Part – 9 Vikrant ka raj
ठाकुर हाउस में अब सब कुछ नॉर्मल लगने लगा था। आदित्य अंकल (प्रिया के असली पिता) कुछ दिन शिमला में रुके थे। उन्होंने राजेश पापा से लंबी बातें कीं, पुरानी यादें ताजा कीं, और प्रिया को दोनों पापाओं का प्यार मिल रहा था। आरव और प्रिया का रिश्ता और गहरा हो गया था – भाई-बहन वाला नहीं, बल्कि दोस्ती और समझदारी वाला। लेकिन प्रिया अभी भी किसी रोमांटिक रिश्ते के लिए तैयार नहीं थी। विक्रांत के मैसेज आते थे, लेकिन वो सिर्फ “हाय-हैलो” तक ही जवाब देती।
एक दिन कॉलेज की लाइब्रेरी में प्रिया और रिया बैठी थीं। रिया ने किताब बंद की और बोली, “यार, विक्रांत तुझसे बहुत इंप्रेस्ड है। रोज क्लास में तेरी तरफ देखता रहता है। तू क्यों इतना दूर भाग रही है?”
प्रिया ने किताब में नजरें गड़ाए कहा, “रिया, अभी मन नहीं है। इतने राज़ खुल रहे हैं, जिंदगी स्थिर नहीं हुई। विक्रांत अच्छा है, लेकिन मुझे उसके बारे में ज्यादा पता नहीं।”
रिया ने आंखें घुमाई। “अरे, पता कर ले! मैंने थोड़ा पूछताछ किया है। देहरादून से है, फैमिली बैकग्राउंड अच्छा है। लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि उसकी फैमिली में कोई पुराना राज़ है। अवनी ने तो कुछ हिंट भी दिया था।”
प्रिया चौंकी। “अवनी? वो क्यों बोलेगी?”
“जलन। लेकिन शायद सच हो। चल, आज विक्रांत से पूछते हैं।”
उसी शाम कॉलेज कैंटीन में विक्रांत प्रिया के पास आया। “प्रिया, कल संडे है। लाइब्रेरी ग्रुप स्टडी? या फिर माल रोड पर वॉक?”
प्रिया ने पहली बार खुलकर मुस्कुराया। “विक्रांत, स्टडी तो ठीक है, लेकिन पहले तू अपनी फैमिली के बारे में बता। कहां से है तू? घर में कौन-कौन?”
विक्रांत थोड़ा रुक गया। फिर मुस्कुराया। “चलो, आज बताता हूं। पूरी स्टोरी।”
तीनों (प्रिया, रिया, विक्रांत) कॉलेज के पीछे वाली बेंच पर बैठ गए। सनसेट हो रहा था। विक्रांत ने गहरी सांस ली और अपनी कहानी शुरू की।
“मेरा पूरा नाम विक्रांत सिंह राठौर है। मैं देहरादून का हूं, मसूरी के पास एक छोटे से हिल स्टेशन का। मेरी फैमिली पुरानी राजघराने से ताल्लुक रखती है – राठौर राजपूत। मेरे दादाजी महाराजा विक्रम सिंह राठौर थे, गढ़वाल के छोटे से रियासत के आखिरी राजा। आजादी के बाद प्रिवी पर्स खत्म हो गया, जमीनें चली गईं, लेकिन नाम और कुछ पुरानी प्रॉपर्टी बची रही।”
प्रिया और रिया ध्यान से सुन रहे थे।
“दादाजी बहुत सख्त थे। ब्रिटिश टाइम में उन्होंने इंडियन आर्मी में सर्व किया, फिर आजादी के बाद राजनीति में आए। लेकिन 1980 में एक बड़ा स्कैंडल हुआ। दादाजी पर आरोप लगा कि उन्होंने अपनी रियासत की जमीन अवैध तरीके से बेची। कोर्ट केस चला, प्रॉपर्टी जब्त हो गई। दादाजी का दिल टूट गया। 1985 में हार्ट अटैक से गुजर गए।”
विक्रांत की आवाज में दर्द था।
“उसके बाद मेरे पापा – कर्नल अजय सिंह राठौर – ने फैमिली संभाली। पापा आर्मी में थे। कश्मीर में पोस्टिंग, 1999 कारगिल वॉर में फाइट किया। वीर चक्र मिला। लेकिन घर की हालत खराब थी। पापा ने देहरादून में एक छोटा सा स्कूल खोला – ‘राठौर मिलिट्री एकेडमी’। आज वो मिडिल क्लास फैमिली का अच्छा स्कूल है। मां – राधा राठौर – स्कूल की प्रिंसिपल हैं। सख्त, लेकिन बच्चों से बहुत प्यार करती हैं।”
रिया ने पूछा, “भाई-बहन?”
