😱(भाग 1 — लाल साड़ी वाली औरत)😱
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव बरवा में शाम के बाद लोग घरों से बाहर निकलना पसंद नहीं करते थे। गाँव के आख़िरी छोर पर एक पुराना बरगद का पेड़ था। उसके पास एक टूटी हुई हवेली खड़ी थी, जिसे लोग लाल हवेली कहते थे।
कहते थे कि उस हवेली में लगभग तीस साल पहले एक औरत रहती थी—चंद्रा।
चंद्रा की शादी गाँव के एक ज़मींदार परिवार में हुई थी। शादी के कुछ ही महीनों बाद उसके पति की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई। गाँव वालों ने कहा कि वह कुएँ में गिर गया था, लेकिन कुछ लोगों का मानना था कि उसकी मौत के पीछे कोई और राज़ था।
पति की मौत के बाद चंद्रा हमेशा लाल साड़ी पहनकर हवेली की छत पर बैठी रहती थी। एक रात अचानक हवेली में आग लग गई।
सुबह तक सब कुछ राख हो चुका था।
लेकिन चंद्रा की लाश कभी नहीं मिली।
उस दिन के बाद से गाँव में एक अजीब बात शुरू हुई।
हर अमावस्या की रात, गाँव की पगडंडी पर एक औरत दिखाई देती थी।
लाल साड़ी में।
लंबे खुले बाल।
चेहरा घूँघट से ढका हुआ।
और उसके पैरों के निशान…
हमेशा उल्टे होते थे।
गाँव के बुज़ुर्ग कहते थे—
“वो चंद्रा नहीं है… वो अब लाल चुड़ैल बन चुकी है।”
लोग उस रास्ते से रात में गुजरना तो दूर, दिन में भी अकेले नहीं जाते थे।
लेकिन गाँव में रहने वाला अमन इन बातों पर विश्वास नहीं करता था।
अमन शहर में पढ़ाई करके कुछ दिनों के लिए गाँव आया था। वह इन भूत-प्रेत की कहानियों को गाँव वालों का अंधविश्वास समझता था।
एक शाम वह अपने दोस्त रवि के साथ चाय की दुकान पर बैठा था।
रवि ने अचानक कहा, “आज अमावस्या है। रात को बाहर मत निकलना।”
अमन हँस पड़ा।
“तुम भी इन बातों पर विश्वास करते हो?”
रवि ने उसकी तरफ गंभीरता से देखा।
“मैंने उसे देखा है।”
अमन की हँसी रुक गई।
“किसे?”
“लाल चुड़ैल को।”
रवि ने धीरे से बताया, “दो साल पहले मैं रात में खेत से लौट रहा था। लाल हवेली के पास मुझे किसी औरत के रोने की आवाज़ सुनाई दी। मैंने सोचा कोई मुसीबत में है। मैं उसके पास गया।”
“फिर?”
“उसने मुझसे पूछा—‘तुमने उसे कहाँ छिपाया है?’”
अमन ने पूछा, “किसे?”
रवि की आँखों में डर उतर आया।
“मुझे नहीं पता।”
कुछ देर दोनों चुप रहे।
तभी चाय की दुकान के पीछे बैठे बूढ़े हरिराम काका बोले—
“अगर अपनी जान प्यारी है तो आज रात लाल हवेली के पास मत जाना।”
अमन ने मुस्कुराते हुए पूछा, “काका, आपने भी उसे देखा है?”
हरिराम काका ने उसकी आँखों में देखा।
“देखा नहीं बेटा… उसके हाथों से बचा हूँ।”
अमन कुछ पूछ पाता, उससे पहले काका उठकर वहाँ से चले गए।
रात लगभग साढ़े ग्यारह बजे अमन अपने कमरे में सोने की कोशिश कर रहा था।
अचानक—
ठक… ठक… ठक…
खिड़की पर किसी ने दस्तक दी।
अमन उठकर बैठ गया।
उसने खिड़की खोली।
बाहर कोई नहीं था।
हवा भी बिल्कुल बंद थी।
वह वापस बिस्तर पर आया ही था कि फिर आवाज़ आई।
ठक… ठक… ठक…
इस बार आवाज़ कमरे के दरवाज़े से आई।
अमन धीरे-धीरे दरवाज़े के पास गया।
“कौन है?”
