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दो अजनबी भाई

पढ़ने का समय : 6 मिनट

दो अजनबी भाई — राम और श्याम शहर की एक बड़ी कंपनी में राम की नौकरी को करीब दो साल हो चुके थे। राम शांत स्वभाव का लड़का था। वह अपने काम से काम रखता और ऑफिस में किसी से ज्यादा घुलता-मिलता नहीं था। उसी ऑफिस में एक दिन नया लड़का आया—श्याम। श्याम की उम्र करीब राम के बराबर ही थी। चेहरे पर हमेशा हल्की मुस्कान रहती और बात करने का अंदाज ऐसा था कि सामने वाला कुछ ही मिनटों में उससे घुल-मिल जाता। पहले दिन ही श्याम को राम के पास वाली सीट मिली। श्याम ने कुर्सी पर बैठते हुए कहा, “भाई, मैं श्याम हूं। उम्मीद है तुम मुझे देखकर परेशान नहीं होगे।” राम हंस पड़ा। “परेशान तो नहीं होऊंगा, लेकिन ज्यादा सवाल पूछे तो जरूर हो जाऊंगा।” श्याम ने तुरंत हाथ बढ़ाया। “पक्का दोस्त?” राम ने उसका हाथ पकड़ लिया। “पक्का दोस्त।” बस, उसी दिन से दोनों की दोस्ती शुरू हो गई। कुछ ही दिनों में राम और श्याम ऑफिस के सबसे अच्छे दोस्तों में गिने जाने लगे। दोनों साथ लंच करते, काम में एक-दूसरे की मदद करते और ऑफिस खत्म होने के बाद चाय पीने भी चले जाते। लेकिन दोनों की जिंदगी के बारे में एक अजीब बात थी। राम अपने परिवार के बारे में ज्यादा बात नहीं करता था। और श्याम भी अपने परिवार का जिक्र आते ही बात बदल देता था। एक दिन लंच करते समय श्याम ने पूछा, “राम, तुम्हारे घर में कौन-कौन है?” राम कुछ पल चुप रहा। “मां-पापा हैं।” “भाई-बहन?” राम ने सिर हिलाकर कहा, “नहीं।” श्याम मुस्कुराया। “मेरे भी मां-पापा हैं। लेकिन मेरी मां हमेशा कहती हैं कि अगर मेरा एक भाई होता तो शायद मैं इतना जिद्दी नहीं होता।” राम हंसते हुए बोला, “मेरी मां भी कभी-कभी कहती थीं कि काश मेरा कोई भाई होता।” दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहे। फिर श्याम ने मजाक में कहा, “लगता है हम दोनों को भाई की कमी थी, इसलिए दोस्त बन गए।” राम ने भी हंसते हुए कहा, “शायद।” उन्हें क्या पता था कि उनकी यह बात सच से इतनी करीब थी। दरअसल, राम और श्याम सगे भाई थे। लेकिन दोनों को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी। करीब पच्चीस साल पहले राम और श्याम का जन्म एक ही परिवार में हुआ था। परिस्थितियों के कारण बचपन में दोनों अलग हो गए थे। राम को उसके नाना-नानी अपने साथ ले गए थे, जबकि श्याम अपने माता-पिता के साथ दूसरे शहर चला गया था। समय बीतता गया। राम बड़ा होकर अपने नाना-नानी को ही अपना माता-पिता समझता रहा। श्याम भी अपने घर में यही मानकर बड़ा हुआ कि उसका कोई भाई नहीं है। उनके माता-पिता ने कभी पुराने रिश्तों की बात नहीं की थी। लेकिन किस्मत ने दोनों भाइयों को एक ही ऑफिस में ला खड़ा किया था। एक शाम ऑफिस में अचानक बिजली चली गई। पूरा ऑफिस अंधेरे में डूब गया। श्याम ने मोबाइल की टॉर्च जलाई और मजाक किया, “अगर भूत आया तो तुम मुझे बचाना।” राम हंस पड़ा। “पहले तुम मुझे बचाना। तुम मुझसे ज्यादा बहादुर दिखते हो।” श्याम ने कहा, “ठीक है भाई।” राम ने मजाक में उसे देखा। “भाई मत बोलना।” श्याम हंस पड़ा। “क्यों? अच्छा नहीं लगता?” राम कुछ पल चुप रहा। “पता नहीं… अजीब सा लगता है।” श्याम ने उसकी बात को मजाक समझकर छोड़ दिया। अगले दिन ऑफिस में एक जरूरी प्रोजेक्ट की मीटिंग थी। राम और श्याम को एक ही टीम में रखा गया। दोनों ने पूरी मेहनत की और प्रोजेक्ट सफल हो गया। कंपनी के मालिक ने दोनों की तारीफ करते हुए कहा, “तुम दोनों की सोच बिल्कुल एक जैसी है। लगता है जैसे कई सालों से साथ काम कर रहे हो।” श्याम ने राम की तरफ देखकर कहा, “हमारी दोस्ती ही ऐसी है।” राम मुस्कुराया। लेकिन उसी शाम एक ऐसी घटना हुई जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। श्याम ऑफिस