आरव ने कॉल तुरंत काट दिया।
उसका दिल तेजी से धड़क रहा था।
उसे महसूस हो रहा था कि बाइक की पिछली सीट पर कोई बैठा है।
सीट थोड़ी नीचे दबी हुई थी।
लेकिन आरव ने पीछे देखने की हिम्मत नहीं की।
उसने बाइक तेज कर दी।
कुछ दूर जाने के बाद उसके कान के पास फिर वही फुसफुसाहट आई—
“आरव… मुझे घर जाना है।”
आरव ने कोई जवाब नहीं दिया।
अचानक उसकी बाइक की हेडलाइट बंद हो गई।
सड़क पूरी तरह अंधेरे में डूब गई।
तभी सामने एक बूढ़ी औरत खड़ी दिखाई दी।
उसने सफेद साड़ी पहन रखी थी और उसके बाल चेहरे पर लटक रहे थे।
बूढ़ी औरत ने हाथ उठाकर बाइक रोकने का इशारा किया।
आरव किसी तरह उसके पास से बाइक निकालकर आगे बढ़ गया।
लेकिन जैसे ही उसने कुछ मीटर आगे जाकर शीशे में देखा…
वही बूढ़ी औरत बाइक की पिछली सीट पर बैठी थी।
आरव की सांस रुक गई।
वह पीछे मुड़ने ही वाला था कि बूढ़ी औरत ने उसके कान में कहा—
“अगर पीछे देखा… तो अगली सुबह तुम्हारी नहीं होगी।”
आरव ने आंखें बंद कर लीं और बाइक दौड़ाता रहा।
कुछ देर बाद उसे दूर एक पुराना मकान दिखाई दिया।
मकान के बाहर वही बोर्ड लगा था—
“पीछे देखना मना है।”
और इस बार उसके नीचे खून से लिखा था—
“वो घर तक साथ आती है।”

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇
चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं
शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।
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