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एक सच्चा आशिक

पढ़ने का समय : 7 मिनट

एक सच्चा आशिक कभी झूठ नहीं बोलता

 

शहर के पुराने हिस्से में एक छोटी-सी किताबों की दुकान थी। दुकान के मालिक का नाम राघव था। उम्र करीब पच्चीस साल और स्वभाव बहुत शांत। वह ज्यादा बोलता नहीं था, लेकिन जो भी कहता, साफ-साफ कहता था।

 

उसी शहर में अनाया नाम की लड़की रहती थी। वह कॉलेज में पढ़ती थी और अक्सर राघव की दुकान से किताबें लेने आती थी।

 

पहली बार जब अनाया दुकान पर आई, उसने पूछा, “आपके पास पुराने उपन्यास मिल जाएंगे?”

 

राघव ने मुस्कुराकर कहा, “हां, लेकिन अगर पढ़ने के लिए चाहिए तो अच्छे वाले दूंगा। सिर्फ दिखावे के लिए चाहिए तो कोई भी दे दूंगा।”

 

अनाया हंस पड़ी।

 

“आप हर ग्राहक से ऐसे ही बात करते हैं?”

 

“नहीं,” राघव ने कहा, “हर किसी से इतनी बात भी नहीं करता।”

 

अनाया को उसकी बात अजीब लगी, लेकिन अच्छी भी लगी।

 

धीरे-धीरे वह रोज दुकान पर आने लगी। कभी किताब खरीदती, कभी बस थोड़ी देर बैठकर बातें करती।

 

एक दिन अनाया ने पूछा, “राघव, तुम्हें कभी किसी से प्यार हुआ है?”

 

राघव कुछ पल चुप रहा।

 

फिर बोला, “हां।”

 

अनाया ने मुस्कुराते हुए पूछा, “कौन है?”

 

राघव ने उसकी आंखों में देखा और कहा, “तुम।”

 

अनाया अचानक शांत हो गई।

 

कुछ सेकंड तक दुकान में बिल्कुल सन्नाटा रहा।

 

फिर उसने नजरें झुका लीं।

 

“तुम मजाक तो नहीं कर रहे?”

 

“नहीं।”

 

“अगर मैं मना कर दूं तो?”

 

राघव ने सहजता से कहा, “तब भी मेरी बात झूठ नहीं हो जाएगी। प्यार करना मेरे हाथ में है, तुम्हारा जवाब नहीं।”

 

अनाया के दिल में उसकी बात उतर गई।

 

धीरे-धीरे दोनों के बीच एक खूबसूरत रिश्ता बन गया। वे घंटों बातें करते। भविष्य के सपने देखते। राघव हमेशा अनाया से एक बात कहता था—

 

“मैं तुमसे कभी झूठ नहीं बोलूंगा।”

 

अनाया हंसकर कहती, “इतना भरोसा?”

 

राघव जवाब देता, “प्यार में अगर सच छिपाना पड़े तो वह प्यार कैसा?”

 

सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन एक दिन राघव को अपने पिता की पुरानी बीमारी के बारे में पता चला। डॉक्टर ने बताया कि इलाज के लिए बहुत पैसे चाहिए।

 

राघव ने दुकान बेचने का फैसला कर लिया।

 

अनाया को जब पता चला तो उसने पूछा, “तुमने मुझे बताया क्यों नहीं?”

 

राघव ने कहा, “क्योंकि मैं नहीं चाहता कि तुम्हें मेरी परेशानी की वजह से अपने परिवार से लड़ना पड़े।”

 

“लेकिन मैं तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा हूं।”

 

राघव ने उसकी तरफ देखा।

 

“इसीलिए तो तुम्हें झूठ नहीं बोल सकता।”

 

कुछ ही दिनों बाद अनाया के घर में उसकी शादी की बात चलने लगी। उसके पिता ने एक बड़े कारोबारी परिवार के लड़के का रिश्ता बताया।

 

अनाया ने साफ मना कर दिया।

 

लेकिन उसके पिता ने कहा, “राघव के पास क्या है? न बड़ा घर, न पैसा, न कोई स्थिर भविष्य।”

 

अनाया चुप रही।

 

उस रात उसने राघव को फोन किया।

 

“अगर मैं तुम्हारे साथ खड़ी रहूं तो क्या तुम मुझे कभी दुखी नहीं होने दोगे?”

 

राघव कुछ पल चुप रहा।

 

फिर बोला, “मैं तुम्हें दुखी होने से बचाने का वादा नहीं कर सकता। जिंदगी में दुख आएंगे। लेकिन मैं यह वादा कर सकता हूं कि जब दुख आएगा, तब तुम्हारा हाथ छोड़कर भागूंगा नहीं।”

 

अनाया की आंखों में आंसू आ गए।

 

उसने कहा, “बस यही सुनना था।”

 

लेकिन अगले ही दिन राघव को एक बड़ा झटका लगा।

 

उसके पिता की हालत अचानक बहुत खराब हो गई। डॉक्टर ने तुरंत इलाज के लिए शहर से बाहर ले जाने को कहा।

 

राघव के पास पैसे नहीं थे।

 

उसने अपनी दुकान बेच दी।

 

इलाज शुरू हुआ, लेकिन पिता को बचाया नहीं जा सका।

 

राघव पूरी तरह टूट गया।

 

इसी बीच अनाया के घरवालों ने उसे राघव से रिश्ता खत्म करने के लिए मजबूर करना शुरू कर दिया।

 

एक दिन अनाया के पिता ने राघव को बुलाया।

 

उन्होंने कहा, “तुम अच्छे लड़के हो, लेकिन मेरी बेटी की जिंदगी तुम्हारे साथ मुश्किल होगी। अगर सच में उससे प्यार करते हो तो उसे छोड़ दो।”

 

राघव ने सिर झुका लिया।

 

उस रात उसने अनाया को मिलने बुलाया।

 

अनाया आते ही बोली, “क्या हुआ?”

