॉक्टर।
आरव ने तस्वीर को दीवार से उतार लिया।
“रुद्र…”
रुद्र चुप रहा।
आरव ने उसकी तरफ देखते हुए पूछा—
“तुमने कहा था कि ये वही आदमी है जिसने हमारी जिंदगी बर्बाद करने की साजिश रची थी। इसका मतलब क्या है?”
रुद्र ने कुछ बोलने के लिए मुंह खोला, लेकिन तभी अंधेरे कमरे से डॉक्टर की आवाज आई—
“मत पूछो, आरव।”
चारों तरफ सन्नाटा छा गया।
अमन ने तुरंत अपनी बंदूक निकाल ली।
“बाहर आ!”
कुछ सेकंड बाद सामने की सीढ़ियों पर डॉक्टर दिखाई दिया।
लेकिन इस बार उसके चेहरे पर वह नरमी नहीं थी, जो हमेशा दिखाई देती थी।
उसकी आंखों में एक अजीब-सी कठोरता थी।
आरव ने गुस्से से कहा—
“आपने हमसे झूठ बोला।”
डॉक्टर ने शांत स्वर में कहा—
“हां।”
“आपने कहा था कि आपने मुझे और अमन को बचाया था।”
“मैंने बचाया था।”
“तो फिर ये तस्वीर?”
डॉक्टर ने तस्वीर की तरफ देखा।
“क्योंकि उस रात मैं वहां था।”
अमन ने गुस्से में कहा—
“मेरी मां को किसने मारा था?”
डॉक्टर ने उसकी तरफ देखा।
कुछ पल तक वह चुप रहा।
फिर बोला—
“विराज ने गोली चलाई थी।”
अमन ने कहा—
“और आदेश?”
डॉक्टर ने जवाब नहीं दिया।
आरव ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—
“शेखर का?”
डॉक्टर ने सिर झुका लिया।
“हां।”
अमन की मुट्ठियां कस गईं।
“तो आप सब जानते थे!”
डॉक्टर ने कहा—
“मैं सब जानता था।”
—
डॉक्टर की असली कहानी
आरोही ने पूछा—
“फिर आपने इतने साल चुप्पी क्यों साधे रखी?”
डॉक्टर ने गहरी सांस ली।
“क्योंकि मुझे अपनी जान से ज्यादा दो बच्चों की जान की चिंता थी।”
आरव ने कहा—
“हमारी?”
“हां।”
“लेकिन आपने हमारी यादें मिटाईं।”
डॉक्टर की आंखों में दर्द आ गया।
“अगर मैं ऐसा नहीं करता तो तुम दोनों आज जिंदा नहीं होते।”
अमन ने कहा—
“हमें बचाने के लिए हमारी यादें छीन लीं?”
“हां।”
“और फिर हमें झूठ बोलते रहे?”
“क्योंकि सच तुम्हें फिर उसी नरक में ले जाता।”
आरव कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने पूछा—
“उस रात आखिर हुआ क्या था?”
डॉक्टर ने कमरे की एक पुरानी कुर्सी पर बैठते हुए कहा—
“आज मैं तुम्हें पच्चीस साल पुरानी पूरी कहानी बताऊंगा।”
—
पच्चीस साल पहले की रात
डॉक्टर ने कहना शुरू किया—
“उस रात अस्पताल में सिर्फ दो बच्चों का जन्म नहीं हुआ था।”
“उस रात एक साम्राज्य का वारिस पैदा हुआ था।”
आरव ध्यान से सुन रहा था।
“शेखर उस समय एक बहुत बड़ा कारोबारी था। लेकिन उसके कारोबार के पीछे एक दूसरा चेहरा भी था।”
अमन ने पूछा—
“सम्राट?”
डॉक्टर ने सिर हिलाया।
“हां।”
“शेखर ही सम्राट था।”
आरव ने धीमे से कहा—
“तो अभय?”
