एपिसोड – 32 : तहखाने में मां की आवाज
“अमन…”
तहखाने के अंधेरे से आई उस आवाज ने अमन के पैरों तले जमीन खिसका दी।
वह सीढ़ियों के सामने खड़ा रह गया।
उसकी आंखों में आंसू भर आए।
“मां…?”
आरव ने अमन के कंधे पर हाथ रखा।
“अमन, हो सकता है ये कोई रिकॉर्डिंग हो।”
अमन ने सिर हिलाया।
“नहीं…”
“तुम्हें कैसे पता?”
“क्योंकि मेरी मां मुझे इसी तरह बुलाती थी।”
आरोही ने पीछे मुड़कर देखा।
अस्पताल के गलियारे में धुआं तेजी से भर रहा था।
“हमें जल्दी करना होगा।”
बूढ़े डॉक्टर ने कहा,
“नीचे चलो। ऊपर ज्यादा देर रुकना सुरक्षित नहीं है।”
आरव ने डॉक्टर की तरफ देखा।
“आप भी हमारे साथ चलिए।”
डॉक्टर ने सिर हिलाया।
“मैं इतने साल इसी दिन का इंतजार कर रहा था।”
चारों लोग अंधेरी सीढ़ियों से नीचे उतरने लगे।
सीढ़ियां बहुत पुरानी थीं।
हर कदम के साथ नीचे से ठंडी हवा ऊपर आ रही थी।
अमन सबसे आगे था।
उसकी आंखें अंधेरे में किसी चीज को खोज रही थीं।
“मां…”
फिर वही आवाज आई—
“अमन…”
इस बार आवाज बिल्कुल पास से आई।
अमन दौड़ने लगा।
आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“रुको!”
“मुझे मेरी मां के पास जाना है।”
“पहले सोचेंगे।”
“मैंने पच्चीस साल इंतजार किया है!”
अमन ने हाथ छुड़ा लिया।
“अब अगर वो सच में मेरी मां हैं तो मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ूंगा।”
आरव उसके पीछे दौड़ा।
आरोही भी साथ थी।
तहखाने के आखिर में एक लोहे का दरवाजा दिखाई दिया।
दरवाजे पर लिखा था—
ROOM 00
अमन दरवाजे के सामने जाकर रुक गया।
“ये कमरा…”
डॉक्टर ने कहा,
“इसी कमरे में सिया को रखा गया था।”
अमन की सांसें तेज हो गईं।
“लेकिन उसकी मौत तो…”
डॉक्टर ने कहा,
“वही तो सबसे बड़ा झूठ था।”
डॉक्टर ने दरवाजा खोला।
कमरे के अंदर एक पुराना बेड था।
एक टेबल।
कुछ दवाइयां।
और दीवार पर लगी एक बड़ी तस्वीर।
तस्वीर में सिया थी।
अमन धीरे-धीरे तस्वीर के पास गया।
“मां…”
उसने तस्वीर को छुआ।
अचानक उसके पीछे लगी दीवार से हल्की आवाज आई।
टिक… टिक…
आरोही ने पूछा,
“ये कैसी आवाज है?”
डॉक्टर ने कहा,
“ये रिकॉर्डिंग सिस्टम है।”
अमन ने तुरंत पूछा,
“कहां?”
डॉक्टर ने दीवार के एक हिस्से को दबाया।
दीवार खुल गई।
अंदर एक पुराना रिकॉर्डर रखा था।
डॉक्टर ने उसे चालू किया।
कुछ सेकंड तक शोर आया।
फिर…
सिया की आवाज सुनाई दी।
“अगर ये रिकॉर्डिंग अमन तक पहुंची है, तो शायद मैं अब इस दुनिया में नहीं हूं।”
अमन ने आंखें बंद कर लीं।
उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।
सिया की आवाज आगे आई—
“अमन, तुम्हें मेरी मौत की बहुत सारी कहानियां सुनाई जाएंगी।”
“कोई कहेगा कि तुम्हारे पिता ने मुझे मारा।”
“कोई कहेगा कि शेखर जिम्मेदार था।”
“कोई कहेगा कि आरव के परिवार की वजह से मैं मरी।”
“लेकिन तुम किसी की बात पर विश्वास मत करना।”
अमन ने कांपती आवाज में कहा,
“मां…”
रिकॉर्डिंग चलती रही।
“सच सिर्फ एक है।”
कुछ पल की खामोशी के बाद सिया बोली—
“मेरी मौत के पीछे एक ऐसा इंसान है, जिसे मैंने अपना भाई समझा।”
आरव ने डॉक्टर की तरफ देखा।
आरोही ने धीरे से पूछा,
“कौन?”
