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काश मैं अब भी तुम्हारे करीब होती

पढ़ने का समय : 6 मिनट

“कुछ गलतियाँ इंसान की ज़िंदगी बदल देती हैं… और कुछ गलतियाँ पूरी ज़िंदगी पछतावा बनकर साथ चलती हैं।”

 

रिया और आरव एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। दोनों की मुलाकात कॉलेज में हुई थी। धीरे-धीरे दोस्ती हुई और फिर दोस्ती प्यार में बदल गई। आरव रिया का बहुत ख्याल रखता था। वह हर छोटी-बड़ी खुशी में उसके साथ खड़ा रहता। रिया की तबीयत खराब हो जाए तो पूरी रात जागकर उसकी चिंता करता। उसके जन्मदिन पर अपने हाथों से छोटा-सा गिफ्ट बनाता, क्योंकि उसके पास ज़्यादा पैसे नहीं थे।

 

रिया भी उससे बहुत प्यार करती थी, लेकिन उसके दिल में एक कमी थी। उसे हमेशा लगता था कि आरव बहुत सीधा-सादा है। उसके पास न महंगी बाइक थी, न स्टाइलिश कपड़े और न ही बड़ा बैंक बैलेंस। धीरे-धीरे उसने दूसरों की बातों पर ध्यान देना शुरू कर दिया। उसकी कुछ सहेलियाँ भी उसे समझातीं कि प्यार से ज़िंदगी नहीं चलती, पैसे भी ज़रूरी होते हैं। यही बातें धीरे-धीरे उसके मन में घर करने लगीं और उसने आरव के सच्चे प्यार से ज़्यादा बाहरी चमक-दमक को महत्व देना शुरू कर दिया।

 

एक दिन कॉलेज में कबीर नाम का लड़का आया। अमीर परिवार से था, महंगी कार में आता था, हर समय दोस्तों से घिरा रहता था। उसकी बातें सुनकर रिया धीरे-धीरे उसकी तरफ आकर्षित होने लगी।

 

आरव को यह बदलाव महसूस होने लगा।

 

“रिया, सब ठीक है ना? तुम पहले जैसी नहीं रहीं।”

 

रिया ने मुस्कुराने की कोशिश की।

 

“कुछ नहीं… बस पढ़ाई का प्रेशर है।”

 

लेकिन सच कुछ और था।

 

अब वह आरव के मैसेज देर से पढ़ती, कॉल उठाने से बचती और हर समय कबीर के साथ दिखाई देती। आरव हर दिन खुद को समझाता कि शायद रिया किसी परेशानी में होगी, लेकिन उसके दिल को हर पल यही डर सताता था कि कहीं वह उसे खो न दे।

 

एक शाम आरव ने उसे पार्क में बुलाया।

 

“रिया… अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो बता दो। मैं खुद को बदल लूंगा, लेकिन यूँ दूर मत जाओ।”

 

रिया ने बिना उसकी आँखों में देखे कहा,

 

“आरव… हमें यहीं सब खत्म कर देना चाहिए।”

 

यह सुनते ही आरव जैसे अंदर से टूट गया।

 

“क्या… इतना आसान था तुम्हारे लिए?”

 

रिया बोली,

 

“हम दोनों एक-दूसरे के लिए नहीं बने हैं।”

 

असल वजह उसने नहीं बताई कि वह कबीर के साथ रहना चाहती है।

 

आरव की आँखों से आँसू बह निकले, लेकिन उसने सिर्फ इतना कहा,

 

“अगर यही तुम्हारी खुशी है… तो मैं तुम्हें रोकूँगा नहीं। बस खुश रहना।”

 

उस दिन के बाद दोनों की राहें अलग हो गईं।

 

कुछ ही दिनों में रिया और कबीर साथ घूमने लगे। महंगे रेस्टोरेंट, लंबी ड्राइव, बड़े-बड़े गिफ्ट… रिया को लगा कि उसने सही फैसला लिया है। उसे लगता था कि अब उसकी हर ख्वाहिश पूरी होगी और यही उसकी नई दुनिया है।

 

लेकिन कहते हैं, जो रिश्ता दिखावे पर शुरू होता है, वह ज़्यादा दिन नहीं चलता।

 

धीरे-धीरे कबीर का व्यवहार बदलने लगा। वह घंटों तक रिया के मैसेज का जवाब नहीं देता। मिलने के बहाने टाल देता। पहले जो हर समय उसके साथ रहने की बातें करता था, अब वही उससे दूरी बनाने लगा।

 

एक दिन रिया ने देखा कि कबीर किसी दूसरी लड़की के साथ हाथ पकड़कर घूम रहा है।

 

रिया उसके सामने जाकर खड़ी हो गई।

 

“कबीर… ये सब क्या है?”

