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श्रेणी: प्रेम कहानी

यहां दिल को छू लेने वाली खूबसूरत कहानियां पढ़ने और लिखने के लिए साझा की जाती है।

  • आपका होना एक तरफ…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    दुनिया की हर ख़ुशी एक तरफ़, और तेरा साथ एक तरफ़,

     

    *आने वाले कल को जीत लेंगे, बस थामे रखना मेरा हाथ एक तरफ़।*💝💝

  • कहीं ऐसा ना हो जाए…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अपने क़दमों के निशान मेरे रास्ते से हटा दो,

     

    *कहीं ये ना हो कि मैं चलते चलते तेरे पास आ जाऊं!!*💞

  • “बारिश वाली मुलाकात”

    “बारिश वाली मुलाकात”

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    शाम का समय था। हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। सड़क किनारे एक छोटी सी चाय की दुकान पर भीड़ लगी थी। रिया भीगती हुई वहाँ आकर रुकी। उसके हाथ में किताबें थीं और चेहरे पर गुस्सा।

    “आज ही बारिश आनी थी…” उसने धीरे से कहा।

     

    तभी पास खड़े एक लड़के ने अपनी छतरी उसकी तरफ बढ़ा दी।

    “अगर चाहो तो इस्तेमाल कर सकती हो।”

     

    रिया ने उसकी तरफ देखा। लड़का मुस्कुरा रहा था। सफेद शर्ट पूरी भीग चुकी थी, लेकिन फिर भी उसके चेहरे पर अजीब सी शांति थी।

     

    “और तुम?” रिया ने पूछा।

     

    “मैं बारिश पसंद करता हूँ।” उसने हँसते हुए कहा।

     

    रिया ने बिना कुछ बोले छतरी ले ली। कुछ देर बाद दोनों एक ही बस में बैठे थे। संयोग ऐसा था कि सीट भी साथ मिली।

     

    “वैसे मैं आरव हूँ।”

     

    “रिया।”

     

    बस की खिड़की से बारिश की बूंदें अंदर आ रही थीं। दोनों छोटी-छोटी बातें करने लगे। रिया ने अपने बैग से एक नोट बुक निकाली ओर उसने कुछ लिखने लगी पता ही नहीं चला कब रास्ता खत्म हो गया। उतरते समय रिया जल्दी में थी। उसकी किताब नीचे गिर गई। आरव ने उठाकर उसे दी। तभी उसके अंदर से एक छोटा सा कागज़ गिरा।

     

    आरव ने अनजाने में उसे उठा लिया।

    उस पर हल्के नीले पेन से लिखा था—

     

    “कुछ मुलाकातें अजीब होती हैं…

    सिर्फ कुछ मिनटों में कोई इंसान अपना सा लगने लगता है…”

     

    रिया की धड़कन जैसे रुक गई। उसने जल्दी से वो कागज़ उसके हाथ से ले लिया। “वो… बस ऐसे ही लिखा था मैंने।” उसने नजरें चुराते हुए कहा।

     

    आरव कुछ पल उसे देखता रहा। फिर हल्का सा मुस्कुराया।

    “अच्छा लिखा है…” उसने धीमी आवाज़ में कहा,

    “क्योंकि मुझे भी आज कुछ ऐसा ही महसूस हुआ।”

     

    रिया ने पहली बार उसकी आँखों में देखा।

    बारिश की बूंदें अब भी गिर रही थीं, बस फर्क इतना था कि अब उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी।

     

    दोनो अपने अपने रस्ते की ओर चले गए दोनों बिना ये सोचे कि फिर मुलाकात होगी कि नहीं रिया अक्सर आरव के बारे में सोचने लगी वो हर बार बस उस प्लान को अपने दिमाग में दोहराती ओर ऐसा ही कुछ हाल आरव का था ऐसे ही सालों बीत गए पर रिया उस दिन के अलावा कभी आरव को सोच नहीं पाई शायद वो फिर मुलाकात नहीं उस पल में ही खुश रहना चाहती थी शायद यही होता है कुछ पल का सुकून या प्यार 

  • सबसे हसीन दुनिया है आप. 😊

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    खुद को थोड़ा समय देकर देखो,

    तुम्हारी अपनी ही दुनिया सबसे हसीन लगेगी…

    जो सुकून तुम ढूंढते फिरते हो,

    वो तुम्हारे अंदर ही मुस्कुरा रहा है!!

  • मे खुद को गिरफ्तार करता हु…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तू बैठ सामने

    *मैं इश्क़ का इज़हार करता हूँ,*

     

    तू माँगे चाँद

    *मैं तारे भी तेरे नाम करता हूँ,*

     

    कभी नाराज़ मत होना मुझसे,

    मैं तेरी चाहत की ज़ंजीरों में 

    *खुद को गिरफ़्तार करता हूँ…!!*

  • अधूरा इश्क

    अधूरा इश्क

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

     

    अधूरा इश्क

    रागिनी को हमेशा से अंधेरे कमरों से अजीब-सी खींच महसूस होती थी।
    उसके नए किराए के घर में एक कमरा था जिसका दरवाज़ा ताला लगा था। मालिक ने कहा था “कभी मत खोलना।”

    एक रात बिजली चली और वही कमरे से हल्की दस्तक आई। रागिनी डरते हुए बोली “क…कौन?”

    अंदर से एक धीमी, टूटी आवाज़ आई “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

    अगली बार बिजली जाने पर आवाज़ फिर आई।
    इस बार कमरे का ताला अपने आप गिरा।
    और अंदर था… सिर्फ़ अंधेरा।

    पर उसी अंधेरे में एक परछाई उभर रही थी एक लड़का… बेहद खूबसूरत, पर धुंध जैसा।

    उसने कहा “मेरा नाम आरव है… मैं इंसान नहीं हूँ, पर तुम्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचाऊँगा।”

    रागिनी चाहकर भी उस कमरे से दूर नहीं रह पाती।
    आरव उसे हर रात मिलता कभी बातों में, कभी बस खामोशी में।

    रागिनी ने महसूस किया कि वह आरव की तरफ़ खिंच रही है… डर और प्यार के बीच फँसकर।

    आरव हमेशा कहता “मेरी दुनिया में मत आना रागिनी… वो अंधेरा तुम्हें वापस नहीं लौटने देगा।”

    एक दिन रागिनी ने पूछ ही लिया “तुम कौन हो? क्या हो?”