कोई जवाब नहीं।
उसने दरवाज़ा खोला।
बाहर अँधेरा था।
लेकिन फर्श पर कुछ पड़ा था।
एक लाल चूड़ी।
अमन ने उसे उठाया।
उसी पल उसके कान के पास किसी ने फुसफुसाकर कहा—
“मुझे… मेरा सामान वापस चाहिए…”
अमन झटके से पीछे मुड़ा।
कोई नहीं था।
उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।
सुबह होते ही उसने रवि को सब बताया।
रवि ने लाल चूड़ी देखते ही उसका हाथ पकड़ लिया।
“इसे फेंक दो!”
“क्यों?”
“क्योंकि यह उसकी निशानी है।”
अमन ने कहा, “मैं आज रात लाल हवेली जाऊँगा।”
रवि ने उसे रोकने की कोशिश की।
लेकिन अमन नहीं माना।
रात के करीब बारह बजे दोनों टॉर्च लेकर हवेली की ओर निकल पड़े।
आसमान में चाँद नहीं था।
पेड़ों के बीच से गुजरती हवा किसी के रोने जैसी आवाज़ कर रही थी।
जैसे ही वे हवेली के पास पहुँचे, अमन की टॉर्च अचानक बंद हो गई।
“बैटरी खत्म?” रवि ने पूछा।
“अभी तो नई डाली थी।”
तभी हवेली के अंदर से एक धीमी आवाज़ आई—
छन… छन… छन…
पायल की आवाज़।
रवि ने अमन का हाथ पकड़ लिया।
“चल वापस।”
लेकिन अमन आगे बढ़ता गया।
हवेली का मुख्य दरवाज़ा आधा खुला था।
उन्होंने उसे धक्का दिया।
क्रीईईईक…
अंदर धूल और मकड़ी के जालों से पूरा कमरा भरा हुआ था।
दीवार पर पुराने चित्र लगे थे।
एक तस्वीर के सामने अमन रुक गया।
वह चंद्रा की तस्वीर थी।
लाल साड़ी।
लंबे बाल।
और माथे पर बड़ी लाल बिंदी।
अमन तस्वीर को ध्यान से देख ही रहा था कि उसे कुछ अजीब दिखाई दिया।
तस्वीर की आँखों से…
खून जैसे लाल आँसू बह रहे थे।
अमन पीछे हट गया।
रवि काँपते हुए बोला—
“अमन… तस्वीर को मत देख।”
तभी ऊपर की मंज़िल से किसी के चलने की आवाज़ आई।
ठक… ठक… ठक…
दोनों ने ऊपर देखा।
सीढ़ियों के आख़िरी छोर पर एक औरत खड़ी थी।
लाल साड़ी।
लंबे बाल।
चेहरा पूरी तरह बालों से ढका हुआ।
अमन ने टॉर्च उसकी तरफ की।
औरत ने धीरे-धीरे अपना सिर उठाया।
फिर उसने अपना चेहरा ऊपर किया।
चेहरा नहीं था।
सिर्फ काली, खाली आँखें थीं।
रवि चीख पड़ा।
दोनों पीछे भागे।
लेकिन दरवाज़ा बंद हो चुका था।
औरत की आवाज़ पूरे कमरे में गूँजी—
“मेरा… हार… कहाँ है?”
अमन ने काँपते हुए अपनी जेब टटोली।
उसे याद आया कि लाल चूड़ी उठाते समय उसे फर्श पर एक छोटा-सा पुराना लॉकेट भी मिला था।
वह लॉकेट उसने जेब में रख लिया था।
अचानक उसकी जेब गर्म होने लगी।
औरत ने चीखकर कहा—
“तुमने उसे छुआ है…”
दीवारें काँपने लगीं।
खिड़कियाँ अपने आप खुल गईं।
रवि बेहोश होकर गिर पड़ा।
अमन ने लॉकेट निकालकर जमीन पर फेंक दिया।
औरत अचानक गायब हो गई।
दरवाज़ा खुल गया।
अमन ने रवि को उठाया और दोनों हवेली से बाहर भागे।
लेकिन बाहर निकलते समय अमन ने पीछे मुड़कर देखा।
हवेली की ऊपरी खिड़की में वही लाल साड़ी वाली औरत खड़ी थी।
उसने धीरे से अपना हाथ उठाया।
और अपनी उंगली से अमन की ओर इशारा किया।
फिर उसके होंठ हिले—
“अब अगली रात तुम्हारी है…”
अमन ने नीचे देखा।
उसके पैरों के पास वही लाल लॉकेट पड़ा था।
और उसके ऊपर ताज़ा खून से सिर्फ एक शब्द लिखा था—
“वापस।”

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇
चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं
शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।
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