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श्रेणी: प्रेम कहानी

यहां दिल को छू लेने वाली खूबसूरत कहानियां पढ़ने और लिखने के लिए साझा की जाती है।

  • अधूरी दास्तान

    पढ़ने का समय : 4 मिनट

    शहर की हल्की बारिश की बूँदें सड़कों पर गिर रही थीं। रिया अपने अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी थी, हाथ में चाय का कप, और मन में एक अजीब सी उदासी। वह उस दिन से सोच रही थी, जब उसने आर्यन को आखिरी बार देखा था। वह आर्यन ही था—उसका पहला प्यार, उसका पहला सपना।

    कॉलेज की यादें अचानक ताजा हो गईं। लाइब्रेरी में किताबों की खुशबू, कैफेटेरिया में हँसी का शोर, और बारिश की उन छुप-छुप कर की मुलाकातों में जो मुस्कानें थी, वे सब कुछ आज भी उसकी आँखों के सामने जीवित थीं। आर्यन हमेशा कहते, “रिया, अगर तुम्हारे ख्वाबों में कोई जगह हो, तो मैं वहीं रहना चाहता हूँ।” रिया की आँखों में चमक आ जाती थी, और उसे लगता था कि उसका पूरा जीवन उसी मुस्कान में समा गया है।

    लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, कॉलेज की दुनिया छोड़कर असली जीवन में कदम रखने का समय आया। आर्यन को विदेश में नौकरी मिली, और रिया को शहर में ही रहना पड़ा। पहले तो दोनों ने हर रोज़ फोन किए, पत्र लिखे, और मिलने की कोशिश की, लेकिन दूरी और जिम्मेदारियों ने उनके बीच एक अदृश्य दीवार खड़ी कर दी।

    और फिर वह दिन आया। आर्यन ने संदेश भेजा, “मुझे लगता है हमें अपनी राहें अलग करनी चाहिए। मैं हमेशा तुम्हें याद रखूँगा।” रिया का दिल टूट गया। उसने सारी उम्मीदें, सारे सपने और शायद खुद पर विश्वास तक खो दिया।

    सालों बाद, रिया अब एक सफल आर्ट डायरेक्टर थी। लेकिन मन में वह अधूरापन अभी भी था। एक दिन, उसे अपने पुराने कॉलेज के दोस्त का निमंत्रण मिला। समारोह में पहुँचते ही उसकी नजरें एक व्यक्ति पर टिक गईं—आर्यन। समय की रेत पर शायद हर चीज बदल जाती है, लेकिन उसकी मुस्कान अब भी वैसी ही थी।

    आर्यन भी उसे देखकर चौंका। थोड़ी देर के लिए जैसे समय ठहर गया। दोनों के बीच वही पुरानी गर्माहट और नज़ाकत की आभा फिर से जाग उठी। लेकिन अब वह बातचीत में नहीं, सिर्फ नजरों की खामोशी में थी।

    समारोह के बाद, दोनों पार्क में टहलते हुए पुराने दिनों की बातें करने लगे। वह वही बातें कर रहे थे, जो कभी चुपचाप अपने दिल में महसूस करते रहे थे। अब उनके शब्दों में अनुभव और समझ थी।

    आर्यन ने कहा, “रिया, उस दिन मैं बहुत छोटा और डरपोक था। मैंने अपने डर और जिम्मेदारियों के बीच तुम्हें खो दिया।”

    रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “और मैं भी खुद को दोष देती रही, सोचती रही कि शायद मैं तुम्हारे लिए पर्याप्त नहीं थी।”

    बारिश की बूँदें फिर से गिरने लगीं। रिया ने महसूस किया कि पुराने दर्द में अब कोई कड़वाहट नहीं थी, सिर्फ स्मृतियों की मिठास थी।

    लेकिन इस बार भी कहानी पूरी नहीं हो रही थी। जीवन की जटिलताओं और जिम्मेदारियों ने उन्हें अलग करने का फैसला किया। आर्यन को विदेश लौटना था, और रिया अपने शहर में नई प्रोजेक्ट्स में व्यस्त थी।

    लेकिन इस बार, अलगाव में भी आशा थी। उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया, और इस बार बिना किसी खामोशी के, अपने दिल की भावनाओं को साझा किया। आर्यन ने कहा, “हमारे बीच की दूरी अब फिर से मायने नहीं रखती। जब भी तुम्हारी याद आएगी, मैं तुम्हारे पास महसूस करूंगा।”

    रिया ने हँसते हुए जवाब दिया, “और मैं जानती हूँ कि अब अधूरी दास्तान भी अपने तरीके से पूरी हो रही है। हमारी यादें, हमारी बातें, हमारे सपने—ये सब अब हमारे दिलों में हमेशा के लिए रहेंगे।”

    समारोह खत्म हुआ। रिया अपने अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी थी। बारिश धीमी हो गई थी। उसने अपने दिल में तय किया कि अधूरी दास्तान में भी खूबसूरती हो सकती है। वह अधूरी नहीं रही, क्योंकि उसने इसे अपने अनुभवों और यादों में पूरा कर लिया।

    अगली सुबह, रिया ने अपने फोन में एक संदेश देखा—आर्यन का।

    “रिया, जीवन हमें अलग रास्तों पर ले जा सकता है, लेकिन मेरे दिल में तुम्हारे लिए हमेशा एक जगह है। शायद हम साथ नहीं हैं, लेकिन इस अधूरी दास्तान की मिठास हमेशा हमारे बीच रहेगी। कभी कहीं, कभी किसी रूप में, हम फिर मिलेंगे।”

    रिया ने मुस्कुराते हुए बाहर देखा। सूरज की किरणें अब बरसात की बूँदों पर चमक रही थीं। उसने महसूस किया कि अधूरी दास्तान में भी एक तरह की पूर्णता होती है। कभी-कभी प्रेम का मतलब केवल साथ रहना नहीं, बल्कि अपने दिलों में उसकी याद को संजोना भी होता है।

    वह बालकनी पर खड़ी, बारिश की बची बूँदों को देखते हुए सोच रही थी—शायद जीवन की हर अधूरी कहानी में भी उम्मीद और सुंदरता छिपी होती है। और इस अधूरी दास्तान ने उसे यही सिखाया कि कभी-कभी अधूरापन ही प्रेम की सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

    रिया ने धीरे से कहा, “शायद हमारी दास्तान अधूरी है, लेकिन यही अधूरापन इसे सबसे खास बनाता है।”

    और इस तरह, अधूरी दास्तान ने अपने अंतिम पन्ने पर एक नया अध्याय छोड़ दिया—एक अध्याय जो पूरी तरह प्रेम, यादों, और उम्मीद से भरा था।

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    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

  • भाग – 1 इश्क का पैगाम

    भाग – 1 इश्क का पैगाम

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

     

     

     

     

     

     

     

    • भाग – 1 इश्क का पैगाम

    सकरी की माटी और रूह की पहली प्यास

     

    बिहार राज्य के पूर्णिया जिला के सकरी गाँव की सरहद पर जब शाम उतरती है, तो ऐसा लगता है मानो किसी नवयौवना ने अपनी सिंदूरी साड़ी का पल्लू पूरे आकाश पर फैला दिया हो। वह धूल भरी पगडंडी, जिसके दोनों ओर बाँस के झुरमुट हवा में धीरे-धीरे सरसराते थे, जैसे कोई पुराना आशिक अपनी प्रेमिका के कान में कोई गुप्त मंत्र फूँक रहा हो। इसी पगडंडी पर धूल उड़ाती हुई जब ईशान की काली जीप रुकी, तो पूरे गाँव के सन्नाटे में एक अजीब सी हलचल मच गई।

     

    ईशान, जिसके चेहरे पर दिल्ली की भागदौड़ और ‘ब्रेकअप्स’ की थकान साफ़ झलक रही थी, जीप से नीचे उतरा। उसने चश्मा हटाया और एक लम्बी साँस ली। हवा में नीम के पत्तों की कड़वाहट और जलते हुए उपलों की वह सोंधी महक थी, जिसे बहुत से लेखक ने अपनी कहानियों में अमर कर दिया था। ईशान के लिए यह केवल एक ‘लोकेशन’ नहीं थी; यह एक ऐसी दुनिया थी जहाँ प्रेम आज भी अपनी आदिम शुद्धता में जीवित था।

    “यही है सकरी…” ईशान बुदबुदाया। उसके हाथ में कैमरा था, लेकिन मन में एक ऐसी बेचैनी थी जिसे वह खुद समझ नहीं पा रहा था। वह यहाँ एक डॉक्यूमेंट्री शूट करने आया था, लेकिन उसके भीतर का आधुनिक युवा, जो केवल ‘शॉर्ट-टर्म’ रिश्तों और ‘कैजुअल डेटिंग’ का आदी था, यहाँ की शांति से डर रहा था। उसे क्या पता था कि सकरी की यह शांति किसी बड़े तूफान के आने की आहट है।

    गाँव के बीचों-बीच एक पुराना पोखर था, जिसे लोग ‘हंसिया पोखर’ कहते थे। शाम का वक्त था। गाँव की औरतें और लड़कियाँ अपने घड़ों में पानी भरने वहीं जुटती थीं। ईशान टहलता हुआ उधर ही निकल गया। वहीं उसकी मुलाकात मंजरी से हुई।