    आरव की आँखों में अजीब-सा दर्द चमका“एक गलती ने मुझे इस दुनिया के बीच कहीं अटका दिया है… ना मैं ज़िंदा हूँ, ना मरा हुआ।”

    रागिनी उससे और गहराई से जुड़ने लगी, वह डर खत्म हो चुका था। बस एक अजीब-सी मोहब्बत जन्म ले चुकी थी।

    अब रागिनी हर दिन सूरज ढलने का इंतज़ार करती।
    रात होते ही आरव उसके पास आ जाता उसे कहानियाँ सुनाता, कभी हवा बनकर उसके बालों को छूता, कभी उसके आँसू पोंछता।

    दोनों जानते थे ये रिश्ता नामुमकिन है। पर इश्क़ कभी इजाज़त थोड़े ही पूछता है।

    एक रात कमरे में सिर्फ आरव नहीं आया… उसके पीछे कुछ और भी था।

    काली, गुर्राती परछाइयाँ जो रागिनी पर झपट पड़ीं।

    आरव चिल्लाया “भागो! ये मेरी दुनिया के भूखे साए हैं—तुम्हें ले जाएँगे!”

    आरव ने उन्हें रोक लिया… पर उसके शरीर का आधा हिस्सा अंधेरे में गायब हो गया।

    रागिनी रो पड़ी “मैं तुम्हें खो दूँगी क्या?”

    आरव बोला “मैं पहले ही खो चुका हूँ…”

    आरव कमज़ोर पड़ने लगा। वह कहने लगा “रागिनी… जब तक मैं हूँ, तुम सुरक्षित हो। पर मेरा समय ख़त्म हो रहा है। इस कमरे को छोड़कर किसी और शहर चली जाओ।”

    पर रागिनी ने साफ़ कह दिया “इश्क़ भागता नहीं, लड़ता है।”

    उस रात हवा में अजीब सरसराहट थी। कमरा खुद-ब-खुद खुल गया। अंधेरा गाढ़ा और डरावना।

    आरव ने रागिनी का हाथ पकड़ लिया पहली और आखिरी बार… उसका स्पर्श ठंडा, पर गहरा था।

    “मेरे साथ मत आना…”

    पर रागिनी ने कहा “मैं अकेली रह ही नहीं सकती तुम्हारे बिना।”

    अंधेरा दोनों के चारों तरफ घूमने लगा।

    अगली सुबह घर का दरवाज़ा खुला मिला। कमरा बिल्कुल शांत। आरव की परछाई गायब थी। रागिनी भी गायब थी।

    बस दीवार पर उभरी एक धुँधली लाइन “अंधेरों में किया इश्क़… दोनों को उजाला कभी नहीं मिला।”

    कई साल बाद, उसी घर में नए किरायेदार आते हैं।
    पहली ही रात, बिजली जाती है… और बंद कमरे से आवाज़ आती है “डरो मत… मैं भी कैद हूँ…”

    इस बार कमरे में दो परछाइयाँ दिखाई देती हैं एक धुँधला लड़का… और उसके कंधे पर सिर रखे एक लड़की।

    दोनों की आँखों में एक ही बात उनकी कहानी कभी पूरी नहीं हुई… और शायद कभी होगी भी नहीं।

    “अंधेरों का इश्क़… अधूरा ही सही, पर अमर रहा।”

     

  • कोई कुछ नहीं बोलेगा

    कोई कुछ नहीं बोलेगा

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    शीला प्रिंसिपल मैम के सवाल का जवाब देना चाहती थी। पर वो बोलकर नहीं। ये देखते हुए की कोई कुछ नहीं बोल रहा है ।तो प्रिंसिपल मैम दुबारा फिर से,एक सवाल और दुहराईं….

    ” कहीं तुम लोगों ने मिलकर कमल को, पिट पिट कर बेहोश तो नहीं कर दी हो? सच्चाई क्या है? साफ साफ हमें बताओ तुम सब.”

    प्रिंसिपल मैम ने अपनी ऊंगली चारों लड़कियों के तरफ करतीं हुई आंखों में आंखे डाल कर,आवाज ऊंची करतीं हुई बोली थी।

    जब राधा को लगा कि अब मामला बिगड़ने लगी है। तो उसने अपने आप को ज्यादा देर रोक नहीं पाई और बोल पड़ी…

    ”  ऐसा कुछ भी नहीं है मैम , जो कुछ भी आप सब के सामने है ना मैम।सच्चाई इससे कहीं बहुत अलग है । “

    राधा प्रिंसिपल मैम को देखते हुए बोली थी। और फिर एक बार सभी के नज़र राधा पर आ कर टिक गई थी।

    शीला अपने मन में कुछ सोच रही थी। वो वहां से निकल कर धीरे-धीरे बाहर के तरफ चल दी थी। वो अपने पैर में लगी चोट के कारण ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। वो चलते हुए लंगड़ा कर चल रही थी। शीला पर कुछ लोगों को छोड़कर बाकी किसी की भी नजर नहीं थी। सभी लोगों का ध्यान कमल और उसके आसपास खड़ी लड़कीयों के उपर ही था। किसी ने भी शीला के उपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। वो लंगड़ाते हुए मीटिंग हॉल से बाहर निकल गई थी। चांदनी प्रिंसिपल मैम के पास जाती है। और उनके आंखों में आंखें डाल कर धीरे से बोलतीं है ।

    ”  कमल बहुत ही घटिया लड़का है। इसके व्यवहार लड़कीयों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।”

     चांदनी बात आगे बढ़ाते हुए बोली।

    ” इस ने राधा और रूपा के साथ बहुत हीं घटिया सलूक किया है।”

    जब रूपा देखी की चांदनी बात खोल दी है। तो वो भी बीच में कुद पड़ी, एक जोरदार लात कमल के कमर के पास मारी। लात लगने से कमल का शरीर हिल कर रह जाता है। यह देखकर कि रूपा ने कमल को लात मारी है। तो कुछ लोग आगे आते हैं,और रूपा को पकड़ कर साइड में कर देते हैं। रूपा का शरीर गुस्से से उबल रही थी। वो सभी को खा जाने वाली नज़रों से देख रही थी। उसके माथे पसीने से भीग गई थी। जब चांदनी प्रिंसिपल मैम से ये बात बोलीं थी। तो प्रिंसिपल मैम भी यह बात सुनकर दंग रह गईं थीं।

