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😱भूतिया पार्लर 👻💄(part-2)

पढ़ने का समय : 5 मिनट

जमुना दादी की बात सुनकर अमन और उसके दोस्त चुप हो गए।

 

अमन ने पूछा—

 

“दादी, आखिरी दुल्हन कौन थी?”

 

दादी ने चारों तरफ देखा और धीमी आवाज में बोलीं—

 

“कुसुम।”

 

“वही लड़की जो दस साल पहले पार्लर में बेहोश मिली थी?”

 

दादी ने सिर हिलाया।

 

“हाँ।”

 

फिर उन्होंने एक पुरानी कहानी सुनाई।

 

कुसुम की शादी शहर में रहने वाले एक आदमी से होने वाली थी। शादी के दिन उसे सजने के लिए सजनी के पार्लर में भेजा गया था।

 

लेकिन सजनी उस दिन बहुत परेशान थी।

 

कहा जाता है कि कुछ दिन पहले उसने किसी पुराने ग्राहक की तस्वीर में एक अजीब औरत देखी थी।

 

वह औरत हर तस्वीर में दिखाई देती थी।

 

लेकिन जब सजनी तस्वीर खींचती तो आसपास कोई नहीं होता।

 

धीरे-धीरे सजनी को उस औरत के सपने आने लगे।

 

सपने में वह औरत कहती—

 

“मुझे भी दुल्हन बनाओ।”

 

सजनी ने इसे अपना वहम समझा।

 

लेकिन जिस दिन कुसुम पार्लर आई, वही औरत पहली बार शीशे में दिखाई दी।

 

सजनी डर गई।

 

उसने कुसुम से कहा—

 

“आज श्रृंगार मत करवाओ। घर चली जाओ।”

 

लेकिन तभी पार्लर का दरवाजा अपने आप बंद हो गया।

 

शीशे पर धुंध छा गई।

 

और उसमें एक शब्द लिखा दिखाई दिया—

 

“दुल्हन…”

 

इसके बाद क्या हुआ, किसी को पता नहीं चला।

 

कुसुम बेहोश मिली।

 

सजनी गायब थी।

 

और शीशे पर वह डरावना संदेश लिखा था।

 

अमन ने पूछा—

 

“लेकिन सजनी की आत्मा हमें क्यों परेशान कर रही है?”

 

दादी ने कहा—

 

“शायद वह किसी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहती। शायद वह किसी को अपना सच बताना चाहती है।”

 

उसी शाम अमन ने अपने दोस्तों के साथ पार्लर जाने का फैसला किया।

 

इस बार वे अकेले नहीं गए।

 

जमुना दादी भी उनके साथ थीं।

 

पार्लर का ताला अब भी लगा था।

 

दादी ने अपनी चाबी निकाली।

 

अमन हैरान रह गया।

 

“आपके पास इसकी चाबी?”

 

दादी बोलीं—

 

“सजनी ने मरने से पहले नहीं… गायब होने से पहले मुझे दी थी।”

 

दरवाजा खुला।

 

अंदर धूल और मकड़ी के जाले थे।

 

पुरानी कॉस्मेटिक की बोतलें अब भी मेज पर रखी थीं।

 

एक कोने में टूटा हुआ हेयर ड्रायर पड़ा था।

 

और सामने वही बड़ा शीशा।

 

अमन ने शीशे को देखा।

 

उसमें कमरा दिखाई दे रहा था।

 

लेकिन अचानक…

 

शीशे में कमरे का दरवाजा बंद दिखाई दिया।

 

जबकि असली दरवाजा खुला था।

 

अमन ने पीछे देखा।

 

दरवाजा खुला था।

 

फिर शीशे में देखा।

 

दरवाजा बंद था।

 

और उसके सामने…

 

एक दुल्हन खड़ी थी।

 

लाल जोड़ा।

 

भारी घूँघट।

 

हाथों में लाल चूड़ियाँ।

 

अमन ने घबराकर पूछा—

 

“कौन हो?”

