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श्रेणी: प्रेम कहानी

यहां दिल को छू लेने वाली खूबसूरत कहानियां पढ़ने और लिखने के लिए साझा की जाती है।

  • ग्रुप कॉल

    ग्रुप कॉल

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    सभी अपने अपने दिशा में कमल को ढूंढने  चल पड़े हैं। चांदनी और राधा अलग अलग दिशा में और रूपा वापस शीला के तरफ चल देती है।उदेस्य तीनो चारों सहेलियों का वही एक कमल को पकड़ कर उसके किये की उसे सजा दिलवाना…

    इधर कमल जो छुप कर सभी पर नजर बनाये हुए था। जब उसे लगा सभी लोग उससे दुर जा चुके हैं। तब उसने राहत की सांस लिया और सोचते हुए बाहर निकल गया,की अब वो दुसरे रास्ते से कॉलेज से बाहर निकल जायेगा। और ये सभी लडकियां कॉलेज में उसे ढूंढती हीं रह जायेगी। कमल अपने मन में यही सब बातें सोचते हुए बाहर निकला और सड़क पर चलने लगा। चलते चलते उसने देखा की एक लड़की सड़क के किनारे बैठी, अपनी पैर पकड़े सर झुकाए अपने पैरों के साथ कुछ कर रही थी। वो लड़की शीला थी शीला को दुसरी साईड घूमी होने के कारण कमल उसे पहचान नहीं पाया था। शीला भी अपना सर नीचे कर के अपने पैर में लगी चोट को मालिश कर ठिक करने की कोशिश कर रही थी। उसकी नजर निचे की तरफ झुकी होने के वजह से उसने भी कमल को नहीं देख पायी थी। कमल भी कोई होगी सोचकर उसे आगे निकल गया था ।जैसे हीं कमल कुछ दूर गया था। कि उसके कानों में सर सराती हुई एक तेज तरार आवाज आकर पड़ी।

    ” वहीं रूक जाओ कमल भागने की बिल्कुल भी कोशिश मत कर ना”

    शीला अपने हांथ से घुटनो का सहारा से उठकर खड़ी होती हुई बोली थी।

    कमल एक दम से चौंका गया और उसके कदम रूक गया वो मुड़ कर आश्चर्य से पिछे देखा उसे शीला दिखी जो उसको अपनी बड़ी बड़ी आंखो से उसके तरफ गुस्से से देख रही थी। कमल शीला को नीचे से उपर तक गौड़ से देखता है। उसे ऐहसास हो जाता है की शीला को चोट लगी है। वो अकेली उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकती है।

    ” हां हां नही भाग रहा हूं मैं,आजा ..देखता हूं क्या कर लेती है मेरा “

    कमल जोर से बोला था।

    ” कमीने मैं तेरा खून पी जाऊंगी।”

    शीला चीख कर जोर से कमल के तरफ बढ़ते हुए बोली थी।

    शीला के पैर के चोट के दर्द बढ़ गयी थी। वो चलते हुए लंगरा भी रही थी। यह देखकर कमल का हौसला और बढ़ गया था।

    ” ख़ून पी जायेगी हा हा हा हा हा “

    बोल कर कमल जोर से हंसा

    ” कुत्ते भागकर तुने अपने लिये और ज्यादा प्रोबलम खड़ी कर लिया है।”

     कमल को देखते हुए शीला दांत पीसकर जोर से बोली थी। शीला चलते हुए लंगरा रही थी ।धिरे धिरे शीला लंगड़ाती हुई कमल के सामने पहुंच जाती है। दोनो के बीच में बहस जारी रहती है। दूर से रूपा शीला और कमल को देख लेती है। वो अपने जेब से मोबाईल निकाल ती है। और अपने फोन में कुछ  टाईप करने लगती है। और ग्रुप कॉल लगा देती है। रींग होने लगती है।

    इधर राधा चलते हुए रास्ते के दोनो साईड नजर घुमा घुमा के देखते हुए आगे के तरफ बढ़ती रहती है।तभी राधा के फोन बजने लगती है।राधा अपनी जेब से मोबाईल बाहर निकालती है। राधा फोन के स्क्रीन में देखती है। जिसमें ग्रुप कॉल आ रही होती है। राधा अंसर बटन पर क्लीक कर के मोबाईल कान में सटा लेती है।

    उधर चांदनी भी कॉल उठा लेती है।जब कॉल रिसीव हो जाती है। तब रूपा जल्दी से जोर से बोलती है।

    ” आप लोग सुन रही हो ना दीदी “

    दूसरी तरफ से आवाज आई जो चांदनी की थी।

    ” हां सुन रही हूं। रूपा बोलो…”

     फिर राधा की भी आवाज आई

    ” क्या हुआ रूपा तुम कहां पर हो बोलो..”

    जबाव देते हुए रूपा बोली

    ” शीला दीदी ने कमल को पकड़ लिया है।आप लोग जल्दी से पहुंचिए।”

    ” ठीक है तुम दीदी के पास पहुंचो मैं भी जल्दी हीं आ रही हूं।”

    चांदनी बोलकर फोन कट कर देती है।

    ” रूपा हम लोग दूर हैं। थोड़ी देर लग सकती है। तुम तेजी से दीदी के पास पहुंचो दीदी को चोट लगी है। ध्यान रखना कमल दीदी को कुछ नुकसान ना पहुंचाए।”

    राधा बोलते हुए घबरा रही थी। उसे शीला की चिन्ता हो रही थी।

    ” ठीक है दीदी मैं जा रही हूं। जल्दी से आईए आप लोग “

    रूपा भी बोलकर फोन काट दी थी।

    फोन काट कर रूपा शीला के तरफ बढ़ने लगती है।  शीला हिम्मत से आगे बढ़कर कमल के कॉलर पकर लेती है।

    ” तेरी इतनी हिम्मत की तुम मेरा कॉलर पकड़ेगी।”

    कमल शीला को जोर से झापड़ मारते हुए चीख कर बोला था ‌।

    शीला थप्पड़ खा कर हिल गयी थी। थप्पड़ लगने के कारण शीला का कमल के कॉलर से पकड़ कमजोर हो गई थी।

    कमल शीला के हांथ को अपने कॉलर से हटाया और हांथ को मरोड़ा जिससे शीला पिछे मुड़ गयी थी। हांथ मुड़ने से शीला को दर्द भी हुआ था। कमल शीला का हांथ मरोड़ कर उसके पीठ पर मुक्का से वार किया था। मुक्के की चोट से शीला को दर्द तो हुआ था। पर अगले हीं पल शीला कमल के हांथ से अपना हांथ झटके से छुड़ाई और सम्भल कर कमल के पेट में एक जोर दार मुक्के से अटैक किया,कमल दर्द के मारे पेट पकड़ लिया था। शीला यहीं नहीं रूकी उसने फुर्ती से कमल के टांग पर वार किया। वो लगातार पांच छह लात लगातार कमल के पैर पर मारी थी। कमल दर्द से छट पटा गया था। वह फिर से क्लास रूम वाला सिच्युशन में चला गया था। वो उम्मीद नही किया था कि, एक अकेली शीला उस पर भारी पड़ जायेगी। वो भी चोट खाई हुई। वो पेट पकड़ कर घुटने के बल बैठ गया था। जैसे हीं कमल बैठा था। की शीला की लात ने उसके गाल पर भार दिया। गाल पर लात पड़ने के वजह से कमल बगल के तरफ उलट गया था। अब जब कमल जमीन पर गीर हीं गया था। तो शीला भी कहां चुकने वाली थी। चल पड़ी अपनी लात दर लात की बरसात करने वो भुल गयी थी की, उसकी पैर में चोट भी लगी है । वो लगातार लात से वार करती रही  कमल पर कभी उसकी लात कमल के पेट तो कभी कमर कभी गर्दन पर लगती थी । शीला हर लात के साथ बस यही बोलती थी।

     ” ये ले कमीने,ये ले कुत्ते, ये ले हरामी।”

    शीला अपनी सारी दर्द भुल कर कमल को मारे जा रही थी।

    मार खा खा के कमल के शरीर से होश गायब हो गया था। मतलब वो बेहोश हो गया था। शीला ये जाने बीना कमल को बीना साबुन के ही धुलाई किये जा रही थी। बे खबर शीला कमल को मारे जा रही थी। पढिए अगले भाग में……प्यार एक अहसास कहानी अजय शीला की……..

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    Manoj Divana Namaste Story World

    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • टी प्वाइंट का चक्कर

    टी प्वाइंट का चक्कर

    पढ़ने का समय : 8 मिनट

    ” मिस्टर भाटी कॉम यू ऑन द स्टेज ”

    बोलकर प्रोफेसर दयानन्द, प्रोफेसर विश्वनाथ भाटी का स्वगत किए थे। पहले सभी प्रोफेसर्स को बारी बारी से बोलना था। लास्ट में सभी बच्चों को प्रिंसिपल मैम संबोधन करने वाली थीं।

    प्रोफेसर भाटी अपने जगह से उठकर माइक के पास आते हैं।और बोलते हैं।

    ” जय श्री कृष्ण बच्चो ”

    स्टूडेंटस के भीड़ भी एक साथ बोलते हैं।

    ” जय श्री कृष्ण”

    प्रोफेसर भाटी आगे बोलना स्टार्ट किए थे।

    ” तो मेरे बच्चों,जैसा की आपको बताया गया है।अभी अभी आप सब को प्रोफेसर दयानन्द सर बता रहे थे। की भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन मनाने के बारे में, हमारे कॉलेज ने फैसला लिया है। कि अपने कॉलेज में उस दिन पुजा पाठ भजन सांस्कृतिक कार्यक्रम  और श्री कृष्ण रचित लीलाओं का नाट्य  प्रदर्शन कर दिखाया जाना है। जिसमें आप सब लोग भी सहभागी बनेंगे। आप लोग वह लीला मंचन देख और सुन कर श्री कृष्ण के लीलाओं को आप अपने जिवन में उतारेंगे और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को अपने दोस्तों मित्रों के साथ शेयर करेंगे। इन्ही बातों के साथ हम अपनी  वानी को विराम देते हैं। धन्यवाद बच्चों।”

    इसी के साथ एक बार फिर तालियों के गर गड़गड़ाहट से पुरा मीटिंग हॉल गुंज उठता है। अब फिर से माइक प्रोफेसर दयानन्द जी के हांथ में थे। और वो फिर से बोलना स्टार्ट कर चुके थे।

    ” हां तो बच्चो, अभी आप लोग प्रोफेसर भाटी को सुन रहे थे। मुझे आशा नहीं उम्मीद है कि ,आप सभी उनके बताए बातों पर गौड़ करेंगे।”

    सभी स्टूडेंट्स के तरफ देखते हुए पुछते हैं।

    ” उनके बातों पर गौड़ करेंगे ना बच्चों?”