    और वो चांदनी के तरफ आश्चर्य से देखती हुई बोली।

    ” क्या हुआ है राधा और रूपा के साथ?बेटा तुम मुझे पुरी बात सच सच बताओ। कोई भी व्यक्ति हमारे कालेज के रूल रेगुलेशन को तोड़े,ये सब मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकती हूं।”

    प्रिंसिपल मैम कड़क अंदाज में चांदनी के तरफ देखते हुए बोली थी।

    चांदनी बोली।

    ” मैं सच कह रही हूं मैम,कमल ने राधा और रूपा पर बहुत अत्याचार किया है।उन दोनों को रस्सियों से बांध कर पिटा है। बहुत बदसलूकी की है। उसके साथ  रेप करने की कोशिश किया है।” बोलते बोलते चांदनी के आंखों से आंसू बहने लगती है।

    प्रिंसिपल मैम अपने चेयर से उठ कर चांदनी के बहते आंसुओं को पोंछती है। और चांदनी को अपने गले से लगा लेती है। और बोलतीं हैं।

    ” अगर तुम्हारी बातों में सच्चाई है। तो मैं इसे छोड़ूंगी नहीं, इसे  सजा दिलवा कर रहूंगी।”

    और मुड़ कर प्रोफेसर दयानंद को आदेश देते हुए बोलती हैं।

    ” प्रोफेसर दयानंद जी। आप डाक्टर को फोन लगाइए, वो आकर कमल का चेक अप करे मामला बेहद संवेदनशील है।”

     प्रोफेसर दयानंद हड़बड़ाकर जल्दी से उठते हुए बोलता है।

    ” जी मैडम जी,अभी काल करके बात कर रहा हूं। 

    प्रिंसिपल मैम बोली।

    ” हां थोड़ा जल्दी किजिए, बच्चों के जिंदगी का सवाल है।”

    प्रोफेसर दयानंद अपने जेब में से अपना मोबाइल निकाल कर एक नम्बर डायल करता है। रिंगटोन बजने के बाद काल रिसीव होता है। प्रोफेसर दयानंद फोन पर बात करते हुए बोलता है।

    ” हैलो,हां जी डाक्टर शर्मा जी। आप कृपया करके जल्दी से कालेज में आ जाइए। यहां पर एक बच्चे की हालत गंभीर है।”

    फोन पर दूसरी तरफ से आवाज आती है।

    हैलो, प्रोफेसर दयानंद जी। हाउ आर यू क्या हुआ है? अच्छा ठीक है। मैं अभी निकलता हूं कालेज के लिए ,बस मैं जल्दी पहुंच हीं रहा हूं। आप मेरा इंतजार किजिए।”

    बोलकर डाक्टर शर्मा ने फोन कट कर दिया था।

    वहां मौजूद कुछ स्टूडेंट्स जो कमल के दोस्त थे। वो बिल्कुल भी मानने के लिए तैयार नहीं था कि कमल कभी भी यह घटिया हरकत कर सकता है। उसे लग रहा था कि, जरूर यह सब लड़कियां मिलकर कमल के साथ कोई साजिश कर रही है। उसको झूठ मूठ के जाल में फंसा रही है। एक लड़का जिसका नाम गोविंद था। वो जोर से बोल पड़ता है।

    ” नहीं यह सब झूठ है। मैं नहीं मानता इस तरह के बातों को, कमल कभी भी ऐसा घटिया हरकत कर हीं नहीं सकता है। मैं कमल को अच्छी तरह जानता हूं।”

    यह देखकर एक लड़का और उसके सपोर्ट में खड़ा हुआ और बोला।

    ” ये इन लड़कियों की साज़िश है। ये कमल को फसाना चाहतीं हैं। क्यों की कमल पैसे वाला है।”

     वह लड़का पूरी ताकत से चिल्लाकर बोल रहा था। इसका नाम विशाल है।

    ” विशाल ये तुम कैसी बातें कर रहे हो। कमल एक नंबर का कुत्ता कमीना घटिया इंसान है। वो राधा दीदी को बालात्कार करने वाला था। मेरी आंखों के सामने,सही टाइम पर आकर शीला दीदी और चांदनी दीदी ने उस राक्षस से राधा दीदी को बचा लिया। नहीं तो ये रेपिस्ट ना जाने क्या क्या करता हम दोनों के साथ।”

    रुपा विशाल को नफ़रत भरी नजरों से देखते हुए जोर से बोली थी।

    ” झूठ, तुम झूठ बोल रही हो। बहाना बना रही हो। तुम सब ने मिलकर कमल को मार मारकर बेहोश कर दी हो। अब सजा से बचने केलिए बहाने बना रही हो ।”

     विशाल रूपा के तरफ देखते हुए,वह भी ज़ोर से चीखते हुए बोल रहा था।

    ” सट अप, शांत हो जाओ तुम सब। कोई कुछ नहीं बोलेगा।”

    प्रिंसिपल मैम सभी को डांटते हुए जोर से बोली थी। सुनकर सभी लोग चुप हो गए थे। प्रिंसिपल मैम के आवाज बिना माइक के हीं पुरे मीटिंग हाल में गुंज रही थी। 

    इधर शीला मीटिंग हॉल में से बाहर निकल कर कॉलेज के दो नंबर गेट वाले रास्ते में लंगड़ाती हुई चली जा रही थी। बाहर तेज धूप निकली हुई थी। हल्की हल्की ठंडी हवा बह रही थी। जिससे शीला थोड़ा राहत महसूस कर रही थी। रास्ते के साइडों में हरे भरे पेड़ पौधे लगाए गए थे। जिससे रास्ते में कहीं कहीं छाया भी हो रही थी। शीला चलती हुई कॉलेज के दो नंबर गेट से बाहर निकल कर मार्केट वाले रास्ते में चलने लगती है। चलते चलते एक शॉप से पानी की बोतल खरीद कर आगे बढ़ गई थी। थोड़ी देर आगे चलने के बाद शीला को एक मेडिकल स्टोर दिखाई पड़ती है। शीला उसमें चली जाती है। शीला मेडिकल स्टोर के अंदर आ गई थी। अंदर आकर वो काउंटर पर बैठे आदमी के तरफ देखते हुए बोलती है।

    ” नमस्ते अंकल “

    सुनकर शीला के जवाब में वो आदमी भी बोलते हैं।

    ” नमस्ते बेटा , बोलिए बेटा क्या चाहिए आपको?”

