अगली सुबह बारिश रुक चुकी थी, लेकिन आरव के मन में रात का डर अब भी जिंदा था।
उसने कलाई पर बने काले निशान को कई बार साबुन से धोया, मगर वह निशान ज़रा भी हल्का नहीं हुआ। उसकी माँ ने पूछा तो उसने कह दिया कि बाइक से गिरने के कारण चोट लग गई है।
लेकिन आरव जानता था कि वह झूठ बोल रहा है।
दोपहर में उसका बचपन का दोस्त कबीर घर आया। आरव ने उसे पिछली रात की पूरी घटना बताई।
कबीर कुछ देर चुप रहा।
“तुमने उस घर में साया की तस्वीर देखी थी?”
“हाँ।”
कबीर का चेहरा बदल गया।
“आरव, वह घर बीस साल से बंद है।”
“लेकिन वहाँ कोई रहता था?”
“रहता नहीं था… रहती थी।”
“कौन?”
कबीर ने धीमी आवाज़ में कहा, “साया।”
साया गाँव की रहने वाली एक लड़की थी। लगभग बीस साल पहले उसकी शादी शहर में हुई थी। लेकिन शादी के कुछ महीनों बाद वह अचानक गायब हो गई।
गाँव वालों ने कहा था कि वह अपने पति के साथ भाग गई।
लेकिन कहानी इतनी आसान नहीं थी।
साया की छोटी बहन ने बताया था कि शादी के बाद साया कई बार अपने घर लौटना चाहती थी। वह कहती थी कि उसके ससुराल के पास एक पुराना मकान है, जहाँ रात को कोई उसे बुलाता है।
एक दिन उसने अपनी बहन से कहा था—
“वहाँ मेरा साया नहीं है… किसी और का साया है।”
इसके बाद साया गायब हो गई।
कुछ दिनों बाद गाँव के लोगों ने उसी पुराने मकान के पास उसकी चूड़ियाँ और पायल पाई थीं।
फिर मकान बंद कर दिया गया।
कबीर ने कहा, “लोग कहते हैं कि साया की आत्मा वहीं भटकती है।”
आरव ने अपनी कलाई का निशान दिखाया।
कबीर का चेहरा पीला पड़ गया।
“यह निशान… मैंने पहले भी देखा है।”
“कहाँ?”
“पुरानी हवेली के चौकीदार के हाथ पर।”
दोनों उसी शाम गाँव के सबसे बुज़ुर्ग व्यक्ति ठाकुर दीनदयाल के पास पहुँचे।
उन्होंने साया का नाम सुनते ही दरवाज़ा बंद कर दिया।
“तुम दोनों वहाँ गए थे?”
आरव ने सिर हिलाया।
बुज़ुर्ग ने लंबी साँस ली।
“तो अब वह तुम्हें जाने नहीं देगी।”
“क्यों?” आरव ने पूछा।
दीनदयाल ने बताया कि साया की मौत साधारण नहीं थी।
शादी के बाद उसके पति ने गाँव के बाहर बने उस मकान को अपने कारोबार के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया था। लेकिन वहाँ पहले से ही एक पुराना कमरा था, जिसे हमेशा बंद रखा जाता था।
साया ने एक रात वह कमरा खोल दिया था।
अंदर उसे एक पुरानी डायरी मिली थी।
डायरी में लिखा था कि कई साल पहले एक तांत्रिक ने उस घर में किसी आत्मा को बाँधने की कोशिश की थी। लेकिन अनुष्ठान अधूरा रह गया था। आत्मा पूरी तरह बंधी भी नहीं और मुक्त भी नहीं हुई।
उस आत्मा को लोग काला साया कहते थे।
वह किसी इंसान के शरीर पर अपना प्रभाव डाल सकती थी।
दीनदयाल ने कहा, “साया ने उस कमरे का राज़ जान लिया था। उसके बाद वह बदलने लगी।”
“क्या उसके पति ने उसे मार दिया?” आरव ने पूछा।
बुज़ुर्ग ने उत्तर नहीं दिया।
कुछ देर बाद उन्होंने कहा, “अगर सच जानना है तो उस घर में वापस जाना होगा।”
आरव डर गया।
उसी रात उसके कमरे की खिड़की पर तीन बार दस्तक हुई।
ठक…
ठक…
ठक…
आरव ने पर्दा हटाया।
बाहर कोई नहीं था।
फिर उसने नीचे देखा।
कीचड़ में दो पैरों के निशान थे।
वे निशान खिड़की के नीचे से शुरू होकर घर के अंदर जाने वाले दरवाज़े तक जा रहे थे।
आरव ने पीछे देखा।
उसकी माँ सो रही थी।
तभी उसके कमरे के कोने से किसी लड़की के रोने की आवाज़ आई।
“मुझे… बाहर निकालो…”
आरव ने कमरे की बत्ती जलाई।
कोई नहीं था।
लेकिन उसके बिस्तर पर वही पुरानी डायरी पड़ी थी।
जिसे उसने कभी देखा तक नहीं था।
उसने डायरी खोली।
पहले पन्ने पर लिखा था—
“अगर यह डायरी तुम्हारे हाथ में है, तो साया ने तुम्हें चुन लिया है।”
आरव के हाथ काँपने लगे।
अगले पन्ने पर एक नक्शा बना था।
उसमें उसी पुराने मकान का चित्र था और नीचे एक निशान।
निशान के पास लिखा था—
“नीचे का कमरा।”
अचानक डायरी के पन्ने अपने आप पलटने लगे।
आखिरी पन्ने पर सिर्फ़ एक वाक्य लिखा था—
“मेरी आत्मा को नहीं, मेरे सच को मुक्त करो।”
उसी क्षण कमरे की खिड़की अपने आप खुल गई।
बाहर फिर बारिश शुरू हो चुकी थी।
बारिश की बूंदों के बीच आरव ने दूर पुराने मकान की छत पर एक औरत को खड़े देखा।
काले कपड़े।
खुले बाल।
सफ़ेद आँखें।
साया उसे देख रही थी।
और फिर उसने अपनी उँगली से नीचे की तरफ़ इशारा किया।
उस पुराने मकान के नीचे।
उस बंद कमरे की तरफ़।
आरव समझ गया कि अगली रात उसे वहाँ वापस जाना होगा।
लेकिन इस बार वह अकेला नहीं जाएगा।
कबीर उसके साथ होगा।
और उन्हें उस कमरे में छिपा सच ढूँढना होगा।
क्योंकि अब सवाल सिर्फ़ साया की आत्मा का नहीं था।
सवाल यह था कि काला साया आखिर किसका था।

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇
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शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।
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