🔐 लॉग-इन या रजिस्टर करें  

बेवफाई भाग 2

पढ़ने का समय : 6 मिनट

बेवफाई

 

Part 2

 

छह महीने बाद, 

 

अगले छह महीने रिया ने खुद को पूरी तरह काम में डुबो दिया। वह एक छोटे से डिजाइन स्टूडियो में काम करती थी। आरव से अलग होने के बाद उसने खुद को संभालना सीखा।

 

पहले वह हर रात रोती थी। फिर रोना बंद हो गया। पहले उसे आरव की याद आती थी। फिर उसने खुद को याद करना शुरू किया। उसने अपने स्टूडियो को बड़ा किया।

 

नई टीम बनाई। और छह महीने बाद… रिया का नाम मुंबई के युवा फैशन डिजाइनरों में गिना जाने लगा।

वो रिया जिसे कुछ महीनों पहले तक कोई नहीं जानता था आज उसने अपना एक मुकाम हासिल कर लिया था। 

 

एक दिन उसे एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला। क्लाइंट का नाम देखकर वह कुछ सेकंड के लिए चुप रह गई।

 

आरव मल्होत्रा। उसकी कंपनी। रिया ने फाइल बंद कर दी। “मैं ये प्रोजेक्ट नहीं करूंगी।”

 

लेकिन कुछ ही देर बाद उसे क्लाइंट की शर्तों के बारे में पता चला।

 

प्रोजेक्ट किसी और डिजाइनर को नहीं दिया जा सकता था। उसे ही करना था।

 

रिया ने गहरी सांस ली। “ठीक है।”

 

उसे क्या पता था कि यह मुलाकात उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सच सामने लाने वाली थी।

 

 

अगले दिन वह आरव के ऑफिस पहुंची। दरवाजा खोलते ही उसकी नजर आरव पर पड़ी।

 

छह महीने में वह बदल चुका था।

 

चेहरे पर पहले से ज्यादा थकान थी। आंखों के नीचे हल्के काले घेरे। लेकिन सबसे ज्यादा अजीब था…

उसकी आंखों में दर्द। रिया ने फाइल टेबल पर रखी।

 

“प्रोजेक्ट की सारी डिटेल्स मैंने देख ली हैं।”

 

आरव उसे देखता रहा। “तुम ठीक हो?”

 

रिया ने ठंडी आवाज में कहा, “ये सवाल अब तुम्हें पूछने का अधिकार नहीं है।”

 

आरव चुप हो गया। दोनों के बीच कुछ सेकंड की खामोशी रही।

 

फिर रिया ने कहा, “काम की बात करें?”

 

आरव ने सिर हिलाया, “हां।”

 

दोनों प्रोफेशनल हो गए, कम से कम बाहर से।

 

लेकिन हर मुलाकात में कुछ अनकहा रह जाता।

 

एक दिन अचानक आरव ने पूछा, “तुमने दोबारा शादी क्यों नहीं की?”

 

रिया ने उसकी तरफ देखा। “तुमने की?”

 

आरव चुप हो गया। रिया मुस्कुरा दी। “मुझे भी जवाब नहीं चाहिए।”

 

वह वहां से जाने लगी। तभी आरव ने कहा, “रिया…”

 

वह रुक गई। “मैंने तुम्हारे साथ बेवफाई नहीं की थी।”

 

रिया के चेहरे पर कठोरता आ गई। “फिर मीरा कौन थी?”

 

आरव ने आंखें बंद कर लीं। “वो मेरी बहन है।”

 

रिया जैसे पत्थर की बन गई। “क्या?”

 

आरव बोला, “मेरी छोटी बहन।”

 

रिया कुछ बोल नहीं पाई। आरव ने टेबल की दराज खोली और एक पुराना लिफाफा निकाला।

 

उसमें मेडिकल रिपोर्ट्स थीं। “मीरा को कैंसर था।”

 

रिया के हाथ कांपने लगे। “क्या?”

 

आरव, “डॉक्टर ने कहा था कि उसके पास ज्यादा वक्त नहीं है।” आरव की आवाज टूटने लगी।

 

“मीरा मेरी वजह से नहीं… मेरी वजह से नहीं, बल्कि इसलिए मेरी जिंदगी में वापस आई थी क्योंकि उसकी आखिरी इच्छा थी कि मैं उसे अपनी जिंदगी में खुश देखूं।”

 

रिया की आंखों से आंसू बह निकले।“तो तलाक?”

 

आरव, “वो भी झूठ था।”

 

“क्यों?”

 

आरव ने उसकी तरफ देखा। “क्योंकि मुझे लगा… अगर मैं तुम्हें अपने से दूर कर दूंगा, तो तुम सुरक्षित रहोगी।”

 

रिया ने हैरानी से उसे देखा। “किससे?”

