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लौटाया जंगल

पढ़ने का समय : 6 मिनट

शहर से थोड़ा दूर एक सुनसान सड़क थी। सड़क के दोनों तरफ ऊंचे-ऊंचे पेड़ थे और शाम होते ही वहां लोगों का आना-जाना बहुत कम हो जाता था।

 

एक दिन राजेश अपनी बाइक से उसी रास्ते से घर लौट रहा था। अचानक उसे सड़क किनारे से किसी छोटे जानवर के रोने की आवाज सुनाई दी।

 

राजेश ने बाइक रोक दी।

 

“ये आवाज कैसी है?”

 

वह आवाज की तरफ बढ़ा तो झाड़ियों के पास उसे एक छोटा सा बच्चा दिखाई दिया।

 

पहले तो राजेश समझ नहीं पाया कि वह कौन सा जानवर है। लेकिन जब उसने ध्यान से देखा तो उसके होश उड़ गए।

 

वह शेर का बच्चा था।

 

बच्चा बहुत कमजोर था और लगातार आवाज कर रहा था। उसके आसपास कोई दूसरा जानवर नहीं था।

 

राजेश ने काफी देर तक आसपास देखा।

 

“इसकी मां कहां है?”

 

लेकिन वहां कोई नहीं था।

 

राजेश ने वन विभाग को सूचना देने की कोशिश की, मगर उस समय आसपास नेटवर्क नहीं था। बच्चा ठंड से कांप रहा था।

 

राजेश का दिल नहीं माना।

 

उसने उसे सावधानी से उठाया और अपनी बाइक पर रख लिया।

 

“चल छोटे… पहले तुझे सुरक्षित जगह ले चलता हूं।”

 

वह उसे अपने घर ले आया।

 

घर पहुंचते ही उसकी पत्नी सीमा घबरा गई।

 

“राजेश! ये क्या लेकर आए हो?”

 

राजेश ने कहा,

 

“सड़क किनारे अकेला मिला था। बहुत छोटा है। अगर वहीं छोड़ देता तो शायद बचता नहीं।”

 

सीमा ने बच्चे को देखा तो उसका दिल भी पिघल गया।

 

“लेकिन ये शेर है।”

 

राजेश ने सिर हिलाया।

 

“जानता हूं। इसे हमेशा अपने पास नहीं रखेंगे। जब तक ये ठीक नहीं हो जाता, तब तक इसकी देखभाल करेंगे।”

 

उन्होंने उसका नाम रखा—शेरू।

 

कुछ ही दिनों में शेरू घर का हिस्सा बन गया।

 

वह राजेश के पीछे-पीछे चलता।

 

राजेश जहां बैठता, शेरू वहीं आकर बैठ जाता।

 

राजेश काम से बाहर जाता तो शेरू दरवाजे के पास बैठकर उसका इंतजार करता।

 

धीरे-धीरे वह इतना राजेश से जुड़ गया कि उसे देखते ही दौड़कर उसके पास आता।

 

सीमा अक्सर हंसकर कहती,

 

“लगता है इसे तुम इंसान नहीं, इसकी मां समझ में आते हो।”

 

राजेश मुस्कुराकर कहता,

 

“मैंने इसे सड़क से उठाया था, लेकिन अब लगता है इसने मुझे ही अपना घर बना लिया है।”

 

समय गुजरता गया।

 

कुछ महीने बाद शेरू बड़ा होने लगा।

 

उसके पंजे बड़े हो गए।

 

उसकी आवाज में भी पहले से ज्यादा ताकत आ गई।

 

अब वह घर में दौड़ता तो छोटे-मोटे सामान गिर जाते।

 

एक दिन राजेश ने उसे खेलते हुए देखा और उसके चेहरे की मुस्कान अचानक गायब हो गई।

 

उसे समझ आ गया था कि अब शेरू को हमेशा घर में रखना संभव नहीं होगा।

 

वह शेर था।

 

उसका असली घर जंगल था।

 

रात को राजेश देर तक सो नहीं पाया।

 

सीमा ने पूछा,

 

“क्या सोच रहे हो?”

 

राजेश ने धीमी आवाज में कहा,

 

“शेरू को जंगल वापस छोड़ना पड़ेगा।”

 

सीमा कुछ पल चुप रही।

 

“तुम उसे छोड़ पाओगे?”