 

राघव ने धीरे से कहा, “अनाया, मैं चाहता हूं कि तुम मुझसे शादी मत करो।”

 

अनाया का चेहरा उतर गया।

 

“क्यों?”

 

“क्योंकि मेरे पास अब कुछ नहीं है।”

 

“मुझे पैसे नहीं चाहिए।”

 

“लेकिन मैं तुम्हें झूठा सपना भी नहीं दिखाऊंगा।”

 

अनाया की आंखों से आंसू बहने लगे।

 

“तो क्या तुम्हारा प्यार खत्म हो गया?”

 

राघव ने तुरंत कहा, “नहीं।”

 

“फिर मुझे छोड़ क्यों रहे हो?”

 

राघव ने कहा, “क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूं। मैं तुम्हें अपनी मजबूरी में बांधना नहीं चाहता।”

 

अनाया ने गुस्से में कहा, “तुम्हें लगता है मैं इतनी कमजोर हूं कि तुम्हारे साथ गरीबी में नहीं रह सकती?”

 

राघव चुप रहा।

 

अनाया ने कहा, “तुमने मुझे हमेशा सच बोलने का वादा किया था। आज सच बताओ—क्या तुम मुझे चाहते हो?”

 

राघव की आंखों में आंसू आ गए।

 

“हर दिन। हर पल। लेकिन तुम्हारी खुशी भी चाहता हूं।”

 

अनाया ने उसका हाथ पकड़ लिया।

 

“तो फिर मेरी खुशी का फैसला तुम क्यों कर रहे हो?”

 

राघव के पास कोई जवाब नहीं था।

 

अनाया ने कहा, “मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं। अगर रास्ता मुश्किल होगा तो दोनों मिलकर चलेंगे। लेकिन मुझे यह मत कहो कि मेरे भले के लिए मुझे छोड़ रहे हो।”

 

राघव की आंखों से आंसू निकल आए।

 

उसने पहली बार अनाया को अपने करीब आने दिया।

 

कुछ समय बाद दोनों ने अपने परिवारों को समझाने की कोशिश की।

 

अनाया के पिता अब भी तैयार नहीं थे।

 

राघव ने उनसे कहा, “मैं आपकी बेटी को बड़े-बड़े सपने दिखाने का झूठ नहीं बोलूंगा। मेरे पास आज बहुत कुछ नहीं है। लेकिन मैं मेहनत करूंगा। और अगर कभी मैं असफल हुआ तो भी उससे अपनी असफलता नहीं छिपाऊंगा।”

 

उसकी सच्चाई ने अनाया के पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया।

 

उन्होंने पूछा, “अगर मेरी बेटी को कभी लगे कि उसने गलत फैसला किया है तो?”

 

राघव ने जवाब दिया, “तब मैं उसे रोकूंगा नहीं। प्यार कैद नहीं होता।”

 

कुछ महीनों बाद राघव ने एक नई छोटी-सी दुकान शुरू की। इस बार दुकान पहले से भी छोटी थी, लेकिन उसमें मेहनत और उम्मीद दोनों थीं।

 

अनाया भी पढ़ाई पूरी करने के बाद उसके साथ काम करने लगी।

 

धीरे-धीरे दुकान चल निकली।

 

एक शाम अनाया ने मुस्कुराकर पूछा, “राघव, याद है तुमने पहली बार कहा था कि तुम मुझसे प्यार करते हो?”

 

राघव हंस पड़ा।

 

“हां।”

 

“तब तुम्हारे पास कुछ नहीं था।”

 

“अब भी बहुत कुछ नहीं है।”

 

अनाया ने उसकी ओर देखकर कहा, “गलत। अब तुम्हारे पास मैं हूं।”

 

राघव मुस्कुराया।

 

“और मेरे पास तुम्हारा भरोसा है।”

 

अनाया ने कहा, “एक बात बताओ, अगर उस दिन तुमने मुझसे झूठ बोला होता कि सब ठीक है, पैसे हैं, भविष्य सुरक्षित है, तो शायद मैं तुम्हारे साथ आ जाती।”

 

राघव ने कहा, “लेकिन तब तुम्हें सच्चा राघव नहीं मिलता।”

 

अनाया ने मुस्कुराकर उसका हाथ थाम लिया।

 

“और मुझे खुशी है कि तुमने मुझे सच बताया।”

 

कई साल बाद उनकी वही छोटी-सी किताबों की दुकान शहर की मशहूर दुकान बन गई।

 

दुकान के बाहर एक छोटी-सी पंक्ति लिखी थी—

 

“प्यार वह नहीं जो हर बात को खूबसूरत बनाकर बताए, प्यार वह है जो सच बताकर भी साथ निभाने का हौसला रखे।”

 

राघव जब भी उस पंक्ति को देखता, अनाया की तरफ मुस्कुरा देता।

 

क्योंकि उसने एक बात जिंदगी भर नहीं भूली थी—

 

सच्चा आशिक अपने प्यार को खुश करने के लिए झूठ नहीं बोलता। वह सच बोलता है, चाहे सच कितना भी मुश्किल क्यों न हो। क्योंकि सच्चा प्यार भरोसे पर टिकता है, और भरोसा कभी झूठ की नींव पर खड़ा नहीं हो सकता।

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