    मंजरी… वह कोई मामूली लड़की नहीं थी। वह सकरी की धूप और बारिश से बनी एक ऐसी मूरत थी, जिसे देखकर पत्थर भी पिघल जाए। उसने हलके नीले रंग की सूती साड़ी पहनी थी, जिसका पल्लू उसके कंधे से ढलक कर उसकी सुडौल कमर पर आ टिका था। जब वह पानी भरने के लिए पोखर की सीढ़ियों पर झुकी, तो उसकी साड़ी का एक हिस्सा भीग गया। वह भीगा हुआ कपड़ा उसके जिस्म से इस तरह चिपक गया था, मानो साड़ी ने उसके शरीर की हर वक्रता (curve) को चूमने की कसम खा ली हो।

    ईशान का कैमरा हाथ में ही रह गया। उसने कई बार फैशन शोज़ में अधनंगी मॉडल को देखा था, लेकिन मंजरी के उस भीगे हुए रूप में जो ‘शुद्ध कामुकता’ थी, उसने ईशान के पैरों तले की ज़मीन खिसका दी। वह आकर्षण केवल शारीरिक नहीं था; वह रूह की एक ऐसी पुकार थी जिसे ईशान ने पहले कभी महसूस नहीं किया था। मंजरी के गोरे और सुडौल बदन पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें सूरज की आखिरी किरणों में ऐसे चमक रही थीं, जैसे किसी कलाकार ने सोने की राख बिखेर दी हो।

    मंजरी ने जैसे ही आहट पाकर पीछे मुड़कर देखा, उसकी आँखें ईशान की आँखों से टकराईं। वह क्षण जैसे अनंत काल के लिए थम गया। मंजरी की आँखों में वह ग्रामीण लज्जा तो थी, लेकिन साथ ही एक ऐसी आग भी थी जो सीधे कलेजे को चीर कर पार निकल जाए। प्रेम की भाषा में कहें तो, “मंजरी की चितवन में वह जादू था, जो सावन की पहली फुहार में मिट्टी से उठने वाली उस महक में होता है, जो मन को पागल कर देती है।

    उसने अपनी पायल की छन-छन के साथ एक कदम पीछे हटाया। उसके भीगे बदन की सिहरन दूर खड़े ईशान तक पहुँच रही थी। ईशान के भीतर का आधुनिक पुरुष, जो हमेशा शब्दों और तर्कों से खेलता था, आज गूंगा हो गया था। उसे अपनी रगों में खून की गति तेज होती महसूस हुई। वह मंजरी के करीब जाना चाहता था, उसे छूना चाहता था, यह देखना चाहता था कि क्या यह हाड़-मांस की बनी कोई इंसान है या सिर्फ उसका कोई सपना।

    “कौन हैं आप?” मंजरी की आवाज़ में कोई डर नहीं था, बल्कि एक अजीब सा अधिकार था। उसकी आवाज़ ऐसी थी जैसे पुरानी बांसुरी से कोई विरह का राग निकल रहा हो।

    ईशान ने खुद को संभाला। “मैं… मैं शहर से आया हूँ। कुछ तस्वीरें खींचने।”

    मंजरी हल्का सा मुस्कुराई। उस मुस्कुराहट ने उसके चेहरे पर वह नूर बिखेरा कि ईशान को लगा जैसे पूरी कायनात सिमट कर वहीं आ गई हो। “तस्वीरें? हमारी क्या तस्वीरें खींचिएगा बाबू? यहाँ तो सब कुछ पुराना है, धूल भरा है।”

    “नहीं…” ईशान ने आगे बढ़कर कहा, उसकी आवाज़ में एक गहरी हूक थी, “यहाँ वो है, जो मेरी दुनिया में खो चुका है। यहाँ ‘इश्क’ अपनी असली शक्ल में है।”

    मंजरी ने अपनी नज़रें झुका लीं। उसके गालों पर गुलाबी रंग उभर आया, जो शायद उस शाम की लाली से भी ज्यादा गहरा था। वह अपनी गागर उठाकर जाने लगी, लेकिन उसका भीगा आँचल रास्ते में पड़ी एक झाड़ी में फँस गया। जैसे ही उसने उसे छुड़ाने के लिए ज़ोर लगाया, साड़ी का वह भीगा हिस्सा और भी तन गया, जिससे उसके शरीर की बनावट ईशान के सामने पूरी तरह स्पष्ट हो गई। ईशान का गला सूखने लगा। आज की ‘फास्ट लाइफ’ में जहाँ सेक्स सिर्फ एक ज़रूरत थी, यहाँ उसे महसूस हुआ कि एक स्पर्श की प्यास क्या होती है।

    मंजरी ने शरमाते हुए आँचल छुड़ाया और एक बार पीछे मुड़कर ईशान को देखा। उस एक नज़र में हज़ारों पैगाम थे, आमंत्रण भी, डर भी और एक अनकही चाहत भी।

    उस रात, सकरी के डाक-बंगले में लेटे हुए ईशान को नींद नहीं आई। बाहर झींगुरों का शोर था और दूर कहीं कोई बिरहा गा रहा था। उसे बार-बार मंजरी का वह भीगा बदन, उसकी सुराहीदार गर्दन पर थमी पानी की वो बूंद और उसकी आँखों की वो आग याद आ रही थी। उसने महसूस किया कि उसका शहरी दिल, जो अब तक केवल ‘डेटिंग ऐप्स’ के छोटे-छोटे पैगामों में खुशी ढूँढता था, अब एक बड़ी आग में जलने को तैयार है।

    सकरी की वह रात गवाह थी कि एक आधुनिक प्रेमी और एक ग्रामीण प्रेमिका के बीच की वह दीवार अब टूटने वाली थी। यह केवल एक प्रेम कहानी की शुरुआत नहीं थी; यह दो अलग-अलग दुनियाओं के टकराने और एक होने की दास्तान थी, जहाँ जिस्म की प्यास और रूह की तलाश एक दूसरे में मिलने वाली थी।

    जारी…..

     

    मेरे प्यारे पाठकों, “इश्क का पैगाम” का यह पहला भाग आपको कैसा लगा? क्या सकरी गाँव की माटी की महक और मंजरी की वो पहली सिहरन आपके दिल तक पहुँची?

    पढ़ने के लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया! ❤️

    यह एक लम्बी और रोमांचक यात्रा है। आपकी हर एक टिप्पणी (Comment) और प्रतिक्रिया मुझे आगे लिखने की ऊर्जा देगी। कृपया  अपने विचार जरूर लिखें और कहानी पसंद आये, तो उपहार स्वरूप स्टीकर भेजकर प्रोत्साहित करें।

    सधन्यवाद 

     

     

    आशीष मिश्रा मैथिली

    NSW  नया लेखक  🥉

  • फाइटर बेटियां

    फाइटर बेटियां

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    चलो ठिक है तो हम दोनो जा रहे हैं ! तुम बैठो क्लास रूम मे…राधा बोली और जाने लगी….रूको राधा तुम ऐसे नहीं जा सकती मेरे सवाल का जबाव दिए बगैर…कमल को गुस्सा आने लगा था !

    ” मैं क्या जबाव दूं ..कौनसी बात का जबाव दूं, हां “

    राधा डांटते हुए कमल से बोली थी। बिना रूके फीर बोली…

    ” देखो, मैं ना तो तुम्हें चाहती हूं। ना हीं मेरे मन मे तुम्हारे लिए कुछ है। ना था ना है ना रहेगा “

    राधा अपने तरफ से बात साफ करते हुए बोली थी।

    ” तुम्हें समझ में नही आता क्या कुछ भी?,जब दीदी मना कर रही है, तो तुम क्यो पागलों जैसी हरकत कर रहे हो।”

    रूपा कमल को समझाने की कोशिश की थी।

    ” देखो तुम्हें जो समझना है समझो, पर आज मैं तुम्हे पाकर रहूंगा राधा “

     अपनी उंगलियों से चुटकियां बजाते हुए कमल, अपना डिसीजन क्लियर कर दिया था ।

    ” तुम बहुत गलत कर रहे हो कमल, तुम्हें पता भी है, कि तुम क्या कह रहे हो। जिस बात का कोई मतलब हीं नही है।”

    राधा कमल को, समझा बुझा कर उससे अपना पिछा छुड़वाना चाह रही थी । 

    ” क्या तुम्हे मुझसे प्यार नहीं है? “

    कमल राधा के आंखों से आंख मिलाकर बोला था।

    ” बिल्कुल नहीं “

    राधा कमल को जबाव देते हुए बोली थी।

    ” जब दीदी बोल दी है नही, तो अब तुम्हारा यहां रूकने का कोई मतलब हीं नही बनता है। अब तुम जा सकते हो,जाओ जल्दी यहां से “

    रूपा कमल को गुस्से से देखते डांट कर जोर से हुए बोली थी।

     

    क्लास बिल्डिंग रास्ता 

     

    इधर चांदनी रूपा के नम्बर पर कॉल लगा रही थी। रिंग बजकर कॉल रिसीव नहीं हुआ तो, दुबारा से नम्बर डायल कर दी थी। इस बार भी कॉल रिसीव नहीं हुआ तो, हैरानी से शीला के तरफ देखी।

