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एक कमरा दो अजनबी

पढ़ने का समय : 6 मिनट

एक कमरा, दो अजनबी और एक अनकहा एहसास

 

विदेश के एक बड़े कॉलेज में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था थोड़ी अलग थी। वहाँ लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल तो थे, लेकिन कुछ खास कमरों में अलग-अलग देशों के छात्रों को साथ रहने की अनुमति थी। कॉलेज का मानना था कि इससे छात्रों को अलग-अलग संस्कृतियों और लोगों को समझने का मौका मिलता है।

 

ऐसे ही एक कमरे में पहले से तीन लड़कियाँ रहती थीं —सोम्या, एलिना और कैथरीन।

 

सोम्या भारत से आई थी। वह बेहद शांत, मासूम और प्यारी लड़की थी। बात करते समय उसकी आवाज में एक अजीब-सी नरमी रहती थी। वह हर किसी से जल्दी घुलती-मिलती नहीं थी, लेकिन जिसे अपना मान लेती, उसके लिए पूरी तरह खड़ी रहती।

 

एक शाम कमरे का दरवाजा खुला और कॉलेज का वार्डन एक लड़के के साथ अंदर आया।

 

“यह तुम्हारा नया रूममेट है। नाम है सुशांत।”

 

तीनों लड़कियाँ एक-दूसरे का चेहरा देखने लगीं।

 

सुशांत ने बस हल्का-सा सिर हिलाया।

 

“हैलो।”

 

“बस इतना?” एलिना हँसते हुए बोली, “हमने सोचा था नए रूममेट का कम से कम परिचय तो होगा।”

 

सुशांत ने अपना बैग नीचे रखा।

 

“सुशांत। इंडिया से हूँ। बाकी… बाद में।”

 

कैथरीन ने धीरे से एलिना के कान में कहा, “ये तो बहुत सीरियस है।”

 

एलिना हँस पड़ी।

 

सोम्या चुपचाप उसे देख रही थी।

 

सुशांत ने कमरे में नजर दौड़ाई और फिर अपना सामान एक खाली कोने में रखने लगा। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि कमरे में तीन लड़कियाँ हैं।

 

एलिना ने पूछा, “तुम्हें अजीब नहीं लग रहा?”

 

“क्या?”

 

“हम तीन लड़कियाँ हैं और तुम अकेले लड़के।”

 

सुशांत ने बिना उसकी तरफ देखे कहा, “मुझे पढ़ाई करनी है। कमरे में कौन है, इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता।”

 

कैथरीन ने मजाक में कहा, “वाह! इतना सीरियस इंसान हमने पहली बार देखा है।”

 

सोम्या के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

 

उस रात सुशांत देर तक पढ़ता रहा। बाकी तीनों आपस में बातें करती रहीं। एलिना और कैथरीन लगातार उससे बात करने की कोशिश करतीं, लेकिन सुशांत के जवाब छोटे होते।

 

“तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?”

 

“नहीं।”

 

“क्यों?”

 

“दिलचस्पी नहीं।”

 

“कभी प्यार हुआ?”

 

“नहीं।”

 

“होगा भी नहीं लगता।”

 

“शायद।”

 

एलिना ने हँसते हुए कहा, “तुम इंसान हो या किताब?”

 

सुशांत ने पहली बार मुस्कुराकर उसकी तरफ देखा।

 

“किताब शायद ज्यादा अच्छी होती।”

 

सब हँस पड़ीं।

 

बस सोम्या उसे चुपचाप देखती रही।

 

अगले कुछ दिनों में कमरे का माहौल थोड़ा बदलने लगा। एलिना और कैथरीन सुशांत को परेशान करने के नए-नए तरीके ढूँढतीं। कभी उसका पेन छिपा देतीं, कभी उसकी किताब के ऊपर मजाकिया पर्ची रख देतीं।

 

लेकिन सोम्या कभी उसे परेशान नहीं करती थी।

 

एक दिन सुशांत लाइब्रेरी से वापस आया तो उसने देखा कि उसकी मेज पर खाना रखा था।

 

वह हैरान हुआ।

 

“ये किसने रखा?”

 

सोम्या ने किताब से नजर उठाई।

 

“मैंने।”

 

“क्यों?”

 

“सुबह से तुमने कुछ नहीं खाया था।”

 

सुशांत कुछ पल उसे देखता रहा।

 

“तुम्हें कैसे पता?”