    सभी स्टूडेंट्स एक साथ बोलते हैं।

    “जी सर।”

    फिर प्रोफ़ेसर दयानन्द बोलते हैं।

    ” अब मैं आप लोगों के बीच, प्रोफेसर शास्त्री आयेंगे और अपनी बात को रखेंगे।”

    एक बार फिर सारा हॉल तालियों से गुंज उठता है। प्रोफेसर शास्त्री जी आते हैं। और अपने हांथ में  माइक लेकर बोलना स्टार्ट कर देते हैं।

    इधर शीला चांदनी राधा और रूपा कमल को लिए मीटिंग हॉल के रास्ते पर चल रहे होते हैं। सभी सहेलियों के चेहरे पर चिन्ता की लकीर साफ झलक रही थी। सभी के मन में खुशी भी थी की अब सब कुछ नोर्मल हो गयी थी। या प्रिंसिपल मैम से मिलने के बाद सब कुछ ठीक हो जाने वाली  थी। कमल के हाल की बात करें तो, उसका हाल बिल्कुल भी ठीक नहीं था। वो तो यही सोच सोच कर घबरा रहा था। की जब उसे प्रिंसिपल मैम के पास लेकर जाया जायेगा, तो फिर क्या होगा उसके साथ। उसको सारा कॉलेज के सामने बदनामी उसके दोस्तों के बीच में बेइज्जती उसके मम्मी पापा के बदनामी की बहुत चिंता होने लगी थी। भाई जब तुम्हे ये सब की चिन्ता थी। तो पहले ना सोचना था, की हम ये सब कर्म ना करें।जिससे हमारी इतनी बदनामी हो। उस टाइम तो बहुत बड़ा हिरो बन रहा था। की मेरे बढ़कर कोई हिरो है हीं नही इस दुनियां में,जब कर्म किया है तो फल भी तो मिलेगा। लेकिन उसके दिमाग में एक खुराफात आइडिया भी आता है। कि इन सब से अपने आप को छुड़ा कर भाग जायें। कहते हैं ना, जब काल सर पे नाचने लगता है।तो बुद्धी का विनाश हो जाता है। यही सब कमल के साथ अभी हो रहा था। शीला और चांदनी कमल को पकड़े हुए चल रहे हैं। की तभी एका एक जोरदार झटके के साथ,कमल दोनो से अपना हांथ झटक कर  छुड़ा लेता है। और जोर से दोनो को धक्का दे कर गिरा देता हैं। और भागने लगता है।

    ” पकड़ो राधा उसे ”

    चांदनी जो कमल के धक्के खा कर सड़क पर गिरी थी। जोर से बोली थी ।

    ” पकड़ो पकड़ो भागने ना पाये।”

    शीला भी नीचे पड़े पड़े हीं बोली थी। रूपा और राधा जो थोड़ा पिछे पिछे चल रही थी। कमल को भागते हुए देखी तो उसे दौड़कर पकड़ना चाहा पर उसे भी कमल झटक कर  भाग गया था। शीला उठकर खड़ी हो गई थी। चांदनी भी उठ गई थी।

    ” चलो दौड़कर पकड़ते हैं। कितना दूर भागेगा।”

    शीला बोली और दौड़ने लगी

    ” चोट लगा है उसे, ज्यादा तेज नहीं भाग सकता है। हम पकड़ लेंगे उसे।”

    चांदनी दौड़ते हुए बोली थी। राधा और रूपा भी कमल को पकड़ने के लिए सरपट दौड़ने लगी थी।

    ” इस बार पकड़ाया तो  छोडूंगी नहीं उसे, बीना हांथ पांव तोड़े।”

    रूपा गुस्से में दांत पीस कर जोर से बोली थी।

    ” यह सब मेरी वजह से हुआ है। हमने ध्यान नहीं दिया उसपर और वो भाग गया।”

    राधा अपने आप को ब्लेम करते हुए रूआंसी आवाज में बोली थी।

    ” तुम्हे खुदको कोसने की कोई जरूरत नही है राधा, इसमें हम सब की गलती है।”

    शीला राधा से बोली थी।

    ” हां दीदी ठीक कह रहीं है। आप अपने आप को दोशी नहीं मानिए।”

    बोल कर रूपा भी राधा को समझाने की कोशिश कर रही थी। बेचारा कमल ज्यादा दूर तक नहीं भाग पाया था। भागते भागते एक बिल्डिंग के पीछे दीवार से सटकर जोर जोर से सांस ले रहा था।कमल अपने पीछे चारो लड़कियों को दौड़ते हुए देख लिया था। यही सोचकर वो सभी लड़कियों के ध्यान डायवर्ट करने के लिए छुप गया था। ये सभी सहेलियां भी कमल का पीछा करते हुए उसके पीछे भाग रही थी। तभी शीला के पैर सड़क किनारे रखे एक पत्थर के टुकड़े से टकरा जाती है। वो गिर जाती है। ये देखकर सभी रूक जाती है। पर शीला उन लोगो को रूकने से मना करती है।

    ” तुम लोग मेरी फ़िक्र मत करो और उसे दौड़ कर पकड़ो, नहीं तो वो भाग जायेगा।”

    शीला अपना दर्द बर्दास्त करने के प्रयास करते हुए कराह कर बोली थी।

    ” नहीं दीदी तुम्हें चोट लगी है। और ऐसे मे…”

    चांदनी अभी अपनी  बात पूरी कर पाती इससे पहले हीं चांदनी के बात को बीच मे से हीं काटते हुए शीला बोली।

    ” नही मेरी छोड़ो तुम लोग और उसे पकड़ो तुम लोग नही तो वो भाग जायेगा।”

    ” दीदी आपको तो…”

    राधा भी अपनी बात पूरी नहीं कर पायी थी। कि शीला की चीखती हुई आवाज सभी के कानों में पड़ती है।

    ” उसे पकड़ना जरूरी है। मेरी चोट को नहीं।”

    तीनो सहेली समझ चुकी थी। की उसे क्या करना है। और वो सभी चल पड़े थे वे करने। समय भी देखिए ना कैसा खेल खेलता है ।शीला को चोट वहीं जाकर लगी थी। जिस बिल्डिंग के पीछे कमल छीपा था। वो बात अलग थी की वो अकेली थी। और चोटिल भी हो गयी थी। चांदनी राधा और रूपा दुबारा से दौड़ने लगी थी ! कमल इन लोगों को दौड़ते हुए आगे जाते हुए देख रहा था। वो सोच रहा था कि ये लोग दूर चले जायेंगे। तो हम निकल कर दुसरे रास्ते से कॉलेज से बाहर भाग जायेंगे। कहते हैं ना जो होता है अच्छे के लिए होता है। शीला वहीं थी जहां कमल छुपा हुआ था ।

    इधर चांदनी रूपा राधा भागते भागते दूर निकल गयी थी। और एक जगह पर जाकर तीनो सहेलियां रूक गयी थी। हुआ ये था की दौड़ते दौड़ते उन लोगों को एक टी प्वाइंट मिल गया था। वहां पर तीन रास्ता जा रहा था। एक रास्ते से तो वो तीनो आई हीं थी। और एक रास्ता इधर जा रहा था । तो दूसरा रास्ता उधर इसी लिए तीनो वही रूक गयी थी। की वो कौन रास्ते में जाये पता नहीं कमल कौन से रास्ते से भागा होगा और वो कौन रास्ता पकड़े यही कंफ्यूजन में तीनो सहेलियां वहीं रूक गयी थी।

    ” अब किधर जायें दीदी ?”

    राधा कंफ्यूज होते हुए चांदनी से पूछी थी।

    ” यहां पर कोई है भी नहीं, जिससे पूछ सकें की क्या कमल को देखा है।”

    रूपा भी चांदनी से बोली थी।

    ” कोई दिमाग लगाना पड़ेगा।”

    चांदनी दोनो के आंखों में झांकते हुए बोली थी।

    ” पर कैसे”

    थोड़ी देर सोचने के बाद चांदनी बोली थी कि।

    ”  हम कमल को अलग अलग ढूंढेंगे।  राधा तुम उस साइड जाओगी मैं इस तरफ जाती हूं। और रूपा तुम दीदी के पास जाओगी उन्हे चोट लगी हैं। तुम उनका ख्याल रखोगी।”

    ” पर दीदी आप लोग अकेले कैसे कमल को पकड़ोगी कही वो आप लोगों को?”

    रूपा बोलते बोलते रूक गयी थी।

    राधा बोली

    ” एक आइडिया है दीदी।”

    ” क्या आईडिया है। जल्दी बोलो।”

    राधा के तरफ देखते हुए चांदनी बोली थी। सही टाइम पर दिमाग भी सही चलता है सही लोगों का।

    ” हमलोग मोबाइल मे ग्रुप बना लेते है। सभी चारो सहेलियों को ग्रुप कॉल करना है। जिसे भी कमल दिखेगा वो कॉल करेगी और बतायेगी फिर हम लोग जल्दी से वहां पहुंच जायेंगे।”

    राधा अपनी पूरी प्लानिंग बताई थी।

    ” पर शीला दीदी को तो पता हीं नही है। ये बात तो वो कैसे कर पायेंगी कॉल।”

    रूपा बोली और दोनो को आशचर्य से देखने लगी थी।

    ” दीदी के पास तुम जा रही हो, तो तुम करोगी कॉल अगर तुन्हें कमल दिखा तो।”

    ” राधा तुम ग्रुप बनाओ जल्दी से टाइम नही है।”

    चांदनी दोनो को ऑर्डर देते हुए बोली थी। कुछ हीं देर में राधा मोबाइल में टाइप करके ग्रुप बना लेती है।

    ” बन गया दीदी ग्रुप।”

    .राधा चांदनी से बोली थी।

    ” ठीक है ओके तो तुम जाओ उधर।”

    चांदनी राधा को हांथ से एक तरफ इशारा करते हुए बोली थी। और बात आगे बढाते हुए फिर बोली

    ” मैं इधर जा रही हूं। और रूपा तुम दीदी के पास जाओ जल्दी से।”

    राधा और चांदनी एक साथ बोली थी।

    ” ठीक है दीदी मैं जा रही हूं।”

    रूपा बोलती है।और सभी अपने अपने रास्ते चल दिए थे।

    पढिए आगे कि कहानी अगले भाग में……प्यार एक अहसास…..

