एपिसोड – 33 : विराज का नया चेहरा
तहखाने में अचानक छाई खामोशी को विराज की धीमी हंसी ने तोड़ दिया।
आरव की नजर सामने खड़े विराज पर थी।
उसके पीछे कई हथियारबंद लोग खड़े थे।
दूसरी तरफ रुद्र अपनी बंदूक ताने हुए था।
अमन आरव के पास खड़ा था और आरोही ने डर के बावजूद खुद को संभाल रखा था।
कुछ सेकंड तक कोई कुछ नहीं बोला।
फिर आरव ने विराज से पूछा—
“तुम यहां क्यों आए हो?”
विराज मुस्कुराया।
“क्योंकि इस कहानी का सबसे जरूरी हिस्सा अभी बाकी है।”
अमन ने गुस्से में कहा,
“तुमने मेरी मां को मरवाया!”
विराज ने उसकी तरफ देखा।
“तुम अब भी वही गलती कर रहे हो।”
“कौन-सी?”
“हर मौत का जिम्मेदार मुझे समझना।”
अमन उसकी तरफ बढ़ा।
“अगर आज तुमने एक कदम भी आगे बढ़ाया तो—”
रुद्र ने उसे रोक दिया।
“अमन, रुक जाओ।”
विराज ने रुद्र की तरफ देखा।
“तुमने आखिरकार अपना असली पक्ष चुन ही लिया।”
रुद्र ने कहा,
“मैंने कभी तुम्हारा पक्ष नहीं चुना था।”
विराज की मुस्कान गायब हो गई।
“फिर आज देखता हूं तुम किसके लिए मरते हो।”
अब तक घायल आर्यन दीवार के सहारे खड़ा था।
उसने विराज को देखते ही कहा,
“तुम यहां कैसे पहुंचे?”
विराज ने उसकी तरफ देखा।
“जिस रास्ते से तुम आए थे।”
आर्यन ने कहा,
“मैंने वह रास्ता बंद कर दिया था।”
विराज हंसा।
“तुम्हें लगता है तुम्हारे बनाए रास्ते सिर्फ तुम्हें पता हैं?”
आर्यन की आंखों में गुस्सा आ गया।
“लाल फाइल चाहिए थी तुम्हें।”
“अभी भी चाहिए।”
“लेकिन वो मेरे पास नहीं है।”
विराज ने कहा,
“मुझे पता है।”
आर्यन चौंका।
“फिर?”
विराज ने आरव की तरफ देखा।
“क्योंकि वो उसके पास है।”
आरव ने कहा,
“मेरे पास नहीं है।”
“तुम्हें सच में कुछ याद नहीं?”
“नहीं।”
विराज धीरे-धीरे आरव के करीब आया।
“तुम्हें अपने बचपन की कुछ बातें याद हैं?”
आरव चुप रहा।
“एक लाल रंग का कमरा?”
आरव की आंखें सिकुड़ गईं।
“एक महिला…”
उसने अचानक अपना सिर पकड़ लिया।
कुछ धुंधली तस्वीरें उसके दिमाग में घूमने लगीं।
एक छोटा बच्चा…
गोद में बैठी माधवी…
एक लाल फाइल…
और एक आवाज—
“इसे कभी किसी को मत देना।”
आरव ने आंखें खोल दीं।
आरोही तुरंत उसके पास आई।
“आरव!”
आरव ने माथा पकड़ रखा था।
“मुझे कुछ याद आया।”
विराज मुस्कुराया।
“मुझे पता था।”
आरव ने धीरे-धीरे कहा,
“मैं बहुत छोटा था।”
“मां मेरे कमरे में आई थीं।”
“उनके हाथ में एक फाइल थी।”
“उन्होंने वो फाइल…”
वह रुक गया।
अमन ने पूछा,
“कहां रखी थी?”
आरव ने आंखें बंद कीं।
“मेरे कमरे में।”
विराज ने कहा,
“कहां?”
“मुझे नहीं पता।”
तभी आरोही ने पूछा,
“क्या तुम्हें अपने कमरे की कोई और चीज याद है?”
आरव ने कुछ पल सोचा।
“एक लकड़ी का घोड़ा।”
आरोही चौंकी।
“लकड़ी का घोड़ा?”
“हां।”
अमन ने कहा,
“क्या उसके अंदर कुछ छिपाया गया था?”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“शायद।”
विराज की आंखें चमक उठीं।
“अब हम सही रास्ते पर हैं।”
अचानक आर्यन ने गोली चलाने की कोशिश की।
रुद्र ने उसका हाथ पकड़ लिया।
दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई।
विराज पीछे हट गया।
“आर्यन!”
आर्यन चिल्लाया,
“लाल फाइल तुम्हें नहीं मिलेगी!”
विराज ने कहा,
“तुम्हें लगता है मैं तुमसे डरता हूं?”
“तुम मेरे बिना कुछ नहीं हो।”
“गलत।”
विराज ने मुस्कुराकर कहा,
“तुम मेरे रास्ते का सिर्फ पहला पत्थर थे।”
आर्यन का चेहरा बदल गया।
“क्या मतलब?”
