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तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा

पढ़ने का समय : 5 मिनट

गाँव रामपुर में तीन दोस्तों की जोड़ी इतनी मशहूर थी कि लोग उन्हें नाम से कम और “तीन तिगाड़ा” कहकर ज़्यादा बुलाते थे।

पहला था भोला। नाम की तरह ही भोला नहीं, बल्कि थोड़ा सनकी भी था। उसे हर काम अपने ही अजीब तरीके से करना पसंद था। कोई कहे दाएँ जाओ, तो वह कहे, “सब दाएँ जाते हैं, मैं बाएँ जाऊँगा।”

दूसरा था गोलू। हर समय हँसता रहता। चाहे कैसी भी मुसीबत हो, उसके चेहरे पर मुस्कान कभी नहीं जाती थी। उसकी एक ही आदत थी—हर बात में मज़ाक करना।

तीसरा था पप्पू। वह इतना नादान और बेपरवाह था कि लोग कहते, “इसका दिमाग छुट्टी पर रहता है।” कोई भी कुछ कह दे, वह बिना सोचे वही कर देता।

तीनों का हाल ऐसा था कि जहाँ जाते, वहाँ कोई न कोई गड़बड़ ज़रूर हो जाती।

एक दिन तीनों ने सोचा कि अब गाँव में अपनी इज़्ज़त बनानी चाहिए।

भोला बोला, “चलो आज किसी की मदद करते हैं।”

गोलू हँसते हुए बोला, “हाँ, लोग कहेंगे कि ये तीनों सुधर गए।”

पप्पू बोला, “और अगर नहीं सुधरे तो?”

दोनों ने उसे घूरकर देखा।

सबसे पहले उन्हें एक बूढ़ी अम्मा मिलीं जो सिर पर लकड़ियों का गट्ठर उठाए जा रही थीं।

तीनों दौड़ पड़े।

“अम्मा, हम उठा देते हैं।”

अम्मा खुश हो गईं।

लेकिन जैसे ही भोला ने गट्ठर उठाया, उसने कहा, “इसे ऐसे नहीं, उल्टा पकड़ना चाहिए।”

उसने गट्ठर उल्टा कर दिया।

सारी लकड़ियाँ सड़क पर बिखर गईं।

उधर गोलू इतनी ज़ोर से हँसा कि संतुलन बिगड़ गया और वह भी लकड़ियों पर गिर पड़ा।

पप्पू उन्हें उठाने लगा, लेकिन उसने सूखी लकड़ियों की जगह पास रखे किसी के कपड़े उठा लिए।

अम्मा सिर पकड़कर बैठ गईं।

तीनों चुपचाप वहाँ से खिसक लिए।

चलते-चलते उन्हें लगा कि खेती में मदद करनी चाहिए।

एक किसान खेत में पानी लगा रहा था।

भोला बोला, “चाचा, हम कर देते हैं।”

किसान ने खुशी-खुशी हाँ कर दी।

जैसे ही किसान घर गया, भोला ने नहर का रास्ता बदल दिया।

बोला, “सीधा पानी जाएगा तो मज़ा क्या?”

नतीजा…

पूरा पानी खेत छोड़कर सड़क पर बहने लगा।

गोलू हँस-हँसकर लोटपोट हो गया।

पप्पू बोला, “लगता है सड़क पर धान उगेंगे।”

इतने में किसान वापस आया।

उसने देखा कि खेत सूखा है और सड़क नदी बनी हुई है।

तीनों फिर भाग खड़े हुए।

अब उन्होंने फैसला किया कि किसी की दुकान पर मदद करेंगे।

हलवाई ने कहा, “इन लड्डुओं पर चाँदी का वर्क लगा दो।”

भोला बोला, “वर्क से क्या होगा? चमक तो तेल से आएगी।”

उसने लड्डुओं पर तेल लगा दिया।

गोलू हँसते-हँसते चीनी का डिब्बा गिरा बैठा।

पप्पू ने समझा कि सब खराब हो गया है।

उसने पूरा बेसन पानी में डाल दिया।

थोड़ी ही देर में लड्डुओं की जगह बेसन का हलवा बन गया।

हलवाई चिल्लाया, “तुम तीनों दुकान से बाहर निकलो!”

अब तो पूरे गाँव में चर्चा होने लगी।

“जहाँ ये तीन पहुँच जाएँ, वहाँ भगवान ही मालिक है।”

तीनों उदास होकर तालाब किनारे बैठ गए।

गोलू पहली बार चुप था।

तभी गाँव के सरपंच आए।

उन्होंने कहा, “तुम लोग इतने परेशान क्यों हो?”

भोला बोला, “हम अच्छा करना चाहते हैं, लेकिन सब बिगड़ जाता है।”

सरपंच मुस्कुराए।

उन्होंने कहा, “अगर सच में मदद करनी है तो पहले सीखो, फिर काम करो।”

तीनों को बात समझ आ गई।

अगले दिन गाँव में सफाई अभियान रखा गया।

इस बार उन्होंने बिना अपनी अक्ल लगाए वही किया जो लोगों ने बताया।

भोला सिर्फ झाड़ू लगाता रहा।

गोलू कूड़ा उठाता रहा और बीच-बीच में सबका मन भी हँसाकर हल्का करता रहा।

पप्पू बस बोरी पकड़कर चलता रहा।

पहली बार कोई गड़बड़ नहीं हुई।

गाँव वाले खुश हो गए।

लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंज़ूर था।

काम खत्म होने के बाद पप्पू बोला, “अब कूड़ा कहाँ डालना है?”

किसी ने कहा, “पीछे वाले गड्ढे में।”

पप्पू बिना देखे बोरी उठाकर फेंक आया।

कुछ देर बाद पता चला कि वह कूड़ा नहीं, सरपंच का नया खाद का बोरा था।

असली कूड़ा वहीं पड़ा रह गया।

पूरा गाँव पहले कुछ पल चुप रहा…

फिर इतनी ज़ोर से हँसा कि तालाब तक आवाज़ पहुँच गई।

सरपंच भी हँस पड़े।

उन्होंने कहा, “लगता है तुम तीनों की किस्मत में थोड़ा-बहुत काम बिगाड़ना लिखा है।”

भोला बोला, “हम कोशिश तो पूरी करते हैं।”

गोलू हँसते हुए बोला, “हमारा इरादा अच्छा होता है, बस नतीजा थोड़ा अलग निकल जाता है।”

पप्पू मासूमियत से बोला, “अगली बार शायद सही हो जाए…”

यह सुनकर फिर सब हँस पड़े।

उस दिन के बाद गाँव में जब भी कोई काम बिगड़ जाता, लोग मुस्कुराकर बस एक ही बात कहते—

“लगता है यहाँ तीन तिगाड़ा होकर गए हैं!”

और तीनों दोस्त भी अब इस बात का बुरा नहीं मानते थे। वे हर गलती से कुछ नया सीखते, फिर अगले काम में जुट जाते। हालाँकि उनके साथ कोई न कोई छोटी-मोटी गड़बड़ी फिर भी हो जाती थी, लेकिन उनकी सच्ची दोस्ती, साफ़ दिल और लोगों को हँसा देने वाली आदत ने पूरे गाँव का दिल जीत लिया था।

सीख: अच्छा इरादा ज़रूरी है, लेकिन किसी भी काम को सही तरीके से सीखकर करना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी होता है। और सच्चे दोस्त हर मुसीबत को भी हँसी में बदल

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Auther preeti Sharma

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं

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