 

कबीर ने बेपरवाही से कहा,

 

“रिया, प्लीज़ ड्रामा मत करो। मुझे अब तुम्हारे साथ नहीं रहना।”

 

रिया के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

 

“लेकिन… तुमने तो कहा था कि तुम मुझसे प्यार करते हो।”

 

कबीर हँस पड़ा।

 

“मैंने ऐसा कई लड़कियों से कहा है। तुम भी उनमें से एक थीं।”

 

इतना कहकर वह दूसरी लड़की का हाथ पकड़कर चला गया।

 

रिया वहीं सड़क किनारे बैठकर फूट-फूटकर रोने लगी।

 

उसे पहली बार एहसास हुआ कि उसने किस इंसान को खो दिया।

 

उस रात उसने मोबाइल खोला।

 

आरव की पुरानी तस्वीरें…

 

पुराने मैसेज…

 

उसकी भेजी हुई शुभ रात्रि की बातें…

 

जन्मदिन की शुभकामनाएँ…

 

सब कुछ पढ़ते-पढ़ते उसकी आँखें भर आईं।

 

एक मैसेज पर उसकी नज़र रुक गई।

 

“अगर कभी पूरी दुनिया भी तुम्हारा साथ छोड़ दे… तब भी मैं तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगा।”

 

रिया ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी।

 

“मैंने ही तो उस इंसान का साथ छोड़ दिया था…”

 

अब उसे समझ आया कि सच्चा प्यार महंगे गिफ्ट या बड़ी कार से नहीं, बल्कि परवाह और भरोसे से बनता है।

 

अगले दिन वह हिम्मत करके आरव के घर पहुँची।

 

दरवाज़ा खुला।

 

सामने आरव था।

 

वह पहले जैसा ही शांत था, लेकिन उसकी आँखों की चमक कहीं खो चुकी थी।

 

रिया रोते हुए बोली,

 

“आरव… मुझे माफ़ कर दो। मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी। मैंने तुम्हारे प्यार की कद्र नहीं की। अगर हो सके तो मुझे एक मौका और दे दो।”

 

कुछ पल तक दोनों के बीच खामोशी रही।

 

फिर आरव ने धीमी आवाज़ में कहा,

 

“रिया… मैंने तुम्हें दिल से चाहा था। जब तुम गई थीं, उस दिन सिर्फ रिश्ता नहीं टूटा था… मैं भी टूट गया था। कई रातें बिना सोए गुज़ारी हैं मैंने। हर त्योहार, हर खुशी अधूरी लगती थी। लेकिन समय ने मुझे जीना सिखा दिया।”

 

रिया की सिसकियाँ और तेज़ हो गईं।

 

“मुझे हर दिन पछतावा होता है। काश… मैं तुम्हें कभी छोड़कर न जाती।”

 

आरव ने उसकी तरफ देखा।

 

“मैंने तुम्हें बहुत पहले माफ़ कर दिया था… क्योंकि प्यार में नफरत करना मैंने सीखा ही नहीं। लेकिन कुछ टूटे हुए रिश्ते फिर जुड़ तो जाते हैं, मगर उनमें पहले जैसा भरोसा कभी वापस नहीं आता।”

 

रिया समझ गई कि अब बहुत देर हो चुकी है।

 

उसने आखिरी बार आरव को देखा और भारी कदमों से वहाँ से चली गई।

 

कई साल बीत गए।

 

एक दिन बारिश हो रही थी।

 

रिया बस स्टॉप पर अकेली खड़ी थी। सामने सड़क के उस पार आरव अपनी पत्नी और छोटी-सी बेटी के साथ हँसते हुए चल रहा था।

 

उसकी बेटी ने दौड़कर आरव का हाथ पकड़ लिया।

 

आरव मुस्कुराकर उसे गोद में उठा लिया।

 

वह दृश्य देखकर रिया की आँखों से आँसू बह निकले।

 

उसने आसमान की तरफ देखा और खुद से कहा,

 

“जिस इंसान ने मुझे सबसे ज़्यादा प्यार किया… मैंने उसी का दिल तोड़ दिया। आज उसके पास उसकी खुशियाँ हैं, और मेरे पास सिर्फ मेरी गलती की यादें।”

 

बारिश की बूँदें उसके आँसुओं में मिल गईं।

 

वह धीरे से मुस्कुराई, लेकिन उस मुस्कान में दर्द छिपा था।

 

उसके होंठों से बस एक ही बात निकली—

 

“काश… मैं अब भी तुम्हारे करीब होती।

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