 

राजेश की आंखें भर आईं।

 

“पता नहीं।”

 

अगले दिन राजेश ने वन विभाग से संपर्क किया। अधिकारियों ने उसे समझाया कि शेरू जैसे-जैसे बड़ा होगा, उसके लिए घर का माहौल खतरनाक भी हो सकता है और उसके प्राकृतिक व्यवहार पर भी असर पड़ सकता है।

 

राजेश सब समझ रहा था।

 

लेकिन दिल मानने को तैयार नहीं था।

 

शेरू को क्या पता था कि उसका मालिक उसके भविष्य के बारे में फैसला कर रहा है।

 

उस रात शेरू हमेशा की तरह राजेश के पास आकर लेट गया।

 

राजेश ने उसके सिर पर हाथ रखा।

 

“शेरू… तू मुझसे नाराज मत होना।”

 

शेरू ने उसकी तरफ देखा।

 

राजेश की आंखों से आंसू निकल आए।

 

“मैं तुझे छोड़ना नहीं चाहता। लेकिन तुझे आजाद करना जरूरी है।”

 

अगले कुछ दिनों में वन विभाग ने शेरू को जंगल में वापस भेजने की तैयारी शुरू कर दी।

 

जिस दिन उसे ले जाना था, सुबह से ही राजेश बहुत चुप था।

 

सीमा की आंखें भी नम थीं।

 

शेरू को जैसे कुछ समझ आ रहा था। वह बार-बार राजेश के पास आ रहा था।

 

राजेश ने उसे गले लगा लिया।

 

“तू जहां भी रहेगा, खुश रहना।”

 

फिर शेरू को वाहन में ले जाया गया।

 

राजेश भी उसके साथ जंगल तक गया।

 

गाड़ी जंगल के एक सुरक्षित हिस्से में रुकी।

 

अधिकारी ने कहा,

 

“अब इसे यहीं छोड़ना होगा।”

 

राजेश कुछ कदम पीछे हट गया।

 

शेरू बाहर आया।

 

उसने चारों तरफ देखा।

 

फिर अचानक पीछे मुड़ा।

 

सीधे राजेश की तरफ।

 

वह कुछ कदम आगे बढ़ा और राजेश के पास आकर खड़ा हो गया।

 

राजेश का दिल टूट गया।

 

उसने शेरू के सिर पर आखिरी बार हाथ फेरा।

 

“जा… अब यही तेरा घर है।”

 

शेरू ने राजेश को कुछ पल तक देखा।

 

फिर वह धीरे-धीरे जंगल की तरफ बढ़ने लगा।

 

कुछ कदम बाद वह फिर पलटा।

 

राजेश वहीं खड़ा था।

 

उसने हाथ उठाकर कहा,

 

“जा शेरू।”

 

इस बार शेरू जंगल की ओर बढ़ गया।

 

कुछ ही देर में वह पेड़ों के बीच गायब हो गया।

 

राजेश वहीं खड़ा रहा।

 

उसकी आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे।

 

सीमा ने उसके कंधे पर हाथ रखा।

 

“तुमने उसे छोड़ा नहीं है राजेश… तुमने उसे उसकी जिंदगी वापस दी है।”

 

राजेश ने जंगल की तरफ देखते हुए कहा,

 

“जानता हूं… लेकिन दिल तो यही चाहता है कि वो वापस आ जाए।”

 

कई महीने बीत गए।

 

राजेश अक्सर उसी जंगल के आसपास जाता, लेकिन शेरू उसे कभी दिखाई नहीं देता।

 

एक दिन वन विभाग के एक अधिकारी ने राजेश को फोन किया।

 

“राजेश जी, आपको एक खबर देनी है।”

 

राजेश घबरा गया।

 

“क्या हुआ शेरू को?”

 

अधिकारी हंसते हुए बोले,

 

“घबराइए मत। शेरू बिल्कुल ठीक है। हमने उसे जंगल में कई बार देखा है। अब वह दूसरे शेरों के साथ रहना सीख गया है।”

 

राजेश की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

 

“सच?”

 

“हां। और एक बात और…”

 

“क्या?”

 

“वह अब बिल्कुल जंगली शेर की तरह व्यवहार करता है।”

 

राजेश कुछ देर चुप रहा।

 

फिर मुस्कुराकर बोला,

 

“तो आखिरकार वो अपने घर पहुंच ही गया।”

 

उस शाम राजेश जंगल के बाहर काफी देर तक खड़ा रहा।

 

उसे दूर से शेर की दहाड़ सुनाई दी।

 

राजेश की आंखें भर आईं।

 

उसे लगा जैसे वह आवाज कह रही हो—

 

“मैं ठीक हूं।”

 

राजेश ने आसमान की तरफ देखा और मुस्कुराकर कहा,

 

“खुश रहना शेरू… अब मुझे तेरी चिंता नहीं।”

 

उस दिन राजेश समझ गया कि प्यार हमेशा किसी को अपने पास रखने का नाम नहीं होता।

 

कभी-कभी सच्चा प्यार वह होता है…

 

जब हम अपने सबसे प्यारे को अपने से दूर करके भी

उसकी आजादी चुनते हैं।

और शेरू?

 

वह जंगल में लौट चुका था।

 

लेकिन उसके दिल में शायद आज भी उस इंसान के लिए एक जगह थी…

 

जिसने उसे सड़क किनारे लावारिस पाया था,

 

उसे घर दिया था,

 

प्यार दिया था,

 

और आखिर में…

 

उसे उसकी असली दुनिया लौटा दी थी।

 

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