वफादार पालतू कुत्ता
शहर से थोड़ा दूर एक छोटे से गांव में अर्जुन अपनी पत्नी सीमा और दस साल के बेटे रोहन के साथ रहता था। उनका घर छोटा था, लेकिन परिवार बहुत खुश था। घर के बाहर एक बड़ा-सा आंगन था और आंगन के एक कोने में लकड़ी का छोटा-सा शेड बना था।
एक दिन अर्जुन बाजार से लौट रहा था। रास्ते में उसे सड़क किनारे एक छोटा-सा घायल पिल्ला दिखाई दिया। पिल्ला लगातार कराह रहा था और डर के मारे एक पेड़ के पीछे छिपा था।
अर्जुन ने उसे धीरे से उठाया।
“अरे बेचारे… तुझे किसने इतना चोट पहुंचा दी?”
पिल्ले ने डरते हुए अर्जुन की तरफ देखा।
अर्जुन उसे घर ले आया।
रोहन पिल्ले को देखते ही खुश हो गया।
“पापा! ये हमारे साथ रहेगा?”
अर्जुन मुस्कुराया।
“अगर इसकी तबीयत ठीक हो गई तो क्यों नहीं?”
सीमा ने उसके घाव साफ किए और उसे दूध दिया।
कुछ ही दिनों में पिल्ला ठीक होने लगा। रोहन ने उसका नाम रखा—शेरू।
शेरू बहुत समझदार था। वह पूरे दिन रोहन के आसपास रहता। रोहन स्कूल जाता तो दरवाजे तक छोड़ने जाता और जब तक वह लौटकर नहीं आता, दरवाजे के पास बैठा रहता।
एक दिन रोहन स्कूल से लौटकर आया तो उसके हाथ में एक छोटा-सा बिस्कुट का पैकेट था।
उसने शेरू को देखकर कहा, “देख, तेरे लिए क्या लाया हूं!”
शेरू खुशी से पूंछ हिलाने लगा।
रोहन ने उसे बिस्कुट दिया और बोला, “तू मेरा सबसे अच्छा दोस्त है।”
शेरू ने जैसे उसकी बात समझ ली। वह उसके पैरों के पास बैठ गया।
समय बीतता गया और छोटा-सा पिल्ला बड़ा होकर मजबूत कुत्ता बन गया। उसका रंग भूरा था और गले में लाल पट्टा बंधा रहता था।
अर्जुन ने घर की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी शेरू को दे दी।
लेकिन शेरू सिर्फ घर की रखवाली नहीं करता था। वह परिवार के हर सदस्य का ध्यान रखता था।
सुबह अर्जुन खेत पर जाता तो शेरू कुछ दूर तक उसके साथ जाता।
सीमा कुएं से पानी भरने जाती तो शेरू उसके पीछे चलता।
और रोहन स्कूल जाता तो शेरू हमेशा गेट तक उसे छोड़ने जाता।
एक दिन रोहन ने हंसते हुए कहा, “शेरू, तू मुझे स्कूल छोड़ने क्यों आता है? मैं बच्चा नहीं हूं।”
शेरू ने उसकी तरफ देखा और पूंछ हिलाई।
रोहन हंस पड़ा।
“अच्छा बाबा, चल।”
एक शाम अचानक गांव में तेज बारिश शुरू हो गई। बिजली चमक रही थी और हवा बहुत तेज चल रही थी।
अर्जुन घर लौटने में देर कर रहा था।
सीमा बार-बार दरवाजे की तरफ देख रही थी।
“पता नहीं आज इतनी देर क्यों हो गई।”
शेरू भी बेचैन था।
वह बार-बार दरवाजे तक जाता और बाहर देखने लगता।
रात काफी हो गई, लेकिन अर्जुन नहीं आया।
सीमा ने पड़ोसियों को खबर की।
कुछ लोग टॉर्च लेकर अर्जुन को खोजने निकल पड़े।
शेरू भी उनके साथ दौड़ पड़ा।
करीब एक किलोमीटर दूर खेत के पास उन्हें अर्जुन की साइकिल मिली।
लेकिन अर्जुन वहां नहीं था।
शेरू जमीन सूंघते हुए आगे बढ़ने लगा।
एक आदमी बोला, “लगता है कुत्ता किसी तरफ जा रहा है।”
सब लोग उसके पीछे चल दिए।
थोड़ी दूर जाकर शेरू एक गड्ढे के पास रुक गया और जोर-जोर से भौंकने लगा।
नीचे अर्जुन गिरा हुआ था।
वह घायल था और उठ नहीं पा रहा था।
लोगों ने तुरंत उसे बाहर निकाला और अस्पताल ले गए।
डॉक्टर ने कहा, “अगर थोड़ी और देर हो जाती तो मुश्किल हो सकती थी।”
सीमा ने शेरू को गले लगा लिया।
“तूने आज मेरे पति की जान बचा ली।”
शेरू चुपचाप उसके पैरों के पास बैठ गया।
उस दिन के बाद पूरे गांव में शेरू की चर्चा होने लगी।
लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी।
कुछ महीनों बाद अर्जुन को काम के सिलसिले में शहर जाना पड़ा। सीमा और रोहन भी उसके साथ गए। घर की देखभाल के लिए शेरू को पड़ोसी चाचा के पास छोड़ दिया गया।
रोहन जाते समय शेरू को गले लगाकर बोला, “हम जल्दी वापस आएंगे।”
शेरू ने रोहन को जाते हुए बहुत देर तक देखा।
तीन दिन बाद परिवार वापस लौट आया।
गाड़ी घर के पास रुकी।
दरवाजा खुलते ही शेरू दौड़ता हुआ आया।
वह कभी अर्जुन के पास जाता, कभी सीमा के और फिर रोहन के पास जाकर उछलने लगा।
रोहन ने उसे गले लगा लिया।
“मुझे पता था तू हमें बहुत याद कर रहा होगा।”
शेरू खुशी से पूंछ हिलाता रहा।
कुछ दिन बाद एक रात घर में अजीब आवाज हुई।
शेरू अचानक उठ गया।
वह दरवाजे की तरफ देखने लगा।
अर्जुन ने नींद में पूछा, “क्या हुआ?”
