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Dil sabhal ja jara part – 26

पढ़ने का समय : 5 मिनट

Part – 26 ankahi mulakat 

स्कूल की घंटी बजी। दिन खत्म हो चुका था। बच्चे चहल-पहल करते हुए गेट की ओर दौड़ रहे थे, बैग्स लहराते हुए, हंसते-खेलते। प्रिया अपनी क्लास से बाहर निकली। उसका चेहरा थका हुआ था, लेकिन आंखों में एक हल्की सी संतुष्टि थी – बच्चों ने उसे मैम कहकर बुलाया था, उनकी मासूम बातें सुनकर मन थोड़ा हल्का हुआ था। वो अपना बैग कंधे पर टिकाया और गेट की ओर बढ़ी। सफेद सलवार-कमीज में, बाल खुले, चेहरा सादा – कोई मेकअप नहीं, सिर्फ होंठों पर हल्की लिप बाम। वो खुद को नॉर्मल दिखाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी चाल में एक उदासी थी, कदम भारी थे। मन में आरव की यादें घूम रही थीं – “आरव… आज बच्चों ने स्टोरी सुनी। तुम होते तो कहते, ‘प्रिया, तू बेस्ट टीचर है।’”

 

स्कूल से थोड़ा दूर, एक पेड़ की छांव में एक काली कार खड़ी थी। विक्रांत अंदर बैठा था। उसने स्कूल गेट की ओर देखा। प्रिया को आते देखा। उसका दिल धड़क गया। चेहरा देखकर चौंका – प्रिया उदास लग रही थी, पहले वाली चमक नहीं थी आंखों में। विक्रांत ने कार स्टार्ट नहीं की। वो इंतजार कर रहा था – स्कूल खत्म होने का। वो स्कूल के अंदर प्रिया से मिलना नहीं चाहता था। क्यों? क्योंकि वो खुद नहीं समझ पा रहा था कि क्या कहेगा। शिमला की यादें ताजा थीं – प्रिया का आरव के साथ होना, वो शादी जिसमें वो गया था लेकिन रह नहीं सका। वो प्रिया को पसंद करने लगा था – गहराई से। लेकिन जानता था प्रिया उसे सिर्फ दोस्त मानती है। शादी में गया था, लेकिन फेरे शुरू होने से पहले चला आया था। प्रिया की शादी किसी और के साथ देख नहीं सकता था। उसी रात मुंबई आ गया था – अपनी नानी (प्रिंसिपल मैडम) के पास। आरव की मौत की खबर उसे नहीं पता थी। वो सोचता था प्रिया और आरव खुशहाल जीवन जी रहे होंगे शिमला में। लेकिन अब प्रिया को मुंबई में देखकर हैरान था। “प्रिया यहां? स्कूल में जॉब? आरव के साथ नहीं? क्या हुआ?”

 

विक्रांत की नजरें प्रिया पर टिकी थीं। उसका चेहरा गंभीर था, आंखों में सवालों का तूफान। वो कार से बाहर नहीं निकला। इंतजार करता रहा। प्रिया स्कूल गेट से निकली। अकेली पैदल चल रही थी – बस स्टॉप की ओर। उसका चेहरा उदास, आंखें नीचे, जैसे मन कहीं और हो। विक्रांत ने कार आगे बढ़ाई। प्रिया के ठीक आगे रोकी। शीशा नीचे किया। “प्रिया… अंदर बैठो।”

 

प्रिया रुक गई। विक्रांत को देखकर चौंकी। उसकी आंखें बड़ी हो गईं, चेहरा सफेद पड़ गया। “विक्रांत… तुम… यहां?”

 

विक्रांत ने दरवाजा खोला। उसकी आवाज में चिंता थी, लेकिन संयम। “हां प्रिया। बैठो। मैं ड्रॉप कर दूंगा।”

 

प्रिया कुछ नहीं बोली। उसकी आंखें नम हो गईं, लेकिन आंसू नहीं बहने दिए। वो चुपचाप कार में बैठ गई। दरवाजा बंद किया। सीट बेल्ट लगाई। पूरी तरह चुप। उसका चेहरा खिड़की की ओर, बाहर देख रही थी, लेकिन कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मन में तूफान – “विक्रांत… तुम यहां? आरव के बाद… तुम्हें देखकर सब याद आ गया। शिमला, वो दिन, वो दोस्ती। लेकिन अब… अब सब खत्म।”

 

विक्रांत ने कार स्टार्ट की। वो ड्राइव कर रहा था, लेकिन नजरें बार-बार प्रिया पर जा रही थीं। प्रिया की उदासी उसे काट रही थी। वो सोच रहा था – “प्रिया… पहले कितनी हंसती थी। आंखों में चमक थी। अब… ये उदासी क्यों? आरव के साथ खुश नहीं है? या कुछ और? शादी के बाद मुंबई क्यों? स्कूल में जॉब? आरव कहां है?” विक्रांत का दिल दुख रहा था। वो प्रिया को पसंद करता था – बहुत। लेकिन जानता था प्रिया का दिल आरव के पास था। शादी में गया था, लेकिन रह नहीं सका। “प्रिया को आरव के साथ देख नहीं सकता था। इसलिए चला आया। लेकिन अब… ये क्या हुआ?”

