भाग 1
राधे राधे दोस्तों ❤️
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दिल्ली, इंडिया
रात के बारह बजे। सर्दियों की वो काली रात बारिश में पूरी तरह डूबी हुई थी। आसमान पर काले बादल छाए थे और तेज बारिश के साथ हल्का-हल्का कोहरा सड़क को अपने आगोश में लिए हुए था।
मौसम ऐसा था कि कोई भी समझदार इंसान अपने घर से बाहर निकलने के बारे में सोचता तक नहीं।
लेकिन… उस सुनसान सड़क के बीचों-बीच एक लड़की चली जा रही थी।
सड़क ज्यादा चौड़ी नहीं थी। दोनों तरफ घना जंगल था, जिसके ऊंचे-ऊंचे पेड़ तेज हवा के साथ झूम रहे थे। बारिश की तेज आवाज़ और हवा की सनसनाहट के अलावा वहां दूर-दूर तक किसी इंसान के होने का कोई निशान नहीं था।
लेकिन उस लड़की को शायद इन चीजों से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। वो लगातार चलती जा रही थी।
ना उसे बारिश की परवाह थी… ना ठंड की… और ना ही इस सुनसान रास्ते की।
ऐसा लग रहा था जैसे वो अपनी जिंदगी से ही हार चुकी हो। शायद वो रो भी रही थी। लेकिन बारिश की तेज बूंदें उसके आंसुओं को अपने साथ बहा ले जा रही थीं। करीब से देखने पर उसके चेहरे पर हल्के-हल्के चोट के निशान साफ दिखाई दे रहे थे।
उसने चटक लाल रंग का सूट पहन रखा था। वो बिल्कुल किसी नई-नवेली दुल्हन जैसी लग रही थी। लेकिन उसके कपड़े बारिश में पूरी तरह भीग चुके थे।
उसकी कलाइयों में लाल चूड़ियां थीं, जिनमें से कुछ टूट चुकी थीं। हाथों पर लगी मेहंदी बारिश में फीकी पड़ चुकी थी। मांग में लगा सिंदूर लगभग धुल चुका था, लेकिन उसकी हल्की-सी लालिमा अब भी बाकी थी।
और गले में… एक मंगलसूत्र था, वो लड़की बेहद खूबसूरत थी। लेकिन उस खूबसूरत चेहरे पर इस वक्त सिर्फ दर्द था। बहुत गहरा दर्द, आखिर कौन थी वो?
और इतनी रात को इस सुनसान जंगल वाली सड़क पर अकेली क्यों चल रही थी?
तभी… दूर से आती एक गाड़ी की हेडलाइट ने उसकी आंखों पर तेज रोशनी डाली।
लड़की ने पलटकर भी नहीं देखा। गाड़ी लगातार उसकी तरफ बढ़ती चली आ रही थी।
पों… पों…! ड्राइवर ने जोर-जोर से हॉर्न बजाया।
लेकिन लड़की अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। सड़क इतनी संकरी थी कि गाड़ी को दूसरी तरफ से निकालने की कोई गुंजाइश भी नहीं थी।
ड्राइवर ने आखिरी वक्त पर पूरी ताकत से ब्रेक लगा दिए।
चीईईईईईई…!
टायरों की तेज आवाज के साथ गाड़ी लड़की से कुछ ही इंच की दूरी पर जाकर रुकी। गाड़ी के अंदर अचानक सन्नाटा छा गया।
ड्राइवर ने घबराकर पीछे की सीट की तरफ देखा।
वहां बैठा आदमी पहले से ही उसे घूर रहा था। उसकी आंखों में साफ गुस्सा था।
ड्राइवर सहम गया। “साहब… मेरी कोई गलती नहीं है। सामने अचानक एक लड़की रोड के बीचों-बीच खड़ी हो गई थी। अगर मैं ब्रेक नहीं लगाता तो…”
वह अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया। पीछे बैठा आदमी झुंझलाकर बोला, “साला… सबको मरने के लिए मेरी कार के सामने ही आना होता है।”
उसने गुस्से में अपनी घड़ी की तरफ देखा और फिर सामने खड़ी लड़की को। “अगर कुछ हो जाता ना, तो कल सुबह हर न्यूज़ चैनल पर एक ही खबर चलती…”
उसके होंठों पर एक कड़वी मुस्कान आई। “रूद्रांश शेखावत की गाड़ी से लड़की की मौत।”
ड्राइवर ने कुछ नहीं कहा। वह सामने खड़ी लड़की को देखने लगा। हेडलाइट की तेज रोशनी में अब उसका चेहरा साफ नजर आ रहा था।
बारिश लगातार हो रही थी। लेकिन उसकी आंखों में उमड़ रहा दर्द शायद इस बारिश से भी ज्यादा गहरा था।
रूद्रांश ने आखिरकार गुस्से में गाड़ी का दरवाजा खोला और बाहर निकल आया। बारिश की ठंडी बूंदें कुछ ही सेकंड में उसके बालों और कपड़ों को भिगोने लगीं।
उसने इसकी परवाह नहीं की। महंगे जूते कीचड़ में धंस गए, लेकिन उसकी नजरें सामने खड़ी लड़की पर टिकी थीं।
वह उसके पास जाकर रुक गया। “मरना है तो किसी और जगह जाकर मरो।”
उसकी आवाज में गुस्सा था। “मेरी गाड़ी के सामने नहीं।”
लड़की ने धीरे-धीरे अपना चेहरा उठाया। उसकी आंखें बुरी तरह सूजी हुई थीं, होंठ कांप रहे थे। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
रूद्रांश ने गौर से उसे देखा। उसके चेहरे पर हल्की चोटों के निशान थे।
भीगे बाल उसके चेहरे से चिपके हुए थे। पलकों पर बारिश की बूंदें ठहरी हुई थीं।
और उसकी आंखें… जैसे बिल्कुल खाली थीं।
मानो उन आंखों में रोने के लिए भी अब कुछ बाकी नहीं बचा था। रूद्रांश का गुस्सा कुछ कम हुआ।
उसने दोबारा पूछा, “कौन हो तुम?”