    ” ये भी कॉल नही उठा रही है । “

     चांदनी शीला से बोली।

    ” चलो चलकर देखते हैं।अब वहीं जाकर पता चलेगा, की आखिर बात क्या है। “

    शीला चांदनी से बोली और आगे चलने लगी थी।

    ” ठीक चलो वही चलते हैं। “

    बोलते हुए चांदनी भी चल पड़ी थी। आज पहली बार हुआ था की राधा और रूपा इन दोनो के कॉल रिसीव नही की थी ।इससे पहले जब भी ये दोनो, राधा या रूपा को कॉल करती थी।तो कॉल रिसीव होते हीं उनके चहकती हुई खनखनाती हुई आवाजों से इनका स्वागत होता था। पड़ ना जाने आज क्या हो गया था ,की कॉल रिसीव हीं नही हो रही थी। यही सोचते हुए दोनो आगे बढ़ रही थी।

     

    क्लास रूम 

     

    ” रूपा जुवान सम्भल कर बात करो, तुम्हें बीच में बोलने के लिए किसने बोला है। अगर तुमको जाना है, तो तुम जा सकती हो।राधा कहीं नहीं जा रही है। मैं बोल दिया तो बोल दिया। “

    कमल रूपा को आंख दिखाते हुए बोला था ।

    ” अबे मजनू के औलाद, तुम्हे बात कुछ समझ में आता है की नहीं। बहुत बात से  समझा लिया तुमको, अब शायद  तुम लात खाके हीं मानोगे। “

    रूपा कमल पर चिल्ला कर गुस्से से चीखते हुए बोली थी।

    ” कमल तुम जाओ यहां से,मैं तुम्हे बार बार बोल रही हूं। मुझे छोड़ दो, मेरे मन में तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं है। तुम क्या, किसी भी लड़के के लिए मेरे दिल में कुछ भी नहीं है। समझो बात को, और जाओ यहां से। “

    राधा बोली,राधा बोल रही थी। इतने में कमल राधा का हांथ पकड़ लेता है। राधा झटक कर कमल से अपना हांथ छुड़ा लेती है। कमल जितना भी राधा के पास आना चाह रहा था। राधा कमल से उतनी हीं दुर जा रही थी। यह देखकर कमल का सब्र का बांध टुटता जा रहा था। कहते हैं, लोग प्यार में पागल हो जाता है। और जब प्यार एक तरफा हो तो पागल पंती और भी ज्यादा बढ़ जाती है। यही सब कमल के साथ अभी हो रहा था। कमल को गुस्सा इस बात से नहीं था। की राधा ने उसे रिजेक्ट किया था। बल्की गुस्सा इस बात से था।की वो ऐसा कर कैसे सकती है। मैं हेंडसम हूं। पढा लिखा हूं। पैसा प्रोपर्टी है हमारे पास, फीर भी मुझे ये रिजेक्ट कर रही है। यही कारण है। की प्यार रिस्पेक्ट आदर से शुरूआत हुई बात अब जोर जबर्दस्ती नीच पंती तक पहुंच गयी थी। 

    ” समझा समझा कर थक गयी हूं तुम्हे, पर तुम हो की समझने का नाम हीं नहीं ले रहे हो। “

    राधा बोली और अपनी आंख लाल करते हुए कमल को देखी।

    ” मुझे कुछ नहीं समझना है। अब जो भी समझना है। सिर्फ और सिर्फ तुन्हें समझना है। बोलकर कमल राधा के गाल को हांथ लगाना चाहता है। पर इससे पहले की कमल का हांथ राधा के गाल को टच करता उससे पहले हीं कमल के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ पड़ा थप्पड़ के साउंड इतना तेज था। की पूरा क्लास रूम गन गना गया था। थप्पड़ खा कर जब कमल पिछे मुरा तो देखा, रूपा अपनी कमर पर हांथ रखी हुई कमल के तरफ देख रही थी। 

    ” तुम, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे थप्पड़ मारने की “

    कमल रूपा को गुस्से से देखते हुए बोला था। अभी भी कमल का हांथ उसके गाल पर हीं था।

    ” वैसे हीं, जैसे तुम्हारा हिम्मत हुआ।  मेरी दीदी के साथ बदसलूकी करने का “

    बोलकर रूपा कमल को घुरने लगी थी।

    ” महंगा पड़ेगा, तुम लोगों को ये थप्पड़ । समझी तुम.”

    कमल रूपा पर गुर्राया।

    ” क्या महंगा पड़ेगा बे “

    बोलकर रूपा  तेजी से झपट कर कमल के कमर पर एक लात मारी कमल अपने आप को सम्भाल पाता इससे पहले रूपा ताबड़तोड़ मुक्का बरसाने लगी। अब जब कमल को मार पर हीं गया था। तो वो भी कहां पिछे रहने वाला था। उसने रूपा के गाल पर जोरदार तमाचा मारा रूपा हिल गयी थी।  पर वो रूकी नही अब पहले से और भी ताकत के साथ कमल पर अटैक करी थी।

    ” ले मजनू की औलाद, ये ले, और ले “

    रूपा लगातार कमल के पेट में पंच कर रही थी। 

    ” रूपा तुम ज्यादा उड़ रही हो तुम,  पड़ कुचलना पड़ेगा तुम्हारी। समझी रूपा की बच्ची। “

    कमल दांत पीस कर रूपा के तरफ देखते हुए बोला था।

    ” पड़ कुचलेगा हराम खोर, तेरी तो मैं जान निकाल दूंगी। मेरी दीदी को परेशान करता है। अब तो तुझे उपर वाला भी नही बचा सकता है। ले, ये ले लात खा कमीने। सुधर तो तुम सकते नहीं, तो मर जायेगा ऐसे हीं।  तुम्हारे खानदान में सारे कमीने ही होंगे इस लिए तुम ऐसी नीच वाला हरकत करता है। “

    बोलते हुए रूपा कमल को बेसुध पिटाई कर रही थी।मार खाते हुए कमल कराह रहा था। राधा जो ये सब देख रही थी। रूपा को रोकना चाह रही थी। पर कमल के हरकत से उसे भी बहुत दु:ख पहुंचा था।चाहकर भी वो रूपा को नही रोक पायी वो भी कमल के ठीक सामने आकर खरी हो गयी थी।

    ”  चला भी जा अब, जा,क्यों पिटाई खा रहा है। “

    राधा कमल को रूपा के हाथों पिटते हुए कमल पर दया दिखाते हुए गंभीर स्वर में बोली थी।

    क्या कमल पिटाई खा कर चला गया?या उसने कोई चाल चली। क्या रूपा कमल के चंगुल से राधा को बचा पाई?या रूपा भी फंस गई। क्या शीला और चांदनी राधा और रूपा के पास पहूंच पाई ? क्या होगा राधा और रूपा के साथ? क्या होगा कमल का अगली चाल इन्हीं सभी सवालों के जवाब जानने के लिए बने रहिए इस कहानी के साथ। आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में…..।

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    Manoj Divana Namaste Story World

    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • तुम और मैं- एक प्रेम कहानी ❤️

    तुम और मैं- एक प्रेम कहानी ❤️

    पढ़ने का समय : 5 मिनट

     

    बारिश की हल्की-हल्की बूंदें खिड़की के शीशे पर गिर रही थीं। हवा में एक अजीब सी ठंडक थी, जो दिल के अंदर तक उतर रही थी। आरव अपनी कॉफी के कप को थामे खिड़की के पास खड़ा था, जैसे किसी का इंतज़ार कर रहा हो। शायद किसी ऐसे इंसान का, जो उसकी जिंदगी में कभी था… और अब नहीं था।

    उसकी नजरें बाहर सड़क पर टिकी थीं, लेकिन उसका मन अतीत की गलियों में भटक रहा था।

    “तुम और मैं… क्या सच में बस एक कहानी बनकर रह गए?” उसने खुद से धीमे से कहा।

     

    तीन साल पहले…

    कॉलेज का पहला दिन था। भीड़, शोर, नए चेहरे—सब कुछ नया और थोड़ा डराने वाला भी। आरव हमेशा की तरह चुप रहने वाला लड़का था। उसे भीड़ में रहना पसंद नहीं था।

    तभी अचानक किसी से टकरा गया।

    “ओह सॉरी!” एक मीठी सी आवाज आई।

    आरव ने नजर उठाई—सामने एक लड़की थी, बड़ी-बड़ी आँखें, चेहरे पर हल्की मुस्कान, और बाल हवा में लहराते हुए।

    “कोई बात नहीं,” उसने धीमे से कहा।

    “मैं नंदिनी हूँ,” उसने मुस्कुराते हुए हाथ बढ़ाया।

    आरव ने थोड़ा हिचकिचाते हुए हाथ मिलाया—“आरव।”

    उस दिन बस इतना ही हुआ। लेकिन शायद वही एक पल था, जब उनकी कहानी शुरू हो चुकी थी।

     

    दिन बीतते गए, और नंदिनी धीरे-धीरे आरव की जिंदगी का हिस्सा बन गई। वह उसकी खामोशी को समझती थी, और उसकी हर छोटी-बड़ी बात पर ध्यान देती थी।