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  • विडियो सबूत

    विडियो सबूत

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    एक फैसला जिसमें सबकी सहमति होती है। जानेंगे इस भाग में उस फैसले की रहस्य चलिए चलें कहानी की ओर…
    ” अब इसके साथ बहस करने का कोई फायदा नहीं है दीदी, अब इसको प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलना चाहिए।”
    राधा सख्त होते हुए कठोर आवाज में बोली थी।
    ” हां इसे अब प्रिंसिपल मैम के पास हीं लेकर चलते हैं। अब वही इसके साथ जो भी करना होगा करेंगे।”
    शीला भी राधा के बात से सहमत होते हुए बोली थी। चार सहेलियों में दो के स्वभाव कड़क, तो दो के सरल व सॉफ्ट जैसा की हम लोगों ने देखा की कैसे रूपा और चांदनी बात बात पे हमेशा एक्शन व अटैक मोड में रहती थी। तो वहीं शीला और राधा का सॉफ्ट व नॉर्मल बिहेवियर रही है। रूपा और चांदनी को अगर फ्री छोड़ दिया जाए, तो वो दोनो कमल के हलक से जान निकाल ले।
    ” इसे ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं दीदी, इसने हमलोगों को बहुत हर्ट किया है दीदी।”
    रूपा के पैर रह रह कर फड़फड़ा जाती थी। जिसको रूपा कमल के पीठ और उसके कंधे पर अपनी लात मार कर शांत कर लेती थी।रूपा कमल के रीढ़ के हड्डियों पर अपनी लात की चोट जमाते हुए बोली थी।
    ” हां दीदी, रूपा ठिक कह रही है। इसे हम ऐसे हीं नहीं छोड़ सकते हैं। इसको एक ऐसी सजा दे देते हैं। कि जिसे ये ज़िन्दगी भर याद रखेगा, हमेशा दिमाग में रहेगा की किसी लड़की से पाला पड़ा था। और ये अपने जिवन में कभी भी किसी भी लड़की के तरफ अपनी आंख उठा कर नही देखेगा। और अपनी गंदी नजर किसी लड़की पर डालने से पहले हजार बार सोचेगा।”
    चांदनी अपनी लहजा सख्त रखते हुए सभी को देखकर बोली थी।
    ” मैं तो कहती हूं। इसके हांथ पैर तोड़ देते हैं।”
    रूपा गुस्से में आकर जोर से बोली थी। और कमल को लात मारकर गिरा दी थी। कमल जब हांथ पैर टूटने का बात सुना, तो उसका रूह कांप गया। वो अपने मन में बिना हांथ और बिना पैर के उसके जीवन कैसा होगा इमेजिन करने लगा था। की वो बिना पैर के चल फीर कैसे सकेगा, और बिना हांथ के खाना कैसे खा सकेगा या फीर कोई भी काम कैसे कर सकेगा। यही सब सोच कर उसका मन विचलीत हो रहा था। वो चाह रहा था की जल्द से जल्द यह मेटर उसके जिंदगी से खत्म हो जाए। सबने अपने तरफ से अपनी अपनी बात रख दी थी। अब सबकी नजर शीला पर हीं जा कर रूक गयी थी। क्योंकी फैसला उसे हीं करनी थी। सभी दोस्तों में सबसे बड़ी भी वही थी, और राधा चांदनी रूपा तीनो भी शीला के कोई भी बात या उसके लिए कोई भी फैसले को ना हीं कोई भी मना कर ती थी। और ना हीं कोई भी चुनौती देती थी।शीला जो भी स्टेन्ड लेगी उसे सभी को माननी पड़ेगी। ऐसा नही है की शीला की बात मानना इन सब की मजबूरी थी। बल्की ये सभी के दिल में शीला के लिये इज्जत और सम्मान थे। और विस्वास थे, की हमारी दीदी हमारे लिए कभी कुछ गलत नहीं करेंगे,या कुछ गलत होने देंगे। कोई भी रिश्ता एक दुसरे के इज्जत सम्मान देने विस्वास करने और एक दुसरे के फैसले में साथ देने से हीं रिश्ता सही और सुचारू रूप से चलती है।
    ” अब क्या किया जाए।”
    चांदनी अपनी बात पुरी भी नहीं की थी। की बीच में हीं चांदनी की बात काटते हुए कमल बोला
    ” मुझे माफ करदो।”
    और बोलते हुए चांदनी के पैर पर गीर कर नाक रगड़ने लगा था। जोर जोर से रोने लगा था। कमल के आंखों से आंसू के धार भी बहने लगा था।
    ” ठीक है तो, इसे लेकर प्रिंसिपल मैम के पास चलते हैं।
    शीला सभी के तरफ देखकर बोली थी।
    ” ठीक है दीदी, चलते हैं।”
    एक साथ तीनो सहेली बोलती है। और रूपा कमल को बाल पकर कर घसीटते हुए ले जाने की कोशिश करती है। बल्कि कुछ दूर घसीट भी देती है।
    पर चांदनी और शीला उसे ऐसा नहीं करने के लिए इशारे से रोकती है। और दोनो कमल के एक एक बांह पकर कर खड़ा होने में कमल का मदद करती है। और दोनो साइड से दोनो लड़की उसके दोनो बांह पकड़े हुए आगे बढ़ जाती है। उसके पिछे पिछे राधा और रूपा भी चल पड़ती है। शीला की पलटन मीटिंग हॉल के तरफ चल पड़ी थी। शीला को फैसला लेनी थी वह फैसला वो ले चुकी थी। उसके फैसले में उसके तीनो सहेलियों का भी समर्थन मिल चुकी थी।क्लास रूम से सभी बाहर जा चुके थे।
    मीटिंग हॉल
    मीटिंग हॉल में चहल पहल तेज हो गए थे ! सभी स्टूडेंट्स और सभी टीचर्स भी अपने अपने जगह लेकर बैठ चुके थे। प्रिंसिपल मैम भी स्टेज पर आ चुकी थी। मीटिंग की कार्यवाही भी सुरू हो गयी थी।
    उस में से एक टीचर मंच संचालन कर रहे थे। जिनका नाम था। प्रोफेसर दया नन्द। वे बारी बारी से प्रोफेसरों को माइक से आमंत्रीत कर रहे थे। और जिस प्रोफेसर के नाम वो माइक से अनाउंस करते थे। वो आकर अपना वक्तव्य देते थे।
    ” तो बच्चों, जैसा की आपको बताया गया है। की इस   बार होने वाले भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव हमारे अपने कॉलेज में धूम धाम से मनाया जाएगा। जिसमे तैयारी हम सभी टीचर्स के साथ साथ आप सभी स्टूडेंट्स को भी करनी है।”
    प्रोफेसर दयानन्द मंच से माइक पर बोल रहे थे। यह बात सुनकर नीचे स्टूडेंट के बीच भी काना फूसी स्टार्ट हो गयी थी।
    ” ये क्या बात हुई, इतनी सी बात बताने के लिए इतना बड़ा अरेंजमेंट किया गया है। ये बात तो सभी के क्लास रूम में भी तो बता सकते थे।”
    नीचे बैठे स्टूडेंट में से एक स्टूडेंट बोला था।
    ” हां, इसमें नई बात कौनसी है। कृष्ण जी का तो जन्मोत्सव तो हर साल मनाया जाता है। हमारे कॉलेज में नया क्या बोल दिया इन्होने।”
    एक दुसरे स्टूडेंट ने पहले स्टूडेंट के तरफ देखकर जवाब देते हुए बोला था।
    ” नया बस यही है की, कॉलेज में ईस बार मनाया जायेगा। सुना नही तुमने।”
    पहले स्टूडेंट बोलकर दूसरे स्टूडेंट को देख कर हंसने लगा था। साथ में और भी स्टूडेंट्स भी हंसने लगे थे।
    ” इस बार क्या, हर बार तो मनाया गया है। हमारे कॉलेज में कृष्ण जन्मोत्सव।”
    एक लड़की सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
    ” लेकिन दयानन्द सर ने इस बार बोले हैं। इसका क्या मतलब हो सकता है?”
    एक और लड़की बोल पड़ी थी। सभी लोग तरह तरह के बाते कर रहे थे। इसी बीच मंच से माइक पर अनाउंस होता है।
    ” अब मैं प्रोफेसर भाटी से आग्रह करूंगा। की वो माइक पर आयेंगे और भगवान श्री कृष्ण के जिवन लीला के बारे में हम लोगों को बतायेंगे और मानव जिवन में श्री कृष्ण के उपदेश की क्या भुमिका है।आयेंगे और हमें समझायेंगे। मिस्टर भाटी कॉम ऑन ऑफ द स्टेज। बच्चो जोरदार तालियों से सर का स्वागत करेंगे।”
    प्रोफेसर दयानन्द माइक हांथ मे लिए बोल रहे होते हैं।
    आगे की कहानी पढ़िए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

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    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • सवाल का जबाव जिसका इंतजार सभी को है।

