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ख़त…

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

             खत … 

आज मुद्दतों बाद मैंने खुद से मुलाकात की है,

आसमान में घिर आये हैं हजारों बादल 

मेरे दिल में उतर आये हैं तुम्हारी यादों का सावन ,

अपनी पसंदीदा चीजें सहेज रखी है

अपनी अलमारी में , चंद खतों में तुम्हारा नाम मिला,

कागज़ पर स्याही उतरी सी है,

जैसे धड़कन मेरी उजली सी है ,

चंद खतों में तुम्हारा खत दिखा 

यादों की लहर सी दौड़ आई,

मेरी उम्मीदों पर पानी की चंद बूंदें चमक आई,

तुम ना जाने क्या क्या सपने सजाए जाते 

और मैं तुम्हारे साथ हाथों में हाथ डाल 

मुस्कान लिए बैठी रहती , अब न तुम हो पास मेरे,

बस एक ठंडी आह होंठों पर मेरी आई,

ख़त नहीं था ये कभी मेरे लिए 

तुम्हारी नजदीकिया महसूस करने का जरिया बना,

इश्क लगता है वाकई सिर्फ खतों तक 

तुम्हारा सीमित रहा , न समझ सके तुम 

मुझे न मेरी आत्मा की गहराई को,

इसलिए शायद बस अब खतों के 

जरिए तुम मेरे पास हो ….।।

 

 

 

 

 

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shalini rawat

NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

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