से घर जाने ही वाला था कि उसके पिता का फोन आया। “श्याम, आज जल्दी घर आ जाना। तुम्हारी मां की तबीयत थोड़ी खराब है।” श्याम तुरंत घर निकल गया। घर पहुंचते ही उसने देखा कि उसकी मां के हाथ में एक पुरानी तस्वीर थी। श्याम ने पूछा, “मां, क्या हुआ?” मां ने कांपती आवाज में कहा, “आज मुझे तुम्हारे पुराने दिनों की एक चीज मिली।” उन्होंने तस्वीर श्याम की तरफ बढ़ाई। श्याम ने तस्वीर देखी। उसमें एक छोटी उम्र की महिला अपने साथ दो छोटे बच्चों को पकड़े हुए थी। एक बच्चा बिल्कुल श्याम जैसा दिख रहा था। और दूसरा… श्याम की नजर उस दूसरे बच्चे के चेहरे पर टिक गई। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। “मां… ये दूसरा बच्चा कौन है?” उसकी मां की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने धीरे से कहा, “तुम्हारा बड़ा भाई।” श्याम जैसे पत्थर का हो गया। “मेरा… भाई?” मां ने सिर झुका लिया। “हां। लेकिन हालात ऐसे बने कि तुम दोनों अलग हो गए। हमें कभी मौका ही नहीं मिला तुम्हें सब सच बताने का।” श्याम के हाथ से तस्वीर लगभग गिर गई। उसी समय उसे राम का चेहरा याद आया। राम की आवाज। उसकी मुस्कान। उसकी आदतें। यहां तक कि दोनों की कुछ छोटी-छोटी पसंद भी एक जैसी थीं। श्याम ने तस्वीर को गौर से देखा। फिर अचानक उसकी नजर तस्वीर के पीछे लिखे नाम पर पड़ी। “राम।” श्याम की सांस रुक गई। अगली सुबह वह ऑफिस पहुंचा तो राम अपनी सीट पर बैठा काम कर रहा था। श्याम कुछ देर तक उसे देखता रहा। राम ने पूछा, “क्या हुआ? ऐसे क्यों देख रहे हो?” श्याम ने धीरे से कहा, “राम… तुम्हारे पास अपने बचपन की कोई पुरानी तस्वीर है?” राम ने हैरानी से पूछा, “अचानक क्यों?” “बस दिखाओ।” राम ने अपना फोन खोला और एक पुरानी तस्वीर निकाली। श्याम की आंखें फैल गईं। वही चेहरा। वही तस्वीर में मौजूद मां। वही बचपन। श्याम की आंखों में आंसू आ गए। राम घबरा गया। “श्याम, क्या हुआ?” श्याम ने कांपते हाथों से अपनी जेब से वही पुरानी तस्वीर निकाली। राम ने तस्वीर देखी। कुछ पल तक वह कुछ बोल ही नहीं पाया। फिर उसने तस्वीर को पलटा। पीछे वही नाम लिखा था। राम और श्याम। राम की आंखों से आंसू निकल पड़े। “तुम… मेरे भाई हो?” श्याम ने कुछ नहीं कहा। बस आगे बढ़कर राम को गले लगा लिया। दोनों भाई काफी देर तक एक-दूसरे को पकड़े खड़े रहे। जिस रिश्ते से दोनों अनजान थे, वही रिश्ता उनकी दोस्ती की सबसे बड़ी वजह बन चुका था। राम रोते हुए बोला, “इतने सालों से मैं सोचता रहा कि मेरा कोई भाई नहीं है।” श्याम ने कहा, “और मैं सोचता रहा कि मेरी जिंदगी में भाई की कमी क्यों महसूस होती है।” राम ने उसकी पीठ थपथपाई। “शायद इसलिए… क्योंकि दिल को पहले से पता था कि मेरा भाई कहीं है।” दोनों हंसते हुए रोने लगे। उस दिन ऑफिस में बाकी लोगों को कुछ समझ नहीं आया कि दोनों एक-दूसरे को देखकर बार-बार क्यों मुस्कुरा रहे हैं। कुछ दिनों बाद दोनों अपने माता-पिता के सामने साथ खड़े थे। पुराने रिश्तों की सारी गलतफहमियां धीरे-धीरे दूर होने लगीं। राम और श्याम ने तय किया कि अब वे कभी एक-दूसरे से दूर नहीं होंगे। श्याम ने मजाक करते हुए कहा, “वैसे एक बात बताऊं?” राम ने पूछा, “क्या?” “तुम मेरे दोस्त तो पहले ही बन गए थे।” राम मुस्कुराया। “और अब?” श्याम ने उसे गले लगाते हुए कहा, “अब तुम मेरे दोस्त नहीं… मेरे भाई हो।” राम ने हंसकर कहा, “लेकिन ऑफिस में दोस्त ही रहेंगे।” दोनों हंस पड़े। कभी दो अजनबी एक ही ऑफिस में मिले थे। फिर दोस्त बने। और आखिर में उन्हें पता चला कि जिस इंसान को वे अपना सबसे अच्छा दोस्त समझ रहे थे… वही इंसान उनका अपना सगा भाई था। कभी-कभी जिंदगी रिश्ते पहले नहीं बताती, बस लोगों को मिलाती है। रिश्ता बाद में सामने आता है।

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