डॉक्टर बोले—
“अभय उसका छोटा भाई था।”
“लेकिन हमें बताया गया कि अभय ही सम्राट है।”
“यही तो शेखर की सबसे बड़ी चाल थी।”
डॉक्टर ने कहा—
“शेखर ने अपने अपराधों का इल्जाम अभय के ऊपर डाल दिया था।”
आरव को सब समझ आने लगा।
“इसलिए अभय ने खुद को खलनायक बना लिया।”
“हां।”
“ताकि शेखर का ध्यान मेरी तरफ से हट जाए।”
डॉक्टर ने सिर हिलाया।
—
सिया को क्या पता था?
अमन बेचैनी से पूछ बैठा—
“लेकिन मेरी मां को क्या पता चला था?”
डॉक्टर ने उसकी तरफ देखा।
“सिया को शेखर के गुप्त कारोबार के बारे में पता चल गया था।”
“कैसे?”
“क्योंकि वह शेखर की एक कंपनी में काम करती थी।”
अमन चौंक गया।
“मेरी मां?”
“हां।”
“लेकिन उन्होंने मुझे कभी नहीं बताया।”
“क्योंकि उन्हें डर था कि तुम भी खतरे में आ जाओगे।”
डॉक्टर ने आगे कहा—
“सिया ने शेखर के खिलाफ सबूत इकट्ठा करना शुरू कर दिया।”
“उसे लाल फाइल मिली।”
आरव ने तुरंत पूछा—
“लाल फाइल में क्या था?”
डॉक्टर बोले—
“शेखर के सारे गैरकानूनी कारोबार, उसके गुप्त खातों की जानकारी, उसके लोगों के नाम और सबसे बड़ी बात…”
वह रुक गया।
आरव ने पूछा—
“क्या?”
डॉक्टर ने कहा—
“उसके असली वारिस का नाम।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
आरव ने धीरे से पूछा—
“मेरा?”
डॉक्टर ने सिर हिलाया।
“हां।”
—
आरव क्यों खतरा था?
“शेखर को डर था कि अगर उसकी मौत हो गई तो उसका साम्राज्य किसी और के हाथ चला जाएगा।”
“इसलिए उसने आरव को अपना उत्तराधिकारी बनाया।”
आरव ने कहा—
“लेकिन मैं तो बच्चा था।”
“इसीलिए उसने तुम्हें इस्तेमाल किया।”
“कैसे?”
“तुम्हारी असाधारण याददाश्त का।”
डॉक्टर ने बताया—
“तुम्हें बचपन से ही चीजें याद रखने की आदत थी। शेखर तुम्हें कोड, रास्ते और जरूरी बातें दिखाता था।”
“उसे पता था कि तुम भूलोगे नहीं।”
आरव के चेहरे पर घृणा आ गई।
“उसने मुझे इंसान नहीं समझा।”
डॉक्टर ने कहा—
“उसके लिए तुम उसका बेटा नहीं, उसकी सबसे सुरक्षित तिजोरी थे।”
आरोही ने आरव का हाथ पकड़ लिया।
आरव ने उसकी तरफ देखा।
आरोही की आंखों में उसके लिए सिर्फ प्यार था।
“अब तुम्हें किसी के लिए तिजोरी बनने की जरूरत नहीं है।”
आरव ने हल्की मुस्कान दी।
“जब तुम मेरे साथ हो, मुझे किसी चीज से डर नहीं लगता।”
अमन ने दोनों को देखा।
“ये वक्त रोमांस करने का नहीं है।”
आरोही ने उसे घूरकर देखा।
“मैं तो बस उसे हिम्मत दे रही थी।”
अमन मुस्कुरा दिया।
“ठीक है, ठीक है।”
कुछ पल के लिए माहौल हल्का हुआ।
लेकिन डॉक्टर की अगली बात ने सबकी मुस्कान छीन ली।
—
सबसे बड़ा धोखा
डॉक्टर ने कहा—
“लेकिन लाल फाइल में सिर्फ शेखर के अपराध नहीं थे।”
आरव ने पूछा—
“और क्या था?”
“एक सच ऐसा था, जिसे शेखर दुनिया से छुपाना चाहता था।”
“कौन सा?”
डॉक्टर ने कहा—
“आरव का जन्म।”
आरव चौंक गया।
“मेरा जन्म?”
“हां।”
“मेरा जन्म इतना बड़ा राज क्यों था?”
डॉक्टर ने कहा—
“क्योंकि शेखर तुम्हारा जैविक पिता नहीं था।”
आरव की सांस रुक गई।
“क्या?”
अमन ने भी डॉक्टर की तरफ देखा।
“लेकिन अभी तो…”
डॉक्टर ने कहा—
“यही भ्रम शेखर ने जानबूझकर फैलाया।”
आरव की आवाज कांपने लगी।
“तो मेरे पिता कौन हैं?”
डॉक्टर ने धीरे से कहा—
“अभय।”
आरव ने आंखें बंद कर लीं।
“तो ये सच है?”
“हां।”
“और अमन?”
डॉक्टर कुछ पल चुप रहा।
“अमन…”
अमन आगे बढ़ा।
“मेरे पिता कौन हैं?”
डॉक्टर ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हारे पिता भी अभय ही हैं।”
अमन स्तब्ध रह गया।
“तो हम दोनों…”
डॉक्टर ने कहा—
“सगे भाई हो।”
अमन की आंखों से आंसू निकल आए।
उसने आरव की तरफ देखा।
“भाई…”
आरव ने उसे गले लगा लिया।
दोनों कुछ पल तक चुपचाप एक-दूसरे को पकड़े रहे।
—
लेकिन फिर सवाल उठा
अमन ने अचानक पूछा—
“अगर हम दोनों अभय के बेटे हैं तो शेखर ने क्यों कहा कि हम दोनों में से सिर्फ एक उसका बेटा है?”
डॉक्टर चुप हो गया।
आरव ने भी उसकी तरफ देखा।
“हां।”
“वो झूठ क्यों बोला?”
डॉक्टर ने कहा—
“क्योंकि वह तुम्हें एक-दूसरे के खिलाफ करना चाहता था।”
अमन ने कहा—
“ताकि हम आपस में लड़ें।”
“हां।”
आरव ने मुट्ठी भींच ली।
“वो हमें कभी भाई नहीं बनना देना चाहता था।”
डॉक्टर ने कहा—
“लेकिन शेखर तुम्हारी एक बात नहीं समझ पाया।”
“क्या?”
“खून से बड़ा रिश्ता भरोसे का होता है।”
आरव और अमन एक-दूसरे की तरफ देखने लगे।
—
विराज कहां है?
रुद्र ने अचानक पूछा—
“डॉक्टर, विराज अभी कहां है?”
डॉक्टर का चेहरा गंभीर हो गया।
“शेखर के साथ।”
रुद्र ने कहा—
“मुझे यही डर था।”
आरव ने पूछा—
“क्यों?”
“क्योंकि विराज सिर्फ शेखर का आदमी नहीं है।”
“तो?”
रुद्र ने कहा—
“वो शेखर का उत्तराधिकारी बनना चाहता है।”
आरोही ने कहा—
“और अगर लाल फाइल उसे मिल गई तो?”
डॉक्टर ने कहा—
“वो पूरा साम्राज्य अपने नाम कर लेगा।”
अमन ने कहा—
“तो हमें लाल फाइल पहले ढूंढनी होगी।”
डॉक्टर ने कहा—
“लाल फाइल यहां नहीं है।”
आरव ने पूछा—
“फिर कहां है?”
डॉक्टर ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हारे पुराने कमरे में।”
आरव चौंक गया।
“मेरे कमरे में?”
“हां।”
“लेकिन वहां तो कुछ नहीं है।”
डॉक्टर मुस्कुराया।
“तुमने कभी अपनी पुरानी लकड़ी की घोड़े वाली खिलौना गाड़ी देखी?”
आरव के चेहरे पर अचानक बचपन की याद चमकी।
“हां।”
“उसके अंदर क्या था?”
आरव ने सिर पकड़ लिया।
उसे एक दृश्य याद आया।
छोटा आरव…
लकड़ी का घोड़ा हाथ में लिए हुए…
माधवी उसके सामने बैठी थीं।
माधवी कह रही थीं—
“इसे कभी किसी को मत देना।”
आरव की आंखें खुल गईं।
“मुझे याद है।”
अमन ने पूछा—
“क्या?”
“लाल फाइल उस खिलौने के अंदर थी।”
डॉक्टर ने सिर हिलाया।
“लेकिन वो खिलौना अब वहां नहीं है।”
आरव चौंका।
“तो?”
डॉक्टर ने कहा—
“शेखर उसे पहले ही ढूंढ चुका है।”
—
आखिरी उम्मीद
अचानक हवेली के बाहर गाड़ियों के रुकने की आवाज आई।
रुद्र खिड़की के पास गया।
बाहर कई काली गाड़ियां खड़ी थीं।
“वे आ गए।”
आरव ने पूछा—
“कौन?”
रुद्र ने कहा—
“शेखर के लोग।”
डॉक्टर ने तुरंत कहा—
“हमें पीछे के रास्ते से निकलना होगा।”
अमन ने कहा—
“लेकिन लाल फाइल?”
डॉक्टर ने आरव की तरफ देखा।
“फाइल अभी भी तुम्हारे पास है।”
आरव चौंका।
“मेरे पास?”
“हां।”
“लेकिन आपने कहा था कि शेखर उसे ले गया।”
डॉक्टर मुस्कुराया।
“मैंने कहा था कि उसने खिलौना ले लिया।”
“लेकिन फाइल?”
डॉक्टर ने आरव के सीने की तरफ इशारा किया।
“तुम्हारे अंदर छुपी यादों में।”
आरव कुछ समझ नहीं पाया।
डॉक्टर ने कहा—
“शेखर ने खिलौना लिया।”
“लेकिन लाल फाइल की असली जानकारी तुमने बचपन में याद कर ली थी।”
आरव की आंखें फैल गईं।
“तो फाइल की जरूरत ही नहीं?”
“नहीं।”
“सारा सच मेरे दिमाग में है?”
“हां।”
आरव ने आंखें बंद कर लीं।
उसे अचानक लाल रंग का एक कमरा दिखाई दिया।
एक मेज…
लाल फाइल…
शेखर…
अभय…
सिया…
माधवी…
और एक छोटा-सा तिजोरी का दरवाजा।
फिर एक नंबर उसकी आंखों के सामने चमका—
1408
आरव ने अचानक आंखें खोल दीं।
“मुझे पासवर्ड याद आ गया।”
रुद्र ने पूछा—
“कौन सा?”
आरव ने कहा—
“1408।”
डॉक्टर का चेहरा बदल गया।
“नहीं…”
आरव ने पूछा—
“क्या हुआ?”
डॉक्टर ने डरते हुए कहा—
“1408 कोई पासवर्ड नहीं है।”
“तो क्या है?”
डॉक्टर ने कांपती आवाज में कहा—
“ये वो तारीख है जिस दिन तुम्हारे पिता ने पहली बार किसी को मरवाया था।”
आरव स्तब्ध रह गया।
तभी बाहर से गोली चलने की आवाज आई।
धांय!
रुद्र ने कहा—
“अब हमारे पास ज्यादा समय नहीं है।”
आरव ने आरोही का हाथ पकड़ लिया।
“चलो।”
अमन ने कहा—
“और डॉक्टर?”
डॉक्टर ने कहा—
“मैं भी चलूंगा।”
वे पीछे के दरवाजे की तरफ बढ़े।
लेकिन जैसे ही आरव ने दरवाजा खोला…
सामने शेखर खड़े थे।
उनके साथ विराज भी था।
शेखर के हाथ में लाल फाइल थी।
उन्होंने फाइल ऊपर उठाई और मुस्कुराते हुए कहा—
“जिस चीज को तुम ढूंढ रहे हो, वो मेरे पास है, आरव।”
आरव ने कहा—
“नहीं।”
शेखर चौंके।
आरव की आंखों में अब डर नहीं था।
“असली फाइल मेरे पास है।”
शेखर की मुस्कान गायब हो गई।
आरव ने आगे बढ़कर कहा—
“क्योंकि मुझे सब याद आ गया है।”
शेखर के चेहरे पर पहली बार डर दिखाई दिया।
और विराज ने धीरे से अपनी बंदूक आरव की तरफ उठा दी।
जारी रहेगा…

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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