    “तुम इतना चुप क्यों रहते हो?” एक दिन नंदिनी ने पूछा।

    “पता नहीं… आदत है,” आरव ने जवाब दिया।

    “तो बदलो आदत। मैं हूँ ना, बातें करने के लिए,” उसने हंसते हुए कहा।

    और सच में, नंदिनी के साथ रहते-रहते आरव बदलने लगा। अब वह मुस्कुराता था, हंसता था, और कभी-कभी बेवजह बातें भी करता था।

    दोनों साथ में कैंटीन जाते, लाइब्रेरी में घंटों बैठते, और कभी-कभी बिना किसी वजह के बस कॉलेज के गार्डन में घूमते रहते।

    एक दिन बारिश हो रही थी—ठीक वैसे ही जैसे आज।

    “चलो भीगते हैं!” नंदिनी ने उत्साह से कहा।

    “पागल हो क्या? बीमार हो जाओगी,” आरव ने कहा।

    “तुम साथ हो ना, कुछ नहीं होगा,” उसने उसका हाथ पकड़ लिया।

    और उस दिन पहली बार आरव ने खुद को पूरी तरह खुला हुआ महसूस किया। बारिश की बूंदें, नंदिनी की हंसी, और दिल में एक अनकहा सा एहसास…

    शायद यही प्यार था।

     

    एक शाम, कॉलेज के गार्डन में बैठकर आरव बहुत देर तक कुछ सोचता रहा।

    “क्या हुआ?” नंदिनी ने पूछा।

    “कुछ कहना है…” उसने धीरे से कहा।

    “तो कहो ना,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।

    आरव ने गहरी सांस ली—“नंदिनी… मुझे लगता है मैं तुमसे… प्यार करने लगा हूँ।”

    कुछ पल के लिए खामोशी छा गई।

    नंदिनी ने उसे देखा… और फिर हल्के से मुस्कुरा दी।

    “मुझे लगा तुम कभी नहीं कहोगे,” उसने कहा।

    “मतलब?” आरव ने हैरानी से पूछा।

    “मतलब… मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ,” उसने धीरे से कहा।

    उस दिन, उनकी कहानी ने एक नया मोड़ लिया—दोस्ती से प्यार तक का सफर पूरा हो चुका था।

     

    अब हर दिन खास होता था। छोटी-छोटी बातें भी बड़ी खुशियाँ बन जाती थीं।

    “जब तुम साथ होती हो ना, सब आसान लगने लगता है,” आरव ने एक दिन कहा।

    “और जब तुम साथ होते हो, दुनिया अच्छी लगने लगती है,” नंदिनी ने जवाब दिया।

    दोनों ने साथ में सपने देखे—एक साथ जिंदगी बिताने के, हर मुश्किल को साथ पार करने के।

    लेकिन जिंदगी हमेशा वैसी नहीं होती, जैसी हम सोचते हैं।

    दूरी

    कॉलेज खत्म होने वाला था।

    एक दिन नंदिनी बहुत चुप थी।

    “क्या हुआ?” आरव ने पूछा।

    “मुझे एक जॉब ऑफर मिला है… दूसरे शहर में,” उसने धीमे से कहा।

    आरव कुछ पल के लिए चुप रह गया।

    “तो जाओ ना… ये तो अच्छी बात है,” उसने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा।

    “और तुम?” नंदिनी की आंखों में सवाल था।

    “मैं यहीं रहूंगा… मेरी फैमिली…” आरव ने जवाब दिया।

    दोनों जानते थे—ये फैसला आसान नहीं था।

    टूटन

    दिन बीतते गए, और दूरी बढ़ती गई। फोन कॉल्स कम हो गए, मैसेजेस में वो गर्माहट नहीं रही।

    एक दिन नंदिनी ने कहा—“शायद हमें थोड़ा स्पेस चाहिए…”

    आरव ने कुछ नहीं कहा।

    वो समझ गया था—ये ‘स्पेस’ असल में ‘दूरी’ बन चुका था।

    धीरे-धीरे बात करना बंद हो गया।

    और एक दिन, सब खत्म हो गया।

     

    तीन साल बाद…

    आरव अभी भी उसी शहर में था, उसी खिड़की के पास खड़ा।

    तभी दरवाजे की घंटी बजी।

    उसने दरवाजा खोला…

    सामने नंदिनी खड़ी थी।

    वही मुस्कान, वही आंखें… लेकिन अब उनमें एक अलग सी गहराई थी।

    “हाय,” उसने धीरे से कहा।

    “नंदिनी… तुम?” आरव हैरान था।

    “अंदर आ सकती हूँ?” उसने पूछा।

    फिर से

    दोनों चुपचाप बैठे रहे कुछ देर तक।

    “कैसे हो?” नंदिनी ने पूछा।

    “ठीक हूँ… तुम?” आरव ने जवाब दिया।

    “ठीक नहीं थी… इसलिए वापस आ गई,” उसने कहा।

    आरव ने उसकी तरफ देखा—“क्यों?”

    नंदिनी की आंखों में आंसू थे—“क्योंकि मैंने समझ लिया… कि जिंदगी में सब कुछ मिल सकता है, लेकिन सच्चा प्यार नहीं।”

    “और तुम?” उसने पूछा।

    आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—“मैंने कभी तुम्हें भुलाया ही नहीं।”

    नई शुरुआत

    बारिश फिर से शुरू हो गई थी।

    नंदिनी खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई—“याद है? हम पहली बार ऐसे ही भीगे थे।”

    “हाँ… और तुमने कहा था—‘तुम साथ हो ना, कुछ नहीं होगा’,” आरव ने मुस्कुराते हुए कहा।

    नंदिनी ने उसकी तरफ देखा—“अब भी कह सकती हूँ?”

    आरव उसके पास आया, उसका हाथ थाम लिया—“अब तो हमेशा साथ रहूंगा।”

    दोनों खिड़की के पास खड़े होकर बारिश को देखते रहे।

    इस बार, कोई डर नहीं था। कोई दूरी नहीं थी।

    बस दो लोग थे—जो कभी एक-दूसरे से बिछड़ गए थे, लेकिन फिर से मिल गए।

     

    “तुम और मैं…” नंदिनी ने कहा।

    “एक कहानी नहीं… एक जिंदगी,” आरव ने उसकी बात पूरी की।

    बारिश की बूंदें अब भी गिर रही थीं, लेकिन इस बार वो ठंडक नहीं, बल्कि एक नई गर्माहट लेकर आई थीं।

    शायद कुछ कहानियां खत्म नहीं होतीं…

    वो बस थोड़ा रुकती हैं, ताकि फिर से शुरू हो सकें।

    और ये कहानी भी… अब शुरू हुई थी। ❤️

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    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

  • कुछ तो है

    कुछ तो है

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    राधा और रूपा का इंतजार  करते करते  शीला और चांदनी को बहुत देर हो जाती है तो परेशान होकर दोनो सहेली क्लास के रूम के तरफ भागती है….शीला के क्लास वाले बिल्डिंग से मीटिंग हॉल बीच में चार बिल्डिंग छोड़कर थी ! दोनो तेजी से दौर कर अपने क्लास रूम पहुंच जाना चाहती थी।

    ” क्या हुआ नही हुआ एक बार फोन करके भी बता देती..”

    शीला बोली बोलते हुए शीला हांफ भी रही थी। तेजी से दौड़ने से शीला के सांस  चढ़ गई थी। यही हाल चांदनी की भी थी।

    ” हां उसे कॉल कर लेना चाहिए.”

    चांदनी बोली और अपना मोबाईल अपने जेब से निकालने लगी….

    ” मैं ही कर लेती हूं कॉल रूको शीला ऐसे में तुम बीमार पर जाओगी……चांदनी बोली और रूक गई…

    “.मेरी छोड़ो पहले उसको फोन लगाओ जल्दी”

    शीला बोलकर वो भी रूक जाती है ! चलते चलते दोनो तीन बिल्डिंग क्रोस कर गई थी ! अब दोनो की चिंता और भी ज्यादा बढ़ गई थी ! “ना जाने क्या हुआ है उन दोनो के साथ क्लास में कोई स्टूडेंटस भी नहीं थे “

     चांदनी बोलकर नम्बर डायल कर दी थी ! रिंग होने लगी थी अब दोनो कॉल रिसीव होने का इंतजार करने लगी थी। फुल रींग होने के बाद भी कॉल रिसीव नहीं होती है ! 

    “नही उठाई”

    शीला चांदनी को मायूसी से देखी और बोली..

    ” नही”

    चांदनी बोली।

    ” रूपा के नम्बर पे लगाओ कॉल “

    शीला बोली शीला का दिल बैठा जा रहा था ! सेम कंडिशन से चांदनी भी गुजर रही थी।

    ” हां हां लगाती हूं “

     चांदनी बोली और स्क्रोल डाउन करने लगी चांदनी और शीला के चेहरा साफ उतर गया था ! ऐसा लग रहा था अब रो देगी दोनो ! फोन लगाकर अपने कान मे सटा लेती है ! चांदनी और शीला एक दूसरे को देख रही है। और मन हीं मन दोनो सोच रही थी की

     कुछ तो है..

     

    क्लास रूम

     

    ” देखो कमल मुझे जाने दो तुम्हारी ये हरकत मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है ! दीदी वेट कर कर के परेशान हो गई होंगी….राधा बोली और कमल के हांथ से अपना हांथ को झटक कर झटका मार कर छुड़ाना चाहा पर पकड़ इतनी मजबूत थी की छुड़ा नहीं पाई…

    ” अरे मेरी जान, तुम्हें छोड़ने के लिए थोड़े हीं ना पकड़ा हूं ! बहुत दिन से तुम्हे पकड़ना चाह रहा था पर तुम तो हांथ हीं नही लगती थी आज जब मौका मिला है तो तुम नखरा हीं ज्यादा करने लगी है ” कमल बोलता है…..

    ” कुत्ते हरामजादे छोड़ मेरी बहन को छोड़ कमीने छोड़..”

    रूपा बहुत गुस्से मे कमल से बोलती है.।

    ” तुम क्यों फड़ फड़ा रही है तुम्हें मैं कुछ नहीं करूंगा तुम बस शान्ती से तमाशा देखती जा “

    कमल रूपा को डांटते हुए बोला था।

    ” कमीने करेगा तो तब जब तू कुछ करने के लायक बचेगा, तब ना ..हमें बांधकर हिरो बन रहा है।अगर इतना हीं पावर है तुझमें तो खोल के दिखा मुझे फीर मैं बताती हूं की तू कहां का हिरो है ” बोलकर रूपा कमल को ललकारी ! बंधी तो राधा भी थी ! लेकिन राधा का एक हांथ कमल खोल रखा था ! जीसे पकड़ कर राधा को कमल बार बार अपने से चिपकाने की कोशिश करता रहता था ! 

    ” देख राधा आज तुम्हें मुझसे कोई नहीं बचा सकता है ! चाहे तुम जितनी भी कोशिश कर लो “

    कमल घमंड में चुर होकर राधा से बोला था ! 

    ” तुम बिल्कुल भी ठीक नहीं कर रहे हो कमल, मैने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा जो तुम मेरे साथ ये सब कर रहे हो। देखो खोल दो हम दोनो को और जाने दो हमें,कहीं ऐसा ना हो की तुम्हें बाद में चलकर पछताना पड़े”

    राधा कमल को समझाते हुए बोली थी।

    ” नहीं मैं तुम्हें आज ऐसे कभी नहीं जाने दुंगा,आज तुम्हे मेरी होनी पड़ेगी “

    कमल राधा को गुस्से से देखते हुए बोला था। 

    ” तेरी इतनी मजाल की तू दीदी से इस तरह बात करेगा “

    रूपा बात आगे बढाते हुए फिर बोली…

    ” अपनी शक्ल देखा है कभी आईने में बड़ा आया है मेरी दीदी का लवर बनने वाला “

    बोलकर रूपा अपने बदन को गुस्से में कस मसाने लगती है ! 

    ” देख कमल मैं तेरी शिकायत प्रिंसीपल मैम से करूंगी अगर मेरी बात नहीं माना तो”

    राधा कमल को समझाने कि कोशिश की

    ” हरामजादी अभी तक तेरी गर्मी शांत नही हुआ है ! बहुत उछल रही है ना रूक अब मैं तुम्हें ऐसे नहीं छोड़ूंगा अब तेरा रेप होगा “

    कमल दांत पीसकर गुस्से से आंख लाल करते हुए बोला था ! रेप का नाम सुनकर राधा और रूपा दोनो बहुत घबरा गई थी !

    दोनो मन हीं मन सोच रही थी की कहां फस गई मैं  वे दोनो फोन भी नहीं कर सकती थी की शीला और चांदनी उन दोनो को मदद कर सके इन दोनो के फोन कमल छीन कर साइलेंट मोड में डालकर अलग रख दिया था ! कमल का नजर काफी समय से राधा पर था ! वो राधा को चाह रहा था ये बात अलग है की कभी भी कमल राधा को सामने से प्रपोज नहीं किया था ! राधा भी कभी इस बात को नोटिस नही किया था ! वैसे भी राधा प्यार मोहब्बत के लफड़े से दूर हीं रहना चाहती थी ! बस उसका मकसद था की पढाई लिखाई कर के अपना फ्यूचर बनाना उसको इन सब से कोई भी मतलब नहीं था। कमल भी अपने दिल में राधा को बसाये एक तरफा मोहब्बत लिए घुम रहा था। वो राधा को बताने वाला था की वो उससे प्यार करता है ! कई बार बात करने की कोशिश किया भी पर नहीं कर पाया था। क्यों की राधा कभी अकेली रहती हीं नहीं थी। चारो सहेलियां हमेशा साथ रहती थी कॉलेज में ! इसी लिए कमल को मौका नहीं मिल पाता था ! आज मीला भी तो सिच्यूशन हीं कुछ अलग बन गई थी। अब आप कहेंगे की ये क्लास रूम में कैसे पहुंचा तो बता दें दर असल कमल राधा और रूपा को मैन गेट से हीं पिछा कर रहा था ! जब देखा वो दोनो क्लास रूम में गई है तो पिछे पिछे कमल भी क्लास रूम में चला गया था। जब राधा और रूपा ने देखा तो 

    ” तुम,तुम यहां क्या कर रहे हो कमल?”

    .राधा कमल को उंगली से प्वाइंट  करते हुए बोली थी 

    ” मैं, मैं यहां तुमसे मिलने आया था।”

     कमल बोला और दोनो के पास आकर बैंच पर बैठ गया था ! 

    ” तुम जाओ यहां से हम लोग भीं जा रहें हैं मीटिंग हॉल में “

    रूपा कमल से बोली और उठने लगी…

    ” ठिक है तुम जाओ, हमे राधा से अकेले में कुछ बात करना है।”

    कमल रूपा से बोला था।

    क ,क क्या क्या, बात करना है तुमको मुझसे?”

     राधा हकलाते हुए आशचर्य से कमल को देख कर बोली थी।

    ” राधा रूको ना थोड़ी देर बात कर लो फीर चली जाना “

     कमल राधा से बोला और मुस्कुराने लगा…

    ” नही मुझे नही करनी है तुमसे कोई भी बात तुम चले जाओ यहां से  “

    .राधा कमल पर चिल्लाते हुए बोली थी।

    ” हां तुम जाओ यहां से मैं बोल देती हूं नहीं तो अच्छा नहीं होगा “

    रूपा गरज कर बोली..

    ” तुम लोग बेकार में ऐसी बातें कर रही हो “

    कमल शांत होते हुए बोला था !

    ”  मैं कहती हूं ना तुम जाओ यहां से तो जाओ मुझे परेशान मत करो “

    राधा बोली और उठकर जाने लगी…

    अरे खा म खा तुम लोग हाइपर हो रही हो कुछ भी ऐसी वैसी बात नही है “

    कमल दोनो को देखते हुए बोला था।

    ” चलो ठिक है, तो हम दोनो जा रहे हैं। ठिक है, तुम बैठो क्लास रूम में “

    राधा बोली और उठकर जाने लगी…. आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में ….

     

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    Manoj Divana Namaste Story World