    सवाल का जबाव जिसका इंतजार सभी को है।

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    कहानी के इस भाग में एक रहस्य से पर्दा उठता है। जिसका इंतजार लगभग सभी को रहता है। चलिए कहानी की ओर चलें…
    ” अब रोने की बारी उनकी है। जिसने तुम्हें रूलाने की कोशिश की है । अब तुम्हें रोने की कोई जरूरत नहीं है। “
    शीला बोलती हुई,राधा को ढांढस बंधा रही थी। शीला और चांदनी दोनो मिलकर  राधा और रूपा को रस्सी के बंधन से आजाद कर चुकी थी । चारो सहेलियां एक दुसरे से आपस में लिपट कर रोने लगी थी। अब इन सभी के जिन्दगी में जो दु:ख के बादल छाये थे वो अब छट चुके थे। इन सबके जिवन में तुफान लाने वाला सख्श धराशाई होकर बेसुध फर्श पर परा था।
    “अब जब सब कुछ ठीक हो गया है तो, हमें यहां से चलना चाहिए।”
    बोलकर चांदनी बारी बारी से तीनो के तरफ देखती है।
    ” हां हमें चलना चाहिए इससे पहले की कोई और प्रोबलम खड़ा हो हमें यहां से निकल जाना चाहिए।”
    शीला भी अपने आप को शांत करते हुए आंख से आंसू के बुंद को साफ करते हुए बोली थी ।
    ” हां दीदी जायेंगे पर इसे ऐसे छोड़कर नहीं इसको इसके किए की सजा देने के बाद।”
    रूपा कठोर होते हुए बोली थी। राधा को बहुत बरा सदमा लगा था। वो अभी भी बहुत डरी हुई थी। उसे अभी भी यकिन नही हो रहा था की सब कुछ नॉर्मल हो गया है। और वो मन ही मन अपने आप को कोस भी रही थी। की ये जो कुछ भी हुआ है, सब उसी के वजह से हुआ है। और वो उसी के वजह से आज रूपा और चांदनी शीला के जान का भी खतरा हो सकता था।
    ” क्या इसको ऐसे हीं छोड़ दोगे दीदी आप लोग?”
    शीला और चांदनी के तरफ देखकर कमल के तरफ अपनी उंगली से इशारा करते हुए राधा बोली थी। और एक बार फीर राधा के आंख से आंसू बहने लगे थे।
    ” नहीं दीदी, हम लोग इस कमीने को छोड़ेंगे नहीं। बल्कि पुलिस में देंगे।”
    रूपा राधा के आंख से आंसू पोंछते हुए बोली थी। रूपा की बात सुनकर सभी रूपा को आशचर्य से देखने लगे थे। तीनो के मन में एक साथ एक बात चली थी। की रूपा कितनी समझदार है, वो कितनी समझदारी की बात कर रही है। पर राधा रूपा को समझदार के साथ साथ बहुत हिम्मत वाली भी मानने लगी थी। आज जिस तरह से रूपा कमल के साथ डटकर मुकाबला की थी। उसको कमल से मार भी खानी परी थी। पर वो जिस तरह से अपना हिम्मत नहीं हारी थी। रूपा की यही सब गुण राधा के नजर में रूपा को महान बना रही थी।
    अभी उधर ये सब चारो सहेलियों में चल हीं रहा था। कि इधर धीरे धीरे  कमल के हांथ पैर हिलने लग गया था। उसको होस आने लगा था। कमल का आंख धीरे धीरे खुलता है। कमल का हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं था। उसके बदन में अभी भी बहुत अ सहनीय दर्द हो रहा था। उसके मुंह से बहुत सारा खून भी बह गया था। ज्यादा खून बह जाने के कारण हीं कमल को होश नहीं आ पाया था। जब कमल का आंख खुलता है। तो वो नजर घुमाकर सभी लड़कियों के तरफ देखता है। वो कुछ बोलना चाहता है, पर वो कुछ भी बोल नहीं पाता हैं। उसके शरीर के अंदर इतनी भी शक्ती नहीं बच पाई थी। की वो कुछ बोल भी पाये। यही सब सोचकर कमल अपने आप को बहुत लाचार और कमजोर महसूस कर रहा था।
    ” इसको मीटिंग हॉल में लेकर चलते हैं। वहां ले जा कर प्रिंसिपल मैम के हवाले कर देते हैं। अब वही  इसके साथ जो करना होगा करेंगे।”
    शीला अपनी समझदारी से सभी के तरफ देखते हुए बोली थी।
    ” दीदी पुलिस को कॉल करके बुला लेते हैं ना, इसको पुलिस के हवाले कर देंगे।”
    बोल कर रूपा शीला को प्रश्नवाचक मुद्रा में देखने लगी थी।
    ” नही इसको प्रिंसिपल मैम के पास लेकर चलते हैं।”
    शीला रूपा को जबाव देते हुए बोली थी।
    ” नहीं दीदी इस भेड़िये को खुला छोड़ना ठीक नहीं होगा।”
    रूपा शीला से बोली थी। कमल को होश में आने के बाद उसके दिमाग में एक हीं बात राऊंड मारते हुए चल रहा था। की ये दोनो क्लास रूम में कैसे आया था। और आकर उसका बना बनाया सारा खेल बिगाड़ दिया था। कमल का बात सही भी था। अगर उस टाइम शीला और चांदनी आ कर, कमल पर अटैक नहीं किया होता तो अभी सारा सिचुएशन उसके अंडर में होता। और शीला और चांदनी से उसको इतना मार नहीं पड़ा होता तो वो,अभी फर्श पर नहीं पड़ा होता।
    ” तुम दोनो अंदर कैसे आए?”
    कमल दर्द से कराहते हुए हिम्मत करते हुए शीला और चांदनी से अपनी बात पुछ हीं लिया था। ये आवाज चारो सहेलियों के कान में जैसे ही गई सभी आशचर्य से उस आती हुई आवाज के तरफ मुड़कर देखी। सभी सहेलियों के चेहरे के हाव भाव एक दम से बदल गये थे। सभी एक्शन मोड में आ गयी थी। सभी एक साथ एक बार फिर से कमल पर अटैक करने चल पड़ी थी। यह सीन देखकर कमल के होश उड़ गये थे। डर के मारे उसके पसीने छुटने लगे थे। वो सोचने लगा अब उसके शरीर में और मार बर्दास्त करने की छमता नहीं है। अब अगर और मार पड़ा तो वो जिन्दा बच नहीं पायेगा। इसी लिए अब वो दिमाग से काम लेना चाहा। कमल हिम्मत करके उठकर बैठ गया था।
    ” तो तुम्हें जानना है। की हम क्लास रूम के अंदर कैसे आए?”
    चांदनी कमल पर चीखते हुए जोर से बोली थी।
    ” हां इसे बता हीं देते हैं। की हम दोनो क्लास रूम के अंदर कैसे आए।”
    शीला चांदनी के तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली थी। हालाकी राधा और रूपा भी कमल के इस सवाल का जबाव जानना चाहती थी। वो दोनो भी अपनी दीदी के तरफ देखने लगी थी। सभी चलकर कमल के पास पहूंच गये थे। रूपा का लात कमल के पीठ पर पड़ता है। जो कमल अभी अभी उठकर बैठा हीं था। एक भारी चीख कमल के मुंह से निकल जाता है।
    ” पहले इसको इसके सवाल का जबाव सुनने दो बहन, फिर उसके बाद तुम इस पर अपना बॉक्सिंग का प्रेक्टिस कर लेना।”
    शीला रूपा को रोकते हुए बोली थी। सुनकर रूपा रूक जाती है।
    “इसमें तुम्हारी हीं बेवकूफी है भेड़िए।”
    चांदनी गुस्से से दांत पीस कर कमल के तरफ मुड़कर बोली थी।
    ” मैं चाहती तो, तुम्हें वहीं सबक सीखा सकती थी। जब तुम्हें रस्सी और डंडा लिये क्लास रूम के तरफ आते हुए देखी थी। और छुपकर तुम्हारा पीछा करने लगी थी।”
    बीना रूके शीला बोलते रही।
    ” .मैं जानना चाहती थी। की आखिर बात क्या है। तुम रस्सी और डंडे लेकर क्या करने वाले हो। और सोने पे सुहागा तो तब हुआ, जब तुम्हारा दोनो हांथ खाली नहीं होने के वजह से तुमने दरवाजा लॉक नहीं किया। इसी बात का फायदा हमने उठायी और दोनो भीतर आके दरवाजे बंद कर ली थी। ताकी तुम्हें भी बचकर भागने नहीं दूं।”
    चांदनी ने कमल को पुरी बात बतायी थी ।
    ” दीदी जब आप पहले हीं आ गईं थी तो, आपने हमें पहले हीं क्यों नहीं बचाई थी। आप अपनी आंखों के सामने हमें रस्सी से बंधते और पिटते हुए देखी थी।”
    रूपा बोलकर शीला और चांदनी के तरफ सवालिया नजर से देखने लगी थी।
    ” इसका मतलब, दीदी मैं आपके आंखों के सामने बेहोश हुई थी।”
    राधा भी शीला और चांदनी से सवाल की थी। इस पर शीला और चांदनी कुछ भी नहीं बोलती है। बस दोनो अपना शर हां में हिला देती है।
    ये सुनकर कमल के पैर के नीचे से जमीन खिसक गयी थी। उसमे अब हिम्मत भी नहीं थी। की वो उन सब से फाइट कर सके तो उसने अपनी जान बचाने का एक तरीका निकाला जो एक हारा हुआ हर इंसान लगभग यही करता है। और कमल ने भी वही किया था। वो झुक कर शीला के पैर पकर लिया था।
    ” मुझे माफ कर दो,मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गयी है। प्लीज मुझे माफ कर दो और मुझे जाने दो।”
    कमल शीला के पैरों में गिरकर नाक रगड़ते हुए बोला था।
    ” कमीने सुअर की औलाद, तुम्हें माफ कर दूं। निकल गयी सारी हेकड़ी, अब रेप नहीं करेगा मेरी दीदी का हां।”
    रूपा गुस्से में अपनी आंखे लाल करते हुए कमल से बोली थी । और धमा धम दो लात उसको रसीद करदी थी। कमल रूपा के पैर की चोट खा कर पुरी तरह से हिल गया था। अब उसको समझ आने लगा था। की उसकी ग़लती छोटी नहीं है।
    ” अब पछतावा आ रहा है। अपने किये पर पहले ये क्यों नहीं सोचा अपना अंजाम ये सब करने से पहले।”
    चांदनी जो राधा के कंधे में अपनी बांह डाली हुई थी। कमल से  बोली थी।
    “माफी तो तुम्हें मिलने से रही, पर तुम्हे जेल जरूर मिलेगी।”
    रूपा कमल को बाल से खींचते हुए बोली थी।
    ” अब इसके साथ बहस करने से, कोई फायदा नही है दीदी।”
    कहानी और भी मजेदार होने वाली है ! पढिए अगले भाग में….प्यार एक अहसास

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    Manoj Divana Namaste Story World

    नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

  • टूटा घमंड

    टूटा घमंड

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    कमल राधा को भी बांध दिया था। उसके बाद जो कुछ भी हुआ था।ये बात तो आप लोग जानते हीं हैं की कैसे तीनो के बीच की बहस और लड़ाई इतनी बढ़ गई थी। जो कमल राधा को रेप करने तक की बात भी बोल दिया था। रेप की बात सुनकर राधा और रूपा बहुत घबरा गई थी। दोनो लड़की पसीने से पानी पानी हो गयी थी।
    रेप एक ऐसा शब्द है। जो ये  शब्द  जीस कसी के नाम के साथ जुड़ जाती है। तो उसकी जिंदगी, जीते जी नरक बन जाती है। ये समाज बालात्कार को समाजिक और कानूनी एक बहुत हीं जघन्य अपराध के श्रेणी में रखा है। इस अपराध को करने वाले के खीलाफ बहुत सख्त कानून बनाया गया है। और इसमें सख्त से सख्त सजा देने का प्रवधान भी किया गया है। इसके अंदर सजा आजीवन जेल में रहने से लेकर फांसी की सजा तक भी दी जा सकती है।
    आइए हमलोग अपनी कहानी के ओर बढ़ते हैं।
    कमल का हौसला अब ज्यादा बढ़ गया था। वो दोनो लड़की पर कंट्रोल जो कर लिया था। राधा और रूपा अपने उपर से रस्सियों के बंधन से छुटने के लिये हांथ पैर तो नही मार सकती थी। क्योंकी बंधे हुए थे। बस अपनी ताकत लगाकर कसमसाने से ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही थी।
    ” देख तेरी ना करने की जिद्द ने तुम्हें कहां लाकर खड़ी कर दी है।तुम्हे शायद मालुम नही, मुझे ना सुनने की बिल्कुल भी आदत नहीं है। जब मैं अपनी मम्मी पापा के ना कहे को बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं। तो तुम्हारा कैसे करूंगा?”
    ” कमल राधा के तरफ देखते हुए बोला था। राधा सिर्फ लाचारी से कमल को देखती रहती है। कमल के बात में सच्चाई थी। वो एक अमीर बाप का बेटा था। उसके मॉम डैड उसे बहुत प्यार करते थे ! वे उसके हर जायज नजायज जिद्द को पुरा कर रहे थे। कोई भी चीज का मांग अगर कमल करता था। तो वो उसे लाकर हर हाल में देते थे । कमल के मॉम डैड कमल के पालन पोसन में किसी भी प्रकार के कोई कमी नहीं होने दिये थे। इसी लार प्यार का नतीजा है। की आज उनका बेटा एक रेपिस्ट बनने जा रहा था।
    ” तुम अपनी सोच कमीने, यहां से तुम बचकर नही जाएगा जिन्दा।”
    रूपा कमल पर चिल्ला कर जोर से बोली थी ।
    ” तू इसी तरह फरफराती रह, तुम लोग कुछ नहीं बिगाड़ सकती हो मेरा। कुछ भी नहीं करोगी तुम लोग। “
    कमल रूपा से बोला और राधा के तरफ बढ़ा और उसकी गले में बांह डालकर अपने दुसरे हांथ से उसके गाल गर्दन को टच करते हुए हांथ नीचे के तरफ बढ़ा दिया था। ये देखकर रूपा को बहुत गुस्सा आ रही थी। वो कमल को कच्चा चबा जाना चाहती थी।
    रूपा सोच रही थी। अगर अभी वो बंधी नहीं होती, और उसके हांथ पांव खुले होते तो वो कमल को अच्छा खासा सबक सीखा सकती थी। बंधे होने से वो अपने आपको बहुत हीं लाचार और मजबूर फील कर रही थी। वो यहां से निकलने का मन में तड़किव सोच रही थी। रूपा को आभास हो गयी थी। की रूपा राधा कमल के अलावा भी कोई क्लास रूम में मौजुद है। मगर कौन,वो सोची कही कमल और लोगों को तो नहीं बुला रखा है। हम दोनो से अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए। वो क्लास रूम के चारो तरफ अपनी नजर घुमाके देखने लगी थी। रूपा फिर सोची अगर कमल किसी को बुलाया होता तो वो हम लोगों के सामने लाता हमसे बदला लेने के लिए। फीर मन हीं मन बोली, नही नही शायद यह हमारा वहम है।अगर कमल किसी को बुलाया हुआ होता तो वो उसे छुपने को थोड़ी बोलता।
    रूपा राधा के सामने थी। पर कुछ दूरी थी, और बीच में कमल था। अगर रूपा राधा को कुछ भी बताती की उसने क्या महसूस किया है।तो उस बात को कमल भी सुन सकता था। इस लिए रूपा कुछ नहीं बोली। और सोची कोई तो है पर कौन? रूपा अभी ये सब सोच हीं रही थी कि तभी कमल राधा को कस कर पकड़ कर अपने सीने से चिपका लेता है। और अपना चेहरा राधा के चेहरे के सामने ले जा कर राधा को चूमना चाहता है। कमल का मुंह राधा के मुंह से सटने हीं वाला था। की तभी एक साथ दो मुक्का कमल के दोनो जबड़े  पर आकर पड़ा। हमला अचानक हुआ था। मुक्के के थ्रो इतना जबरदस्त था। की कमल के बत्तीसी हिल गया था। उसके मुंह से खून बहने लगा था। वो समझ नहीं पा रहा था की उस पर हमला कौन किया था। जब की वो क्लास रूम के दरवाजे को लॉक कर के रखा था। तो बाहर से कोई कैसे आ सकता था। सवाल हीं नही पैदा हो सकता है की कोई बाहर से आ जाए, क्लास रूम के अन्दर।
    उसे अच्छे से याद था। कि जब वो दुबारा वापस क्लास रूम में आया था। तो दरवाजे को अच्छे से लॉक किया था। फीर ये कौन अंदर आगया था और कैसे? यही सवाल लिए कमल उपर की तरफ देखता है। देखकर कमल भौचक्का रह गया था। ये कैसे हो सकता है। ये दोनो अन्दर कैसे आ सकती हैं। दर्द तो बहुत हो रहा था कमल को पर इन सवालों के जबाव जानने के लिए। धीमी और रूआंसी आवाज में बोलता है।
    तुम, तुम यहां कैसे आई?”
    अब आप समझ हीं गये होंगे की वहां कौन आ गयी थी। कमल ये बोला हीं था की आठ दस लात सात आठ मुक्का कमल को और रसीद हो गया था। कमल दर्द से चीख उठा था। चांदनी और शीला कुछ भी बोल नही रही थी। बस उनके हांथ और पांव चल रहे थे।कमल को लग रहा था। कि जैसे अब उसके शरीर से जान नीकल हीं जायेगा। दोनो फाइटर बिल्कुल भी नहीं रूक रहे थे। ताबड़तोड़ लात और मुक्का बरसा रहे थे। मार मार के दोनो सहेली कमल का कचूमर बाहर कर दिया था। जब मार खा खा कर कमल बेहोशी से फर्श पर बेसुध हो गया था। तब दोनो दोस्त अपनी फाइट को विराम दी थी।
    ” तुम दोनो को डरने की कोई जरूरत नहीं है। हम आ गये हैं।
    चांदनी अपने दोनो हाथों को मोड़कर अपने सीने से चिपका कर बोली थी।
    ” हां तुम लोग डरो मत, तुम्हारी दीदी तुम लोगों को कुछ नही होने देगी।”
    शीला भी राधा और रूपा को देख कर बोली थी।
    थैंक्यू दीदी, जो आप लोग यहां आ गयी ।
    राधा को बोलते हुए आंसू बहने लगे थे।
    ” देखो, तुम्हे रोने की कोई जरूरत नही है। “
    चांदनी राधा के पास जाकर उसके आंख से आंसू पोछने लगती है।
    ” हां बहन, अब रोने की बारी उनकी है। जिन्होने तुम्हारे आंखों में आंसू दिए हैं। चुप हो जाओ राधा। “
    शीला बोलते हुए राधा के कंधे पर हाथ फेर रही थी। और शीला और चांदनी दोनो के बंधे रस्सी को खोलने लगती है।
    आगे कि कहानी पढिए अगले भाग में….

