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सांझ की रोशनी में सौन्दर्य

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

सुनो! तुम श्रृंगार ना किया करो,

अपनी आंखों को यूं ना मुझे देख कर नीचे किया करो ,

मैं पागल हूं तुम्हारी झील सी आंखों का

मुझे और ना तुम्हारे लिए पागल किया करो ,

कजरारी आंखें तुम्हारी देख कर दिल में बेताबी सी छाती है,

सांझ की रोशनी में चमक तुम्हारे चेहरे की बढ़ जाती है,

मैं कायल हूं तुम्हारी झील सी आंखों का,

क्या इरादा रखती हो तुम मुझे डूब कर पार जाने का,

ये काली घटाओं सी जुल्फ तुम्हारी,

हार बनने को बेताब है गले का हमारी ,

यूं जो माथे पर छोटी सी बिंदी जो

तुम लगाती हो सच कहता हूं कि ,

तुम जान मेरी लेकर जाती हो , 

हल्की सी लाली लिए चेहरा तुम्हारा दमकता है,

निकला ना करो तुम अकेले कहीं दिल मेरा डरता है ,

ये जो हंसती हो औरों से मिलकर  ,

नहीं जानती तुम कितना दिल मेरा जलता है ,

मैं बंदिशों में तुम्हें नहीं बांध रहा हूं ,

तुम इसे बंदिशें मत समझना ,

ये दुनिया तुम्हारे लायक नहीं है,

इसलिए मैं थोड़ा  सा ही सही तुम्हें

लेकर सम्भल रहा हूं …!!

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