विराज ने कहा—
“सम्राट की गद्दी अब मेरी है।”
अमन चौंक गया।
“तो तुम दोनों अलग हो?”
विराज हंसा।
“हम कभी एक नहीं थे।”
आरव ने पूछा,
“फिर तुम इतने साल साथ क्यों रहे?”
विराज ने कहा,
“क्योंकि दुश्मन को हराने के लिए पहले उसके सबसे करीब जाना पड़ता है।”
रुद्र ने अचानक कहा,
“विराज, तुम्हें लाल फाइल नहीं मिलेगी।”
विराज ने उसे देखा।
“क्यों?”
रुद्र ने कहा,
“क्योंकि शेखर ने उसे बहुत पहले ही नष्ट कर दिया था।”
सब चौंक गए।
आरव ने पूछा,
“क्या?”
रुद्र ने कहा,
“लाल फाइल अब कागजों का बंडल नहीं है।”
“फिर?”
“उसमें जो जानकारी थी, वो दूसरी जगह सुरक्षित है।”
विराज ने गुस्से में पूछा,
“कहां?”
रुद्र ने आरव की तरफ देखा।
“उसके पास।”
आरव चौंक गया।
“मेरे पास?”
रुद्र ने सिर हिलाया।
“तुम्हें बचपन में जो यादें मिटा दी गईं… उन्हीं में लाल फाइल का पूरा सच छिपा है।”
आरोही ने पूछा,
“यादें कैसे मिटाई गईं?”
डॉक्टर ने धीमे से कहा,
“दवाइयों से।”
आरव ने डॉक्टर की तरफ देखा।
“आपने?”
डॉक्टर ने सिर झुका लिया।
“हां।”
आरव की आंखों में गुस्सा भर गया।
“आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?”
डॉक्टर ने कहा,
“क्योंकि अगर तुम्हें सब याद रहता तो तुम आठ साल की उम्र में ही मार दिए जाते।”
आरव चुप हो गया।
अमन ने पूछा,
“और मुझे?”
डॉक्टर ने कहा,
“तुम्हारी यादें भी मिटाई गई थीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि तुम दोनों ने कुछ ऐसा देखा था जो किसी बच्चे को नहीं देखना चाहिए था।”
अमन ने बेचैनी से पूछा,
“क्या?”
डॉक्टर ने कहा,
“तुम दोनों ने सिया की हत्या होते देखी थी।”
अमन जैसे पत्थर का हो गया।
“मैं…”
उसकी आंखों के सामने अचानक एक दृश्य चमका।
सिया जमीन पर गिरी हुई थी।
एक आदमी उसके सामने खड़ा था।
और दो छोटे बच्चे एक कोने में छिपे हुए थे।
एक बच्चा रो रहा था।
दूसरा उसका हाथ पकड़े हुए था।
अमन ने आंखें खोल दीं।
“मैंने देखा था।”
आरव ने पूछा,
“क्या?”
अमन ने कांपती आवाज में कहा—
“मां को गोली मारने वाला आदमी… आर्यन नहीं था।”
सब चौंक गए।
आर्यन भी स्तब्ध रह गया।
“क्या?”
अमन ने उसकी तरफ देखा।
“तुम कमरे में थे।”
आर्यन का चेहरा बदल गया।
“लेकिन गोली किसी और ने चलाई थी।”
विराज अचानक शांत हो गया।
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“विराज…”
विराज की आंखों में पहली बार डर दिखाई दिया।
अमन ने कहा—
“वो आदमी…”
उसने आंखें बंद कीं।
“वो आदमी…”
कुछ सेकंड बाद उसकी नजर सीधे विराज पर जाकर टिक गई।
“तुम थे।”
तहखाने में सन्नाटा छा गया।
विराज ने कुछ नहीं कहा।
आरव उसकी तरफ बढ़ा।
“तुमने मेरी मां जैसी सिया को क्यों मारा?”
विराज ने कहा,
“क्योंकि वो बहुत कुछ जानती थी।”
“क्या?”
“तुम्हारे जन्म का सच।”
अमन ने गुस्से में कहा,
“तुमने मेरी मां को मारा!”
विराज ने कहा,
“हां।”
अमन उसकी तरफ दौड़ा।
लेकिन रुद्र ने उसे रोक लिया।
“अमन!”
अमन चीखा,
“मुझे छोड़ो!”
“अभी नहीं।”
विराज ने कहा,
“तुम मुझे मार सकते हो।”
अमन रुक गया।
“लेकिन उससे तुम्हारी मां वापस नहीं आएगी।”
अमन की आंखों से आंसू निकल आए।
“तुम इंसान नहीं हो।”
विराज मुस्कुराया।
“इंसानियत ने मुझे बहुत पहले छोड़ दिया था।”
आर्यन ने अचानक जमीन से अपनी बंदूक उठा ली।
उसने विराज पर गोली चलाई।
धांय!