रिकॉर्डिंग में सिया ने नाम लेने की कोशिश की।
“वो…”
फिर अचानक रिकॉर्डिंग में तेज आवाज आई।
जैसे कोई दरवाजा तोड़कर अंदर आया हो।
सिया चीखी—
“तुम यहां कैसे आए?”
फिर एक पुरुष की आवाज सुनाई दी।
“तुम बहुत ज्यादा जान चुकी हो, सिया।”
अमन ने रिकॉर्डर को कसकर पकड़ लिया।
“ये आवाज…”
आरव ने पूछा,
“किसकी है?”
अमन ने सिर उठाया।
उसके चेहरे पर गुस्सा था।
“मैंने ये आवाज पहले सुनी है।”
“कहां?”
“सम्राट की आवाज में।”
रिकॉर्डिंग में पुरुष की आवाज फिर आई—
“लाल फाइल कहां है?”
सिया ने जवाब दिया,
“तुम्हें कभी नहीं मिलेगी।”
“तो तुम्हारे बच्चे मरेंगे।”
“मेरे बच्चे?”
सिया घबरा गई।
“तुम्हें पता है?”
“मुझे सब पता है।”
“अमन को हाथ मत लगाना!”
“और दूसरा बच्चा?”
कुछ पल खामोशी रही।
फिर सिया की आवाज कांप गई।
“आरव को कुछ मत करना।”
आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।
सिया आगे बोली—
“वो सिर्फ एक बच्चा है।”
पुरुष ने कहा,
“दोनों बच्चे मेरे रास्ते का सबसे बड़ा खतरा हैं।”
अमन की आंखों से आंसू निकल रहे थे।
“मां ने मुझे बचाने के लिए…”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“हम दोनों को।”
तभी रिकॉर्डिंग में सिया की चीख सुनाई दी।
और रिकॉर्डिंग अचानक बंद हो गई।
अमन ने रिकॉर्डर जमीन पर रख दिया।
“तो मेरी मां ने हम दोनों को बचाने की कोशिश की थी।”
डॉक्टर ने कहा,
“हां।”
आरव ने पूछा,
“लेकिन वो आदमी कौन था?”
डॉक्टर चुप रहे।
आरव ने कहा,
“आप जानते हैं।”
डॉक्टर ने नजरें झुका लीं।
“हां।”
“कौन?”
डॉक्टर ने धीरे से कहा—
“आर्यन।”
अमन चौंका।
“सम्राट?”
डॉक्टर ने सिर हिलाया।
“हां।”
आरव ने कहा,
“लेकिन रुद्र ने कहा था कि सम्राट का असली नाम आर्यन है।”
डॉक्टर ने कहा,
“रुद्र ने तुम्हें आधा सच बताया।”
“और पूरा सच?”
डॉक्टर ने कहा,
“आर्यन सिर्फ सम्राट का नाम नहीं था।”
“तो?”
“वो शेखर का छोटा भाई था।”
आरव जैसे पत्थर का हो गया।
“क्या?”
डॉक्टर ने बताया,
“शेखर और आर्यन दो भाई थे।”
“आर्यन हमेशा से अपने बड़े भाई से ईर्ष्या करता था।”
“शेखर के पास परिवार था, इज्जत थी और व्यापार था।”
“आर्यन के पास सिर्फ लालच था।”
अमन ने पूछा,
“और सिया?”
डॉक्टर ने कहा,
“सिया आर्यन को अपना भाई मानती थी।”
“लेकिन आर्यन ने ही उसे धोखा दिया।”
आरव ने पूछा,
“फिर पापा का नाम उस फाइल में क्यों था?”
डॉक्टर ने कहा,
“क्योंकि अस्पताल के रिकॉर्ड आर्यन ने शेखर के नाम पर बनवाए थे।”
आरव ने राहत की सांस ली।
“तो पापा निर्दोष हैं?”
डॉक्टर ने तुरंत कहा,
“इतना आसान नहीं है।”
आरव चौंका।
“क्यों?”
“क्योंकि शेखर को सब पता था।”
अमन ने गुस्से में कहा,
“क्या पता था?”
डॉक्टर ने कहा,
“कि आर्यन अस्पताल में क्या करने वाला है।”
“फिर उन्होंने रोका क्यों नहीं?”
डॉक्टर ने सिर झुका लिया।
“क्योंकि शेखर उस वक्त आर्यन के खिलाफ सबूत जुटा रहे थे।”
अमन चिल्लाया,
“लेकिन मेरी मां मर रही थी!”
“शेखर ने उसे बचाने की कोशिश की।”
“फिर?”
“वो देर से पहुंचे।”
अमन की आंखें लाल हो गईं।
“देर से?”
“हां।”
आरव ने पूछा,
“क्यों?”
डॉक्टर ने कहा,
“क्योंकि उन्हें रास्ते में रोक लिया गया था।”
“किसने?”
डॉक्टर ने कहा—
“विराज ने।”
आरव ने आंखें बंद कर लीं।
“तो विराज भी इसमें था?”
डॉक्टर ने कहा,
“हां।”
अमन ने पूछा,
“विराज ने शेखर को रोका?”
“हां।”
“क्यों?”
“क्योंकि उसे लाल फाइल चाहिए थी।”
आरोही ने कहा,
“मतलब विराज और आर्यन दोनों लाल फाइल के पीछे थे।”
डॉक्टर ने सिर हिलाया।
“लेकिन एक और बात है।”
आरव ने पूछा,
“क्या?”
“लाल फाइल में सिर्फ विराज और आर्यन के अपराध नहीं थे।”
“तो?”
डॉक्टर ने कहा—
“उसमें शेखर का भी एक राज था।”
आरव चुप हो गया।
“कौन सा राज?”
डॉक्टर ने जवाब नहीं दिया।
अचानक ऊपर से जोरदार धमाका हुआ।
पूरा तहखाना हिल गया।
छत से धूल गिरने लगी।
आरोही चिल्लाई,
“हमें यहां से निकलना होगा!”
ऊपर से धुआं नीचे आने लगा।
डॉक्टर ने कहा,
“अस्पताल में आग तेजी से फैल रही है।”
आरव ने पूछा,
“दूसरा रास्ता?”
डॉक्टर ने कहा,
“एक रास्ता है।”
उन्होंने कमरे के पीछे लगी दीवार की तरफ इशारा किया।
“वहां से बाहर निकल सकते हैं।”
अमन ने पूछा,
“और आप?”
डॉक्टर ने मुस्कुराकर कहा,
“मैं भी चलूंगा।”
वे सभी दीवार के पीछे बने रास्ते से आगे बढ़ने लगे।
कुछ ही कदम चले थे कि पीछे से आवाज आई—
“इतनी जल्दी जा रहे हो?”
सब रुक गए।
अंधेरे में किसी के कदमों की आवाज सुनाई दी।
टॉर्च की रोशनी सामने गई।
एक आदमी धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ रहा था।
काले कपड़े।
हाथ में बंदूक।
चेहरे पर मुस्कान।
अमन ने उसे देखते ही कहा—
“आर्यन!”
आदमी मुस्कुराया।
“बहुत अच्छे, बेटा।”
अमन का चेहरा गुस्से से भर गया।
“मेरी मां को तुमने मारा।”
आर्यन ने कहा,
“तुम्हारी मां ने खुद अपनी मौत चुनी थी।”
अमन उसकी तरफ बढ़ा।
आरव ने रोक लिया।
“अमन!”
आर्यन हंसा।
“तुम दोनों बिल्कुल अपनी मां जैसे हो।”
आरव ने कहा,
“मां-पापा कहां हैं?”
आर्यन ने कहा,
“तुम्हारे माता-पिता सुरक्षित हैं।”
“उन्हें छोड़ दो।”
“छोड़ दूंगा।”
“कब?”
“जब मुझे लाल फाइल मिल जाएगी।”
आरव ने कहा,
“मेरे पास नहीं है।”
आर्यन मुस्कुराया।
“मुझे पता है।”
“तो?”
“क्योंकि लाल फाइल तुम्हारे पास कभी थी ही नहीं।”
आरव चौंक गया।
“फिर?”
आर्यन ने कहा—
“लाल फाइल तुम्हारी मां के पास है।”
आरव के चेहरे का रंग उड़ गया।
“मां?”
आर्यन ने कहा,
“हां।”
“लेकिन मां को तो…”
“माधवी ने उसे पच्चीस साल से छुपा रखा है।”
अमन ने कहा,
“झूठ!”
आर्यन ने अपनी जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली।
तस्वीर में माधवी थीं।
उनके हाथ में लाल फाइल थी।
आरव ने तस्वीर देखते ही कहा—
“ये कब की है?”
आर्यन मुस्कुराया।
“तुम्हारे जन्म की रात।”
आरोही ने तस्वीर गौर से देखी।
“आरव…”
“क्या?”
“तस्वीर के पीछे कुछ लिखा है।”
आरव ने तस्वीर पलटी।
पीछे सिर्फ एक लाइन थी—
“जिसे बचाने के लिए झूठ बोला, उसी के हाथों सच छिपाया।”
आरव की समझ में कुछ नहीं आया।
आर्यन ने कहा,
“अब तुम समझ रहे होगे कि तुम्हारी मां ने तुमसे इतना कुछ क्यों छुपाया।”
आरव ने गुस्से में कहा,
“तुम मेरी मां को बदनाम कर रहे हो।”
आर्यन हंसा।
“मैं नहीं।”
उसने अपनी जेब से फोन निकाला।
स्क्रीन पर लाइव वीडियो चल रहा था।
माधवी और शेखर एक कमरे में बंधे हुए थे।
माधवी रो रही थीं।
फिर आर्यन ने कैमरा उनकी तरफ किया।
“माधवी।”
माधवी ने कैमरे की तरफ देखा।
उनकी आंखें आरव को देखते ही भर आईं।
“आरव…”
आरव चिल्लाया,
“मां!”
माधवी ने रोते हुए कहा—
“बेटा, आर्यन की बात मत मानना!”
आर्यन मुस्कुराया।
“तो फिर तुम ही बता दो।”
माधवी चुप हो गईं।
आरव ने कहा,
“मां, लाल फाइल कहां है?”
माधवी की आंखों से आंसू बहने लगे।
वह कुछ कहने ही वाली थीं कि…
पीछे से शेखर ने जोर से कहा—
“माधवी! नहीं!”
माधवी ने शेखर की तरफ देखा।
फिर आरव की तरफ।
और आखिरकार बोलीं—
“आरव… लाल फाइल मेरे पास नहीं है।”
आरव चौंक गया।
“तो किसके पास है?”
माधवी ने कांपती आवाज में कहा—
“तुम्हारे पास।”
आरव स्तब्ध रह गया।
“मेरे?”
माधवी बोलीं—
“तुम्हारे जन्म के समय मैंने वो फाइल तुम्हारे साथ ही छुपा दी थी।”
आरव ने अपनी तरफ देखा।
“लेकिन मेरे पास तो कुछ नहीं।”
माधवी ने कहा—
“तुम्हारे पास है…”
वह रो पड़ीं।
“बस तुम्हें पता नहीं कि वो कहां है।”
आर्यन ने कैमरा बंद कर दिया।
फिर उसने आरव की तरफ देखकर कहा—
“अब ढूंढो, आरव… क्योंकि अगर तुम्हें लाल फाइल नहीं मिली, तो अगली बार तुम्हारी मां जिंदा नहीं रहेगी।”
आर्यन ने बंदूक उठाई।
और तभी…
पीछे से एक गोली चली।
धांय!
आर्यन के हाथ से बंदूक गिर गई।
सबने पीछे मुड़कर देखा।
अंधेरे में एक आदमी खड़ा था।
हाथ में बंदूक।
चेहरे पर खून के निशान।
अमन ने पहचानते ही कहा—
“रुद्र!”
रुद्र ने कहा—
“आरव, अमन… मेरे पास ज्यादा समय नहीं है।”
“क्यों?”
रुद्र ने गंभीर आवाज में कहा—
“क्योंकि मैं अकेला नहीं आया हूं।”
अंधेरे में उसके पीछे कई हथियारबंद लोग दिखाई दिए।
और उनमें सबसे आगे खड़ा था…
विराज।
जारी रहेगा…

NSW अनुभवी लेखक -🥇

प्रातिक्रिया दे