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अकेलापन….!!

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

अपनों के बीच होकर भी गैर हो गया हूं मैं,

क्या कहूं ऐ जिन्दगी कितना मजबूर हो गया हूं मैं , 

हंसी होंठों से जाने नहीं देता

इस दिल से कितना बेगैरत हो गया हूं मैं ,

यादों की लाली मेरी आंखों से जाती नहीं,

बस कह नहीं सकता कितना टूट गया हूं मैं, 

अकेलापन अब तो सालता है मुझे ,

आ देख! मुझे आकर तेरे बगैर कैसे जी रहा हूं मैं ,

अकेलापन महसूस किया है मैंने अब तेरी पनाहों में,

क्या कहूं दिल से कितना मजबूर हो गया हूं मैं …!!

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