भाग~51 पहली बार भूली?
पिछली रात…
रूहानी बिस्तर पर लेटी थी, पर नींद उसकी पलकों से कोसों दूर थी। तकिये पर सिर रखते ही आँखें बंद तो हो जातीं, पर भीतर चलती अशांत तस्वीरें उन्हें फिर से खोल देती थीं।
दिन भर का हर एक लम्हा जैसे उलझ कर उसकी साँसों में अटक गया था….. अपने नए स्टूडियो की चमकती शुरुआत, फिर अचानक एकांश राठौड़ और काम्या रैना की मौजूदगी, उन दोनों के शब्दों की वह छुपी हुई नश्तर-सी चुभन, और फिर लौटते वक़्त वो सड़क पर हुआ हल्का-सा एक्सिडेंट… सब कुछ जैसे किसी भारी चादर की तरह उस पर लिपट गया था।
पलंग पर लेटी रूहानी करवट पर करवट बदल रही थी, जैसे उसका जिस्म बिस्तर पर था, पर रूह उसके ही अंदर किसी और समय में लौट गया हो। चादर के नीचे उसकी उंगलियां एक-दूसरे में उलझी हुई थीं, और उसके सीने में बेचैनी किसी अनसुने संगीत की तरह बज रही थी। बाहर रात चुप थी, पर उसके भीतर हज़ार आवाज़ें चल रही थीं।
उसने आँखें बंद कीं, लेकिन उस अंधेरे में एक दृश्य चमकने लगा…. वही शाम, जब पहली बार एकांश ने उसे इस तरह छुआ था कि उसकी साँसें थम गई थीं।
flashback
India Fashion Week के सेमी-फाइनल की रात थी। होटल के उस रूम में बस सिलाई मशीन की टकटक और रूहानी की सांसों की आवाज़ थी।
उसके हाथ लगातार काम में लगे थे….. कभी कपड़ों की तह जांचती, तो कभी स्केच पैड पर कुछ जोड़ती घटाती। आँखों में नींद नहीं थी, बस जूनून था।
उसके चेहरे पर पसीने की हल्की परत थी, पर आंखों में कोई थकान नहीं…. सिर्फ़ जीत की ललक।
उसी कमरे के एक कोने में, एकांश बिस्तर पर लेटा हुआ था। उसका कैमरा हाथ में था, जिसमें वो बार-बार वो तस्वीर देख रहा था जो उसने चुपके से खींची थी…. रूहानी की। उसकी आंखें उस फोटो में कुछ ढूंढ रही थीं… शायद वो मासूमियत जो उसे रूहानी में सबसे पहले दिखी थी।
कुछ पल बाद, वो उठकर उसके पास आया। कैमरा टेबल पर रखा और बिना कुछ कहे, धीरे से उसका हाथ थामा। रूहानी चौंकी, उसके हाथ रुक गए। उसने सिर उठाकर देखा और एक प्रश्न भरी नज़र उसकी आंखों में तैर गई।
“थोड़ा आराम कर लो, रूहानी,” एकांश ने धीमे से कहा और उसके हाथों को पकड़कर बिस्तर तक ले आया। उसके पास बैठकर उसके गाल को अपनी हथेली से सहलाया।
“अब भी काफ़ी समय है,” उसकी आवाज़ में एक अजीब नरमी थी, जो रूहानी को और बेचैन कर गई।
“नहीं, एकांश,” रूहानी ने घबराई सी आवाज़ में कहा, “ज़्यादा समय नहीं है। मुझे किसी भी हालत में ये प्रतियोगिता जीतनी है। ये मेरा सपना है… मेरा सब कुछ।”
“रूहानी… listen… listen… मुझे तुम पर पूरा भरोसा है। तुम जरूर जीतोगी। लेकिन कभी-कभी बस एक पल को जी लेना भी ज़रूरी होता है। कम से कम, इस मोड़ तक पहुँचने का एहसास तो करो।”
वो कुछ कह नहीं पाई, बस मासूमियत से बोली, “क्या कहना चाह रहे हो, एकांश?”
एकांश ने उसके दोनों गालों को अपनी हथेलियों में भर लिया। उसकी आंखें बहुत पास थीं अब।
“हमें मिले कितना वक़्त हो गया, रूहानी?”