शेरू धीरे-धीरे दरवाजे के पास गया और जोर से भौंकने लगा।
अर्जुन उठकर बाहर आया।
आंगन में सब कुछ शांत था।
“कुछ नहीं है शेरू। सो जा।”
लेकिन शेरू शांत नहीं हुआ।
वह घर के पीछे की तरफ भागा।
अर्जुन भी उसके पीछे गया।
वहां दीवार के पास एक आदमी छिपा हुआ था। अर्जुन को देखते ही वह भागने लगा।
शेरू उसके पीछे दौड़ा और जोर-जोर से भौंकने लगा।
आवाज सुनकर पड़ोसी भी बाहर आ गए।
वह आदमी पकड़ा गया।
पता चला कि वह कई दिनों से गांव के घरों की रेकी कर रहा था।
अर्जुन ने शेरू के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा—
“तू सच में हमारे घर का रखवाला है।”
शेरू ने जैसे जवाब में उसकी हथेली चाट ली।
समय बीतता गया।
रोहन बड़ा होने लगा।
अब वह स्कूल के बाद पढ़ाई करने बैठता तो शेरू उसके पास ही लेट जाता।
परीक्षा के दिनों में रोहन देर रात तक पढ़ता।
सीमा कहती, “रोहन, अब सो जाओ।”
रोहन कहता, “बस थोड़ा और।”
शेरू उसके पैरों के पास बैठा रहता।
एक रात रोहन किताब पढ़ते-पढ़ते वहीं सो गया।
सुबह सीमा ने देखा कि शेरू पूरी रात उसके पास बैठा रहा था।
वह मुस्कुराई।
“तू भी ना… इसे अकेला नहीं छोड़ता।”
शेरू ने आंखें झपकाईं।
कुछ साल बाद शेरू बूढ़ा हो गया।
अब वह पहले की तरह तेज नहीं दौड़ पाता था। ज्यादा समय आंगन में बैठकर बिताता।
रोहन अब कॉलेज जाने लगा था।
एक दिन वह शहर जाने के लिए बस में बैठ रहा था।
शेरू गेट तक आया।
रोहन ने उसके सिर पर हाथ रखा।
“मैं जल्दी वापस आऊंगा दोस्त।”
शेरू बस को तब तक देखता रहा, जब तक वह आंखों से ओझल नहीं हो गई।
उस दिन शाम को शेरू खाना भी नहीं खा रहा था।
सीमा ने कहा, “रोहन को याद कर रहा है।”
अर्जुन बोला, “वो जल्दी आएगा।”
दो दिन बाद रोहन अचानक घर लौट आया।
शेरू ने जैसे ही उसकी आवाज सुनी, वह अपनी पूरी ताकत से उठकर दरवाजे तक पहुंचा।
रोहन ने उसे गले लगा लिया।
“शेरू!”
दोनों कुछ देर वैसे ही बैठे रहे।
रोहन की आंखों में आंसू थे।
“तूने मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया।”
शेरू ने धीरे से अपना सिर उसकी गोद में रख दिया।
कुछ महीने बाद शेरू बहुत कमजोर हो गया।
एक शाम पूरा परिवार उसके पास बैठा था।
रोहन उसका सिर सहला रहा था।
“तूने हमारे लिए बहुत कुछ किया है शेरू।”
अर्जुन ने कहा, “ये सिर्फ हमारा पालतू कुत्ता नहीं था… ये हमारे परिवार का हिस्सा था।”
सीमा की आंखों में आंसू आ गए।
शेरू ने एक-एक करके तीनों की तरफ देखा।
फिर उसने धीरे से अपनी पूंछ हिलाई।
उस रात परिवार उसके पास ही बैठा रहा।
अगली सुबह शेरू शांत था।
उसने अपनी जिंदगी प्यार और वफादारी से जी थी।
रोहन ने उसकी पुरानी लाल पट्टी हाथ में लेकर कहा—
“लोग कहते हैं कुत्ता इंसान का सबसे वफादार दोस्त होता है… लेकिन मेरे लिए शेरू सिर्फ दोस्त नहीं था। वह मेरा परिवार था।”
अर्जुन ने शेरू की याद में आंगन के उसी नीम के पेड़ के नीचे एक छोटा-सा पत्थर रखा।
उस पर लिखा“शेरू — जिसने घर की रखवाली नहीं, हमारे दिलों की रखवाली की।”
और आज भी जब रोहन गांव आता, वह उस जगह बैठकर कुछ देर शेरू को याद करता।
क्योंकि कुछ रिश्ते बोलकर नहीं निभाए जाते।
वे बस दिल से निभाए जाते हैं।
और शेरू ने अपने पूरे जीवन में यही साबित किया था कि सच्ची वफादारी शब्दों की मोहताज नहीं होती।

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं
अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं
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