🔐 लॉग-इन या रजिस्टर करें  

सुनसान रास्ता..(part-3]

पढ़ने का समय : 2 मिनट

 

 

आरव बाइक लेकर उस पुराने मकान के सामने रुक गया।

 

उसे लगा कि शायद अंदर कोई इंसान होगा जो उसकी मदद कर सकता है।

 

जैसे ही उसने दरवाजा खोला, दरवाजा अपने आप चरमराते हुए खुल गया।

 

अंदर घुप अंधेरा था।

 

आरव ने मोबाइल की टॉर्च जलाई।

 

दीवारों पर पुराने परिवार की तस्वीरें लगी थीं।

 

एक तस्वीर देखकर आरव के कदम रुक गए।

 

तस्वीर में एक परिवार खड़ा था।

 

बीच में एक बूढ़ी औरत थी।

 

लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि तस्वीर के एक कोने में…

 

आरव खुद खड़ा था।

 

उसके हाथ से मोबाइल गिर गया।

 

तभी ऊपर की मंजिल से किसी बच्चे के रोने की आवाज आई।

 

“मुझे बचा लो…”

 

आरव डरते हुए सीढ़ियों की तरफ बढ़ा।

 

हर सीढ़ी पर किसी के पैरों के निशान थे।

 

गीले पैरों के निशान।

 

और वे निशान ऊपर से नीचे की तरफ आ रहे थे।

 

अचानक उसके पीछे दरवाजा जोर से बंद हो गया।

 

आरव ने दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं खुला।

 

तभी पीछे से वही आवाज आई—

 

“तुम आखिर वापस आ ही गए।”

 

आरव ने धीरे से पूछा—

 

“कौन हो तुम?”

 

अंधेरे से जवाब आया—

 

“जिसे तुमने दस साल पहले जंगल में छोड़ दिया था।”

 

आरव के चेहरे का रंग उड़ गया।

 

उसे अचानक अपने बचपन की एक घटना याद आ गई।

 

दस साल पहले इसी जंगल में उसका छोटा भाई गायब हुआ था।

 

लेकिन आरव को याद था…

 

उसका भाई कभी मिला ही नहीं था।

Comments

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *