उस रात बारिश कुछ ज़्यादा ही तेज़ थी।आसमान लगातार गरज रहा था और बिजली की सफ़ेद चमक हर कुछ सेकंड में पूरे गाँव को ऐसे रोशन कर देती, जैसे अँधेरे में किसी ने अचानक दिन जला दिया हो। कच्ची गलियों में पानी भर चुका था। पेड़ों की डालियाँ हवा के तेज़ झोंकों से बुरी तरह हिल रही थीं और दूर पुराने पीपल के पेड़ से आती पत्तों की सरसराहट किसी धीमी फुसफुसाहट जैसी लग रही थी।
बारिश से बचने के लिए आरव अपनी मोटरसाइकिल तेज़ चला रहा था।
शहर से गाँव लौटते समय उसने सोचा था कि आधे घंटे में घर पहुँच जाएगा, लेकिन रास्ते में उसकी बाइक अचानक बंद हो गई। उसने कई बार किक मारी, मगर इंजन ने जवाब नहीं दिया।
“इस वक्त ही खराब होना था?” आरव ने झुँझलाकर कहा।
उसने मोबाइल निकाला। नेटवर्क गायब था।
चारों तरफ़ सिर्फ़ बारिश थी।
तभी बिजली चमकी और उसकी रोशनी में सड़क के किनारे एक पुराना, जर्जर मकान दिखाई दिया।
आरव ने उस घर को पहले कभी नहीं देखा था।
घर की दीवारें काली पड़ चुकी थीं। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे और मुख्य दरवाज़ा आधा खुला था। सबसे अजीब बात यह थी कि इतनी तेज़ हवा और बारिश के बावजूद दरवाज़ा बिल्कुल स्थिर था।
आरव ने बाइक सड़क के किनारे खड़ी की और घर की तरफ़ बढ़ गया।
जैसे ही उसने दरवाज़े को धक्का दिया, वह अपने आप खुल गया।
अंदर घुप्प अँधेरा था।
“कोई है?” आरव ने आवाज़ लगाई।
कोई जवाब नहीं मिला।
वह मोबाइल की टॉर्च जलाकर अंदर गया। कमरे में पुराने फर्नीचर पर धूल जमी थी। दीवारों पर कुछ धुँधली तस्वीरें टंगी थीं। एक तस्वीर के सामने पहुँचकर आरव रुक गया।
तस्वीर में एक युवती थी।
काले कपड़े पहने हुए, लंबे बाल चेहरे पर आधे बिखरे हुए और आँखें बिल्कुल सीधी कैमरे की तरफ़।
तस्वीर के नीचे नाम लिखा था—साया।
आरव ने अजीब-सी बेचैनी महसूस की।
तभी ऊपर से किसी चीज़ के गिरने की आवाज़ आई।
धड़ाम!
आरव घबरा गया।
“कोई है ऊपर?”
वह सीढ़ियों की ओर बढ़ा। हर सीढ़ी पर उसके कदमों की आवाज़ गूँज रही थी। ऊपर पहुँचकर उसने देखा कि एक पुराना कमरा खुला हुआ था।
कमरे के बीचोंबीच लकड़ी की एक कुर्सी थी।
कुर्सी पर काले बालों का एक गुच्छा पड़ा था।
आरव पीछे हटने लगा।
तभी उसके कान के बिल्कुल पास किसी ने फुसफुसाया—
“तुम… इतनी देर से क्यों आए?”
आरव का शरीर जम गया।
उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।
कोई नहीं था।
उसने घबराकर नीचे भागना चाहा, लेकिन तभी नीचे का मुख्य दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।
धड़ाम!
आरव सीढ़ियों पर ही रुक गया।
बारिश की आवाज़ अचानक और तेज़ लगने लगी।
फिर उसे नीचे से पायल की आवाज़ सुनाई दी।
छन…
छन…
छन…
आवाज़ धीरे-धीरे सीढ़ियों की तरफ़ बढ़ रही थी।
आरव ने मोबाइल की रोशनी नीचे डाली।
सीढ़ियों के अंतिम पायदान पर एक औरत खड़ी थी।
उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
लंबे काले बाल पूरे चेहरे को ढँके हुए थे।
उसने धीरे-धीरे अपना सिर ऊपर उठाया।
आरव की साँस रुक गई।
बालों के बीच से दो बिल्कुल सफ़ेद आँखें दिखाई दीं।
“साया…” आरव के मुँह से अनजाने में निकला।
औरत ने सिर थोड़ा टेढ़ा किया।
“मेरा नाम… तुम्हें किसने बताया?”
आरव पीछे हटते हुए दीवार से जा लगा।
तभी बिजली चमकी।
एक पल के लिए पूरा कमरा रोशनी से भर गया।
और अगले ही पल वह औरत गायब थी।
आरव ने नीचे देखा।
फ़र्श पर गीले पैरों के निशान बने थे।
लेकिन वे निशान दरवाज़े से अंदर नहीं आए थे।
वे सीधे दीवार से निकलकर कमरे तक पहुँचे थे।
आरव ने काँपते हाथों से दरवाज़ा खोलने की कोशिश की। इस बार दरवाज़ा आसानी से खुल गया।
वह दौड़ता हुआ बाहर आया।
बारिश अब भी हो रही थी।
उसने बाइक स्टार्ट की।
इस बार बाइक तुरंत चालू हो गई।
आरव बिना पीछे देखे गाँव की तरफ़ भागा।
लेकिन कुछ दूर जाने के बाद उसे महसूस हुआ कि पीछे कोई बैठा है।
सीट पर किसी के बैठने का भार साफ़ महसूस हो रहा था।
उसने शीशे में देखा।
पीछे कोई नहीं था।
फिर उसके कान के पास वही फुसफुसाहट आई—
“तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकते…”
आरव ने डरकर बाइक रोक दी।
पीछे मुड़ा।
सीट खाली थी।
लेकिन सीट पर पानी से एक शब्द लिखा था—
“वापस आना।”
उस रात आरव घर तो पहुँच गया, मगर सुबह होते ही उसने देखा कि उसकी दाहिनी कलाई पर काले रंग का एक निशान बना हुआ था।
वह निशान बिल्कुल किसी हाथ की उँगलियों जैसा था।
और उसके कमरे की खिड़की के बाहर बारिश से भीगी दीवार पर किसी ने उँगली से लिखा था—
“साया अभी जागी है।”

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇
चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं
शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।
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