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  • मुश्किल में जान

    मुश्किल में जान

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    ” जा चला जा अब क्यों पिटाई खा रहा है।”
    राधा कमल को बहर के  रास्ते के तरफ इशारा करते हुए बोली थी।
    ” अब ये नहीं जाएगा दीदी, इसको ऐसे जाने नहीं दुंगी ।”
    रूपा बात को आगे बढाते हुए फिर बोलती है।
    ” इसको ऐसा सबक सिखाऊंगी, की ये ज़िन्दगी भर नहीं भूलेगा।”
    बोलकर रूपा फिर कमल के उपर अटैक करना चाहती है। पर राधा का इसारा पा कर रूक जाती है।
    कमल जो दोनो की बात सुन रहा था । वो एक दम से पिछे मुड़ता है, और गेट के तरफ बढ़ जाता है। दरवाजा खोलकर बाहर निकल जाता है। पर दरवाजे को बाहर से बंद कर देता है ! और आगे बढ़ जाता है। आपको क्या लगता है। की कमल चला गया? क्या वो फीर वापस आयेगा? चलिए कहानी के तरफ चलते हैं, और जनने की कोशिश करते हैं।
    राधा और रूपा एक दुसरे को आशचर्य से देखने लगती है।
    ” चलो बाहर चलते है “
    राधा बोलती है, और रूपा का हांथ पकड़ कर दरवाजे के तरफ जाने लगती है। दोनो चलकर दरवाजे पास आती है और दरवाजे के हेन्डल पकड़ कर अन्दर के तरफ खींचती है। उसे एहसास होती है की दरवाजा बाहर से लॉक है।
    ” दीदी कमल ने दरवाजा बाहर से बंद कर दिया है।”
    रूपा राधा के तरफ देखते हुए बोली थी। जब दोनो ने देखा की दरवाजा बाहर से बंद है। तो फिर दोनो के मन में डर और भी ज्यादा बढ़ गया था। दोनो यही सोच सोच कर परेशान हो रही थी, की अब क्या होगा। ना जाने कब उसका कमल जैसे आफत से छुटकारा मिलेगा।
    ” मोबाइल भी नहीं है, कि जिससे दीदी को कॉल करके बता देती।”
    रूपा ने खामोशी तोड़ते हुए बोली थी।
    ” हां दीदी भी परेशान होगी, वो भी क्या सोच रहीं होंगी की ये दोनो कहां रह गयी।”
    राधा रुआंसे स्वर में बोली थी ।
    इधर शीला और चांदनी के भी कदम तेजी से क्लास रूम के तरफ बढ़ रहे थे। उसे नहीं पता था की क्लास रूम में इतनी बड़ी लड़ाई चल रही थी। परेशानी दोनो के चेहरे पर साफ झलक रही थी।
    ” चांदनी, राधा और रूपा बहुत बड़ी मुसिबत में है। मेरा दिल बहुत घबरा रहा है।”
    शीला बोली और चांदनी के हांथ पकड़ कर खींचते हुए भागने लगी थी।
    ” हां, मुझे भी लगता है। की कुछ तो गड़बड़ है।”
    चांदनी शीला से बोली और ये भी शीला के साथ दौड़ने लगी थी।

    क्लास रूम का दरवाजा एक बार फीर से खुलता है। और कमल क्लास रूम में ऐन्टर करता है। इस बार कमल का हाव भाव चेहरे का एक्सप्रेशन बॉडी लोंगबेज पुरी तरह से बदल गया था। उसका चेहरा एक दम से डरावना हो गया था। लाल लाल आंख बिखरे बाल एक हांथ में डंडा तो दुसरे हांथ में फोल्ड किया हुआ मोटी मोटी दो रस्सी लिए कमल क्लास रूम में प्रवेश किया था।
    ” अब क्यों आये हो कमल, क्या लेने आये हो दुबारा। चलो हटो मेरे रास्ते से मुझे जाना है।”
    रूपा कमल के तरफ अपनी उंगली प्वाइंट ऑट करते हुए बोली थी।
    ” कमल रास्ता छोड़ो मेरा, मैं कह देती हूं। अच्छा नहीं होगा।”
    राधा भी कमल को गुस्से से बोली और रूपा के हांथ को मजबूती से पकड़ कर आगे बढ़ी।
    ” अरे रूक जा, इतनी भी जल्दी क्या है। तुम लोगों को जाने की।”
    बिना रूके कमल फीर बोला
    ” अभी तो तुम लोगों को बहुत सारा हिसाब देना है।”
    बोलकर कमल राधा और रूपा के तरफ लपका 
    राधा और रूपा अचानक हुए इस हमले से सम्भल नहीं पाई थी। इसी बात का कमल को फायदा मिला वो राधा और रूपा को पकड़ चुका था। वो बात अलग था कि उसके शरीर मे इतना ताकत नहीं था। की दोनो लड़कीयों से ये अकेला एक साथ मुकाबला कर सके, लेकिन इस बार कमल अपने लिए ज्यादा पॉजीटीव था।  शरीर को चुस्त दिमाग दुरुस्त कर के आया था। वो अपने दिमाग के घोड़े को तेज गती से दौड़ाने लगा था। वो मन हीं मन सोच लिया था की इन दोनो लड़कियों से एक साथ मुकाबला करना आसान नहीं है। इस लिए वो एक प्लान तैयार किया था कि,ये दोनो को किसी तरह अलग करना पड़ेगा। नहीं तो फिर इन दोनो के हाथों मार खाना पड़ सकता है।
    ” रूक जा शाली, मैं तुम दोनो को अभी बताता हूं।”
    बोलते हुए कमल राधा को एक जोरदार थप्पड़ मार देता है। थप्पड़ खा कर राधा सीधे फर्श पर जा गिरती है।राधा सम्भल पाये उस से पहले कमल के पैर राधा के कमर पर पड़ता है। चोट इतनी जोर की लगी की राधा की चीख निकल गई थी। रूपा का हांथ कमल नहीं छोड़ा था इसका भी कारण है। आपने देखा नहीं कि, थोड़ी देर पहले रूपा कैसे कमल की बैण्ड बजाई थी। यही कारण था कि कमल राधा पर अटैक कर रहा था। और रूपा पर कंट्रॉल बनाना चाह रहा था। दो चार लात और राधा को मारता है। राधा बेहोश हो जाती है।अब बारी थी रूपा की।
    ” शाली हरामजादी,तुने मुझे मारा था। अब रूक मैं तेरा क्या हाल करता हूं।”
    कमल अपना दांत पीस कर रूपा से बोला था।
    ” क्या करेगा तू मेरा,हां, इतना जल्दी भुल गया की मैं तेरा क्या हालत किया था।”
    रूपा कमल पर गुस्से से चिल्लाते हुए जोर से बोलती है।और कमल के घुटने के नीचे पैर पर एक जोरदार लात मार देती है। कमल दर्द के मारे कराह देता है।
    ‘ आ आ आ ह “
    रूपा इतना हीं पर नहीं रूकती है। कमल जो रूपा के दोनो हांथ पकड़े हुए था। रूपा तेज झटके के साथ अपना एक हांथ कमल के पकड़ से आजाद करा चुकी थी। आजाद हीं नहीं ताबड़ तोड़ छः सात चमाटे भी लगा चुकी थी। ऐसा लग रहा था अब सिचुएशन पुरी तरह से रूपा के कंट्रोल में आ गयी थी। राधा अभी भी फर्श पर बेहोश परी थी। रूपा सोच रही थी की, अगर हमें राधा दीदी को सेफ करना है। तो इस कमल रूपी रावण को एक अच्छा सा सबक सीखाना हीं पड़ेगा। वो दुबारा पैर से अटैक करना चाहती थी। जैसे हीं वो अपना पैर अटैक करने के लिए उठाई एक जोर दार मुक्का उसकी सीना पर आ कर लगी मुक्के का भार इतना जबर्दस्त था। रूपा हिल गई थी। दर्द इतना तेज हुआ की रूपा दर्द के मारे कांप गई थी। रूपा का शरीर थर थर कांपने लगा था। इसी वक्त का कमल फायदा उठाया। रूपा के कान के बगल में लगातार थप्पड़ मारा जिससे रूपा और लाचार हो गई थी। होती भी क्यों नहीं इतनी मार जब किसी लड़के को पर जाए तो वो हिल जाये फीर भी ये तो एक लड़की थी। वो भी 17 वर्ष की
    ‘ अब मैं तुझे बताउंगा कि मुझ पर हांथ उठाने का अंजाम क्या होता है।”
    कमल रूपा पर चिल्ला कर बोला था। रूपा को बहुत ज़ोर कि दर्द हो रही थी। वो कुछ बोली नहीं सिर्फ कमल को गुस्से से देखती रही।
    ” बहुत ज्यादा उर रही थी तब से, अब दिखा अपनी ताकत और स्टाइल “
    कमल बोलते हुए रस्सी हांथ में उठा लेता है। और रूपा के कमर में रस्सी लपेटा देता है। दोनो हांथ पीछे करके रूपा का हांथ रस्सी से बांध दिया था। और उसे बाल से खींचते हुए एक बैंच पर ले जाकर बिठा दिया था। इतने में राधा को होश आने  लगा था। उसके हांथ पैर हिलने लगे थे। राधा का आंख धीरे धीरे खुलता है। और राधा की नजर बंधी हुई रूपा पर पड़ती है। वो सहम जाती है। और वो मन में सोचने लगती है। की रूपा कितनी अच्छी है। उसने मेरे लिये अपनी जान की बाजी लगा दी है। शायद इस जगह मेरी अपनी सगी बहन भी होती तो शायद ये सब नहीं करती वो अपनी जान की परवाह किए बगैर हमारा साथ दे रहीं है। कमल से लड़ रही है। ये सब सोच सोच कर राधा रूपा पर प्राऊड फील कर रही थी। और उसके आंख में आंसू आ गई थी ! वो हिम्मत कर के उठ कर बैठती है।
    ” कमल ये क्या हरकत है तुम्हारा, तुमने रूपा को बांध क्यों रखे हो खोल,खोल, खोल कमीने मेरी बहन को।”
    राधा कमल को गुस्से से हुई अपनी लाल आंख दिखाते हुए बोली थी।
    ” अच्छा, तो तुम होश में आ गई हो। रूक मैं आता हूं। तेरी भी खबर लेने।”
    .बोलकर कमल राधा के पास आता है। राधा कुछ कर पाती उससे पहले कमल उसकी कमर में रस्सी लपेट चुका था । कमल राधा को एक हांथ खुला  छोड़ कर  बाकी कमर और एक हांथ को बांध दिया था। कहानी का अगला भाग और मजेदार होने वाली है। तो पढिए पुरी कहानी केवल , नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड डॉट कॉम पर।
     

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  • ब्लाइंड डेट से मिला प्यार एपिसोड 2

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    एपिसोड 2: बॉस का इंतकाम या दिलचस्प शुरुआत?

