पागल जादूगर
घने जंगल के बीच एक पुराना महल था। उस महल के बारे में आसपास के गांवों में तरह-तरह की बातें कही जाती थीं। कोई कहता था कि वहां रात में दीवारें बातें करती हैं, कोई कहता था कि महल के अंदर जाने वाला कभी वापस नहीं आता।
लेकिन सबसे ज्यादा डर लोगों को वहां रहने वाले एक जादूगर से लगता था।
उसका नाम था विराज।
लोग उसे पागल जादूगर कहते थे।
कहते थे कि वह इंसानों से नफरत करता था और अपनी जादुई किताबों के साथ घंटों अकेले बातें करता रहता था। कभी आधी रात को महल की खिड़कियों से नीली रोशनी निकलती, तो कभी जंगल में किसी अनजान जानवर की आवाज सुनाई देती।
एक दिन गांव की एक लड़की तारा जंगल में अपनी छोटी बहन को ढूंढते-ढूंढते उस महल तक पहुंच गई।
महल का बड़ा दरवाजा अपने आप खुल गया।
तारा डरते हुए अंदर गई।
“कोई है?” उसने धीमी आवाज में पूछा।
अचानक पीछे से आवाज आई।
“यहां इंसानों का आना मना है।”
तारा पलटी।
सामने एक लंबा आदमी खड़ा था। उसके बाल बिखरे हुए थे, कपड़े पुराने थे और हाथ में एक चमकती हुई छड़ी थी।
“तुम… जादूगर हो?” तारा ने पूछा।
विराज ने अजीब सी हंसी हंसते हुए कहा, “लोग मुझे पागल जादूगर कहते हैं।”
“मेरी बहन खो गई है। मैंने उसे पूरे जंगल में ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिली।”
विराज की हंसी अचानक रुक गई।
“तुम्हारी बहन कैसी दिखती है?”
“उसकी उम्र दस साल है। उसने लाल रंग की पोशाक पहनी है। उसके हाथ में एक लकड़ी की गुड़िया है।”
विराज ने आंखें बंद कर लीं।
कुछ पल बाद उसने छड़ी जमीन पर रखी।
महल की फर्श पर एक चमकता हुआ गोल निशान बन गया।
उसमें जंगल का दृश्य दिखाई देने लगा।
तारा हैरान रह गई।
“ये… ये क्या है?”
“जादू,” विराज ने कहा।
दृश्य में तारा की बहन एक पेड़ के नीचे बैठी दिखाई दी।
“वो वहां है!”
तारा तुरंत बाहर भागने लगी।
विराज ने उसका हाथ रोक लिया।
“रुको।”
“क्यों?”
“क्योंकि वो पेड़ साधारण पेड़ नहीं है।”
तारा ने उसकी तरफ देखा।
विराज ने कहा, “तुम्हारी बहन अकेली वहां नहीं है।”
दोनों जंगल की ओर चल पड़े।
कुछ दूर पहुंचने के बाद उन्हें बच्ची दिखाई दी।
“दीदी!”
तारा दौड़कर अपनी बहन के पास पहुंची और उसे गले लगा लिया।
लेकिन तभी जमीन हिलने लगी।
पेड़ की जड़ें जमीन से बाहर निकल आईं और चारों तरफ फैलने लगीं।
तारा डर गई।
“विराज!”
जादूगर ने अपनी छड़ी उठाई।
“पीछे हटो!”
उसने मंत्र पढ़ा और छड़ी से रोशनी निकली। जड़ें पीछे हट गईं।
बच्ची रोते हुए तारा से चिपक गई।
तारा ने पहली बार गौर किया कि विराज के हाथ पर गहरा निशान था।
“आपने हमें बचाया… फिर लोग आपको पागल क्यों कहते हैं?”
विराज कुछ देर चुप रहा।
फिर बोला, “क्योंकि लोग सच से ज्यादा डरावनी कहानी पर विश्वास करते हैं।”
“क्या मतलब?”
विराज ने नजरें झुका लीं।
“मैं हमेशा से ऐसा नहीं था।”
उसने उन्हें महल में वापस लाकर एक पुराना कमरा खोला।
कमरे में सैकड़ों किताबें थीं।
बीच में एक बड़ी तस्वीर लगी थी।
तारा ने तस्वीर देखते ही पूछा, “ये कौन हैं?”