    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • चार सहेलियां

    चार सहेलियां

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    मीटींग हॉल में छात्र छात्रायें जुटने लगे थे ! जीसको जहां जगह मिल रही थी बैठ जा रहे थे ! टीचर्स के टीम भी मीटींग हॉल में आ गये थे ! सभी लड़के लड़कियाँ लाईन से लगे कुर्सी पर आकर के बैठ रहे थे ! 
    शीला और चान्दनी भी चलकर मीटींग हॉल में प्रवेश करती है !आगे आगे शीला पीछे चान्दनी और उसके पीछे तीन चार लड़की हॉल के अंदर अपने सीट लेने के लिए बढ़ रही होती है ! ये सभी भी कुर्सीयों पर बैठ जाते हैं !
    चान्दनी अभी मीटींग स्टार्ट होने में टाईम है जरा राधा को कॉल करके पूछेगी कि वो कहां रह गई…. हमें रूपा से भी बात करना चाहिए …..शीला चान्दनी से कहने लगी और वो खुद भी अपनी फोन भी नीकालने लगी थी…हां ठिक है सही कह रही है तुम यहां तो बहुत शोर है बाहर नीकल के बात करनी पड़ेगी….चान्दनी बोलकर शीला को देखने लगी
    हां हां तो चलते हैं ना हॉल रूम से बाहर…चलके बात कर लेते हैं…बोली और शीला उठकर चान्दनी को दोनो हांथ पकर कर उठाने लगती है ! चान्दनी शीला के साथ उठकर चल देती है ! हॉल से बाहर निकलकर दोनो सहेली एक छोटा सा रास्ते की दुरी चलने के बाद गार्डेन में पहूंची…..गार्डेन में बने सीमेंट के बैन्च पर बैठ जाती है ! चलो अब करते हैं बात…तू लगायेगी फोन या मैं करूं कॉल….शीला चान्दनी से बोली ……मैं करती हूं कॉल ….वैसे मैतो सुबह भी बात की थी…चाहो तो अभी तुम बात करलो…वो भी हैप्पी हो जायेगी की दीदी की फोन आई…..बोलकर चान्दनी शीला के तरफ देखने लगी ……ओके चलो मैं हीं करती हूं कॉल उसे…बोलकर शीला ने मोबाईल में नम्बर स्क्रोल डाऊन करने लगी..नम्बर मील गया तो डाईल कर के स्पीकर पर डाल दिया था रिंग बजना स्टार्ट हो गया था जब आधे से ज्यादा रींग बज गया लास्ट होने वाली थी रींग तब कॉल रिसीव किया गया ….हैल्लो शीला दीदी माय लवली जान….कॉल रिसीव करते हीं राधा बोलती है !कैसी हो आप ….राधा फीर बोली……..मैं ठिक हूं कहां रह गई तूं कॉलेज नहीं आ रही क्या …..शीला राधा को बोली…..अरे तुने हीं मुझे कॉल करके बोली सुबह और तुमहीं नहीं आई….चान्दनी बोली….आ रही हूं मैं बस पहुंच हीं गई….क्या बात है आज फीर सभी सहेलियां एक साथ होंगे….रूपा भी मेरे साथ हीं आ रही है….राधा फोन पर बोलकर हंसने लगी……अरे हां ये तो अच्छी बात है….तो आ जाओ तुम दोनो जल्दी से ….शीला बोली….हां बस बस पहुंच हीं गई….राधा बोलकर फोन कट कर दिया…..फोन रखकर शीला और चान्दनी एक दुसरे को देखकर मुश्कुराने लगी थी….
    चार सहेलियों की जोड़ी पुरे कॉलेज में मशहुर धी सब लोग इन चारो के दोस्ती के मिशाल दिया करते थे !ये चारो जब एक साथ कहीं भी चली जाती थी कहीं भी एक साथ खड़ी हो जाती थी तो ये बिल्कुल भी नही लगता था की ये सभी सगी बहनें नहीं है ! चोरों के एक दुसरे के लिए ईज्जत प्यार सम्मान एक दुसरे के लिए समर्पन यही सब चारो दोस्तों को महान बनाती थी ! अईसा नहीं है की हमेशा इन सब में प्यार हीं रहता था…इनके भी जीन्दगी में उदासी मनमुटाव छोटे मोटे झगड़े भी इनके जीन्दगी में हिस्सा ले लेते थे ! ये बात अलग है की ज्यादा दिनो तक एक दुसरे बिना रह नही पाते थे ! कहते हैं ना की ऊतार चढाव हीं जिवन के दो पहलु है..दु:ख शु:ख तो जिवन के आधार है !किसी के शु़:ख में भले हीं साथ नहीं खड़ा हुआ हो लेकिन इन चारो में से कीसी को भी अगर दु:ख हुआ हो उस टाईम पर ये चारो सभी एक साथ चट्टान के तरह खड़े मिलते थे ! चान्दनी के फोन बजने लगती है….चान्दनी फोन रिसीव करती है…..कहां हो दीदी आप लोग मै और रूपा क्लास रूम में हैं……उधर से राधा बोली…..अरे हां मैं तुम लोगो को बताना हीं भुल गई थी.की हम क्लास रूम में नहीं हैं…तुम लोग मीटींग हॉल के तरफ आ जाओ हम लोग वहीं हैं…..चान्दनी राधा को फोन पर जबाव दिया ….ठिक है दीदी मैं अभी आई….राधा बोली….ओके आ जाओ तुम लोग जल्दी….बोलकर चान्दनी कॉल कट कर दी थी !
    उधर मीटींग हॉल में सभी प्रोफेसरस आ गये थे.सभी स्टूडेन्टस भी अपनी अपनी जगह लेकर बैठ चुके थे ! सभी छात्रों के मन में एकहीं शावाल थे जो बार बार दिमाग में घुम रहे थे जो की इतनी बड़ी मीटींग का अरेन्जमैंट किया गया था पर ये बात किसी के कानो कान तक भनक भी नहीं परे थे कि इतनी बरी मिटींग किस बात को लेकर बुलाई गई है..अब आप सोचीये इस मीटींग को सीक्रेट मीटींग कहा जाए तो तनीक भी ताज्जुव वाली बात नही होगी..है ना ?
    चलो अब हमें मीटींग हॉक के अन्दर चलना चाहिये…..शीला चान्दनी से बोली और क्लास रूम वाली बिल्डींग के तरफ नजर दौरादी…..राधा और रूपा कहां रह गई बोली थी क्लास रूम तक तो आ गई हूं फीर आने में इतनी देर कहां लगादी….चान्दनी थोरी परेशान होते हुए बोली और शीला कंधे पर प्यार से हांथ रखी…..आ जाए गी घबराओ मत आती हीं होगी हो सकता है क्लास रूम में बैठकर थारा रिलैक्स कर रही होगी….कमजोर तो वो पहले से हीं है आते आते थक गई होगी शीला बोली …नही मेरा दिल घबरा रहा है अभी तक तो उसे आ जाना चाहिए कहीं कुच्छ…..इससे पहले की चान्दनी अपनी बात पुरी कर पाती शीला बीच में हीं चान्दनी के बात काटते हुए बोली….कच्छ भी मत बोलो उसे कुच्छ नहीं हो सकता है ! अगर तुम अईसी बात सोचती हो तो चलो क्लास रूम चलकर हीं देख लेते हैं वैसे भी वो अकेले नहीं है रूपा भी साथ में है उसके….शीला चान्दनी पर थोरा सख्त लहजे में उसके आंख में आंख डालकर बोली…..तो चलो फीर क्लास रूम चलकर देखते है मेरा जी घबरा रहा है ….चान्दनी चीन्तीत होते हुये बोली….चान्दनी का चहकता हुआ चेहरा अब मुरझाने लगा था ! होगा भी क्यों नहीं अपने बहन से भी ज्यादा इन सभी दोस्तों को जो मानती थी…अईसा नहीं है की शीला कठोर है उसे इन सबकी फिकर नहीं है वो भी उतनी ही चीन्तीत थी जीतनी की चान्दनी थी..फर्क सिर्फ इतना था की चान्दनी चीन्ता साफ झलक रही थी और शीला अपनी चीन्ता बाहर नही आने देना चाह रही थी ! शीला की ये आदत भी थी की वो चाहे जितना भी टेन्शस में वो दुसरे के सामने जाहीर नही होने देती थी की वो कीसी टेन्शन में है या उसे कोई प्रोबलम है ! ये बात तो आप समझ हीं गये होंगे जब शीला की साईकिल खराब हुई थी तो अजय को जल्दी हांथ नही लगाने दिया था ! दोनो उठकर क्लास रूम के तरफ चल देती है !
    चलते चलते रास्ते में यही सोचती रहती है की कितनी ला परवाह हो गई है ये दोनो लड़की..जरासा सा भी हम लोगों की फिकर नहीं है उसके पास….सोचने का एक पहलु ये भी थी की कहीं उन लोगों के साथ कुच्छ गलत तो नहीं हुआ है ! नही नही ये मैं क्या सोच रही हूं ! अईसा नहीं हो सकता उनके साथ ! लग भग एक हीं तरह के सोच दोनो सहेलियों के दिमाग में चल रही थी ! एक तरह से ये भी सोचना जायज थी ! क्योंकी सारे स्टूडेन्टस और टीचर्स मीटींग हॉल के तरफ गये हुए थे ! ये दोनो अकेली क्लास रूम में गई थी ! इस बात का फायदा उठाकर कहीं कोई ईन लोगों के साथ कुच्छ गलत तो नहीं कर दिया …..चान्दी हमें जल्दी से जल्दी क्लास रूम पहुंचना चाहिए….शीला बोली अब शीला के मन में भी डर जन्म ले लिया था……हां हां तुम ठीक कह रही हो हमें जल्दी वहां पहुंच कर देखना चाहिए की आखीर बात क्या है ! चान्दनी बोलती है और उसके कदम तेज हो जती है ! भागो चान्दनी अब अईसे काम नहीं चलेगा……शीला बोलकर दौर लगा देती है ! यह देखकर की शीला दौर रही है ! चान्दनी भी तेजी से दौरने लगती है ! क्या होगा जब शीला और चान्दनी क्लास रूम पहुंचेगी…और मीटींग हॉल में क्या हुआ जानने के लिए पढिए आगे की कहानी अगले भाग में……

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    Manoj Divana Namaste Story World

    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • वेलकम कॉलेज

    वेलकम कॉलेज

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    ऑटो तेज रफ्तार में चल रही है ! अजय शील आपस में बाते करते हंस्ते मुश्कुराते आगे बढ़ रहे थे…अब थोरी दुर आगे हमें उतर कर जाना होगा आ गई वो जगह जहां हमें जाना है….बातो हीं बातों में पता हीं नही चला कब सफर पुरा हो गया…बोलकर अजय शीला के आँखों में देखने लगा

    अजय शीला के साथ और वक्त बिताना चाहता था…वो सोच सोच कर परेशान हो रहा था की अब छोर के जाना परेगा..पर क्या करे जाना तो परेगा जब से अजय शीला को देखा था तब से शीला के लिए एक अलग हीं प्रकार के उसके दिल में फिलींगस जाग गई थी ! शीला की खुबशुर्ती उसकी व्यवहार हाजीर जवाबी…उसकी आकर्शन नयन नक्स और तो और शीला का अजय के साथ बात करने का अंदाज अजय के दिल को तार तार कर रहा था….भाई साहब के बुरा हाल तो हो हीं रहा था…भाई साब गाड़ी रोकना….ड्राईवर से बोलकर शीला के तरफ बरे प्यार से देखने लगा….अब मुझे जाना होगा मैं जा रहा हूं आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा रास्ता ईतना जल्दी कट गया पता हीं नही चला…अजय शीला से बोलकर रिक्सा से उतर गया…..बस कुच्छ हीं दुर मैं भी उतरूंगी.मेरा कॉलेज भी आ हीं गई हैं..बोलकर शीला अजय को देखने लगी…अजय ड्राईवर को किराया दिया और साईड हो गया साईड में आकर शीला को वाय कहा….शीला भी अजय को वाय बोलकर हांथ हिलाने लगी…अजय भी हांथ हिला कर शीला को लगातार देखने लगा…..गाड़ी चलदी थी

    अजय वहीं खड़ा रह गया था..लग रहा था जैसे की किसीने उसको स्टेचू बोल दिया हो.और वो मुर्ती बन गया हो ! अजय शीला की गाड़ी को तब तक देखता रहा जब तक वो गाड़ी अजय के आँखो से ओझल नहीं हो गया…..जब गाड़ी अजय के नजर से गायब हुआ तब वो भी अपने मंजील के तरफ चला गया

    उधर गाड़ी कॉलेज के मैन गेट के पास आकर रूकी….लिजीए मैडम आपकी कॉलेज आ गई…..ड्राईवर शीला से गाड़ी रोकते हुए बोला…..जी…शीला बोलकर उतरने लगी और गाड़ी से उतर कर ड्राईवर को पैसे देकर अपने कॉलेज के तरफ आगे चल परी…..

    कॉलेज शहर बीचो बीच काफी दुर तक फैला हुआ है ! कॉलेज के चारो तरफ कंस्ट्रक्संस के मजबुत बॉन्डरी वॉल किया गया था कॉलेज के सभी बिल्डींगस तीन चार मंजीला ईमारत की थी….कॉलेज को बेहतरीन ढंग से सजाया गया था कॉलेज को अपना एक क्रिकेट स्टेडियम भी था गार्डेन पार्क रंग बिरंगी फुलों के पौधो से सजाया गया था…कॉलेज के अन्दर के सड़कों को अलग अलग कलर के टाईलों से डिजाईन किया गया था जो कॉलेज के शोभा में चार चांद लगा रहा था कॉलेज के गार्डेन में फलदार पेड़ भी लगाये गए थे…कॉलेज के सभी बिल्डींगस को बेहतरीन कलर से पेन्ट किया गया था….ग्राऊण्ड में स्ट्रीट लाईट और बील्डींगस के सभी रूम कैमड़े से लैस है…..यह कॉलेज शहर के सबसे टॉप लेवल के कॉलेजों मे से एक है….मैनगेट से ईंटर होके शीला अपने क्लास वाले बिल्डींग की और चलकर जाने लगी…बहुत सारे गर्लस वॉवाईस आ जा रहे थे शीला भी अपने रास्ते चली जा रही थी……वेल्कम यू कॉलेज माय डियर शीला…..एक जानी पहचानी पतली सी आवज शीला के कान में आकर परी ….बिना मुरे हीं शीला बोली वेल्कम माय स्वीट हॉर्ट चान्दनी…कैसी हो दो तीन दिन बाद नजर आई हो क्या बात….शीला चान्दनी से बोली….हैल्लो जान अभी तक तो तेरी नजर मुझपर परी भी नही है….चान्दनी बोलकर हंसने लगी…शीला मुरकर चान्दनी के तरफ देखती है….ओ…हो..जींस टॉप…..मस्त लग रही हो बेवी….शीला चान्दनी को देखकर मुश्कुराते हुए बोली….

    शीला और चान्दनी नम्बर वन फ्रेन्ड हैं…दोनो एक दुसरे के लिए हमेशा तईयार रहते हैं ! दोनो की दोस्ती स्कूल के दिनो से हीं चलती आ रही है ! पढ़ाई में भी दोनो बहुत अच्छे हैं ! किसी भी प्रकार की कोई भी प्रोबलम हो दोनो दोस्त मिलकर एक दुसरे के साथ डटकर सामना करके उस प्रोबलम को समाप्त कर लेते थे ! अईसा नहीं है की ये दोनो सिर्फ आपस में हीं व्यवहारिक थे…..बल्की ये दोनो सभी को अपना अच्छा दोस्त हीं मानते थे….इनके क्लास के हीं नही…बल्की कॉलेज के बहुत अईसे लड़के लड़कियाँ थे जो ईनके क्लास से सीनीयर और जुनियर थे….सभी ईन्हे अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते थे ! पर ये बात अलग थी की…शीला चान्दनी राधा और रूपा….ये चार दोस्त आपस मे सबसे पक्के दोस्त थे ! जब ये चार दोस्तों कि पलटन एक साथ चलती थी ! तो नजारा देखकर सभी के दिल वाग वाग हो जाते थे…..तुम्हारी ड्रेस भी कुच्छ कम नहीं है….तुम भी बहुत सुन्दर लग रही हो मेरी जान…..शीला के कन्धे पर अपनी हांथ रखते हुए चान्दनी बोली…..राधा को फोन करके पूछी नही की वो कॉलेज आ रही है की नहीं….शीला चान्दनी के बाल के चोटी को अपने हांथ से सहलाते हुए बोली……हां की थी मैं फोन उसे बोली थी आऊंगी शायद आ भी गई होगी….उसका घर तो हम दोनो के घर से नजदीक हीं है ! बोलकर चान्दनी शीला के एक हांथ अपने हांथ में लेली….आज तो छोटी महारानी भी आ रही है….सुबह सुबह हीं कॉल करी थी…मेरी निंद भी नही खुली थी उस टाईम….बोल रही थी आ रही हूं मैं आप लोगों से स्पेशली कुच्छ कहना है….मैं बोली बोल ना क्या कहना चाहती हो तो मै खुद सबके सामने कहुंगी फोन पर नहीं….चान्दनी बोली…दोनो सहेली चलते चलते बात कर रहे थे….अच्छा तो होगी कोई बात जो रूपा आकर हीं हम लोगों को बताना चहती हो…कोई बात नही हम मिलेंगे उससे तो पता भी चल हीं जाएगी आखीर बात क्या है…बोलकर शीला चान्दनी को समझाने की कोसीस की…..

    चलते चलते दोनो दोस्त अपने क्लास रूम के पास पहुंच गई थी ! जैसे हीं क्लास में एन्टर होना चहा  वैसे हीं तीन चार छात्रायें क्लास रूम से बहर आ रही होती है….सभी की नजर शीला और चान्दनी पर परती है ! उस में से एक लड़की चान्दनी के पास आकर ….कैसी हो चान्दनी दीदी….आप दोनो बहुत सुन्दर लग रही हो आज….बोलकर दोनो के सामने खड़ी हो जाती है….आई एम फाईन….हम बहुत अच्छे हैं और तुम सब क्लास रूम से बाहर क्यों जा रही हो क्या बात हुई है….चान्दनी उस लड़की को जवाब देते हुये…उस लड़की से शवाल करदी थी ! हां तुम लोग बाहर क्यों जा रही हो….शीला भी सभी को पॉवाईंट करते हुए बोली थी….आज क्लास एक से डेढ़ घण्टे देरी से स्टार्ट होने वाली है…अभी सभी स्टूडैन्ट को प्रींशीपल मैम मीटींग हॉल में पहुंचने को बोली हैं…..वहां सभी स्टूडैन्टस और सभी प्रोफेसरों के बीच मीटींग होने वाली है ! इस लिए सभी छात्र छात्रायें मीटींग हॉल में जा रहे हैं….आप लोग भी चलिए….उस में से एक लड़की बोली…..अच्छा मैं समझ गई क्यों मीटींग बुलाई गई है..और मीटींग में क्या होने वाली है ! बोलकर शीला सभी के तरफ देखने लगी…..तुम क्या समझ गई जरा मुझे भी बताए गी की माजरा क्या है….बोलकर चान्दनी शीला के गाल पर अपने हांथ की चार उंगलीयाँ रखी…..चलो मीटींग हॉल वहीं सबको मालुम चल जाएगी की क्या होने वाला है ! शीला बोली और चान्दनी के हांथ पकर कर खीचीं और आगे चलने लगी…..चलो चलकर हीं देखते हैं की प्रीशीपल मैडम क्या कहती हैं……बोल कर चान्दनी शीला के साथ चल परती है ! साथ में सभी मीटींग हॉल के तरफ चल देते हैं ! 

