अंधेरी नगरी और कातिल निगाहें
शहर का नाम था काली नगरी।
दिन में यह शहर बाकी शहरों जैसा ही दिखाई देता था। बाजारों में भीड़ रहती, दुकानें खुलतीं और लोग अपने काम में व्यस्त रहते। लेकिन जैसे ही सूरज डूबता, पूरा शहर बदल जाता।
सड़कें सुनसान हो जातीं। घरों के दरवाजे बंद हो जाते और लोग खिड़कियों पर भी पर्दे डाल देते।
क्योंकि इस शहर में एक अजीब डर था।
लोग कहते थे कि रात में गलियों में एक जोड़ी कातिल निगाहें घूमती हैं।
जिसकी नजर उन आंखों से मिल जाती, उसके बाद वह इंसान हमेशा के लिए गायब हो जाता।
पुलिस ने कई बार तलाश की, लेकिन हर बार कोई सुराग नहीं मिला।
इसी शहर में आरव नाम का एक लड़का रहता था। वह इन बातों पर विश्वास नहीं करता था।
एक रात उसका दोस्त निखिल उसके घर आया।
“आरव, आज मेरे घर चलना मत। देर हो गई है।”
आरव हंस पड़ा।
“तुम भी इन अफवाहों पर विश्वास करने लगे?”
निखिल ने गंभीर होकर कहा, “अफवाह होती तो अब तक इतने लोग गायब क्यों होते?”
आरव ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसी रात उसे अपनी दादी की दवा लेने बाजार जाना पड़ा।
रात के करीब ग्यारह बज रहे थे।
जैसे ही आरव पुरानी गली में पहुंचा, उसे लगा कोई उसके पीछे चल रहा है।
वह रुका।
पीछे देखा।
गली खाली थी।
वह आगे बढ़ा।
कुछ कदम बाद उसे एक खिड़की में दो चमकती आंखें दिखाई दीं।
आरव ठिठक गया।
आंखें बिल्कुल स्थिर थीं।
वह कुछ समझ पाता, उससे पहले खिड़की बंद हो गई।
आरव तेजी से आगे बढ़ा।
तभी पीछे से किसी लड़की की आवाज आई—
“रुको!”
आरव पलटा।
एक लड़की काले दुपट्टे में उसके सामने खड़ी थी।
“तुम यहां क्या कर रहे हो?”
आरव ने कहा, “दवा लेने जा रहा हूं।”
लड़की ने घबराकर उसका हाथ पकड़ लिया।
“मेरी बात ध्यान से सुनो। आगे मत जाना।”
“क्यों?”
“क्योंकि वहां से कोई वापस नहीं आता।”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“तुम कौन हो?”
लड़की कुछ पल चुप रही।
“मेरा नाम तारा है।”
तभी दूर से किसी दरवाजे के बंद होने की आवाज आई।
तारा घबरा गई।
“चलो!”
दोनों पास की एक पुरानी हवेली में छिप गए।
आरव ने पूछा, “तुम्हें उन आंखों के बारे में क्या पता है?”
तारा ने धीमी आवाज में कहा, “बहुत कुछ।”
“तो बताओ।”
“ये आंखें किसी भूत की नहीं हैं।”
आरव चौंक गया।
“क्या?”
तारा ने कहा, “इस शहर में पिछले पांच सालों से लोग गायब हो रहे हैं। सबको लगता है कि कोई अदृश्य ताकत उन्हें उठा ले जाती है। लेकिन असली सच इंसानों से भी ज्यादा डरावना है।”
“कौन है इसके पीछे?”
तारा ने हवेली की दीवार की ओर इशारा किया।
वहां पुराने शहर का नक्शा बना था।
“इन सभी गायब हुए लोगों के घर एक ही रास्ते के आसपास थे।”
आरव ने नक्शा देखा।
“तो?”
“ये रास्ता सीधे शहर के पुराने महल तक जाता है।”
आरव ने पूछा, “पुराना महल तो बीस साल से बंद है।”
“हां।”
“फिर वहां कौन रहता है?”