विराज एक तरफ झुक गया।
गोली दीवार में लगी।
रुद्र ने आर्यन को जमीन पर गिरा दिया।
आर्यन चिल्लाया,
“तुमने सिया को मारा था!”
विराज ने कहा,
“हां।”
आर्यन ने कहा,
“लेकिन लाल फाइल में तुम्हारे खिलाफ सबूत है।”
विराज मुस्कुराया।
“मुझे पता है।”
“तो?”
“इसलिए तो मुझे आरव चाहिए।”
आरव चौंका।
“मुझे?”
विराज ने कहा,
“तुम्हारे दिमाग में वो जगह है जहां फाइल छिपी है।”
आरव ने सिर हिलाया।
“मैं तुम्हें कभी नहीं बताऊंगा।”
विराज ने कहा,
“तुम्हें बताना नहीं पड़ेगा।”
“फिर?”
“मैं तुम्हें याद दिला दूंगा।”
विराज ने हाथ उठाया।
उसके आदमी तुरंत आरोही की तरफ बढ़े।
आरव चिल्लाया—
“उसे हाथ मत लगाना!”
आरोही को दो लोगों ने पकड़ लिया।
आरव आगे बढ़ा।
“उसे छोड़ो!”
विराज ने कहा,
“अब तुम समझे?”
“क्या?”
“तुम्हारी कमजोरी।”
आरव की आंखों में गुस्सा था।
“आरोही को छोड़ दो।”
विराज ने कहा,
“लाल फाइल का सच बताओ।”
“मुझे नहीं पता!”
“तो इसे गोली मार दूंगा।”
आरव चिल्लाया,
“नहीं!”
आरोही ने आरव की तरफ देखा।
“मेरी चिंता मत करो।”
“आरोही!”
“तुम्हें सच ढूंढना है।”
आरव की आंखों में आंसू आ गए।
“मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा।”
आरोही मुस्कुराई।
“मुझे तुम पर भरोसा है।”
विराज ने बंदूक आरोही की तरफ कर दी।
तभी…
धांय!
गोली चली।
सबकी सांसें रुक गईं।
आरोही नीचे गिर गई।
आरव चीख पड़ा—
“आरोही!”
वह उसकी तरफ दौड़ा।
लेकिन अगले ही पल सामने खड़ा आदमी गिर पड़ा।
उसके हाथ से बंदूक जमीन पर जा गिरी।
आरव ने पीछे देखा।
रुद्र बंदूक पकड़े खड़ा था।
“गोली मैंने चलाई।”
विराज ने गुस्से में रुद्र की तरफ देखा।
“तुम!”
रुद्र ने कहा,
“मैंने कहा था… मैं तुम्हारे साथ नहीं हूं।”
रुद्र ने आरोही को उठाया।
“उसे कुछ नहीं हुआ।”
आरव ने राहत की सांस ली।
गोली उसके पास खड़े आदमी को लगी थी।
आरोही सुरक्षित थी।
आरव ने उसे गले लगा लिया।
“तुम ठीक हो?”
आरोही ने सिर हिलाया।
“हां।”
“मुझे लगा…”
“कुछ नहीं हुआ।”
रुद्र ने कहा,
“अब यहां से निकलना होगा।”
अमन ने पूछा,
“और विराज?”
रुद्र ने कहा,
“उसे मैं संभालूंगा।”
आरव ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
“क्या?”
“ये कहानी सिर्फ मेरी नहीं है।”
आरव ने विराज की तरफ देखा।
“ये मेरी मां, अमन की मां और हमारे परिवार की कहानी है।”
अमन उसके पास आकर खड़ा हो गया।
“इस बार हम साथ लड़ेंगे।”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“भाई?”
अमन ने कहा,
“भाई।”
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा।
लेकिन तभी…
तहखाने की छत से जोरदार आवाज आई।
धड़ाम!
दीवार का एक हिस्सा टूटकर गिरा।
धूल के बीच एक छोटा लोहे का बॉक्स दिखाई दिया।
आरव उसके पास गया।
बॉक्स पर वही निशान था—
A-17
अमन ने कहा,
“ये वही है।”
आरव ने बॉक्स खोला।
अंदर एक पुरानी फोटो थी।
एक छोटी चाबी।
और एक कागज।
आरव ने कागज खोला।
उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—
“अगर तुम ये पढ़ रहे हो, तो समझो कि तुम्हारा असली पिता अभी जिंदा है।”
आरव के हाथ कांपने लगे।
अमन ने पूछा,
“क्या लिखा है?”
आरव ने धीरे से कहा—
“मेरा असली पिता…”
उसने कागज नीचे कर दिया।
और तभी पीछे से एक आवाज आई—
“हां, आरव… तुम्हारा असली पिता जिंदा है।”
सबने पीछे मुड़कर देखा।
दरवाजे पर…
शेखर खड़े थे।
लेकिन उनके हाथ में बंदूक थी।
और उनकी बंदूक का निशाना…
आरव पर था।
जारी रहेगा…

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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