    शीला के तरफ देखते हुए दुकान दार मुस्कुराते हुए बोला था।

    शीला अपनी पानी की बोतल काउंटर पर रख देती है।

    ” अंकल जी, मेरे फ्रेंड को न चोट लग गई है। और वो बेहोश है।ऐसी कोई मेडिसिन है। जिससे वो जल्दी से होश में आ जाए और वह ठीक हो जाए।”

    शीला दुकानदार को उनके तरफ देखते हुए बोली थी।

    ” हां ठीक है, मैं आपको एक दवाई दे रहा हूं। जिसको पिलाने से वो होश में भी आ जायेगा। और उसके बॉडी के अंदर बूस्टर का भी काम करेगा।..”

    शीला को इतना बोलकर वो दुकानदार अंकल अपने जगह से उठ कर दूसरे साइड दवाई लेने चला जाता है। शीला वहीं खड़ी होती है।

    तभी अजय दुकान में दाखिल होता है। और वो भी काउंटर पर आकर खड़ा होता है।उसका ध्यान अभी शीला पर नहीं गया था। वो डोर ओपन करके अंदर आ गया था। लेकिन उसका नजर शीला के लिए दवाई लेने जा रहे दुकानदार अंकल पर हीं था।

    आगे की कहानी पढ़िए कहानी के अगले भाग में……….. प्यार एक एहसास, नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड पर……..

  • बातों का विश्वास

    बातों का विश्वास

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    शीला कमल को मार मारकर उसे बेहोशी की दुनिया में पहुंचा दिया था। कमल के बेहोश होने के बाद भी शीला के लात रुक नहीं रही थी।‌‌ लगातार लातों की बारिश कर रही थी। गुस्से से शीला के चेहरे पसीने में भीग गया था। पिछे से शीला के कंधे पर दो हाथ पड़ने के आभास होता है। और शीला की तंद्रा भंग होती है। वो पिछे मुड़कर देखतीं हैं। रूपा और राधा उसकी कंधों को धिरे से सहला रही थी। दोनों के चेहरे पर एक खुशी झलक रही थी। और दोनों मुस्कुरा रही थी। वो दोनों अपने दीदी के कमल पर हुई जीत पर प्राउड फील कर रही थी।‌‌

     ” दीदी आप शांत हो जाइए,आप को चोट लगी है।”

    चांदनी धिरे धिरे शीला के तरफ बढ़ते हुए कैजुअली अंदाज में बोली थी।

    ” हां दीदी, अब तो आप हम लोगों पर छोड़ दिजिए। हम देख लेंगे की क्या करना है। इस कमिने के साथ।”

    राधा कमल के तरफ इशारा करते हुए बोली थी।

    ” अब हमें कमल को लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलना चाहिए।”

    रुपा अपने कमर पर हाथ रख कर मुस्कुराती हुई बोल रही थी।

    राधा चांदनी और शीला एक साथ बोलती है।

    ” हां ठीक है चलो चलते हैं।”

    कमल को होश तो था नहीं, जो वो चलकर जाता। तो अब उसे लेकर जाने की जिम्मेदारी,इन चारों सहेलियों के कंधे पर थी । चारों सहेलियों ने कमल के एक एक पैर और एक एक हाथ पकड़ कर उठाई और चल दी थी।

    इधर मीटिंग हाल में कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर कालेज में फंक्शन की तैयारी करने को लेकर प्रिंसिपल स्टूडेंट प्रोफेसर के बीच बाद संवाद चल रही थी। सभी प्रोफेसर अपने स्टूडेंट को भगवान श्री कृष्ण के जीवन के बारे में तो उनके द्वारा किए गए लीला के बारे में अपने स्टूडेंट के सामने ब्यख्यान कर रहे थे।

    जब प्रोफेसर शुक्ला अपनी बात स्टूडेंट के सामने रख रहे थे। तब एक स्टूडेंट अपने कुर्सी से उठ कर प्रोफेसर शुक्ला से एक सवाल किया।

    दरअसल इस शवाल का जवाब उस स्टूडेंट के साथ साथ आप हम और उस मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोगों को चाहिए था। वो लड़का अपनी चेयर से उठा और वो प्रोफेसर शुक्ला को बीच में रोकते हुए बोला।

    ” माफ़ किजियेगा सर, मैं आपको बीच में रोक रहा हूं। सर मैं जानना चाहता हूं। कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव तो हम हमारे कालेज में हर साल मनाते आ रहे हैं। तो फिर हमें इस बार और पहली बार मनाया जाएगा, ऐसा क्यों बताया जा रहा है?”

    उस लड़के ने साफ शब्दों में अपनी बात प्रोफेसर शुक्ला के सामने रख दिया था। उस लड़के की आवाज जब वहां मौजूद सभी लोगों के कानों में जाते हैं। तो सभी के ध्यान उस लड़के पर टिक जाती है। जब ये सवाल उठ हीं गई है तो इसका जवाब जानने कि कोशिश में कुछ लोग और आगे आते हैं। एक लड़की अपनी चेयर से उठ कर बोलती है।

    ” हां सर, हम लोग तो श्री कृष्ण जन्मोत्सव हर साल मनाते हैं। और कॉलेज में अवार्ड फंक्शन का भी आयोजन किया जाता है। तो फिर ये क्यों?”

    उस लड़की ने भी अपने तरफ से एक सवाल पूछ लिया था।इन सवालों के जवाब स्टूडेंट को प्रोफेसर शुक्ला देने वाले हीं थे। कि सभी की नजर मीटिंग हाल के दरवाजे पर पहुंच जाती है।देख कर सभी शौक हो जातें हैं। मीटिंग हाल के माहौल अब बदलने वाला था। जहां तक बदल ही गया था। शीला कमल चांदनी राधा रुपा को देख कर सभी स्तब्ध रह गए थे। सन्नाटा पसर गया था। एक साथ सभी लोगों के जुवान बंद हो गया था। कोई कुछ भी नहीं बोल रहे थे। सभी सीर्फ एक टक उन पांचों को देख रहे थे। अब कोई आगे आकर वेलकम तो करने वाले थे नहीं, तो चारों सहेलियों ने खुद आगे बढ़कर अंदर आने लगी थी। शीला और चांदनी कमल के एक एक हाथ पकड़ कर टांगी हुई थी तो राधा और रूपा एक एक टांग सभी चलकर स्टेज के सामने आकर खड़ी हुई थी।

    खामोशी को भंग करते हुए एक छात्रा इन सभी को देख कर बोली थी।

    ” क्या हुआ है इसे, यह बेहोश क्यों है?”

     उस छात्रा ने अपनी उंगली से कमल को प्वाइंट आऊट करते हुए बोली थी। बीच में से एक और छात्र का आवाज गुंजा।

    ” तुम लोग कमल को ऐसे टांग कर क्यों लाई हो? क्या हुआ है इसके साथ, क्या ये एक्सीडेंट किया है?” 

    उस छात्र ने चारों सहेलियों से सवाल किया था।

    इस सवाल का जवाब आप हम, और ये चारों सहेलियां जानते हैं। लेकिन यहां मीटिंग हाल में मौजूद सभी लोग नहीं जानते थे। अब एक बात और है कि क्या यह सहेलियां जो भी बात बोलेगी क्या वहां मौजूद सभी लोग क्या इनके बात का विश्वास करेंगे? अगर नहीं, तो फिर उसके लिए क्या करना पड़ेगा। वही करने के लिए शीला अपने मन में कुछ सोच कर अपने कदम आगे बढ़ा चुकी थी। सभी कमल को फर्श पर लिटा कर वहीं एक तरफ खड़े हो जाते हैं। अगर कमल की सच्चाई सबके सामने उजागर करना है। तो उसे सबसे पहले होश में लाना होगा, शीला मन-ही-मन ये सोच रही थी। बिना उसको होश में लायें या बिना उसके मुंह से उसके बातों को कोई नहीं मानेगा क्यों मानेगा कैसे मानेगा कोई नहीं मानेगा। हम भी नहीं मानेंगे और आप तो मान हीं नहीं सकते हैं। क्यों की कमल अभी भी बेहोश पड़ा था। चोट उसको लगा था। अब अगर ये चारों सहेलियां बोलेगी की कमल ने उसे परेशान किया है तो इस बात को प्रमाणित भी करना होगा। जो कि कमल के बेहोश रहते संभव नहीं था। यह सीन देख कर प्रोफेसर और प्रिंसिपल मैम भी आश्चर्य चकित रह गए थे।

    प्रिंसिपल मैम इन चारों को देख कर बोलतीं हैं।

    ” शीला चांदनी राधा रूपा क्या है ये सब? तुम सब मिलकर कमल के साथ क्या की हो?”

     थोड़ा रुक कर प्रिंसिपल मैम फिर बोलना शुरू करतीं हैं।

    ” ये बेहोश क्यों हो गया है? सब कुछ सही सही बताओ तुम सब।”

    प्रिंसिपल मैम अपने चेयर पर बैठी हुई हीं इन चारों से सवाल की थीं। शीला प्रिंसिपल मैम को उनके सवाल का जवाब देना चाहती थी। डर इस बात का था कि उसके बात का कोई विश्वास नहीं करेगा।  यही कारण था कि वो कुछ बोलने से बच रही थी। अब प्रिंसिपल मैम उससे सीधा सवाल कर ली थी। तो अब वो चुप कैसे रह सकती थी। 

    क्या होगा जब कमल को होश आयेगा? ये चारों सहेलियां कब तक चुप रहेगी? क्या कमल को होश आयेगा? जब कमल की सच्चाई सभी के सामने आयेगा फिर क्या होगा? इन सभी सवालों के जानने के लिए पढ़ें कहानी का अगला भाग ….. प्यार एक अहसास , कहानी अजय शीला की नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड पर……

     

     

  • ग्रुप कॉल

    ग्रुप कॉल

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    सभी अपने अपने दिशा में कमल को ढूंढने  चल पड़े हैं। चांदनी और राधा अलग अलग दिशा में और रूपा वापस शीला के तरफ चल देती है।उदेस्य तीनो चारों सहेलियों का वही एक कमल को पकड़ कर उसके किये की उसे सजा दिलवाना…

    इधर कमल जो छुप कर सभी पर नजर बनाये हुए था। जब उसे लगा सभी लोग उससे दुर जा चुके हैं। तब उसने राहत की सांस लिया और सोचते हुए बाहर निकल गया,की अब वो दुसरे रास्ते से कॉलेज से बाहर निकल जायेगा। और ये सभी लडकियां कॉलेज में उसे ढूंढती हीं रह जायेगी। कमल अपने मन में यही सब बातें सोचते हुए बाहर निकला और सड़क पर चलने लगा। चलते चलते उसने देखा की एक लड़की सड़क के किनारे बैठी, अपनी पैर पकड़े सर झुकाए अपने पैरों के साथ कुछ कर रही थी। वो लड़की शीला थी शीला को दुसरी साईड घूमी होने के कारण कमल उसे पहचान नहीं पाया था। शीला भी अपना सर नीचे कर के अपने पैर में लगी चोट को मालिश कर ठिक करने की कोशिश कर रही थी। उसकी नजर निचे की तरफ झुकी होने के वजह से उसने भी कमल को नहीं देख पायी थी। कमल भी कोई होगी सोचकर उसे आगे निकल गया था ।जैसे हीं कमल कुछ दूर गया था। कि उसके कानों में सर सराती हुई एक तेज तरार आवाज आकर पड़ी।

    ” वहीं रूक जाओ कमल भागने की बिल्कुल भी कोशिश मत कर ना”

    शीला अपने हांथ से घुटनो का सहारा से उठकर खड़ी होती हुई बोली थी।

    कमल एक दम से चौंका गया और उसके कदम रूक गया वो मुड़ कर आश्चर्य से पिछे देखा उसे शीला दिखी जो उसको अपनी बड़ी बड़ी आंखो से उसके तरफ गुस्से से देख रही थी। कमल शीला को नीचे से उपर तक गौड़ से देखता है। उसे ऐहसास हो जाता है की शीला को चोट लगी है। वो अकेली उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकती है।

    ” हां हां नही भाग रहा हूं मैं,आजा ..देखता हूं क्या कर लेती है मेरा “

    कमल जोर से बोला था।

    ” कमीने मैं तेरा खून पी जाऊंगी।”

    शीला चीख कर जोर से कमल के तरफ बढ़ते हुए बोली थी।

    शीला के पैर के चोट के दर्द बढ़ गयी थी। वो चलते हुए लंगरा भी रही थी। यह देखकर कमल का हौसला और बढ़ गया था।

    ” ख़ून पी जायेगी हा हा हा हा हा “

    बोल कर कमल जोर से हंसा

    ” कुत्ते भागकर तुने अपने लिये और ज्यादा प्रोबलम खड़ी कर लिया है।”

     कमल को देखते हुए शीला दांत पीसकर जोर से बोली थी। शीला चलते हुए लंगरा रही थी ।धिरे धिरे शीला लंगड़ाती हुई कमल के सामने पहुंच जाती है। दोनो के बीच में बहस जारी रहती है। दूर से रूपा शीला और कमल को देख लेती है। वो अपने जेब से मोबाईल निकाल ती है। और अपने फोन में कुछ  टाईप करने लगती है। और ग्रुप कॉल लगा देती है। रींग होने लगती है।

    इधर राधा चलते हुए रास्ते के दोनो साईड नजर घुमा घुमा के देखते हुए आगे के तरफ बढ़ती रहती है।तभी राधा के फोन बजने लगती है।राधा अपनी जेब से मोबाईल बाहर निकालती है। राधा फोन के स्क्रीन में देखती है। जिसमें ग्रुप कॉल आ रही होती है। राधा अंसर बटन पर क्लीक कर के मोबाईल कान में सटा लेती है।

    उधर चांदनी भी कॉल उठा लेती है।जब कॉल रिसीव हो जाती है। तब रूपा जल्दी से जोर से बोलती है।

    ” आप लोग सुन रही हो ना दीदी “

    दूसरी तरफ से आवाज आई जो चांदनी की थी।

    ” हां सुन रही हूं। रूपा बोलो…”

     फिर राधा की भी आवाज आई

    ” क्या हुआ रूपा तुम कहां पर हो बोलो..”

    जबाव देते हुए रूपा बोली

    ” शीला दीदी ने कमल को पकड़ लिया है।आप लोग जल्दी से पहुंचिए।”

    ” ठीक है तुम दीदी के पास पहुंचो मैं भी जल्दी हीं आ रही हूं।”

    चांदनी बोलकर फोन कट कर देती है।

    ” रूपा हम लोग दूर हैं। थोड़ी देर लग सकती है। तुम तेजी से दीदी के पास पहुंचो दीदी को चोट लगी है। ध्यान रखना कमल दीदी को कुछ नुकसान ना पहुंचाए।”

    राधा बोलते हुए घबरा रही थी। उसे शीला की चिन्ता हो रही थी।

    ” ठीक है दीदी मैं जा रही हूं। जल्दी से आईए आप लोग “

    रूपा भी बोलकर फोन काट दी थी।

    फोन काट कर रूपा शीला के तरफ बढ़ने लगती है।  शीला हिम्मत से आगे बढ़कर कमल के कॉलर पकर लेती है।

    ” तेरी इतनी हिम्मत की तुम मेरा कॉलर पकड़ेगी।”

    कमल शीला को जोर से झापड़ मारते हुए चीख कर बोला था ‌।

    शीला थप्पड़ खा कर हिल गयी थी। थप्पड़ लगने के कारण शीला का कमल के कॉलर से पकड़ कमजोर हो गई थी।

    कमल शीला के हांथ को अपने कॉलर से हटाया और हांथ को मरोड़ा जिससे शीला पिछे मुड़ गयी थी। हांथ मुड़ने से शीला को दर्द भी हुआ था। कमल शीला का हांथ मरोड़ कर उसके पीठ पर मुक्का से वार किया था। मुक्के की चोट से शीला को दर्द तो हुआ था। पर अगले हीं पल शीला कमल के हांथ से अपना हांथ झटके से छुड़ाई और सम्भल कर कमल के पेट में एक जोर दार मुक्के से अटैक किया,कमल दर्द के मारे पेट पकड़ लिया था। शीला यहीं नहीं रूकी उसने फुर्ती से कमल के टांग पर वार किया। वो लगातार पांच छह लात लगातार कमल के पैर पर मारी थी। कमल दर्द से छट पटा गया था। वह फिर से क्लास रूम वाला सिच्युशन में चला गया था। वो उम्मीद नही किया था कि, एक अकेली शीला उस पर भारी पड़ जायेगी। वो भी चोट खाई हुई। वो पेट पकड़ कर घुटने के बल बैठ गया था। जैसे हीं कमल बैठा था। की शीला की लात ने उसके गाल पर भार दिया। गाल पर लात पड़ने के वजह से कमल बगल के तरफ उलट गया था। अब जब कमल जमीन पर गीर हीं गया था। तो शीला भी कहां चुकने वाली थी। चल पड़ी अपनी लात दर लात की बरसात करने वो भुल गयी थी की, उसकी पैर में चोट भी लगी है । वो लगातार लात से वार करती रही  कमल पर कभी उसकी लात कमल के पेट तो कभी कमर कभी गर्दन पर लगती थी । शीला हर लात के साथ बस यही बोलती थी।

     ” ये ले कमीने,ये ले कुत्ते, ये ले हरामी।”

    शीला अपनी सारी दर्द भुल कर कमल को मारे जा रही थी।

    मार खा खा के कमल के शरीर से होश गायब हो गया था। मतलब वो बेहोश हो गया था। शीला ये जाने बीना कमल को बीना साबुन के ही धुलाई किये जा रही थी। बे खबर शीला कमल को मारे जा रही थी। पढिए अगले भाग में……प्यार एक अहसास कहानी अजय शीला की……..