    मुंबई की रात कभी नहीं सोती। सड़कों पर शोर था, ट्रैफ़िक का शोर, लोगों की आवाज़ें… लेकिन AK Industries की 25वीं मंज़िल पर एक अलग ही खामोशी पसरी थी। वहां सिर्फ कीबोर्ड की ‘टैप-टैप’ सुनाई दे रही थी। कांच की बड़ी खिड़की के पीछे एक शख्स अंधेरे में डूबा, लैपटॉप की रोशनी में काम कर रहा था।

    तभी, भारी दरवाज़ा एक झटके से खुला। शख्स की उंगलियां कीबोर्ड पर रुकीं। उसने बिना पीछे मुड़े, अपनी घड़ी देखी—रात के 11 बज रहे थे।

    “तो… कैसी रही तुम्हारी ब्लाइंड डेट?” एक गहरी और रौबदार आवाज़ गूंजी।

    दरवाज़े पर खड़ा शख्स, विजय, हंसते हुए अंदर आया और सामने वाली चेयर पर बैठ गया। “भाई! डेट तो ऐसी थी कि तुझे ज़िंदगी भर अफ़सोस होगा कि तू क्यों नहीं गया!”

    काम में डूबे उस शख्स ने लैपटॉप बंद किया। यह अक्षय खन्ना था। 25 साल का हैंडसम, कामयाब और थोड़ा सा ‘वर्कहोलिक’ बिज़नेस टाइकून। उसके लिए काम ही उसकी दुनिया थी, और उसकी एक नज़र लड़कियों का दिल धड़काने के लिए काफी थी।

    अक्षय ने कुर्सी पीछे झुकाई और ठंडे अंदाज़ में पूछा, “इतनी तारीफ? क्या खास था उसमें?”

    विजय ने मेज़ पर झुकते हुए कहा, “खास वो नहीं, उसकी बातें थीं! उसे पता नहीं था कि वो ‘अक्षय खन्ना’ के सबसे पक्के दोस्त के साथ बैठी है। वो बेचारी तो अपने बॉस की धज्जियां उड़ा रही थी।”

    अक्षय की एक भौंह ऊपर उठी। “बॉस की?”

    “हाँ!” विजय ने मजे लेते हुए कहा, “कह रही थी कि उसका बॉस ‘चलता-फिरता टेंशन’ है। हिटलर का दूसरा अवतार! और सुन… उसने ये भी कहा कि अगर पैसों की मजबूरी न होती, तो वो उस ‘खड़ूस’ की कंपनी में एक पल न रुकती।”

    अक्षय के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया, पर उसकी आंखों में एक चमक जागी। “मेरी कंपनी की एम्प्लॉई है?”

    “बिलकुल! बातों-बातों में उसने AK Industries का नाम ले लिया। नाम तो नहीं बताया उसने अपना, पर भाई… लड़की में दम है। तुझे ‘हिटलर’ बोलकर निकल गई!” विजय ठहाका मारकर हंसा।

    अक्षय की उंगलियां टेबल पर ताल देने लगीं। उसके होंठों पर एक शातिर मुस्कान आई। “मेरे ही नमक का हक अदा कर रही है और मुझे ही हिटलर कह रही है? दिलचस्प है…”

    उसने अपना फोन उठाया और एक नंबर डायल किया। “कल सुबह 9 बजे तक मुझे अपनी कंपनी की हर फीमेल एम्प्लॉई की लिस्ट चाहिए। हर एक की।”

    दूसरी तरफ: आरोही का घर

    आरोही ने अपने घर का दरवाज़ा खोला। सामने सोफे पर रोशनी बैठी थी, जिसके पैर पर पट्टी बंधी थी, पर हाथ में चिप्स का पैकेट था।

    आरोही थककर सोफे पर गिरी। “पैर कैसा है अब तेरा? या सिर्फ मेरी खिंचाई करने के लिए पट्टी बांधी है?”

    रोशनी हंसी, “अरे यार, दर्द तो है, पर तेरी डेट की कहानी सुनने की एक्साइटमेंट ज़्यादा है। बता, लड़का कैसा था? उसने तुझे रिजेक्ट किया या तूने उसे भगाया?”

    आरोही ने टीवी का रिमोट उठाते हुए चैन की सांस ली। “मैंने काम तमाम कर दिया। साफ़ कह दिया कि मेरा बॉयफ्रेंड है। अब वो कभी पलटकर नहीं आएगा। वैसे… लड़का बुरा नहीं था, काफी सुलझा हुआ था। पर मुझे इन सब पचड़ों में नहीं पड़ना।”

    रोशनी ने उसे कोहनी मारते हुए कहा, “देख लेना आरोही, कहीं वो लड़का तेरा पीछा न करने लगे।”

    आरोही ने लापरवाही से कहा, “अरे छोड़! मुंबई इतनी बड़ी है, वो दोबारा कभी नहीं मिलेगा। और कल सुबह मुझे ऑफिस जल्दी जाना है, वो ‘हिटलर’ बॉस कल कोई नई आफत न खड़ी कर दे।”

    वापस अक्षय के केबिन में… अक्षय अंधेरे में खिड़की से बाहर मुंबई की लाइट्स देख रहा था। उसके दिमाग में विजय की बातें गूंज रही थीं—”चलता फिरता टेंशन।”

    उसने धीरे से बुदबुदाया, “कल ऑफिस में मिलते हैं, मिस्टीरियस एम्प्लॉई। देखते हैं कल तुम अपनी ‘टेंशन’ को कैसे झेलती हो।”

    उसकी आंखों में अब एक अलग ही शिकार वाली चमक थी।

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  • ब्लाइंड डेट से मिला प्यार

    ब्लाइंड डेट से मिला प्यार

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

    एपिसोड 1 

    राज होटल में आज मुंबई शहर का सबसे चर्चित ब्लाइंड डेट इवेंट था। शाम के ठीक पाँच बजे होटल का मुख्य हॉल हल्की नीली रोशनी और गहरे साए में डूबा हुआ था। वेटर्स ने अपने चेहरों पर काले मास्क पहन रखे थे और एंट्रेंस पर लंबी लाइन लगी थी। हर गेस्ट का कार्ड चेक किया जा रहा था, फिर उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें अलग-अलग कमरों की ओर ले जाया जा रहा था। माहौल में हल्का म्यूज़िक और अनजाना सा रोमांच घुला हुआ था।

    उसी लाइन में खड़ी थी आरोही। हाथ में डायमंड वीआईपी पास और दिमाग में अनगिनत सवाल। वह यहां अपनी दोस्त रोशनी की जगह आई थी, बस थोड़ी देर के लिए। वह बार-बार अपने फोन की स्क्रीन देख रही थी, जैसे खुद से ही पूछ रही हो — क्या सच में अंदर जाना चाहिए?

    तभी उसका फोन बजा। स्क्रीन पर रोशनी का नाम चमक रहा था। आरोही ने तुरंत कॉल उठाई और धीमी आवाज में बोली, “कहां है तू? तेरी बारी आने वाली है।” उधर से दर्द भरी आवाज आई, “सॉरी यार, मैं घर से निकलने ही वाली थी कि मेरा पैर मुड़ गया। अभी हॉस्पिटल में हूं। प्लीज तू मेरी जगह चली जा।”

    आरोही ने झुंझलाते हुए कहा, “मुझे इन सब में कोई इंटरेस्ट नहीं है, और वैसे भी मेरे पास बॉयफ्रेंड बनाने का टाइम नहीं है।”

    रोशनी ने लगभग विनती करते हुए कहा, “प्लीज… आखिरी बार। तुझे मेरी कसम।”

    बस यही वो शब्द थे जिन पर आरोही हमेशा हार जाती थी। उसने गहरी सांस ली और कहा, “ठीक है, पर ये आखिरी बार है। तू मुझे हर बार ऐसे ही फंसा लेती है। बता यहां मुझे करना क्या है?”

    रोशनी चहकते हुए बोली,

    “कुछ खास नहीं, बस जैसी तू है वैसे ही रहना। और हां… लड़का मुझे ना कह दे, आगे मैं अपनी मॉम को संभाल लूंगी।”

    कुछ ही देर बाद उसकी बारी आ गई। उसने हल्की सी मुस्कान के साथ अपना पास दिखाया। दो स्टाफ मेंबर्स उसके पास आए, उसकी आंखों पर काली पट्टी बांधी और उसे धीरे-धीरे एक शांत, अंधेरे कमरे तक ले गए। कुर्सी पर बैठाकर पट्टी हटा दी गई। कमरे में हल्की सी पीली रोशनी थी, इतनी कि सामने बैठे शख्स की परछाईं दिखे, चेहरा नहीं।

    कुछ क्षणों तक खामोशी रही। फिर सामने से एक गहरी और संतुलित आवाज आई, “हेलो।”

    आरोही ने भी जवाब दिया, “हाय।”

    शुरुआती बातचीत औपचारिक थी, लेकिन धीरे-धीरे माहौल सहज होने लगा। आरोही का रुखापन भी थोड़ा कम होने लगा। जब उसने पूछा, “आप क्या करते हैं?” तो सामने वाले ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, “बस… बिज़नेस।”

    “अच्छा है,” आरोही ने हंसते हुए कहा, “कम से कम आप अपने बॉस को रोज़ नहीं झेलते होंगे। मेरा बॉस तो… क्या बताऊं, चलता-फिरता टेंशन है। अगर पैसों की जरूरत ना होती तो उसकी कंपनी में एक दिन भी काम ना करती।”

    सामने बैठा शख्स हल्का सा हंसा, “इतना बुरा है?”

    आरोही बातों में इतनी खो गई कि उसने अपनी कंपनी का नाम भी बोल दिया — “AK Industries में काम करना कोई आसान बात नहीं है।”

    जैसे ही ये शब्द उसके मुंह से निकले, सामने बैठे शख्स की उंगलियां कुर्सी के हैंडल पर हल्के से थम गईं। उसकी मुस्कान थोड़ी गहरी हुई, पर उसने अपनी प्रतिक्रिया छुपा ली।

    बातचीत आगे बढ़ती रही। दोनो यहां वहा की बाते कर रहे थे ।

    इवेंट खत्म होने का संकेत मिला तो सामने वाले ने शांत स्वर में पूछा, “क्या हम फिर मिल सकते हैं?”

