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मैं लिखूं वो

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मैं लिखूं वो जो मन की तितलियों सी

अलग अलग रंगों की, रंग दे तू भी

रंग दे तेरे शब्दों से भरी मीठी सी

कविताएं कर,तेरी वो कविता

कविता जिसमें  जिक्र हो बस मेरा

हो मेरा जिक्र हर लाइन में 

हर शब्द में,रंगों से भरा हर लफ्ज़ 

रंग दे मुझे ऐसी ही कविता से

भर दे रंग मेरे जीवन में तेरी कविता से

भर दे रंग तेरी रंगों से भरी कविता से

भर दे तेरे सुनहरे छोटे रंगीन रंगों से

तेरी कलम की उस स्याही से 

जो नसीब से जुड़ी है हमारे 

बन रंगीली चमक के साथ

सितारों सी कलम महके हमारी जिंदगी भी

भर दे वो रंग तेरी मेरी जिंदगी में 

भर दे खुशबू का सा हर अहसास

अपनी शब्दों की कविता से….।

 

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Auther preeti Sharma

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं

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