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😱भूतिया पार्लर 👻💄(Last part-3)

पढ़ने का समय : 5 मिनट

शीशा टूटते ही पूरे पार्लर में भयानक सन्नाटा छा गया।

 

अमन, सोनू, दीपक और राकेश कुछ समझ नहीं पा रहे थे।

 

जमुना दादी लगातार रो रही थीं।

 

उन्होंने काँपते हुए कहा—

 

“हमें पुलिस को सब बताना होगा।”

 

लेकिन तभी टूटे हुए शीशे के एक टुकड़े में कुसुम का चेहरा दिखाई दिया।

 

उसने कहा—

 

“सच सामने आएगा… लेकिन एक आखिरी काम बाकी है।”

 

अमन ने पूछा—

 

“क्या?”

 

शीशे में दिखाई दे रही कुसुम ने पार्लर के एक कोने की तरफ इशारा किया।

 

वहाँ एक पुराना लकड़ी का संदूक पड़ा था।

 

अमन ने संदूक खोला।

 

उसमें सजनी की डायरी थी।

 

डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था—

 

“अगर मेरे साथ कुछ हो जाए तो मेरी मौत को हादसा मत समझना। मुझे पता है कि गाँव में कौन लड़कियों को डराता और उनके साथ धोखा करता है। अगर मैं नहीं रही तो मेरी डायरी सच बताएगी।”

 

डायरी में उन लोगों के नाम लिखे थे।

 

गाँव के तीन प्रभावशाली आदमी।

 

उनमें से एक का नाम था बलदेव सिंह।

 

बलदेव गाँव का बहुत रसूखदार आदमी था।

 

लोग उससे डरते थे।

 

अमन ने डायरी लेकर गाँव की पंचायत में सबके सामने सच बता दिया।

 

पहले तो बलदेव ने सब कुछ झूठ कहा।

 

लेकिन डायरी में लिखे पुराने सबूत और सजनी की हड्डियाँ देखकर गाँव वालों को सच्चाई समझ आ गई।

 

पुलिस को बुलाया गया।

 

जाँच शुरू हुई।

 

कई साल पुराने राज खुलने लगे।

 

बलदेव और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

 

उस रात गाँव के लोगों ने सजनी और कुसुम के लिए प्रार्थना की।

 

लेकिन अमन के मन में एक सवाल था—

 

अगर अपराधियों को पकड़ लिया गया है, तो क्या भूतिया पार्लर का रहस्य खत्म हो गया?

 

रात करीब बारह बजे वह अकेला पार्लर के सामने खड़ा था।

 

अचानक अंदर से आवाज आई—

 

“अमन…”

 

उसने दरवाजा खोला।

 

अंदर अंधेरा था।

 

उसने टॉर्च जलाई।

 

सामने टूटा हुआ शीशा था।

 

लेकिन इस बार शीशे में उसका प्रतिबिंब नहीं था।

 

उसकी जगह सजनी खड़ी थी।

 

सजनी ने लाल साड़ी पहन रखी थी।

 

चेहरे पर शांति थी।

 

उसने कहा—

 

“मेरा आखिरी काम बाकी है।”

 

अमन ने डरते हुए पूछा—

 

“क्या?”

 

सजनी ने एक पुरानी कुर्सी की ओर इशारा किया।

 

वहाँ कुसुम बैठी थी।

 

उसकी आँखें बंद थीं।

 

सजनी बोली—

 

“उस रात मैं कुसुम को बचाना चाहती थी। लेकिन मैं उसे बचा नहीं सकी। अब उसकी आत्मा तब तक नहीं जाएगी, जब तक उसका अधूरा श्रृंगार पूरा नहीं होगा।”

 

अमन ने पूछा—

 

“लेकिन उसका श्रृंगार कौन करेगा?”

 

सजनी मुस्कुराई।

 

“तुम नहीं।”

 

अचानक पार्लर के दरवाजे पर गाँव की कुछ महिलाएँ दिखाई दीं।

 

उनमें कुसुम की माँ भी थी।

 

वह रोते हुए आगे बढ़ी।

 

कुसुम की आत्मा ने अपनी माँ को देखा।

 

माँ ने उसके सिर पर हाथ रखा।

 

“बेटी… अब घर चल।”

 

इतना सुनते ही कुसुम की आँखों से आँसू निकल पड़े।

 

उसके चेहरे पर पहली बार डर नहीं था।

 

सजनी ने मुस्कुराकर कहा—

 

“अब यह दुल्हन पूरी हो गई।”

 

धीरे-धीरे कुसुम की आत्मा धुएँ में बदलने लगी।

 

फिर सजनी भी उसके साथ धुंधली होने लगी।

 

अमन ने आखिरी बार पूछा—

 

“क्या तुम दोनों अब मुक्त हो जाओगी?”

 

सजनी ने कहा—

 

“हाँ… क्योंकि अब सच छिपा नहीं है।”

 

दोनों आकृतियाँ धीरे-धीरे गायब हो गईं।

 

उसी क्षण पार्लर के अंदर रखा पुराना हेयर ड्रायर अपने आप बंद हो गया।

 

घड़ी की सुई बारह बजकर एक मिनट पर रुक गई।

 

और फिर…

 

सब कुछ शांत हो गया।

 

अगली सुबह गाँव वालों ने पार्लर को हमेशा के लिए बंद करने के बजाय उसे एक नई जगह में बदलने का फैसला किया।

 

उस जगह पर गाँव की लड़कियों के लिए सिलाई और ब्यूटी का प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया।

 

दरवाजे पर एक बोर्ड लगाया गया—

 

“सजनी महिला प्रशिक्षण केंद्र”

 

नीचे एक छोटी-सी पंक्ति लिखी गई—

 

“डर को छिपाने से वह बढ़ता है, लेकिन सच का सामना करने से डर खत्म हो जाता है।”

 

कई साल बाद भी गाँव के बुजुर्ग उस घटना को याद करते हैं।

 

लोग कहते हैं कि अमावस्या की रात कभी-कभी उस पुराने पार्लर की खिड़की में हल्की-सी रोशनी दिखाई देती है।

 

कभी-कभी शीशे में लाल साड़ी पहने एक औरत भी दिखाई देती है।

 

लेकिन अब वह किसी को डराती नहीं।

 

वह सिर्फ कुछ पल के लिए दिखाई देती है…

 

और फिर गायब हो जाती है।

 

गाँव की बूढ़ी जमुना दादी कहती हैं—

 

“वो भूत नहीं है… वो हमें याद दिलाने आती है कि किसी के साथ गलत होते देखकर चुप मत रहना।”

 

कहानी की सीख

 

इस कहानी की सबसे बड़ी सीख यही है कि हर डर के पीछे भूत नहीं होता और हर अफवाह सच नहीं होती। कई बार असली डर इंसानों के गलत कामों से पैदा होता है।

 

अगर किसी के साथ अन्याय हो रहा हो, तो डरकर चुप नहीं रहना चाहिए। सच बोलने वाला इंसान अकेला जरूर पड़ सकता है, लेकिन उसका साहस किसी दूसरे की जिंदगी बचा सकता है।

 

और सबसे जरूरी बात—

 

अंधविश्वास से डरने के बजाय सच्चाई को समझना चाहिए, क्योंकि अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, एक छोटी-सी रोशनी उसे खत्म कर सकती है।

 

 

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End

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