 

आरव ने धीरे से कहा, “मेरे पिता से।”

 

रिया कुछ समझ नहीं पाई।

 

आरव ने बताया कि उसके पिता एक बड़े घोटाले में फंस चुके थे और उनके दुश्मन आरव के परिवार को नुकसान पहुंचाना चाहते थे।

 

कुछ लोगों ने रिया को धमकी देना शुरू कर दिया था।

 

आरव ने पुलिस को सब बताया था, लेकिन जब तक सबूत नहीं मिलते, वह उसे सुरक्षित रखना चाहता था।

 

इसलिए उसने दुनिया के सामने मीरा के साथ रिश्ता होने का नाटक किया, क्योंकि किसी को नहीं पता था आरव की कोई छोटी बहन है। 

 

और जिससे लोग समझें कि उसका और रिया का रिश्ता खत्म हो चुका है। “लेकिन तुमने मुझे सच क्यों नहीं बताया?”

 

आरव की आंखों से आंसू निकल आए। “क्योंकि मुझे डर था कि अगर तुम्हें पता चल गया तो तुम मुझे छोड़कर नहीं जाओगी।”

 

रिया ने धीमे से कहा, “और तुमने सोचा कि झूठ बोलकर मुझे बचा लोगे?”

 

आरव ने सिर झुका लिया। “मैं गलत था।”

 

रिया की आंखों में दर्द था। “हां… तुम गलत थे।”

 

वह उसके करीब आई। और उसका कॉलर पकड़ते हुए टूटी आवाज में बोली, “तुमने मेरी जान तो बचा ली, आरव…”

 

उसकी आवाज कांप गई। “लेकिन मेरे अंदर का भरोसा मार दिया।”

 

आरव की आंखों से आंसू बहते रहे। “मैं जानता हूं।”

 

“मैंने छह महीने तुम्हें नफरत किया।”

 

“मैंने भी।”

 

“मैं हर रात सोचती थी कि तुमने मुझे धोखा दिया।”

 

“मैं हर रात तुम्हारी तस्वीर देखकर खुद को कोसता था।” आरव ने दर्द भरी आवाज में कहा। 

 

दोनों चुप हो गए। कुछ रिश्तों में प्यार खत्म नहीं होता।

बस दर्द इतना बढ़ जाता है कि प्यार दिखाई देना बंद हो जाता है।

 

 

कुछ दिनों बाद मीरा खुद रिया से मिलने आई। वह बहुत कमजोर थी। उसने रिया का हाथ पकड़ लिया। “भाभी…”

रिया की आंखें भर आईं। “मुझे माफ कर दीजिए।”

 

रिया ने सिर हिलाया। “तुम्हारी कोई गलती नहीं थी।”

 

मीरा मुस्कुराई। “लेकिन एक गलती मेरी थी।”

 

रिया, “क्या?”

 

मीरा, “मैंने भाई से कहा था कि अगर वो आपसे सच बताएगा तो आप उसे कभी माफ नहीं करेंगी।”

 

रिया हल्का-सा मुस्कुरा दी। “और अब?”

 

मीरा ने कहा, “अब लगता है कि प्यार में सबसे बड़ी बेवफाई झूठ बोलना नहीं…”

 

वह कुछ पल रुकी। “बल्कि सामने वाले को सच जानने का अधिकार न देना है।”

 

रिया की आंखों से आंसू बह निकले। मीरा चली गई। रिया बहुत देर तक वहीं बैठी रही।

 

 

एक साल बाद। समुद्र के किनारे वही जगह जहां कभी आरव ने उसे प्रपोज किया था।

 

आरव वहां खड़ा था। रिया धीरे-धीरे उसके पास आई।

 

आरव ने उसकी तरफ देखा। “तुम यहाँ आई।”

 

रिया मुस्कुरा दी। “हां।”

 

आरव, “क्या तुम मुझे माफ कर सकती हो?”

 

रिया ने कुछ पल उसे देखा। “माफ कर दिया।”

 

आरव की आंखों में उम्मीद जगी।

 

“लेकिन…” रिया ने उसकी बात रोक दी। “भरोसा वापस आने में वक्त लगेगा।”

 

आरव ने सिर हिलाया। “मैं इंतजार करूंगा।”

 

रिया उसके पास आई। “और अगर फिर कभी मुझे बचाने के लिए मुझसे झूठ बोला…”

 

आरव मुस्कुरा दिया। “तो?”

 

“तो इस बार सच में तलाक ले लूंगी।”

 

दोनों हंस पड़े। आरव ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया। इस बार रिया ने अपना हाथ नहीं खींचा।

 

समुद्र की लहरें उनके पैरों को छूकर लौट रही थीं।

 

रिया ने आरव के कंधे पर सिर रख दिया। कभी-कभी रिश्तों में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होता कि किसने बेवफाई की।

 

सवाल यह होता है कि, क्या उस बेवफाई के बाद भरोसा दोबारा जन्म ले सकता है? रिया और आरव के रिश्ते ने एक बात सीखी थी,

 

प्यार हमेशा रिश्ते को नहीं बचाता।

लेकिन सच्चाई, पछतावा और दोबारा भरोसा बनाने की कोशिश… कभी-कभी टूटे हुए रिश्ते को पहले से भी

ज्यादा मजबूत बना देती है।

 

और शायद…

 

उनकी कहानी में बेवफाई किसी तीसरे इंसान की नहीं थी। बेवफाई उस झूठ की थी, जिसने दो सच्चे दिलों को छह महीनों तक एक-दूसरे से दूर रखा।

 

समाप्त….

आपका एक लाइक मेरे लिए बहुत कीमती है।

 

Comments

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *