एपिसोड – 35 : दो भाइयों में से असली बेटा कौन?
कमरे में अंधेरा था।
अभय की आवाज चारों तरफ गूंज रही थी—
“अब यही पता करना है कि तुम दोनों में से मेरा असली बेटा कौन है।”
आरव ने तुरंत कहा—
“ये कैसी बकवास है? हम दोनों की जिंदगी से खेलना बंद करो!”
अभय की हंसी सुनाई दी।
“मैं खेल नहीं रहा, आरव। मैं तुम्हें तुम्हारी पहचान बता रहा हूं।”
अमन ने गुस्से में कहा—
“हमें किसी पहचान की जरूरत नहीं है। हमारी मां ने हमें पाला है, वही हमारी पहचान है।”
अभय कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला—
“बहुत अच्छी बात कही।”
अचानक कमरे की लाइट जल गई।
सामने अभय खड़ा था।
लेकिन इस बार उसके हाथ में बंदूक नहीं थी।
उसके हाथ में एक पुरानी फाइल थी।
वह धीरे-धीरे दोनों के पास आया।
“इस फाइल में तुम्हारे जन्म का सच है।”
आरव ने कहा—
“तो खोलो।”
अभय मुस्कुराया।
“इतनी जल्दी?”
“हां।”
“सच सुनने के लिए तैयार हो?”
आरव ने बिना झिझक कहा—
“हां।”
अमन भी उसके पास आकर खड़ा हो गया।
“मैं भी।”
अभय ने फाइल खोली।
पहले पन्ने पर दो जन्म प्रमाण-पत्र थे।
एक पर लिखा था—
आरव — जन्म: 14 अगस्त
दूसरे पर—
अमन — जन्म: 14 अगस्त
आरोही हैरान रह गई।
“दोनों की जन्मतिथि एक ही?”
अमन ने कहा,
“हां।”
आरव ने पूछा,
“लेकिन हमें हमेशा बताया गया कि हम अलग-अलग परिवारों में पैदा हुए थे।”
अभय ने कहा—
“तुम दोनों एक ही रात पैदा हुए थे।”
आरव ने पूछा—
“और हमारी मां?”
“अलग थीं।”
अमन ने कहा—
“तो फिर तुम हम दोनों के पिता कैसे हो सकते हो?”
अभय ने उसकी तरफ देखा।
“यही तो इस कहानी का सबसे बड़ा रहस्य है।”
अभय ने अगला पन्ना खोला।
उसमें दो महिलाओं की तस्वीर थी।
एक तस्वीर में माधवी थीं।
दूसरी में सिया।
आरव तस्वीर देखते ही चौंक गया।
“तो मां और सिया एक-दूसरे को पहले से जानती थीं।”
अभय ने कहा—
“सिर्फ जानती नहीं थीं।”
“तो?”
“दोनों ने मिलकर तुम्हें बचाया था।”
माधवी की आंखों से आंसू निकल आए।
आरव ने उनकी तरफ देखा।
“मां?”
माधवी चुप रहीं।
अभय ने कहा—
“तुम्हारी मां और सिया ने एक समझौता किया था।”
“कैसा समझौता?”
“अगर मेरे दुश्मनों को मेरे बच्चों के बारे में पता चलता, तो दोनों बच्चों की जान खतरे में पड़ जाती।”
अमन ने पूछा—
“तो हमें अलग क्यों रखा गया?”
अभय ने कहा—
“ताकि कोई तुम्हें एक-दूसरे से जोड़ न सके।”
आरव ने कहा—
“लेकिन फिर हमें भाई जैसा रिश्ता क्यों महसूस होता है?”
अभय मुस्कुराया।
“क्योंकि खून का रिश्ता तुम्हें बार-बार एक-दूसरे तक खींचता रहा।”
अभय ने एक और कागज निकाला।
“ये तुम्हारी डीएनए रिपोर्ट है।”
आरव ने कागज ले लिया।
उसकी नजर रिपोर्ट पर गई।
वह पढ़ने लगा।
कुछ सेकंड बाद उसका चेहरा बदल गया।
अमन ने पूछा—
“क्या हुआ?”
आरव ने रिपोर्ट उसकी तरफ बढ़ा दी।
अमन ने पढ़ा।
उसकी आंखें फैल गईं।
“ये…”
आरोही ने पूछा—
“क्या लिखा है?”
अमन कुछ नहीं बोला।
आरव ने धीरे से कहा—
“रिपोर्ट के मुताबिक…”
वह रुक गया।
अभय ने बात पूरी की—
“तुम दोनों में से केवल एक मेरा बेटा है।”
अमन ने कहा—
“लेकिन कौन?”
अभय मुस्कुराया।
“यही तो तुम्हें खुद पता लगाना है।”
आरव ने गुस्से में कहा—
“तुम्हें पता है।”
“बिल्कुल।”
“तो बताओ।”
“नहीं।”
“क्यों?”
अभय ने कहा—
“क्योंकि अगर मैंने बता दिया, तो तुम दोनों में से एक की जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी।”
अमन ने आरव की तरफ देखा।
“भाई…”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“हां?”
“अगर मैं तुम्हारा भाई नहीं हुआ तो?”
आरव ने तुरंत कहा—
“तो भी तुम मेरे भाई रहोगे।”
अमन की आंखें भर आईं।
“और अगर तुम मेरे भाई नहीं हुए?”
आरव मुस्कुराया।
“तब भी।”
दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया।
आरोही की आंखों में भी आंसू आ गए।
अभय उन्हें देखता रहा।
उसके चेहरे पर पहली बार कोई भावना दिखाई दी।
शायद गर्व।
शायद दर्द।
आरव मां के पास गया।
“मां, आप जानती थीं कि हम दोनों में से कौन अभय का बेटा है?”
माधवी ने सिर झुका लिया।
“हां।”
आरव की सांस रुक गई।
“आपको पता है?”
“हां।”
“तो बताइए।”
माधवी रोने लगीं।
“मैं नहीं बता सकती।”
“क्यों?”
“क्योंकि मैंने वादा किया था।”
“किससे?”
माधवी ने अभय की तरफ देखा।
“तुम्हारे पिता से।”
आरव ने अभय की तरफ देखा।
“आपने मां से भी सच छुपाने को कहा?”
अभय ने कहा—
“नहीं।”
माधवी ने तुरंत कहा—
“अभय ने मुझे मजबूर नहीं किया था।”
“तो फिर?”
माधवी बोलीं—
“मैंने खुद वादा किया था।”
“क्यों?”
माधवी ने आरव का चेहरा पकड़ लिया।
“क्योंकि उस रात अगर मैंने सच बता दिया होता…”
उनकी आवाज टूट गई।
“तो तुम दोनों में से एक बच्चा आज जिंदा नहीं होता।”
अचानक दीवार के पीछे से बीप की आवाज आने लगी।
रुद्र तुरंत चौकन्ना हो गया।
“ये क्या है?”
अभय का चेहरा बदल गया।
उसने तुरंत कहा—
“सब पीछे हटो।”
कुछ ही सेकंड बाद—
धड़ाम!
दीवार का एक हिस्सा टूट गया।
धुआं कमरे में भर गया।
आरोही खांसने लगी।
आरव ने उसे अपनी तरफ खींच लिया।
“तुम ठीक हो?”
“हां।”
रुद्र ने चारों तरफ देखा।
“कोई बाहर से हमला कर रहा है।”
अभय ने कहा—
“विराज।”
अमन ने कहा—
“उसे लाल फाइल चाहिए।”
अभय ने सिर हिलाया।
“उसे सिर्फ फाइल नहीं चाहिए।”
“फिर?”
“वो चाहता है कि तुम दोनों एक-दूसरे के खिलाफ हो जाओ।”
आरव ने कहा—
“क्यों?”
अभय ने जवाब दिया—
“क्योंकि तुम दोनों मिलकर उससे ज्यादा ताकतवर हो।”
अचानक कमरे की स्क्रीन चालू हो गई।
विराज दिखाई दिया।
उसके चेहरे पर वही खतरनाक मुस्कान थी।
“अभय…”
अभय ने स्क्रीन की तरफ देखा।
“विराज।”
विराज हंसा।
“तुमने आखिरकार अपने बच्चों को सच बता ही दिया।”
आरव ने कहा—
“तुम्हें हमसे क्या चाहिए?”
विराज ने कहा—
“मुझे सिर्फ लाल फाइल चाहिए।”
“क्यों?”
“क्योंकि उस फाइल में मेरी बर्बादी का राज है।”
अमन ने कहा—
“तुमने मेरी मां को मारा।”
विराज चुप हो गया।
फिर बोला—
“हां।”
अमन की आंखें लाल हो गईं।
“मैं तुम्हें छोड़ूंगा नहीं।”
विराज हंसा।
“पहले अपने पिता को तो पहचान लो।”
अभय की आंखें सिकुड़ गईं।
“विराज, तुम्हारा खेल खत्म हो चुका है।”
विराज ने कहा—
“नहीं।”
फिर स्क्रीन पर एक वीडियो चला।
उसमें शेखर दिखाई दे रहे थे।
वो एक कुर्सी से बंधे हुए थे।
आरव चौंक गया।
“पापा!”
विराज ने कहा—
“अगर लाल फाइल नहीं मिली, तो शेखर मरेंगे।”
शेखर ने कैमरे की तरफ देखा।
“आरव… मेरी बात सुनो।”
आरव स्क्रीन के पास चला गया।
“पापा!”
शेखर ने कहा—
“जो कुछ भी हो रहा है, उसमें अभय की हर बात पर भरोसा मत करना।”
अभय ने भौंहें सिकोड़ लीं।
शेखर ने आगे कहा—
“और लाल फाइल…”
वह रुक गए।
विराज ने उन्हें थप्पड़ मारा।
“बोलो!”
शेखर ने फिर कहा—
“लाल फाइल में जो लिखा है… वो पूरा सच नहीं है।”
आरव चौंक गया।
“क्या?”
शेखर ने कहा—
“उसमें एक नाम झूठा लिखा गया है।”
अमन ने पूछा—
“किसका?”
शेखर ने स्क्रीन की तरफ देखते हुए कहा—
“अभय का।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
आरव ने धीरे से अभय की तरफ देखा।
अभय के चेहरे पर पहली बार डर दिखाई दिया।
आरव ने पूछा—
“पापा… मेरा मतलब… अभय…”
वह खुद ही रुक गया।
“क्या ये सच है?”
अभय ने कुछ नहीं कहा।
आरव ने जोर से पूछा—
“क्या लाल फाइल में आपका नाम झूठा लिखा है?”
अभय ने कहा—
“हां।”
अमन चौंका।
“तो तुम असली सम्राट नहीं हो?”
अभय ने आंखें बंद कर लीं।
कुछ पल बाद उसने कहा—
“नहीं।”
आरव का चेहरा सफेद पड़ गया।
“तो असली सम्राट कौन है?”
अभय ने जवाब नहीं दिया।
रुद्र ने कहा—
“मुझे लगता है अब समय आ गया है।”
अभय ने उसकी तरफ देखा।
“रुद्र…”
रुद्र ने कहा—
“तुम्हें सच बताना ही होगा।”
आरव ने पूछा—
“कौन है असली सम्राट?”
रुद्र ने गहरी सांस ली।
फिर धीरे-धीरे कहा—
“जिसे तुमने इतने साल अपना सबसे बड़ा रक्षक समझा…”
आरव की धड़कन तेज हो गई।
रुद्र ने आगे कहा—
“वही असली सम्राट है।”
आरोही ने हैरानी से पूछा—
“कौन?”
रुद्र की नजर सीधे…
शेखर पर गई।
आरव की आंखें फैल गईं।
“पापा…?”
अभय ने तुरंत कहा—
“नहीं!”
लेकिन उसी पल स्क्रीन पर बंधे शेखर मुस्कुराए।
उनकी आंखों में एक अजीब चमक थी।
उन्होंने कैमरे की तरफ देखा और कहा—
“बहुत देर कर दी, अभय।”
फिर शेखर ने अपना चेहरा ऊपर उठाया।
और उनकी आवाज पूरी तरह बदल गई—
“क्योंकि अब मेरा बेटा मुझे वापस चाहिए।”
आरव के हाथ से लाल फाइल गिर गई।
जारी रहेगा…

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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