  • टी प्वाइंट का चक्कर

    टी प्वाइंट का चक्कर

    पढ़ने का समय : 8 मिनट

    ” मिस्टर भाटी कॉम यू ऑन द स्टेज ”

    बोलकर प्रोफेसर दयानन्द, प्रोफेसर विश्वनाथ भाटी का स्वगत किए थे। पहले सभी प्रोफेसर्स को बारी बारी से बोलना था। लास्ट में सभी बच्चों को प्रिंसिपल मैम संबोधन करने वाली थीं।

    प्रोफेसर भाटी अपने जगह से उठकर माइक के पास आते हैं।और बोलते हैं।

    ” जय श्री कृष्ण बच्चो ”

    स्टूडेंटस के भीड़ भी एक साथ बोलते हैं।

    ” जय श्री कृष्ण”

    प्रोफेसर भाटी आगे बोलना स्टार्ट किए थे।

    ” तो मेरे बच्चों,जैसा की आपको बताया गया है।अभी अभी आप सब को प्रोफेसर दयानन्द सर बता रहे थे। की भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन मनाने के बारे में, हमारे कॉलेज ने फैसला लिया है। कि अपने कॉलेज में उस दिन पुजा पाठ भजन सांस्कृतिक कार्यक्रम  और श्री कृष्ण रचित लीलाओं का नाट्य  प्रदर्शन कर दिखाया जाना है। जिसमें आप सब लोग भी सहभागी बनेंगे। आप लोग वह लीला मंचन देख और सुन कर श्री कृष्ण के लीलाओं को आप अपने जिवन में उतारेंगे और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को अपने दोस्तों मित्रों के साथ शेयर करेंगे। इन्ही बातों के साथ हम अपनी  वानी को विराम देते हैं। धन्यवाद बच्चों।”

    इसी के साथ एक बार फिर तालियों के गर गड़गड़ाहट से पुरा मीटिंग हॉल गुंज उठता है। अब फिर से माइक प्रोफेसर दयानन्द जी के हांथ में थे। और वो फिर से बोलना स्टार्ट कर चुके थे।

    ” हां तो बच्चो, अभी आप लोग प्रोफेसर भाटी को सुन रहे थे। मुझे आशा नहीं उम्मीद है कि ,आप सभी उनके बताए बातों पर गौड़ करेंगे।”

    सभी स्टूडेंट्स के तरफ देखते हुए पुछते हैं।

    ” उनके बातों पर गौड़ करेंगे ना बच्चों?”

    सभी स्टूडेंट्स एक साथ बोलते हैं।

    “जी सर।”

    फिर प्रोफ़ेसर दयानन्द बोलते हैं।

    ” अब मैं आप लोगों के बीच, प्रोफेसर शास्त्री आयेंगे और अपनी बात को रखेंगे।”

    एक बार फिर सारा हॉल तालियों से गुंज उठता है। प्रोफेसर शास्त्री जी आते हैं। और अपने हांथ में  माइक लेकर बोलना स्टार्ट कर देते हैं।

    इधर शीला चांदनी राधा और रूपा कमल को लिए मीटिंग हॉल के रास्ते पर चल रहे होते हैं। सभी सहेलियों के चेहरे पर चिन्ता की लकीर साफ झलक रही थी। सभी के मन में खुशी भी थी की अब सब कुछ नोर्मल हो गयी थी। या प्रिंसिपल मैम से मिलने के बाद सब कुछ ठीक हो जाने वाली  थी। कमल के हाल की बात करें तो, उसका हाल बिल्कुल भी ठीक नहीं था। वो तो यही सोच सोच कर घबरा रहा था। की जब उसे प्रिंसिपल मैम के पास लेकर जाया जायेगा, तो फिर क्या होगा उसके साथ। उसको सारा कॉलेज के सामने बदनामी उसके दोस्तों के बीच में बेइज्जती उसके मम्मी पापा के बदनामी की बहुत चिंता होने लगी थी। भाई जब तुम्हे ये सब की चिन्ता थी। तो पहले ना सोचना था, की हम ये सब कर्म ना करें।जिससे हमारी इतनी बदनामी हो। उस टाइम तो बहुत बड़ा हिरो बन रहा था। की मेरे बढ़कर कोई हिरो है हीं नही इस दुनियां में,जब कर्म किया है तो फल भी तो मिलेगा। लेकिन उसके दिमाग में एक खुराफात आइडिया भी आता है। कि इन सब से अपने आप को छुड़ा कर भाग जायें। कहते हैं ना, जब काल सर पे नाचने लगता है।तो बुद्धी का विनाश हो जाता है। यही सब कमल के साथ अभी हो रहा था। शीला और चांदनी कमल को पकड़े हुए चल रहे हैं। की तभी एका एक जोरदार झटके के साथ,कमल दोनो से अपना हांथ झटक कर  छुड़ा लेता है। और जोर से दोनो को धक्का दे कर गिरा देता हैं। और भागने लगता है।

    ” पकड़ो राधा उसे ”

    चांदनी जो कमल के धक्के खा कर सड़क पर गिरी थी। जोर से बोली थी ।

    ” पकड़ो पकड़ो भागने ना पाये।”

    शीला भी नीचे पड़े पड़े हीं बोली थी। रूपा और राधा जो थोड़ा पिछे पिछे चल रही थी। कमल को भागते हुए देखी तो उसे दौड़कर पकड़ना चाहा पर उसे भी कमल झटक कर  भाग गया था। शीला उठकर खड़ी हो गई थी। चांदनी भी उठ गई थी।

    ” चलो दौड़कर पकड़ते हैं। कितना दूर भागेगा।”

    शीला बोली और दौड़ने लगी

    ” चोट लगा है उसे, ज्यादा तेज नहीं भाग सकता है। हम पकड़ लेंगे उसे।”

    चांदनी दौड़ते हुए बोली थी। राधा और रूपा भी कमल को पकड़ने के लिए सरपट दौड़ने लगी थी।

    ” इस बार पकड़ाया तो  छोडूंगी नहीं उसे, बीना हांथ पांव तोड़े।”

    रूपा गुस्से में दांत पीस कर जोर से बोली थी।

    ” यह सब मेरी वजह से हुआ है। हमने ध्यान नहीं दिया उसपर और वो भाग गया।”

    राधा अपने आप को ब्लेम करते हुए रूआंसी आवाज में बोली थी।

    ” तुम्हे खुदको कोसने की कोई जरूरत नही है राधा, इसमें हम सब की गलती है।”

    शीला राधा से बोली थी।

    ” हां दीदी ठीक कह रहीं है। आप अपने आप को दोशी नहीं मानिए।”