रूहानी ने धीमे से कहा, “मुझे ठीक से याद नहीं… शायद बारह या पंद्रह महीने।”
“Do you have any feeling for me?” एकांश की आवाज़ हल्की, पर सीधी थी।
रूहानी ने बिना कुछ कहे, धीरे से हां में सिर हिला दिया और अपनी नज़रें झुका लीं। वो उसकी ज़िंदगी का पहला ऐसा इंसान था, जिसके लिए उसने इतना गहरा महसूस किया था…. दिल से, आत्मा से।
अगले ही पल, एकांश ने उसके चेहरे को अपने और नज़दीक खींच लिया, और उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया।
रूहानी का शरीर अकड़ गया। उसने चादर के दोनों किनारों को कसकर पकड़ लिया। उसकी पलकों में हलचल थी, सांसें उलझी हुई, और मन भीतर से कांप उठा।
ये सब उसके लिए बहुत नया था… बहुत अजीब। वो न तो जवाब दे पा रही थी, न खुद को पूरी तरह उस पल में छोड़ पा रही थी।
पर एकांश को शायद इसका एहसास नहीं था। वो बस उसी लम्हे में डूबा रहा…. बिना यह देखे कि रूहानी के होंठ सिर्फ़ चुप थे, जवाब नहीं दे रहे थे।
वो इस खामोश असहजता को प्रेम का पल समझता रहा… और रूहानी, उस चुप्पी में खुद से कुछ खोती रही।
कुछ देर रूहानी के होंठो को चूसने के बाद एकांश उसके गर्दन पर चला गया और अपने हाथों से रूहानी के टॉप को उसके कमर के पास से उठने लगा।
तभी रूहानी जैसे किसी नींद से जागी, उसने तुरंत एकांश के हाथ को अपनी कमर पर से झटके से हटाया और उठ खड़ी हुई।
तभी एकांश ने उसे बिस्तर पर पटक दिया, उसके ऊपर आकर बोला, “everything is fine ruhani”
रूहानी की आंखे भरने लगी, वो एक ही बात दोहराए जा रही थी, “नहीं एकांश, ये सही नहीं है, मैं हमारी शादी के बाद सब कुछ करूंगी लेकिन अभी नहीं……”
एकांश बोला, “रूहानी! I’m aroused now, what should I do, please”
और इतना बोलकर एकांश रूहानी के कॉलरबोन को चुमना शुरू कर दिया।
रुहानी घबराने लगी थी, उसने अपना पूरा जोर लगाकर एकांश को खुद के ऊपर से हटा दिया और एक जोरदार तमाचा एकांश के गाल पर जड़ दिया।
एकांश की आंखे गुस्से से लाल हो गई थी, वो जैसी ही रूहानी की तरफ बढ़ा, रूहानी बिना एक पल की देरी किए बाथरूम में घुस गई और दरवाज़ा बंद कर दिया।
एकांश कुछ देर गेट खटखटया, लेकिन रूहानी नहीं निकली। वो पूरी रात उसके वॉशरूम में रोते-रोते सो गई थी।
Flashback end
और फिर… पता नहीं कब, रूहानी करवट बदलते-बदलते उठी। आँखें अधखुली थीं, मगर बदन नींद में डूबा हुआ।
वो बिस्तर से उतरी। नंगे पाँव, बिना किसी शोर के, जैसे कोई परछाई चल रही हो। हल्की रोशनी में उसका चेहरा थका हुआ नहीं, खोया हुआ लग रहा था। वो धीरे-धीरे बाहर निकली… और वहीं, किचन के पास, किसी को खड़ा देखा।
उसकी आँखों ने पहचान नहीं की…. उसका दिल ही था जिसने कहा, “यश…..”
वो चली गई उस साये की ओर और गले लग गई। जैसे किसी भुला दिए गए रिश्ते की गर्माहट तलाश रही हो। जैसे कोई बच्ची अपने पुराने तकिये को ढूँढ रही हो, जिसमें उसकी माँ की महक थी।
उसने कसकर पकड़ लिया… और फिर वहीँ, बिना कुछ कहे, कुछ और सोचे, उसकी आँखें बंद हो गईं।
कुछ देर ऐसे ही गुज़रा… फिर जैसे किसी डोर ने उसे वापस खींचा हो, रूहानी ने धीरे से अपनी पकड़ ढीली की, और उसी गति से वापस मुड़ गई। बिना किसी सवाल, बिना किसी आवाज़, जैसे कुछ हुआ ही नहीं और वो चली गई।
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
आज सुबह…
जब अद्वैत ने इधर उधर देखते हुए कहा, “हाँ….. वो आज मेरी माँ की बरसी है न…..” तो रूहानी का गला भर आया था।
उसने जल्दी से “मैं फ्रेश हो कर आती हूँ” कहकर अद्वैत के चेहरे पर ही दरवाजा बंद कर लिया था।
उसने तुरंत बेड साइड टेबल पर से अपना मोबाइल उठाया और बिना देरी किए इंस्टाग्राम खोला और पिछले दिन की opening ceremony की कुछ तस्वीरें अपलोड कर दीं……
studio की चमकदार तस्वीरें, cake-cutting की खुशी, gungun के साथ candid moments
और लिखा:
“Chapter 3 – From Ruins to Radiance ✨ #StitchAndSoul #GrandOpening”
जैसे ही उसने पोस्ट किया, स्क्रीन पर एक reminder pop‑up आया:
“मेरे प्यारे भाई यश का जन्मदिन”
उसके होंठों के बीच फुसफुसाहट थी, “मुझे याद क्यों नहीं रहा?”
उसकी आँखों में guilt का कांटा घुसा, और दिल एक अजीब तरह की बेचैनी से भर गया।
वह खुद से बोली, “पहली बार… मैं कैसे… ये भूल गई?”
वह इस सोच में डूब गई की अब वह अपने छोटे भाई से क्या बोलेगी?
——————
क्या एकांश उस खामोशी को अब भी इश्क़ मानता है… या उसने जानबूझकर अनदेखा किया था रूहानी की कांपती रूह को?
क्या यश सच में वहीं था… या ये सिर्फ़ रूहानी की थकी हुई तन्हाई का एक वहम था?
क्या वाकई गलती से भूली थी रूहानी उसका जन्मदिन… या वो कुछ ऐसा भूल जाना चाहती थी, जिसे याद करना अब सिर्फ दर्द देता है?

लिखकर रूह छूने की कोशिश…..
🥹🥹

प्रातिक्रिया दे