 

सोम्या मुस्कुराई।

 

“जब कोई रोज एक ही समय पर खाना खाता हो और आज नहीं खाए, तो पता चल जाता है।”

 

सुशांत ने पहली बार महसूस किया कि कमरे में कोई ऐसा भी था जो उसकी चुप्पी को समझने की कोशिश करता था।

 

“थैंक यू।”

 

“कोई बात नहीं।”

 

बस इतना ही।

 

लेकिन उस छोटे-से पल के बाद सुशांत के अंदर कुछ बदलने लगा।

 

अब कमरे में आते ही उसकी नजर सबसे पहले सोम्या को ढूँढती।

 

वह खुद इस बदलाव को समझ नहीं पा रहा था।

 

एक शाम बारिश हो रही थी। बिजली चली गई और कमरे में अंधेरा छा गया।

 

एलिना और कैथरीन मोमबत्ती लेने बाहर चली गईं।

 

कमरे में सिर्फ सुशांत और सोम्या रह गए।

 

सोम्या खिड़की के पास बैठी बारिश देख रही थी।

 

“तुम्हें बारिश पसंद है?” सुशांत ने अचानक पूछा।

 

सोम्या ने पलटकर देखा।

 

“हाँ।”

 

“क्यों?”

 

“पता नहीं। बारिश में सब कुछ थोड़ा सच्चा लगता है।”

 

सुशांत चुप हो गया।

 

सोम्या ने पूछा, “तुम हमेशा इतने चुप क्यों रहते हो?”

 

“शायद आदत है।”

 

“किसी से बात करने का मन नहीं करता?”

 

सुशांत ने कुछ पल सोचा।

 

“पहले नहीं करता था।”

 

सोम्या ने उसकी तरफ देखा।

 

“और अब?”

 

सुशांत ने नजरें झुका लीं।

 

“अब… कभी-कभी करता है।”

 

सोम्या समझ नहीं पाई कि वह किसके बारे में कह रहा है।

 

तभी एलिना और कैथरीन वापस आ गईं और कमरे का माहौल फिर सामान्य हो गया।

 

लेकिन उस रात सुशांत देर तक सो नहीं पाया।

 

उसे बार-बार सोम्या की मुस्कान याद आ रही थी।

 

कुछ दिनों बाद कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम था। सभी छात्र तैयारी में व्यस्त थे। सोम्या भी एक प्रस्तुति की तैयारी कर रही थी। वह मंच के पीछे घबराई हुई खड़ी थी।

 

सुशांत ने उसे देखा।

 

“डर लग रहा है?”

 

सोम्या ने धीरे से कहा, “थोड़ा।”

 

“तुम कर लोगी।”

 

“तुम्हें इतना भरोसा कैसे है?”

 

“क्योंकि तुम जब किसी चीज को दिल से करती हो, तो उसे अच्छा ही करती हो।”

 

सोम्या कुछ पल उसे देखती रही।

 

“तुम आजकल बहुत बातें करने लगे हो।”

 

सुशांत मुस्कुरा दिया।

 

“शायद किसी की वजह से।”

 

सोम्या के चेहरे पर हल्की-सी लाली आ गई।

 

उस दिन सोम्या ने मंच पर शानदार प्रस्तुति दी।

 

सबसे ज्यादा खुशी सुशांत के चेहरे पर थी।

 

एलिना ने यह देख लिया।

 

वह कैथरीन के पास जाकर धीरे से बोली, “मुझे लगता है हमारे सीरियस साहब बदल रहे हैं।”

 

कैथरीन हँसते हुए बोली, “और वजह भी साफ है।”

 

दोनों ने सोम्या और सुशांत की तरफ देखा।

 

सुशांत को अब खुद से एक सवाल पूछना पड़ रहा था।

 

जिस लड़के को कभी रिश्तों में कोई दिलचस्पी नहीं थी, वह अब हर दिन किसी एक लड़की के कमरे में आने का इंतजार क्यों करता था?

 

उसे सोम्या की आवाज अच्छी क्यों लगती थी?

 

उसकी मुस्कान देखकर मन हल्का क्यों हो जाता था?

 

और सबसे बड़ी बात…

 

अगर सोम्या एक दिन कमरे में न हो, तो पूरा कमरा खाली-खाली क्यों लगता था?

 

सुशांत को जवाब पता था।

 

बस वह उसे स्वीकार करने से डर रहा था।

 

क्योंकि यह सिर्फ पसंद नहीं थी।

उसके दिल में सोम्या के लिए एक ऐसा एहसास जन्म ले चुका था, जिसकी उसे खुद कभी उम्मीद नहीं थी।

 

और सोम्या?

वह भी शायद उस एहसास को महसूस करने लगी थी…

 

लेकिन दोनों में से किसी ने अभी तक उसे शब्द नहीं दिए थे।

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