तारा ने कहा, “यही पता लगाने मैं यहां आई हूं।”
दोनों उसी रात महल की ओर निकल पड़े।
महल का बड़ा दरवाजा आधा खुला था।
अंदर घुप अंधेरा था।
तारा ने आरव का हाथ पकड़कर कहा, “सावधान रहना।”
वे धीरे-धीरे अंदर बढ़े।
अचानक सामने दीवार पर दो चमकती आंखें दिखाई दीं।
आरव पीछे हट गया।
तारा ने फुसफुसाकर कहा, “यही हैं… कातिल निगाहें।”
लेकिन तभी उन आंखों के नीचे एक चेहरा दिखाई दिया।
वह एक बूढ़ा आदमी था।
उसने कहा—
“तुम दोनों यहां क्यों आए हो?”
आरव ने पूछा, “लोग कहां गायब हो रहे हैं?”
बूढ़ा कुछ देर उन्हें देखता रहा।
फिर बोला—
“क्योंकि इस शहर का असली मालिक कोई इंसान नहीं… उसका लालच है।”
बूढ़े ने उन्हें एक तहखाने में ले जाकर दिखाया कि वहां पुराने कागज और जमीन के दस्तावेज रखे थे।
असल में शहर के कुछ बड़े लोग गरीब लोगों की जमीन हड़पना चाहते थे। जो भी उनके खिलाफ आवाज उठाता, उसे डराकर शहर से गायब कर दिया जाता।
और कातिल निगाहें कोई रहस्यमयी शक्ति नहीं थीं।
वे एक गुप्त सुरंग में लगाए गए चमकीले शीशों और रोशनी का हिस्सा थीं, जिनसे लोगों को दूर से ऐसा लगता था जैसे अंधेरे में कोई डरावनी आंखें उन्हें देख रही हों।
लेकिन एक सवाल बाकी था।
“लोगों को गायब कौन करता है?” आरव ने पूछा।
बूढ़े ने जवाब दिया—
“शहर का सबसे बड़ा व्यापारी… रुद्रसेन।”
तारा ने तुरंत कहा, “लेकिन वह तो लोगों की मदद करने के लिए मशहूर है।”
बूढ़ा हंस पड़ा।
“सबसे खतरनाक चेहरा वही होता है जो हमेशा नेक दिखाई दे।”
अचानक पीछे से आवाज आई—
“बहुत बातें हो गईं।”
तीनों पलटे।
दरवाजे पर रुद्रसेन खड़ा था।
उसके साथ कई आदमी थे।
रुद्रसेन ने कहा, “तुम दोनों को यहां नहीं आना चाहिए था।”
आरव ने पूछा, “लोगों को क्यों गायब किया?”
रुद्रसेन ने मुस्कुराकर कहा—
“क्योंकि डर सबसे सस्ता हथियार है।”
लेकिन उसे पता नहीं था कि तारा पहले ही सारे दस्तावेजों की तस्वीरें अपने फोन में ले चुकी थी।
उसने मौका मिलते ही वे तस्वीरें पुलिस को भेज दीं।
कुछ ही देर में महल को पुलिस ने घेर लिया।
रुद्रसेन पकड़ा गया।
उसके साथ कई और लोगों के नाम सामने आए।
अगली सुबह पहली बार काली नगरी के लोगों ने बिना डर के अपने घरों के दरवाजे खोले।
रात हुई।
लेकिन इस बार किसी खिड़की में चमकती आंखें नहीं थीं।
आरव उसी पुरानी गली से गुजर रहा था।तारा उसके साथ थी।
आरव ने मुस्कुराकर कहा
“तो खत्म हुआ कातिल निगाहों का डर।”
तारा ने आसमान की तरफ देखते हुए कहा
“डर कभी खत्म नहीं होता आरव… बस उसका सच सामने आ जाता है।”
दोनों आगे बढ़ गए।
लेकिन शहर के सबसे पुराने मकान की बंद खिड़की के पीछे…
अचानक दो चमकती आंखें फिर दिखाई दीं।
कुछ सेकंड बाद खिड़की अपने आप बंद हो गई।
और अंधेरे में किसी की धीमी आवाज सुनाई दी
“कहानी खत्म नहीं हुई…”

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं
अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं
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