कोई जवाब नहीं। “इस वक्त यहां क्या कर रही हो?”
लड़की ने धीरे से अपनी गर्दन दूसरी तरफ घुमा ली रूद्रांश ने गहरी सांस ली। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर इस लड़की के साथ ऐसा क्या हुआ है।
उसने अपना हाथ उसके कंधे पर रखने की कोशिश की।
“देखो… अगर तुम्हें कोई परेशानी है, तो”
लड़की ने अचानक उसका हाथ झटक दिया।
वह एक कदम पीछे हट गई। “मुझे छोड़ दो…”
उसकी आवाज इतनी धीमी थी कि बारिश के शोर में लगभग खो गई। रूद्रांश ने उसकी तरफ देखा।
लड़की ने कांपती आवाज में दोबारा कहा, “मुझे कहीं नहीं जाना…”
उस एक वाक्य में इतना दर्द था कि कुछ पल के लिए रूद्रांश भी चुप रह गया। उसने लड़की को गौर से देखा।
लाल दुल्हन का जोड़ा… टूटी हुई चूड़ियां… धुला हुआ सिंदूर… मंगलसूत्र… और चेहरे पर चोटों के निशान।
ये कोई सामान्य मामला नहीं था। रूद्रांश ने आसपास नजर दौड़ाई। चारों तरफ घना जंगल था। इतनी रात को इस सुनसान सड़क पर ये लड़की अकेली थी।
और शायद किसी बड़ी मुसीबत से भागकर यहां तक पहुंची थी। “तुम्हें जाना तो पड़ेगा।”
इस बार रूद्रांश की आवाज पहले से थोड़ी नरम थी। “लेकिन उससे पहले मुझे ये बताओ कि हुआ क्या है?”
लड़की ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में अचानक डर उभर आया। उसने कुछ कहने के लिए होंठ खोले…
लेकिन आवाज नहीं निकली। अगले ही पल उसका शरीर लड़खड़ाया। “अरे…”
रूद्रांश ने झटके से उसे संभाल लिया। लड़की बेहोश हो चुकी थी। “अब ये और बचा था!”
रूद्रांश ने झुंझलाकर कहा, लेकिन उसके हाथों की पकड़ लड़की को संभालने में बेहद सावधान थी।
उसने एक नजर उसके चेहरे पर डाली। इतनी खूबसूरत लड़की… और इस हालत में। उसके चेहरे पर चोटों के निशान देखकर रूद्रांश की भौंहें सिकुड़ गईं।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर किसने इसके साथ ऐसा किया होगा। लेकिन यहां खड़े रहना ठीक नहीं था। उसने लड़की को अपनी बाहों में उठाया और गाड़ी की तरफ बढ़ गया। ड्राइवर तुरंत नीचे उतरा और पीछे का दरवाजा खोल दिया।
रूद्रांश ने लड़की को पिछली सीट पर आराम से लिटाया और खुद उसके पास बैठ गया। “गाड़ी स्टार्ट करो।”
“जी, साहब।” ड्राइवर ने तुरंत गाड़ी आगे बढ़ा दी।
गाड़ी की रफ्तार बढ़ते ही बाहर की बारिश और जंगल पीछे छूटने लगे।
लेकिन रूद्रांश के दिमाग में सवालों का तूफान शुरू हो चुका था। ये लड़की कौन थी? इसके साथ आखिर हुआ क्या था? और वो इस हालत में अकेली वहां क्यों घूम रही थी?
उसकी नजर बार-बार लड़की पर जा रही थी। उसके भीगे बाल चेहरे पर चिपके हुए थे। कलाई पर टूटी हुई लाल चूड़ियों के कुछ टुकड़े अब भी मौजूद थे।
रूद्रांश ने एक पल के लिए उसकी तरफ देखा और फिर नजरें सामने कर लीं। उसे खुद नहीं पता था कि वह इस अनजान लड़की की मदद क्यों कर रहा था।
लेकिन एक बात तय थी… आज रात उसकी जिंदगी में कुछ
ऐसा आने वाला था, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
कहानी आगे जारी रहेगी।
प्लीज आप सब अपना साथ बनाएं रखें।

मेरा नाम नेहा गोयल है।
और पिछले दो वर्ष से मैं प्रतिलिपि पर कहानियां लिखती आ रही हूँ।
मुझे लेखन करते हुए बहुत ही अच्छा लगता है।
वैसे मुझे लिखने से पढ़ना ज्यादा पसंद है।

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