विक्रांत हंसा। “एक छोटी बहन है – वैष्णवी। 16 साल की, बिल्कुल शैतान। घुड़सवारी करती है, पोलो खेलती है। हमारी पुरानी प्रॉपर्टी में एक छोटा सा स्टेबल बचा है, वहां घोड़े पालते हैं। वैष्णवी का सपना है ओलंपिक में घुड़सवारी में मेडल लाना।”
प्रिया ने पूछा, “तो तू शिमला क्यों आया? देहरादून में ही पढ़ सकता था।”
विक्रांत चुप हुआ। फिर बोला, “ये असली वजह है। फैमिली में एक पुराना राज़ है। मेरे दादाजी की दूसरी शादी थी – पहली पत्नी से कोई बच्चा नहीं हुआ, तो दूसरी शादी की। लेकिन दूसरी पत्नी – मेरी दादी – को घर वाले नहीं अपनाते थे। दादाजी की मौत के बाद दादी को घर से निकाल दिया गया। वो शिमला चली गईं। वहां एक छोटा सा घर था – पुरानी प्रॉपर्टी का हिस्सा। दादी ने अकेले जीवन गुजारा। 5 साल पहले गुजर गईं।”
“उनकी वसीयत में लिखा था कि उनका शिमला वाला घर और कुछ ज्वेलरी उनके पोते को मिलेगी – अगर वो शिमला कॉलेज में पढ़ाई करे। दादी चाहती थीं कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें। पापा नहीं चाहते थे कि मैं आऊं, क्योंकि पुराने घाव थे। लेकिन मैं आ गया। घर अब मेरा है – छोटा सा, पुराना बंगला माल रोड के पास। मैं वीकेंड पर वहां रहता हूं।”
प्रिया की आंखें चौड़ी हो गईं। “तो तू अकेला रहता है?”
“हां। एक पुरानी केयरटेकर आंटी है – लक्ष्मी आंटी। वो दादी की टाइम से हैं। घर में दादी की पुरानी चीजें हैं – डायरी, फोटोज, ज्वेलरी। मैं धीरे-धीरे सब समझ रहा हूं।”
रिया ने कॉमेडी ऐड की। “वाह, राजकुमार! पुराना बंगला, घोड़े, ज्वेलरी। प्रिया, अब तो मान जा!”
प्रिया हंसी, लेकिन विक्रांत की आंखों में दर्द देख रही थी।
विक्रांत ने आगे बताया, “सबसे बड़ा राज़ ये है कि दादी को घर से निकालने की वजह सिर्फ प्रॉपर्टी नहीं थी। दादी ने दादाजी की मौत के पीछे साजिश का शक जताया था। कहा था कि बड़े भाई (मेरे पापा के चाचा) ने जहर दिया था। लेकिन प्रूफ नहीं था। दादी अकेली लड़ती रहीं। आखिर में हार गईं। मैं शिमला इसलिए आया क्योंकि दादी की डायरी में लिखा था – ‘सच ढूंढो, विक्रांत। राठौर खानदान का नाम साफ करो।’”
प्रिया ने उसका हाथ थामा। “विक्रांत… तू अकेला नहीं है अब। हम हैं ना।”
विक्रांत मुस्कुराया। “थैंक्स प्रिया। तेरी स्टोरी सुनकर मुझे लगा कि तू समझेगी। तूने भी तो इतना स्ट्रगल किया है।”
रिया ने चिढ़ाया। “अब दोनों अनाथ राजकुमार-राजकुमारी मिल गए। परफेक्ट जोड़ी!”
दोनों शर्मा गए। लेकिन प्रिया को अच्छा लगा। विक्रांत का बैकग्राउंड सुनकर उसे लगा कि वो भी स्ट्रगलर है – बाहर से चमक, अंदर दर्द।
अगले संडे प्रिया और रिया विक्रांत के बंगले पर गईं। पुराना विक्टोरियन स्टाइल बंगला – बड़ा गार्डन, पुरानी फर्नीचर। लक्ष्मी आंटी ने स्वागत किया। “बेटा, तुम्हारी दादी बहुत अच्छी थीं। सबको मिस करती थीं।”
विक्रांत ने दादी की डायरी दिखाई। उसमें पुराने लेटर्स थे – दादाजी के भाई की धमकियां, प्रॉपर्टी के पेपर्स। प्रिया ने पढ़ा। “विक्रांत, ये सीरियस है। हमें इंवेस्टिगेट करना चाहिए।”
विक्रांत ने कहा, “हां। लेकिन डर लगता है। अगर सच में मर्डर था तो… फैमिली बिखर जाएगी।”
रिया ने कहा, “डरो मत। हम तीनों मिलकर करेंगे। प्रिया तो एक्सपर्ट हो गई राज़ खोलने में!”
शाम को बंगले के गार्डन में तीनों बैठे। चाय पीते हुए विक्रांत ने प्रिया से कहा, “प्रिया, मुझे तेरी स्ट्रेंथ से इंस्पिरेशन मिलती है। तूने कभी हार नहीं मानी।”
प्रिया ने मुस्कुराकर कहा, “तू भी नहीं मान रहा। हम साथ हैं।”
कोई रोमांटिक कन्फेशन नहीं। बस दोस्ती गहरी हो रही थी। धीरे-धीरे।
रात को ठाकुर हाउस लौटकर प्रिया ने आरव को सब बताया। आरव ने कहा, “प्रिया, विक्रांत अच्छा लग रहा है। लेकिन सावधानी से। अगर उसकी फैमिली में भी साजिश है तो…”
प्रिया ने कहा, “भैया, मैं समझदार हूं। अभी सिर्फ दोस्ती है।”
आरव मुस्कुराया। लेकिन उसके दिल में कुछ और था। वो खुद नहीं समझ पा रहा था।
अवनी कॉलेज में फिर घूर रही थी। वो विक्रम से मिली थी जेल में। विक्रम ने कहा था, “अवनी, प्रिया और विक्रांत को करीब मत आने दे। राठौर और ठाकुर का पुराना दुश्मनी है। अगर दोनों
मिल गए तो हमारा खेल खत्म।”
क्या पुरानी दुश्मनी थी? नया राज़ खुलने वाला था।

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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