 

रास्ता लंबा था। ट्रैफिक। विक्रांत ने रेडियो ऑन किया – हल्का म्यूजिक। लेकिन प्रिया चुप। विक्रांत ने हिम्मत करके पूछा, “प्रिया… सब ठीक है? तुम… यहां मुंबई में?”

 

प्रिया चुप रही। उसकी आंखें खिड़की से बाहर। आंसू बह रहे थे, लेकिन चुपके से। वो कुछ नहीं बोली।

 

विक्रांत का मन बैचेन हो गया। “प्रिया… बात करो ना। मैं… मैं तुम्हें देखकर हैरान हूं। शादी के बाद… आरव के साथ नहीं हो?”

 

प्रिया का दिल बैठ गया। वो पलटी। विक्रांत की ओर देखा। उसकी आंखें लाल, चेहरा दर्द से भरा। लेकिन बोली नहीं। सिर्फ सिर हिलाया – ना में।

 

विक्रांत चौंका। “क्या मतलब? आरव…?”

 

प्रिया ने आंसू पोंछे। उसकी आवाज कांप रही थी, लेकिन बोली नहीं। वो फिर खिड़की की ओर मुड़ गई।

 

विक्रांत को कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसकी नजरें प्रिया पर टिकी थीं – वो उदासी, वो चुप्पी। “प्रिया… कुछ हुआ है? आरव ठीक है ना?”

 

प्रिया की सांस रुक गई। वो रो पड़ी। चुपके से, लेकिन हिचकियां लेते हुए। विक्रांत ने कार साइड में रोकी। “प्रिया… क्या हुआ? बताओ ना।”

 

प्रिया ने सिर हिलाया। “विक्रांत… घर पहुंचकर।”

 

विक्रांत ने फिर कार स्टार्ट की। उसका मन बैचेन। “आरव… क्या हुआ उसे? प्रिया इतनी टूट क्यों गई है?”

 

घर पहुंचे। प्रिया कार से उतरी। विक्रांत भी उतरा। “प्रिया… मैं अंदर आऊं?”

 

प्रिया ने कहा, “नहीं विक्रांत। कल बात करेंगे।”

 

विक्रांत चला गया। लेकिन उसका मन बैचेन। प्रिया अंदर गई। रो पड़ी। “आरव… विक्रांत आ गया। लेकिन तुम नहीं हो।”

 

प्रिया घर पहुंची। अपार्टमेंट में गई। आदित्य पापा ने देखा। “बेटी… क्या हुआ? चेहरा उदास क्यों?”

 

प्रिया रो पड़ी। “पापा… विक्रांत… वो यहां है। स्कूल में।”

 

आदित्य चौंके। “क्या? वो शिमला वाला?”

 

प्रिया ने सिर हिलाया। “हां पापा। वो मुझसे मिला। लेकिन मैं कुछ नहीं बोली। आरव की याद… सब टूट गया।”

 

रिया आई। “प्रिया… क्या हुआ?”

 

प्रिया ने बताया। रिया ने गले लगाया। “प्रिया… वो पुराना दोस्त है। लेकिन तू उदास मत हो।”

 

लेकिन प्रिया का मन टूट चुका था। विक्रांत की मुलाकात ने पुरानी यादें ताजा कर दीं। “आरव… विक्रांत आ गया। लेकिन तू कहां हो?”

 

विक्रांत घर लौटा। नानी से कहा, “नानी… प्रिया यहां है। लेकिन बदली हुई। उदास। आरव कहां है?”

 

नानी ने कहा, “बेटा… आरव… उसकी मौत हो गई। एक्सीडेंट में।”

 

विक्रांत चौंका। उसका चेहरा सफेद पड़ गया। “क्या? मौत? कब?”

 

नानी ने बताया। विक्रांत रो पड़ा। “प्रिया… इतना दर्द? मैं नहीं जानता था। अब… अब मैं क्या करूं?”

 

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