     लेकिन आरोही ने शांत स्वर में मना करते हुए कहा,

    “मेरा पहले से एक बॉयफ्रेंड है। मैं यहां बस अपनी मॉम की वजह से आई थी… इसलिए शायद हमें आगे नहीं मिलना चाहिए। यही हमारे लिए बेहतर है।”

    वह उठी, दरवाज़ा खोला और बिना पीछे देखे बाहर चली गई।

    कमरे में कुछ पल सन्नाटा रहा। फिर उसी अंधेरे में बैठा वह शख्स हल्के से मुस्कुराया और बहुत धीमी आवाज में बोला, “AK Industries… दिलचस्प।”

     

    उसकी आंखों में अब हल्की सी चमक थी।

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  • बेवजह की मोहब्बत

    बेवजह की मोहब्बत

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

     

     

    बेवजह की मोहब्बत

     

    मेरी लाइफ एकदम सॉर्टेड थी। अच्छी जॉब (सीनियर मैनेजर, गुड़गांव), एक प्यारी वाइफ (नेहा) और एक फ्लैट जिसकी ईएमआई (EMI) हर महीने मेरे अकाउंट को खाली करने की कसम खाती थी। मैं 32 साल का था, मैरिड था, और लाइफ की बोरियत को ‘सफलता’ मान चुका था।

    फिर आई रिया। फेसबुक के एक रैंडम ग्रुप पर हमारी बहस हुई,  “क्या चाय कॉफी से बेहतर है?” इस बेवकूफी भरे टॉपिक से शुरू हुई बात कब मैसेंजर से व्हाट्सएप और फिर वॉयस कॉल तक पहुँच गई, पता ही नहीं चला।

    “शादीशुदा होने का मतलब यह नहीं है कि आपका दिल धड़कना बंद कर देता है, बस वह गलत दिशा में धड़कने का रिस्क नहीं लेना चाहता।” पर मेरा दिल उस समय एडवेंचर के मूड में था।

    रिया मुझसे सात साल छोटी थी। बैंगलोर में रहती थी। उसकी आवाज़ में वो जादू था जो गुड़गांव के ट्रैफिक में भी मुझे सुकून देता था।

     

    शुरुआत में   सब ‘फ्रेंडली’ था। लेकिन धीरे-धीरे हमारी बातें ‘गुड मॉर्निंग’ से ‘आई मिस यू’ तक पहुँच गईं। नेहा (मेरी वाइफ) को लगता था कि मैं ऑफिस के कॉल्स पर बिजी हूँ। और एक तरह से मैं बिजी ही था, अपनी दूसरी लाइफ को मैनेज करने में।

    रिया और मेरे बीच घंटों वॉयस कॉल्स होते थे। जब रात को घर के सब लोग सो जाते, मैं बालकनी में जाकर उससे बात करता।

    “तुम शादीशुदा क्यों हो, अर्जुन?” वह अक्सर पूछती।

    “क्योंकि मैं तुमसे पहले नेहा से मिला था। टाइमिंग का खेल है सब,” मैं मज़ाक में कहता।

    लेकिन यह सिर्फ़ मज़ाक नहीं था। हमारे बीच खुलकर रोमांस होने लगा था। चैट पर वो बातें होती थीं जो शायद मैंने नेहा से कभी नहीं की थीं। वॉयस कॉल पर उसकी सांसों की आवाज़ सुनकर मुझे लगता था कि यही ‘सच्चा प्यार’ है। हमने हज़ारों वादे किए। हमने प्लान बनाया कि हम गोवा में मिलेंगे। वह कहती थी, अर्जुन, तुम मेरे सोलमेट हो। मुझे फर्क नहीं पड़ता कि तुम मैरिड हो, मुझे बस तुम चाहिए।”

    मुझे लगा कि रिया वो ‘मिसिंग पीस’ है जो मेरी लाइफ की पहेली को पूरा कर देगी।

     

    सब कुछ परफेक्ट चल रहा था, जैसे किसी बॉलीवुड फिल्म का पहला हाफ। फिर अचानक रिया के मैसेज कम होने लगे।

    “बिजी हूँ,” “काम का प्रेशर है,” “मम्मी पास में हैं”, ये सब बहाने आम हो गए।

    फिर एक हफ्ता ऐसा आया जब उसने मेरा कोई कॉल नहीं उठाया। मैं पागल हो रहा था। गुड़गांव की सड़कों पर कार चलाते हुए मैं बार-बार फोन चेक करता। नेहा को लगा कि ऑफिस में कुछ बड़ा पंगा हुआ है। उसे क्या पता था कि मेरा ‘दिल का ऑफिस’ बंद होने की कगार पर है।

    “प्यार में ‘इंतज़ार’ करना अच्छा लगता है, लेकिन ‘इग्नोर’ होना दुनिया की सबसे गन्दी फीलिंग है।”

    आठ दिन बाद उसका फोन आया। मेरी जान में जान आई।

    “रिया! कहाँ थी तुम? मैं मर रहा था तुम्हारे बिना!”

    दूसरी तरफ से जो आवाज़ आई, वो रिया की तो थी, पर उसमें वो ‘इश्क’ नहीं था।

    “सुनो अर्जुन, मुझे लगता है हमें अब बात नहीं करनी चाहिए,” उसने बहुत ही ठंडे अंदाज़ में कहा।

     

    मैं यह सुनकर सुन्न रह गया। “क्या? क्यों? क्या हुआ?”

    “कुछ नहीं हुआ। बस मुझे रियलाइज हुआ कि यह सब ‘बेवजह’ है। तुम मैरिड हो। तुम्हारा फ्यूचर नेहा के साथ है। मैं अपनी लाइफ में आगे बढ़ना चाहती हूँ,” उसने ऐसे कहा जैसे वह किसी क्लाइंट को प्रेजेंटेशन दे रही हो।

    उसका अंदाज़ एकदम बदल गया था। वो रिया, जो कॉल पर रो पड़ती थी अगर मैं पाँच मिनट लेट फोन करूँ, अब पत्थर बन चुकी थी।

    “लेकिन रिया, तुमने कहा था कि तुम मुझसे प्यार करती हो? गोवा का प्लान? हमारी वो बातें?”

    “वो सब एक क्रेज था, अर्जुन। अब मैं मैच्योर हो गई हूँ। प्लीज, मुझे कॉल मत करना।”

    उसने फोन काट दिया। मैंने दोबारा मिलाया। ब्लॉक। व्हाट्सएप चेक किया। ब्लॉक। इंस्टाग्राम? ब्लॉक।

     

    मैंने हार नहीं मानी। मैंने अपने एक दोस्त के फोन से उसे कॉल किया। उसने उठाया।

    “रिया, प्लीज एक बार बात कर लो। मैं अपनी शादी छोड़ दूंगा, मैं बैंगलोर आ जाऊंगा,” मैं गिड़गिड़ा रहा था। एक 32 साल का शादीशुदा आदमी, जो अपनी लाइफ में सब कुछ अचीव कर चुका था, एक 25 साल की लड़की के सामने भीख मांग रहा था।

    “अर्जुन, तुम पैथेटिक लग रहे हो। गेट अ लाइफ!” रिया की आवाज़ में नफरत थी।

    “पर क्यों? कम से कम वजह तो बताओ? कोई और मिल गया क्या?”

    “वजह यह है कि मुझे अब तुममें कोई इंटरेस्ट नहीं है। ख़त्म।”

    उसने फिर से ब्लॉक कर दिया। मैंने ईमेल लिखे, लंबे-लंबे पैराग्राफ लिखे। मैंने उसे वो वॉयस नोट्स याद दिलाए जो उसने मुझे भेजे थे। मैंने उसे हमारी वो ‘हॉट चैट्स’ याद दिलाईं। पर कोई जवाब नहीं।

    मुझे समझ नहीं आ रहा था कि जो इंसान कल तक मेरे बिना सांस नहीं ले सकता था, वो आज मुझे कचरा कैसे समझ सकता है?

     

    कुछ हफ़्तों बाद, एक कॉमन फ्रेंड के ज़रिए मुझे पता चला कि रिया की सगाई हो गई है। एक एनआरआई (NRI) लड़के के साथ। वो लड़का अनमैरिड था, अमीर था और अमेरिका में रहता था।

    सब कुछ साफ़ हो गया। रिया के लिए मैं कोई ‘सोलमेट’ नहीं था। मैं बस एक ‘टाइमपास’ था, एक ‘फिलर’ था। जब तक उसे अपनी लाइफ का असली ‘हीरो’ नहीं मिला, वह मेरे साथ डिजिटल रोमांस का नाटक करती रही। मेरी शादीशुदा लाइफ उसके लिए एक सुरक्षा कवच थी, उसे पता था कि मैं कभी उस पर शादी का दबाव नहीं बनाऊंगा, इसलिए वह खुलकर एन्जॉय कर रही थी।

    जैसे ही उसकी लाइफ में ‘सेटल’ होने का मौका आया, उसने मुझे ‘डिलीट’ कर दिया जैसे हम फोन से कोई फालतू ऐप डिलीट कर देते हैं।

     

    आज मैं अपनी बालकनी में खड़ा हूँ। नेहा अंदर आरव (मेरा बेटा, जो अब हो गया है) को सुला रही है। लाइफ फिर से वही है, ईएमआई, ऑफिस और बोरियत।

    रिया अब अमेरिका में है। शायद वह अपने पति के साथ वैसी ही बातें करती होगी जैसी मुझसे करती थी। या शायद नहीं।

    यह कहानी एक लेसन पर खत्म होती है। मेरा लेसन यह था, ऑनलाइन प्यार अक्सर एक ‘फ्री ट्रायल’ की तरह होता है। जैसे ही सब्सक्रिप्शन लेने का टाइम आता है, कंपनी (या लड़की) हाथ खींच लेती है।”

    मोहब्बत बेवजह नहीं होती, उसके पीछे हमेशा एक वजह होती है। कभी वो वजह ‘अकेलापन’ होती है, तो कभी ‘लालच’। रिया के लिए वजह ‘मनोरंजन’ थी, और मेरे लिए वजह ‘भटकाव’ था।

    मैंने अपना फोन निकाला, रिया का नंबर जो आज भी मेरे ‘ब्लॉक लिस्ट’ में सबसे ऊपर था, उसे हमेशा के लिए डिलीट कर दिया। लाइफ सॉर्टेड तो नहीं हुई, पर अब कम से कम ‘हैंग’ नहीं हो रही थी।

     

    लेखक का सन्देश और आभार

    मेरे प्यारे और दिल टूटे (या जुड़े हुए) पाठकों,

    इस मॉडर्न, बेबाक और कड़वे सच से भरी शैली में रचित इस कहानी “बेवजह की मोहब्बत” को पढ़ने के लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया! यह कहानी हमें सिखाती है कि डिजिटल दुनिया के वादे अक्सर ‘नेटवर्क’ की तरह होते हैं, जो कभी भी गायब हो सकते हैं।

    शादीशुदा लाइफ में जब हम बाहर सुकून ढूंढते हैं, तो अक्सर हम ‘सुकून’ नहीं, बल्कि ‘तूफान’ को दावत देते हैं। उम्मीद है कि अर्जुन की यह कहानी आपको अपनी प्राथमिकताओं को समझने में मदद करेगी।

    क्या अर्जुन के साथ जो हुआ, वो सही था? क्या रिया ने जो किया, वह आज के समय की कड़वी सच्चाई है? अपनी राय और एक्सपीरियंस नीचे कमेंट सेक्शन में ज़रूर साझा करें।

    यदि इस डिजिटल लव-स्टोरी और ब्रेकअप ने आपके दिल को छुआ हो, तो कृपया स्टिकर  भेजकर अपना प्यार और समर्थन दें।

    आपकी हर प्रतिक्रिया मुझे और भी ज़्यादा आधुनिक लाइफस्टाइल और मानवीय रिश्तों पर कहानियाँ लिखने की प्रेरणा देती है।

     

    प्यार करो तो ‘लॉगिन’ संभलकर करना, क्योंकि ‘लॉगआउट’ अक्सर दर्दनाक होता है!

