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सुनसान रास्ता…(part-1)

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

 

 

रात के करीब 11 बज रहे थे। आरव अपनी बाइक से गाँव लौट रहा था। रास्ता सुनसान था और चारों तरफ घना जंगल था।

 

अचानक उसकी बाइक बंद हो गई।

 

आरव ने कई बार सेल्फ स्टार्ट दबाया, लेकिन बाइक चालू नहीं हुई। तभी उसे पीछे से किसी के चलने की आवाज सुनाई दी।

 

छप… छप… छप…

 

जैसे कोई गीले पैरों से उसके पीछे चल रहा हो।

 

आरव ने मोबाइल की टॉर्च जलाई और आवाज की तरफ देखने ही वाला था कि उसकी नजर सड़क किनारे लगे एक पुराने बोर्ड पर पड़ी।

 

उस पर लिखा था—

 

“पीछे देखना मना है।”

 

आरव घबरा गया।

 

तभी उसके कान के बिल्कुल पास किसी ने धीरे से फुसफुसाया—

 

“तुमने पढ़ लिया… अब पीछे मत देखना।”

 

आरव का पूरा शरीर कांपने लगा।

 

उसने सामने देखा तो उसकी बंद बाइक अपने आप स्टार्ट हो चुकी थी।

 

लेकिन तभी उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया।

 

कॉल उठाते ही दूसरी तरफ से उसी की आवाज सुनाई दी—

 

“आरव… बाइक मत चलाना। वो तुम्हारे पीछे बैठी है।”

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