    बोल कर रूपा भी राधा को समझाने की कोशिश कर रही थी। बेचारा कमल ज्यादा दूर तक नहीं भाग पाया था। भागते भागते एक बिल्डिंग के पीछे दीवार से सटकर जोर जोर से सांस ले रहा था।कमल अपने पीछे चारो लड़कियों को दौड़ते हुए देख लिया था। यही सोचकर वो सभी लड़कियों के ध्यान डायवर्ट करने के लिए छुप गया था। ये सभी सहेलियां भी कमल का पीछा करते हुए उसके पीछे भाग रही थी। तभी शीला के पैर सड़क किनारे रखे एक पत्थर के टुकड़े से टकरा जाती है। वो गिर जाती है। ये देखकर सभी रूक जाती है। पर शीला उन लोगो को रूकने से मना करती है।

    ” तुम लोग मेरी फ़िक्र मत करो और उसे दौड़ कर पकड़ो, नहीं तो वो भाग जायेगा।”

    शीला अपना दर्द बर्दास्त करने के प्रयास करते हुए कराह कर बोली थी।

    ” नहीं दीदी तुम्हें चोट लगी है। और ऐसे मे…”

    चांदनी अभी अपनी  बात पूरी कर पाती इससे पहले हीं चांदनी के बात को बीच मे से हीं काटते हुए शीला बोली।

    ” नही मेरी छोड़ो तुम लोग और उसे पकड़ो तुम लोग नही तो वो भाग जायेगा।”

    ” दीदी आपको तो…”

    राधा भी अपनी बात पूरी नहीं कर पायी थी। कि शीला की चीखती हुई आवाज सभी के कानों में पड़ती है।

    ” उसे पकड़ना जरूरी है। मेरी चोट को नहीं।”

    तीनो सहेली समझ चुकी थी। की उसे क्या करना है। और वो सभी चल पड़े थे वे करने। समय भी देखिए ना कैसा खेल खेलता है ।शीला को चोट वहीं जाकर लगी थी। जिस बिल्डिंग के पीछे कमल छीपा था। वो बात अलग थी की वो अकेली थी। और चोटिल भी हो गयी थी। चांदनी राधा और रूपा दुबारा से दौड़ने लगी थी ! कमल इन लोगों को दौड़ते हुए आगे जाते हुए देख रहा था। वो सोच रहा था कि ये लोग दूर चले जायेंगे। तो हम निकल कर दुसरे रास्ते से कॉलेज से बाहर भाग जायेंगे। कहते हैं ना जो होता है अच्छे के लिए होता है। शीला वहीं थी जहां कमल छुपा हुआ था ।

    इधर चांदनी रूपा राधा भागते भागते दूर निकल गयी थी। और एक जगह पर जाकर तीनो सहेलियां रूक गयी थी। हुआ ये था की दौड़ते दौड़ते उन लोगों को एक टी प्वाइंट मिल गया था। वहां पर तीन रास्ता जा रहा था। एक रास्ते से तो वो तीनो आई हीं थी। और एक रास्ता इधर जा रहा था । तो दूसरा रास्ता उधर इसी लिए तीनो वही रूक गयी थी। की वो कौन रास्ते में जाये पता नहीं कमल कौन से रास्ते से भागा होगा और वो कौन रास्ता पकड़े यही कंफ्यूजन में तीनो सहेलियां वहीं रूक गयी थी।

    ” अब किधर जायें दीदी ?”

    राधा कंफ्यूज होते हुए चांदनी से पूछी थी।

    ” यहां पर कोई है भी नहीं, जिससे पूछ सकें की क्या कमल को देखा है।”

    रूपा भी चांदनी से बोली थी।

    ” कोई दिमाग लगाना पड़ेगा।”

    चांदनी दोनो के आंखों में झांकते हुए बोली थी।

    ” पर कैसे”

    थोड़ी देर सोचने के बाद चांदनी बोली थी कि।

    ”  हम कमल को अलग अलग ढूंढेंगे।  राधा तुम उस साइड जाओगी मैं इस तरफ जाती हूं। और रूपा तुम दीदी के पास जाओगी उन्हे चोट लगी हैं। तुम उनका ख्याल रखोगी।”

    ” पर दीदी आप लोग अकेले कैसे कमल को पकड़ोगी कही वो आप लोगों को?”

    रूपा बोलते बोलते रूक गयी थी।

    राधा बोली

    ” एक आइडिया है दीदी।”

    ” क्या आईडिया है। जल्दी बोलो।”

    राधा के तरफ देखते हुए चांदनी बोली थी। सही टाइम पर दिमाग भी सही चलता है सही लोगों का।

    ” हमलोग मोबाइल मे ग्रुप बना लेते है। सभी चारो सहेलियों को ग्रुप कॉल करना है। जिसे भी कमल दिखेगा वो कॉल करेगी और बतायेगी फिर हम लोग जल्दी से वहां पहुंच जायेंगे।”

    राधा अपनी पूरी प्लानिंग बताई थी।

    ” पर शीला दीदी को तो पता हीं नही है। ये बात तो वो कैसे कर पायेंगी कॉल।”

    रूपा बोली और दोनो को आशचर्य से देखने लगी थी।

    ” दीदी के पास तुम जा रही हो, तो तुम करोगी कॉल अगर तुन्हें कमल दिखा तो।”

    ” राधा तुम ग्रुप बनाओ जल्दी से टाइम नही है।”

    चांदनी दोनो को ऑर्डर देते हुए बोली थी। कुछ हीं देर में राधा मोबाइल में टाइप करके ग्रुप बना लेती है।

    ” बन गया दीदी ग्रुप।”

    .राधा चांदनी से बोली थी।

    ” ठीक है ओके तो तुम जाओ उधर।”

    चांदनी राधा को हांथ से एक तरफ इशारा करते हुए बोली थी। और बात आगे बढाते हुए फिर बोली

    ” मैं इधर जा रही हूं। और रूपा तुम दीदी के पास जाओ जल्दी से।”

    राधा और चांदनी एक साथ बोली थी।

    ” ठीक है दीदी मैं जा रही हूं।”

    रूपा बोलती है।और सभी अपने अपने रास्ते चल दिए थे।

    पढिए आगे कि कहानी अगले भाग में……प्यार एक अहसास…..