 

दुल्हन ने कोई जवाब नहीं दिया।

 

उसने धीरे-धीरे अपना घूँघट उठाया।

 

चेहरा कुसुम का था।

 

लेकिन उसकी आँखें बिल्कुल सफेद थीं।

 

अचानक पार्लर की सारी लाइटें अपने आप जल गईं।

 

हेयर ड्रायर चलने लगा।

 

कंघियाँ अपने आप घूमने लगीं।

 

और शीशे पर एक के बाद एक शब्द उभरने लगे—

 

“सजनी ने मुझे बचाने की कोशिश की थी।”

 

अमन ने पूछा—

 

“फिर सजनी कहाँ है?”

 

शीशे पर अगला संदेश आया—

 

“वह यहाँ है।”

 

अचानक कमरे के पीछे से किसी के रोने की आवाज आई।

 

सभी पलटे।

 

एक पुराने पर्दे के पीछे किसी की परछाईं थी।

 

अमन ने पर्दा हटाया।

 

वहाँ एक छोटा कमरा था।

 

दीवार पर बहुत सारी तस्वीरें लगी थीं।

 

हर तस्वीर में गाँव की अलग-अलग दुल्हनें थीं।

 

लेकिन हर तस्वीर के पीछे वही काली औरत दिखाई दे रही थी।

 

जमुना दादी ने काँपते हुए कहा—

 

“हे भगवान…”

 

दीवार के आखिरी हिस्से में एक तस्वीर थी।

 

उसमें सजनी खड़ी थी।

 

उसके पीछे वही काली औरत।

 

और तस्वीर के नीचे लिखा था—

 

“अगली दुल्हन कौन?”

 

तभी पार्लर का दरवाजा जोर से बंद हो गया।

 

धड़ाम!

 

चारों तरफ अंधेरा छा गया।

 

कुसुम की आवाज आई—

 

“सच बताओ… नहीं तो अगली दुल्हन तुम्हारे गाँव से होगी।”

 

अमन चिल्लाया—

 

“क्या सच?”

 

आवाज आई—

 

“सजनी को किसने मारा?”

 

जमुना दादी अचानक जमीन पर बैठ गईं।

 

उनकी आँखों से आँसू बहने लगे।

 

उन्होंने कहा—

 

“मैं जानती हूँ।”

 

सब उनकी तरफ देखने लगे।

 

दादी ने काँपती आवाज में कहा—

 

“सजनी को किसी भूत ने नहीं मारा था।”

 

“फिर?”

 

“उसे इंसानों ने मारा था।”

 

अमन ने पूछा—

 

“किसने?”

 

दादी ने दीवार की तरफ इशारा किया।

 

वहाँ एक पुरानी तस्वीर लगी थी।

 

तस्वीर में गाँव के चार आदमी खड़े थे।

 

उनमें से एक था…

 

जमुना दादी का बेटा।

 

दादी रोते हुए बोलीं—

 

“सजनी ने देख लिया था कि गाँव का एक आदमी लड़कियों के साथ धोखा करता था। उसने सबको बताने की धमकी दी थी। उन लोगों ने उसे डराने की कोशिश की। झगड़ा हुआ… और सजनी की मौत हो गई।”

 

“फिर उसकी लाश?”

 

“उसे इसी पार्लर के पीछे पुराने कुएँ में फेंक दिया गया।”

 

अचानक जमीन के नीचे से जोरदार आवाज आई।

 

धम्म!

 

पार्लर की फर्श में दरार पड़ गई।

 

और उस दरार के अंदर से…

 

एक पुराना लाल दुपट्टा दिखाई दिया।

 

अमन ने दुपट्टा खींचा।

 

उसके नीचे हड्डियाँ थीं।

 

जमुना दादी चीख पड़ीं।

 

तभी शीशे में सजनी दिखाई दी।

 

उसने मुस्कुराकर कहा—

 

“अब मेरा सच सामने आएगा…”

 

और अगले ही पल शीशा पूरी तरह टूट गया।

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