    मीटींग हॉल में एक स्टेज लगी है…साऊंड का भी ईंतजाम किया गया है ! स्टेज के उपर कई सारी कुर्सीयां लगाई गई है ! स्टेज के सामने नीचे सभी स्टूडैन्टस के बैठने के लिए कुर्सीयां लगाई गई है जो दो साईडों में बांटा गया हैं ! एक तरफ लड़कों के लिए तो दुसरी तरफ लड़कियों के लिए…बीच मे रास्ता छोरा गया है ! लोगों के आने जाने के लिए……पढिए कहानी के  अगले भाग में ……रोमांचक किस्से….

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    Manoj Divana Namaste Story World

    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • टैम्पो स्टैंड

    टैम्पो स्टैंड

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    अजय ऑटो आने का ईंतजार कर रहा होता है ! कुच्छ कुच्छ देर पर अपने जेब से अपना मोबाईल फोन नीकाल कर टाईम देखता रहता है ! पता नहीं क्या हो गया है….आज एक भी ऑटो नजर नहीं आ रही है ! अजय ऑटो के ईंतजार करते हुए बोला …..कुच्छ लोग और टैम्पो का ईंतजार कर रहे होते हैं ! भीड़ भार से थोरा दुर यह गांव का छोटा सा ऑटो स्टैन्ड है ! यहां भीड़ भार कम होती है ! आप जानते हीं हैं…की गांव की सड़क कैसी होती है…यहां कम लोगों के हीं आना जाना होती है ! इस लिए ईस रूट में सवारी गाड़ी कम हीं चला करती है ..अब शहर जितना सुविधा तो नहीं ना मिलती है ! गांव में रहने वाले लोगों को..
    शहर में रहने वालें लोगों को तो हर प्रकार की सविधा उनके घर तक भी…पहुंच जाती है ! क्यों की शहर में अमीर लोग बहुत पैसे वाले लोग रहते हैं……और वे लोग ज्यादा पैसा खर्च करके…अपने दैनिक सुविधाओं को पुरा कर अपने जिवन आसान बनाते हैं ! आधी से ज्यादा सवारी से भरी हुई  ऑटो आकर रूकती है ! 
    अजय भीड़ को देख कर नहीं बैठता है ! दो तीन लोग उसमें बैठ कर चले जाते हैं ! अजय परेशानी से फीर से ऑटो आने का ईंतजार करने लगता है ! तभी एक सवारी से भरी टैम्पो आती है…अजय अपने हांथ हिलाकर ऑटो को रूकने का ईशारा करता है….ऑटो नही रूकता है !
    तभी एक तरफ से शीला कान्धे में पर्श और हांथ में किताब कॉपी लिए आती हुई नजर आती है ! शीला भी आकर खड़ी होती है ! हे भगवान मैं काफी लेट हो गई हूं….बस जल्दी से कोई गाड़ी मिल जाये….यह बोलकर शीला ईधर उधर नजर घुमाके देखने लगती है…..तभी शीला की नजर अजय पर परती है ! जो मायुशी से किसी सवारी गाड़ी आने का ईंतजार कर रहा होता है ! आप…..आप भी कहीं जाने के लिए गाड़ी का ईंतजार कर रहे हैं क्या….शीला ने अजय के पास आते हुये बोलकर अजय के जबाव का ईंतजार करने लगी…हां हां हमे भी मार्केट जाना था….अजय ने शीला को जबाव देते हुए बोला….मैं काफी देर से कीसी ऑटो पकरने के लिए बहुत मस्सकत कर रहा हूं कोई मिल हीं नहीं रही है ! अजय शीला के तरफ देखकर एक बार फीर बोला……शीला कुच्छ बोल पाती उसी समय एक ई-रिक्सा दोनो के पास आकर रूकी..
    कहां जाना है आप लोगों को….ई- रिक्सा वाला सभी सवारियों के तरफ देखते हुए जोर से बोलता है ! मार्केट तक…अजय रिक्से वाले के तरफ मुरते हुए बोला….जब कोई भी गाड़ी नही आ रही थी तब अजय….दुसरे साईड मुरकर खड़ा था…जब रिक्से वाले के कड़क आवाज अजय के कानों में परा तब अचानक मुरते हुए जबाव दिया था ! 
    चलिये आपका ईंतजार खत्म हुआ….अबतो गाड़ी भी आ गई है…शीला अजय के तरफ देखते हुए मुश्कुरा कर बोली…और हाथों चलने के लिए ईसारा करने लगी….हां हां चलिए चलते हैं ! अजय शीला को बरे प्यार से देखते हुए बोला रिक्से के अन्दर बैठने के लिए चल दिया…..चलिए सभी लोग जल्दी जल्दी बैठिए….रिक्से वाला सभी सावारियों के तरफ देखकर जोर से बोलता है….सभी लोग बारी बारी से गाड़ी में आकर बैठ जाते हैं ! अजय शीला आमने सामने बैठते हैं और जब सब लोग गाड़ी में चढ़जाते हैं तो गाड़ी चल देती है !
    दोनो आमने सामने बैठ तो गये थे पर थे दोनो खामोश….कुच्छ भी नाहीं अजय बोल रहा था नाहीं शीला हीं कुच्छ बोल रही थी…..गाड़ी अपने तेज स्पीड मे चल रही थी अन्य सावारी अपने आप में कुच्छ कुच्छ बाते कर रहे थे…तो कोई अपने घर परिवार में फोन लगा कर बाते कर रहे थे की मै ऑटो में बैठ गया हूं…इतने देर में वहां पहुंच जाऊंगा….आदि आदि बातों से ऑटो गुन्जने लगा था….ईधर शीला और अजय एक दुसरे को देख भी नहीं रहे थे…एक की नजर गाड़ी के इस तरफ तो दुसरे की नजर गाड़ी के उस तरफ….हां बीच बीच में गाड़ी में ब्रेक लगने टाईम पर नजर की एक दो बार टक्कर जरूर होती थी….अईसा नही है की अजय शीला एक दुसरे को नही जानते हैं…..दोनो में बात नही होती है…बल्की अभी कुच्छ सेचुयेशन हीं कुच्छ अयशी थी की दोनो एक दुसरे से बात भी नहीं कर पा रहे थे….अजय शोच रहा था की आज ईस लड़की को क्या हो गया कबसे कुच्छ भी बोल भी नही रही है….उधर भी वही हाल था….शीला के मन में भी वही सब चल रही थी की…आज ये लड़का कुच्छ बोल भी नहीं रहा है….बस नजर से नजर मिल जाती थी वो भी गाड़ी में ब्रेक लगने के टाईम पर…गाड़ी रूकती है किसी के आवाज लगाने पर कि गाड़ी रोको ड्राईवर जी हमें उतरना है…
    ड्राईवर गाड़ी रोक देता है साईड में कर कर….एक लेडिस और एक जैन्स गाड़ी से उतर ते हैं ! और ड्राईवर को किराये का पैसा देकर साईड हो जाते हैं…और गाड़ी फीर से चल परती है ! अब जब दो सीट खाली हो गई थी तो….दोनो के मन थोरा नॉर्मल हुआ था…..अब दोनो बाते करने के बारे में सोच रहे थे…पर सुरूआत कौन करे यही फैसला नहीं हो पा रहा था …..एक बार जब अजय का नजर शीला के तरफ गया तो उसने देखा शीला भी उसी के तरफ ध्यान से देख रही है ! जब अजय का नजर शीला के नजर पर परी तो शीला नजर हटाई नहीं….बल्की उसकी मुंह खुल गई…..आपसे कई मुलाकात हो गई है ! पर अभी तक आपका नाम नहीं जान पाई हूं….आप का नाम क्या हुआ…बोलकर शीला अजय को ध्यान से देखने लगी……मैं भी यही सोच रहा था मैने कई बार चाहा की आपसे आपका नाम पूछ लूं पर नहीं पूछ पाया….अजय बोलकर शीला को देखने लगा था ! अब तो मैने हीं पूछ लिया आपसे तो अब आप बता दिजिए…..बोलकर शीला अजय के जबाव का वेट करने लगी …अजय….शीला से बोला…..मै शीला…मेरा नाम शील है !शीला अजय को जबाव देते हए बोली……और अजय को गॉर से देखने लगी…….परिवार में और कौन कौन हैं?अजय शीला से पूछा…..पापा मम्मी एक बहन दो भाई दादा दादी तीन चाचा दो चाची…..और आपके….बोलकर शिला खिल खीला कर हंसने लगी…..पापा मम्मी चाचा चाची दादा दादी एक भाई एक बहन छोटी……..बोलकर अजय शीला को देखकर मुश्कुरा देता है ! शीला अजय का अपनी साईकिल ठिक करने वाली बात को याद करने लगती है !
    अरे आप कहां खो गईं….बोलकर अजय हंस देता है ! शीला भी मुश्कुरा देती है…….नही कुच्छ….थोरी देर रूक कर…..आपकी पढ़ाई….बोलकर शीला अजय के तरफ देखने लगी….पढ़ाई बीच में ही छोरना पर गया चुकी मेरे घर के माली हालत ठिक नहीं थी तो पढ़ाई छोर कर काम करना पर गया…बोलकर अजय शीला को बरे प्यार से देखने लगा था…साईड में होके रिक्सा रूकता है….दो लोग गाड़ी से उतर कर ड्राईवर को पैसे देते हैं….और गाड़ी आगे की ओर चल परती है…..

    आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में……..

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    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