     

     

    आशीष मिश्रा मैथिली

    NSW  नया लेखक  🥉

  • बेवजह की मोहब्बत

    बेवजह की मोहब्बत

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    बेवजह की मोहब्बत  

     

     

     

     

     

    रात के लगभग ढाई बजे थे, अंधेरे कमरे में बस मोबाइल की हल्की नीली रोशनी थी, और उस रोशनी में बैठा था विवेक, एक शादीशुदा आदमी, जिसकी ज़िंदगी बाहर से बिल्कुल परफेक्ट लगती थी।

     

    एक अच्छी नौकरी, एक समझदार पत्नी, एक छोटा सा बच्चा… सब कुछ था उसके पास।

     

    फिर भी… उसे लगता था, कि कुछ कमी है।

     

    और उस कमी का नाम उसे तब तक नहीं पता था, जब तक कि एक दिन उसकी ज़िंदगी में “नेहा” नहीं आई।

     

     

     

     

    नेहा का एक मैसेज, जो विवेक की जिदंगी में सब बदल गया

     

    वो एक सामान्य दिन था। ऑफिस के काम के बीच विवेक ने फेसबुक खोला, और उसमें  एक नोटिफिकेशन आया

     

    “Hi… क्या आप सच में उतने ही serious हैं, जितने आपकी पोस्ट दिखती हैं?”

     

    विवेक ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, शायद उससे थोड़ा ज्यादा…

     

    बस, यहीं से शुरू हुई एक कहानी, जो जितनी जल्दी बनी, उतनी ही जल्दी टूट भी गई।

     

     

     

     

    नेहा आज की माडर्न लड़की थी, उसकी सोच अलग थी, उसकी बातें… उसकी सोच… सब कुछ ऐसा था जो विवेक को नेहा कि ओर खींचता चला गया।

     

    पहले तो शुरुआत में हल्की-फुल्की बातें हुईं, काम, जिंदगी, सपने… ज्यादातर काम की सीरियस बात उन दोनों के बीच होती थी।

     

    फिर धीरे-धीरे बातें गहरी होने लगीं।

     

    नेहा विवेक से कहती तुमसे बात करके सुकून मिलता है…”

     

    विवेक हँसकर जवाब देता, मुझे भी…”

     

    लेकिन दोनों जानते थे, ये सिर्फ “सुकून” नहीं था।

     

     

     

     

    धीरे-धीरे उनके बीच बातचीत की सीमा टूटने लगी

     

    विवेक शादीशुदा था, ये बात उसने पहले ही दिन नेहा को बता दी थी।

     

    नेहा यह सुनकर कुछ पल के लिए चुप हुई थी…

    फिर बोली—

    “दिल का क्या करें… वो तो किसी से भी लग सकता है…”

     

    उस दिन के बाद से दोनों के बीच एक अनकहा रिश्ता बन गया।

     

    ना नाम था, ना कोई वादा… लेकिन दोनों के बीच एहसास गहरे और सच्चे थे।

     

     

    अब उनकी बातें सिर्फ चैट तक सीमित नहीं रहीं।

     

    रात होते ही कॉल शुरू हो जाती।

     

    धीरे-धीरे वो कॉल्स लंबी होने लगीं—

    कभी एक घंटा, कभी दो…

     

    और फिर वो पल आया, जब दोनों ने अपनी झिझक छोड़ दी।

     

    अब उनकी आवाज़ों में सिर्फ बातें नहीं थीं…

    उनमें एहसास था, चाहत थी।

     

    नेहा की हँसी में एक अपनापन था,

    और विवेक की आवाज़ में एक अपनापन।

     

    वो कहते—

    “काश… हम पहले मिले होते…”

     

    और हर बार ये “काश” उनकी दूरी को और गहरा कर देता।

     

     

    उनके बीच अब झिझक की कोई दीवार नहीं बची थी।

     

    चैट में, कॉल में, दोनों खुलकर अपनी भावनाएँ जताते।

     

    नेहा विवेक से कहती जब तुम ‘miss you’ कहते हो ना… दिल सच में भर आता है…”

     

    विवेक जवाब देता, तुम मेरी आदत बन गई हो…”

     

    उनकी बातें कभी-कभी इतनी गहरी हो जातीं कि लगता हि नही था, कि ये रिश्ता सिर्फ ऑनलाइन है, दिल से जुड़ा हुआ नही है।

     

    लेकिन शायद यही विवेक का सबसे बड़ी गलती थी।

    एक दिन 1-2  हफ्ते के लिए अपने  ऑफिस के काम में कुछ ज्यादा ब्यस्त हो गया, तो वह नेहा को कुछ कम समय दे पा रहा था, जिससे नेहा नाराज रहने लगी।

     

    बाद मे जब विवेक अपने काम से फुर्सत पाया तो उसने नेहा से बात करने का कोशिश किया…  लेकिन अचानक से नेहा का व्यवहार बहुत बदल गया।

     

    धीरे-धीरे नेहा का मैसेज विवेक को कम आने लगा।

     

    कॉल्स छोटी हो गईं, और फिर… अचानक एक दिन वह बंद ही हो गया।

     

    पहले दिन जब  विवेक ने  सुबह दोपहर शाम को अभिवादन का मैसेज किया, जिसका कोई जबाब नही आया तो विवेक सोचा, शायद किसी काम में व्यस्त होगी।”

    दूसरे दिन, जब यही सिलसिला जारी रहा तो, विवेक सोचने लगा, शायद वह किसी बात से नाराज़ है…

    तीसरे दिन भी जब मैसेज  नही आया, तो विवेक अपने आप में सोचने लगा कि क्या मैंने कुछ गलत कहा?”

     

    उसने नेहा को  मैसेज किया सब ठीक है?”

    लेकिन कोई  जवाब  नही,  तब विवेक को नेहा कि फिक्र होने लगा, उसका मन किसी अनहोनी की आशंका से भर गया, वह उससे बात करने, तथा उसका हाल जानने के लिए  उसका मन तड़प गया।

    तब विवेक ने उसके और नेहा के बीच कुछ काॅमन दोस्त थे, उनसे चर्चा किया, नेहा के बारे में उसके कुछ देर बाद नेहा का मैसेज आया।

    मैसेज के शब्द बहुत ही उत्साहहीन था, एकदम बदलता हुआ अंदाज अब वह नेहा पहले जैसी नहीं रही।

     

    वो पहले घंटों बात करती थी,

    अब मिनटों में “busy हूँ” कहकर चली जाती थी।

     

    विवेक हर दिन कोशिश करता, नए तरीके से बात शुरू करने की, उसे हँसाने की…

     

    लेकिन हर बार जवाब वही मिलता “मूड नहीं है…”

     

     

     

     

    विवेक ने हार नहीं मानी।

     

    उसने खुद को दिल से और ज्यादा झोंक दिया उस रिश्ते में।

     

    वो हमेशा पूछता कुछ हुआ है क्या?”

     

    नेहा हमेशा अपने जबाब में  कहती कुछ नहीं…”

     

    वो कहता “तुम पहले जैसी क्यों नहीं हो?” क्योंकि विवेक को तो चुलबुली और नटखट नेहा की आदत थी, लेकिन यहां नेहा एक दम चुप हो गई थी।

     

    नेहा  ज्यादातर सवालों के जवाब में अब चुप हो जाती।

     

    उसकी चुप्पी…  विवेक को सबसे ज्यादा दर्द देती थी।

     

     

     

    एक सच, जो धीरे-धीरे सामने आया, एक दिन, बहुत कोशिश के बाद नेहा ने कहा विवेक… शायद ये सब गलत है…”

     

    विवेक का दिल धड़क उठा, और उसने पुछा

    “गलत? क्या?”

     

    नेहा बोली ये रिश्ता… ये बातें… सब कुछ…”

     

    विवेक ने समझाने की कोशिश की लेकिन ये रिस्ता तो  सच्चा है…”

     

    नेहा ने जवाब दिया “सच्चा है… लेकिन सही नहीं है…”

     

     

     

    उस दिन के बाद, नेहा विवेक से और दूर हो गई।

     

    अब वो खुद से बात शुरू नहीं करती थी।

     

    विवेक हर दिन एक नया मैसेज भेजता, कैसी हो?”

    “आज क्या किया?”

     

    लेकिन जवाब… या तो देर से आता,

    या आता ही नहीं।

     

    एक रात, विवेक ने हिम्मत जुटाई।

     

    उसने कॉल किया।

     

    काफी देर बाद नेहा ने उठाया।

     

    आवाज़ में वही अपनापन नहीं था।

     

    विवेक ने कहा नेहा, हम ये सब खत्म क्यों कर रहे हैं?”

     

    नेहा कुछ पल चुप रही…

    फिर बोली “क्योंकि ये कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था…”

     

     

    अलविदा… बिना शोर के

     

    विवेक ने आखिरी बार कहा—

    “मैं इसे संभाल सकता हूँ… हम इसे सही बना सकते हैं…”

     

    नेहा की आवाज़ धीमी थी—

    “कुछ चीजें सही नहीं बनतीं… बस खत्म हो जाती हैं…”

     

    और फिर… कॉल कट।

     

    उसके बाद नेहा ने खुद से कभी मैसेज नहीं किया।

     

     

    विवेक के पास सब कुछ था…

    फिर भी  उसे लग रहा था, कि जैसे कुछ नहीं था।

     

    उसकी जिंदगी वही थी, ऑफिस, घर, परिवार…

     

    लेकिन अब हर चीज में एक खालीपन था।

     

    वो  मिनट मिनट पर फोन उठाता… नेहा के मैसेज को देखता, लेकिन वहां सब कुछ खाली ही था।

    उसके दिनचर्या में एक अध्याय नेहा का इंतज़ार भी जुड गया।

     

    लेकिन रियल में क्योंकि अब कोई “नेहा” नहीं थी

     

    कुछ रिश्ते वजह से नहीं बनते…

    और इसलिए ही बिना वजह खत्म हो जाते हैं।

     

    विवेक और नेहा का रिश्ता भी ऐसा ही था।

     

    ना कोई शुरुआत का सही कारण,

    ना कोई अंत का सही जवाब।

     

    बस एक एहसास था, जो आया… और चला गया।

     

    एक दिन, महीनों बाद, विवेक ने अपने पुराने चैट पढ़े।

     

    हर मैसेज… हर कॉल…

    सब कुछ जैसे फिर से जिंदा हो गया।

     

    उसने मुस्कुराते हुए फोन बंद किया और सोचा, शायद वो सही थी…

    ये सच्चा था… लेकिन सही नहीं था…”

     

    बेवजह की मोहब्बत… दिल को बहुत कुछ देती है

    कुछ खूबसूरत यादें, कुछ अधूरे सवाल… और एक गहरा सन्नाटा।

     

    “कुछ लोग हमारी जिंदगी में आते हैं,

    हमें खुद से मिलवाने के लिए…

    और फिर चले जाते हैं, 

    हमें अधूरा छोड़कर,

    लेकिन थोड़ा मजबूत बनाकर…”

     

    इस कहानी को पढ़ने के लिए आपको दिल से धन्यवाद ❤️

    अगर कहानी ने आपके दिल को छुआ हो, तो उत्साहवर्धन के लिए स्टिकर जरूर भेजें 😊

     

     

    आशीष मिश्रा मैथिली

    NSW  नया लेखक  🥉