विराज ने धीरे से कहा, “मेरा परिवार।”
तस्वीर में विराज अपनी पत्नी और छोटी बेटी के साथ खड़ा था।
“मैं कभी इस राज्य का राज जादूगर था। लोग मुझ पर भरोसा करते थे। लेकिन एक रात कुछ लालची जादूगरों ने मेरी सबसे शक्तिशाली किताब चुराने की कोशिश की। उस किताब में ऐसा जादू था जो पूरे राज्य को बचा सकता था।”
“फिर?”
“मैंने किताब बचा ली, लेकिन उसी रात मेरी बेटी गायब हो गई।”
तारा चौंक गई।
“क्या वो मर गई?”
विराज की आंखें भर आईं।
“मुझे नहीं पता।”
कमरे में अचानक एक किताब अपने आप खुल गई।
उसके पन्नों पर चमकते अक्षर दिखाई दिए।
“जिसे तुम खोया समझ रहे हो, वह अभी भी जीवित है।”
विराज का चेहरा बदल गया।
“ये कैसे हो सकता है?”
किताब के पन्ने तेजी से पलटने लगे।
अचानक एक नक्शा सामने आया।
उस पर जंगल के बीच एक लाल निशान चमक रहा था।
तारा ने कहा, “शायद आपकी बेटी वहीं है।”
विराज ने सिर हिलाया।
“वह जगह… निषिद्ध जंगल है। वहां कोई जिंदा वापस नहीं आता।”
तारा ने उसकी तरफ देखा।
“आपने मेरी बहन को बचाया। अब मैं आपकी बेटी को ढूंढने में आपकी मदद करूंगी।”
विराज ने पहली बार हल्की मुस्कान दी।
“तुम जानती भी हो कि तुम किस मुसीबत में पड़ रही हो?”
“नहीं। लेकिन किसी को अपने परिवार से दूर रहने का दर्द मैं समझ सकती हूं।”
अगली सुबह दोनों निषिद्ध जंगल की ओर निकल पड़े।
जंगल के बीच उन्हें एक टूटा हुआ मंदिर मिला।
मंदिर के अंदर एक काला दरवाजा था।
दरवाजे पर वही निशान बना था जो विराज की किताब में था।
विराज ने छड़ी उठाई।
दरवाजा खुल गया।
अंदर अंधेरा था।
अचानक किसी बच्ची की आवाज आई—
“पापा…”
विराज के हाथ से छड़ी गिर गई।
उसकी आंखों में आंसू आ गए।
“नहीं… ये आवाज…”
तारा ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“वो आपकी बेटी है।”
दोनों आगे बढ़े।
लेकिन जैसे ही वे आखिरी कमरे में पहुंचे, वहां एक बूढ़ा जादूगर खड़ा था।
उसने हंसकर कहा—
“आखिर तुम यहां आ ही गए, विराज।”
विराज का चेहरा सख्त हो गया।
“तुम!”
बूढ़ा जादूगर बोला, “जिसे तुमने सालों से मृत समझा, उसे मैंने जिंदा रखा। अब तुम्हारी सबसे शक्तिशाली जादुई किताब मुझे दे दो।”
तभी पीछे से वही बच्ची दौड़ती हुई आई।
“पापा!”
विराज घुटनों पर बैठ गया।
बाप-बेटी एक-दूसरे से लिपट गए।
तारा की आंखों में भी आंसू आ गए।
लेकिन बूढ़े जादूगर ने अपनी छड़ी उठा ली।
“अब असली खेल शुरू होगा।”
विराज धीरे-धीरे खड़ा हुआ।
उसकी आंखों में इस बार पागलपन नहीं था।
सिर्फ अपनी बेटी को बचाने का फैसला था।
उसने छड़ी उठाई और कहा—
“आज दुनिया देखेगी कि जिसे तुम पागल कहते रहे… वह असल में कितना शक्तिशाली जादूगर है।”
और अगले ही पल पूरा जंगल तेज रोशनी से भर गया।

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